मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन… जशपुर : कुनकुरी विसर्जन तालाब सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि प्रकृति को फिर से एक तालाब के चारों ओर उतारने की खूबसूरत कोशिश बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर 98 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस परियोजना ने जनवरी 2025 में गति पकड़ी थी और अब यह लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।   तालाब को आधुनिक और हरा-भरा स्वरूप देने में ठेकेदार महेश त्रिपाठी और राजू भारती दिन-रात जुटे हुए हैं। हालांकि अतिक्रमण और तालाब के भीतर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर को अभी तक नहीं हटाया जाना परियोजना की प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। युवाओं का नैचुरल हैंगआउट बन चुका है तालाब तालाब की सुंदरता ऐसी है कि पिछले दो माह से यह युवाओं का पसंदीदा ठिकाना बन गया है। सुबह की धूप हो या शाम की ठंडी हवा – लोग यहां प्रकृति से जुड़ने, सुकून लेने और यादगार रील्स बनाने पहुंच रहे हैं। तालाब में डाली गई रूपचंदा रंगीन मछलियाँ बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। कई लोग अपने घरों से लाए पालतू कछुओं को यहां छोड़कर उन्हें प्राकृतिक आवास भी दे रहे हैं।   प्रकृति की सेवा अब बन गई सामाजिक जिम्मेदारी तालाब में लगाए गए आकर्षक पौधों की देखभाल शहर के निवासी प्रकाश कुजूर कर रहे हैं। उनका तालाब से भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है। प्रकाश ने अमर उजाला को बताया,“मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हमारे बड़े भाई जैसे हैं। वे हमारे यहां किराए के घर में रहकर पढ़ाई किए थे। उनका यह सुंदर प्रयास सफल हो, इसलिए तालाब की सेवा कर रहा हूं।”   मुख्यमंत्री ने निरीक्षण कर बढ़ाई उम्मीदें       बीते 28 अक्टूबर को छठ पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री सपरिवार तालाब का निरीक्षण करने पहुंचे। आसपास की हरियाली और बनती सुंदरता को देखकर उन्होंने अतिरिक्त 60 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही निर्देश दिया कि तालाब के अंदर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर और खंभे को तुरंत बाहर शिफ्ट किया जाए, ताकि तालाब की सुंदरता और सुरक्षा दोनों में कोई बाधा न रहे। स्थल पर मौजूद कलेक्टर रोहित व्यास ने भरोसा दिलाया कि यह तालाब कुनकुरी की पहचान बनेगा और इससे भी बेहतर स्वरूप दिया जाएगा।   एक तालाब—जो सिर्फ पानी नहीं, प्रकृति के पुनर्जागरण की कहानी बन रहा है कुनकुरी का विसर्जन तालाब अब शहर की नई हरित पहचान बनकर उभर रहा है। यहां बनने वाली पगडंडियाँ, पानी में तैरती रंगीन मछलियाँ, किनारे हिलते पौधे और युवा,यह सब मिलकर बताते हैं कि किस तरह एक तालाब पूरे शहर की आत्मा को फिर से जीवंत कर सकता है।   नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील और सीएमओ की लगातार उपस्थिति के कारण विसर्जन तालाब सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के रिश्ते को फिर से मजबूत करने की कहानी बन रहा है। ठेकेदार महेश त्रिपाठी ने बताया कि विसर्जन तालाब सौंदर्यीकरण में फूल-पौधे रूप दिए गए हैं।पौधों की देखभाल के लिए स्प्रिंकलर लगाया गया है।चारों ओर रेलिंग पर एलईडी लाइट लगाकर तालाब में रोशनी की गई है।अतिक्रमण और ट्रांसफार्मर हटाने का काम जल्दी पूरा होने से निर्माण कार्य एक महीने में पूरा हो जाएगा।

मुख्यमंत्री के सड़क मार्ग से गुजरने का गड्ढों पर हुआ बड़ा असर,मिट्टी से ही भरने लगे गड्ढे

