कुनकुरी, जशपुर 6 अप्रैल 2025
छत्तीसगढ़ की पावन धर्मनगरी कुनकुरी शनिवार 5अप्रैल को आध्यात्म और तप के अनुपम दृश्य का ऐतिहासिक साक्षी बना, जब 45 जैन साध्वियों का विशाल संघ नगर में पदार्पित हुआ। आचार्यश्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य समयसागर जी महाराज की प्रमुख शिष्या, आर्यिका श्री गुरु मति माता जी एवं आर्यिका दृण मति माता जी के नेतृत्व में यह संघ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की ओर पदविहार कर रहा है।यह जानकारी अंशुल रारा ने दी।

धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत वातावरण में, गाजे-बाजे और श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए जैन समाज एवं नगरवासियों ने साध्वी संघ का भव्य स्वागत किया। श्वेत वस्त्रधारी माताजीगण के चरण पड़ते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे, कई की आँखों से अश्रुधारा बह निकली।

यह पहला अवसर है जब धर्मनगरी कुनकुरी में इतनी बड़ी संख्या में साध्वियों का आगमन हुआ है। लगभग 100 श्रावक भी इस पदयात्रा में शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि जैन साधु-साध्वियाँ वाहन का उपयोग नहीं करते और नंगे पाँव ही जंगल, पर्वत और पथरीले मार्गों से गुजरते हुए तप और साधना का जीवन जीते हैं।
अब तक यह संघ लगभग 500 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पूरी कर चुका है। प्रतिदिन 15 से 20 किलोमीटर तक का पदविहार, वह भी एक समय शुद्ध आहारचर्या के साथ—यह साधना अपने आप में एक तपस्वी जीवन का परिचायक है।
यह संघ डोंगरगढ़ से विहार करते हुए जशपुर के रास्ते झारखंड स्थित जैन तीर्थों की सर्वोच्च भूमि तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की ओर अग्रसर है। डोंगरगढ़ में पिछले वर्ष आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की समाधि का एक वर्ष पूर्ण होने पर विशाल आयोजन किया गया था। उसी पावन स्थल से यह साध्वीगण आगे विहार कर रहे हैं।
कुनकुरी का यह ऐतिहासिक पल धर्म प्रेमियों के हृदय में सदा अमिट रहेगा। नगरवासियों ने इस आगमन को पर्व की भांति मनाते हुए धर्म, संयम और तप की प्रेरणा ग्रहण की।





















