📍 जशपुर/बगीचा, 11 जून 2025
जशपुर जिले के बगीचा क्षेत्र से जंगल तस्करी की एक बड़ी और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। तांबाकछार के सघन जंगल से लाखों की औषधीय लकड़ी तस्करी करते हुए एक आयशर प्रो गाड़ी पकड़ी गई है। इस गाड़ी में पूरे के पूरे अर्जुन पेड़ के लट्ठे लदे हुए पाए गए, जो कि बहुमूल्य औषधीय वृक्षों में गिने जाते हैं।

🌳 क्या है अर्जुन वृक्ष की खासियत?
अर्जुन पेड़ (Terminalia arjuna) भारतीय आयुर्वेद में हृदय रोगों के इलाज के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इसकी छाल से दवाएं बनती हैं जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने, हृदय को मजबूत रखने और कोलेस्ट्रॉल घटाने में काम आती हैं। ऐसे में इसकी तस्करी न केवल वन संपदा का दोहन है, बल्कि देश की पारंपरिक औषधीय विरासत पर भी कुठाराघात है।
🚛 तस्करी में प्रयुक्त वाहन और घटनाक्रम:
तस्करी में प्रयुक्त आयशर प्रो गाड़ी को ग्रामीणों की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता से जब्त कर लिया गया है। यह गाड़ी रायपुर नंबर की है और इसके चालक व श्रमिक मौके से फरार हो गए। लकड़ी की लोडिंग में प्रयुक्त हाइड्रा मशीन को तस्कर भगा ले गए थे, लेकिन ग्रामीणों ने सूझबूझ से उसे रास्ते में रोक दिया, जो अब वहीं खड़ी है।

🌲 वन विभाग का बयान और रहस्य बना मौन:
इस पूरे मामले में बगीचा रेंजर अशोक सिंह ने घटना की पुष्टि की है। वहीं SDO ईश्वर कुजूर ने सुबह तक कोई भी बयान देने से इंकार किया है, उनका कहना है कि “मुल्यांकन के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।”
🤔 बड़े सवाल, गहरी जड़ें:
यह घटना सिर्फ एक गाड़ी पकड़ने की नहीं, बल्कि जशपुर के जंगलों में फैले अवैध लकड़ी तस्करी रैकेट की गवाही है। यह स्पष्ट हो गया है कि अर्जुन जैसे औषधीय पेड़ की सुनियोजित कटाई हो रही है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इन पेड़ों पर नजर किसकी है?
कहीं स्थानीय तस्करों की आड़ में कोई बड़ा नेटवर्क तो जंगलों को उजाड़ने में लगा नहीं?
🗣️ ग्रामीणों की मांग – हो उच्च स्तरीय जांच
तांबाकछार सहित जशपुर के अन्य वनों में बीते कुछ महीनों में औषधीय पेड़ों की कटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं। ग्रामीण अब उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
🔍 जशपुर का जंगल सिर्फ हरियाली नहीं, जीवनदायिनी औषधियों का भंडार है – उसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।





