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आंखो-देखी  जशपुर जिले में अश्वत्थामा का घाव बन चुका नेशनल हाईवे 43 पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कृपा हुई है। गड्ढेयुक्त घाव को मृदा चिकित्सा के जरिए भरा जा रहा है।जिसे देखकर राहगीर अभी राहत महसूस करते हुए भविष्य में उड़ते धूल की आशंका से घबरा भी रहे हैं।हालांकि ज्यादातर लोग इस बात को लेकर खुश हैं कि चलो सीएम साहब सड़क से आए तो इस अहिल्या बनी कुनकुरी का उद्धार होना तय हुआ।यह सुखद खबर कुनकुरी शहर से आई है। दरअसल,तीन दिन पहले कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में छठ पूजा मनाने आए यहां के विधायक मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय जी का वायुमार्ग के अलावा सड़कमार्ग से भी भ्रमण हुआ।इस दौरान उन्हें सड़क पर गड्ढों नहीं,नहीं गड्ढों पर सड़क,नहीं नहीं साफ समझें तो खराब सड़क से दो -चार होना पड़ा होगा। यह अंदाजा लगाकर कहा जा रहा है कि खराब सड़क पर हिचकोले खाने के बाद ही तो आज सड़क के गड्ढे भरते देखे गए हैं।वैसे भी सीएम साहब के बारे में यह क्लियर बात है कि वे सहज,सरल हैं।खस्ताहाल सड़क देखने के बाद हो सकता है उन्होंने यह कहा हो कि ‘सड़क को चलने लायक तो बना दीजिए।’ अब सीएम साहब की मर्जी जानने के बाद अधिकारी हरकत में आए और इस सड़क को फिर से चलने लायक बनाने में जुट गए हैं। VVIP सिटी होने का गौरव हासिल कर चुके कुनकुरी शहर से गुजरने वाली नेशनल हाईवे सड़क पर गड्ढे भरने का काम द्रुतगति से चल रहा है।इसे दुर्गति ना समझें। वैसे भी कुनकुरी क्षेत्र ही नहीं अपितु समस्त जशपुर जिले को पर्यटन के क्षेत्र में,धार्मिक महत्त्व के क्षेत्र में वैश्विक पहचान देने के लिए मुख्यमंत्री जी स्वयं सक्रिय हैं।सुनने में आया है कि पंडित प्रदीप मिश्रा के बाद दिसंबर में बागेश्वर धाम से पंडित धीरेन्द्र शास्त्री आने वाले हैं।ऐसे में जशपुर जिले का नाम पूरे देश की सुर्खियों में रहेगा। राजनीति के पंडितों को कहना है कि जिस प्रकार से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मोदी की गारंटी पर सरलता और सहजता के साथ सरकार चला रहे हैं नहीं लगता कि आने वाले दिनों में उन लोगों को राहत मिल पाए जो कतार में खड़े हैं। दस विभागों के साथ मुख्यमंत्री का ओहदा लेकर चलना हर किसी के वश की बात नहीं है।एक छोटे गांव के जमींदार परिवार से आने वाले सीएम साय सुनते सबकी हैं लेकिन करना कितना है,यह केवल वो ही तय करते हैं। बहरहाल, हमारी सड़क पर काम चालू है।

छत्तीसगढ़ ड्राईवर महासंघ के आंदोलन का आज दूसरा दिन,कुनकुरी बस स्टैंड में हुआ बवाल,पुलिस ने दी समझाइश

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छत्तीसगढ़ ड्राईवर महासंघ के आंदोलन का आज दूसरा दिन,कुनकुरी बस स्टैंड में हुआ बवाल,पुलिस ने दी समझाइश जशपुर,26 अक्टूबर 2025 – छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंतर्गत जशपुर जिले भर में ड्राइवर महासंघ के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर 25 अक्टूबर से आंदोलन जारी है।जिसमें आज सुबह कुनकुरी बस स्टैंड में बस ड्राईवर से बस नहीं चलाने को लेकर बवाल हो गया। दरअसल,सुबह ड्राईवर संघ के जिलाध्यक्ष फिरन यादव अन्य पदाधिकारियों के साथ बस स्टैंड चाय पीने पहुंचा,जहां लावाकेरा से गुमला चलने वाली बालाजी बस के ड्राईवर को आंदोलन का साथ देने कहा।जिस पर ड्राईवर तैयार नहीं हुआ।इस बात से संघ के पदाधिकारी अध्यक्ष समेत नाराज हो गए और गाड़ी नहीं ले जाने का दवाब बनाने लगे।ऐसी स्थिति में बस एजेंटों ने यात्रियों के साथ मिलकर कुनकुरी थाने में शिकायत कर दी।छठ पूजा में यात्रियों को हो रही परेशानी को देखते हुए कुनकुरी थाना प्रभारी राकेश यादव ने आंदोलनकारियों को थाने बुलाया और जबरन किसी भी बस,ट्रक,टैक्सी को रोकने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी।जिस पर जिलाध्यक्ष फिरन यादव ने संघ की ओर से लिखित पत्र देकर पुलिस को आश्वस्त किया। जिलाध्यक्ष फिरन यादव ने बताया कि यह आंदोलन जशपुरनगर, कुनकुरी, पत्थलगांव, बगीचा, फरसाबहार समेत पूरे जिले में एक साथ चल रहा है। उड़ीसा की भाजपा सरकार ने हमारी मांगों पर सकारात्मक पहल दिखाते हुए एक मांग पूरी कर दी है।बाकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है। ड्राइवर संघ आज छग सरकार से इन मांगों को पूरा करने के लिए लोदाम और लावाकेरा बार्डर पर धरना दे रहा है। # छत्तीसगढ़ पूरे प्रदेश में पूर्ण रूप से शराब बंद लागू किया जाए # ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार पर कठोर कार्रवाई हो। # ड्राइवरों के लिए बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू की जाएं। # ड्राइवर संघ और प्रशासन के बीच स्थायी वार्ता समिति बनाई जाए, ताकि समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके। आम सड़क पर कितना है असर? आज सड़कों पर बसें,पिकप की आवाजाही दिख रही है।वहीं टैक्सी,सीमेंट,कोयले के ट्रक ड्राइवर आंदोलन में शामिल हैं। दोनों बार्डर पर जाम की स्थिति नहीं है।धरना जारी है।सड़क किनारे कई स्थानों पर ट्रक खड़े दिखे।जिलाध्यक्ष फिरन यादव ने बताया कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह धरना प्रदर्शन अनिश्चितकालीन बढ़ाया जा सकता है।

कानफाड़ू प्रेशर हॉर्न पर कुनकुरी पुलिस की सख्त कार्रवाई — शमीम बस के ड्राइवर पर ₹2500 का चालान,ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू

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कानफाड़ू प्रेशर हॉर्न पर कुनकुरी पुलिस की सख्त कार्रवाई — शमीम बस के ड्राइवर पर ₹2500 का चालान, जब्त हुआ हॉर्न कुनकुरी (जशपुर)। सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा और एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में सड़क सुरक्षा और यातायात अनुशासन को लेकर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। शुक्रवार को इसी अभियान के तहत कुनकुरी थाना क्षेत्र में पुलिस ने प्रेशर हॉर्न और सीट बेल्ट उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई की। जशपुर से अंबिकापुर जा रही शमीम बस (क्रमांक CG 15 DY 3264) के ड्राइवर लक्ष्मण यादव को कानफाड़ू प्रेशर हॉर्न बजाते पकड़ा गया। बस में सवार यात्रियों ने पुलिस से शिकायत की थी कि ड्राइवर बार-बार तेज आवाज वाला हॉर्न बजा रहा है, जिससे यात्रियों और अन्य वाहन चालकों को परेशानी हो रही थी। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राकेश यादव के निर्देश पर यातायात पुलिस जवान जितेंद्र गुप्ता और निर्दोष कुजूर ने बस को रोककर जांच की। इस दौरान प्रेशर हॉर्न जब्त कर लिया गया और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहनों में अवैध उपकरणों का उपयोग और सीट बेल्ट न लगाने पर ₹2500 का चालान काटा गया।वहीं ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कुनकुरी पुलिस का कहना है कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत प्रेशर हॉर्न, मल्टी-टोन हॉर्न या तेज ध्वनि उत्पन्न करने वाले किसी भी उपकरण का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। यह न केवल Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000 का उल्लंघन है बल्कि इससे सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरा भी उत्पन्न होता है। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया और कहा कि शहर में बढ़ते ट्रैफिक और शोर प्रदूषण के बीच ऐसी सख्ती आवश्यक है। कुनकुरी शहर शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार का प्रमुख केंद्र है, जहां दिनभर सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में कानफाड़ू हॉर्न आम लोगों के लिए परेशानी और दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। कुनकुरी पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि —  “अब जो भी ड्राइवर प्रेशर हॉर्न या तेज आवाज वाले हॉर्न का उपयोग करेगा, उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

आंखों-देखी: केरसई पंचायत – विकास के इंतज़ार में खड़ा एक आदिवासी गांव : जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के दौरे से लौटकर संतोष चौधरी,संपादक ख़बर जनपक्ष

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विशेष रिपोर्ट :  11 जून 2025 जशपुर जिले का केरसई पंचायत — स्टेट हाईवे-17 के दोनों ओर फैला एक गांव जो मानो विकास के द्वार पर खड़ा होकर अब भी दस्तक की प्रतीक्षा कर रहा है। स्कूल है, बैंक है, व्यापारिक सुविधा है, लेकिन दो सबसे बुनियादी ज़रूरतें – सड़क और पानी – आज भी गांववालों की पहुंच से बाहर हैं। मुख्य सड़क से जैसे ही बड़का बस्ती और नवाटोली की ओर कदम बढ़ते हैं, एक उखड़ी, गड्ढों से भरी सीमेंट कांक्रीट की सड़क मानो यह बताने लगती है कि असली लड़ाई अब शुरू होती है। थोड़ी ही दूर पर बैराटोली की एक महिला मिलती है, जो रास्ता दिखाते हुए बताती है – “यही कच्चा रास्ता है, बाबू।” रास्ता जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, दृश्य एक आदिम समाज की झलक देता है – बरगद के पेड़ के नीचे बैठी एक बुज़ुर्ग महिला, पास में उसका नशे में धुत बेटा, ऊपर टीले पर मिट्टी का घर और सामने से आती आंगनबाड़ी सहायिका जो पांच नन्हें बच्चों को लेकर लौट रही थी। वह कहती है, “सरकार ने सब दिया, लेकिन सड़क देना भूल गई।” बड़का बस्ती की आंगनबाड़ी तक पहुँचने पर दुश्वारी और बढ़ जाती है। कार्यकर्ता बताती हैं कि बच्चों के लिए पानी आसपास के घरों से मांगकर लाना पड़ता है। टंकी है, लेकिन केवल हवा से भरी — सपनों की तरह खोखली। हालांकि आंगनबाड़ी का कक्ष और रसोई स्वच्छ और सुसज्जित हैं, लेकिन सड़क की बदहाली उस सुंदरता पर धूल फेंक देती है। गांव की महिलाएं और बच्चे बताते हैं कि यहां साइकिल या बाइक से गिरना आम बात है। बरसात में स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। बीमार या गर्भवती महिलाओं को खाट पर उठाकर एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। कई बार इलाज पहुंचने से पहले मौत दस्तक दे देती है। युवक कैलाश तिर्की बताते हैं, “नेता लोग चुनाव के वक्त आते हैं, सड़क का वादा कर जाते हैं, और फिर गायब हो जाते हैं।” लेकिन इस बार एक उम्मीद जगी है – गोपाल कश्यप नाम का एक स्थानीय युवक बीडीसी बना है, जो सचमुच कुछ करना चाहता है। गांववालों की आवाज़ बनकर वह खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिल चुका है, इंजीनियरों को लेकर मुआयना करवा चुका है। ब्लॉक डेवलपमेंट कमेटी मेंबर गोपाल कश्यप कहते हैं – “मैं खुद भी आदिवासी हूं, मैं इन लोगों की तकलीफ समझता हूं। इन ग्रामीणों के साथ मुख्यमंत्री निवास बगिया जाकर मुख्यमंत्री जी से सड़क और पानी को लेकर ज्ञापन दिया। उनकी पहल से सड़क के लिए अनुपूरक बजट में प्रस्ताव भेजा गया है और पानी के लिए भी जगह चिन्हित कर ली है। जल्द ही पीएचई विभाग के साथ मिलकर बोरिंग कराएंगे।” बड़का बस्ती में 80 घर हैं और सभी उरांव आदिम जनजाति से हैं। वे शिक्षित हैं, लेकिन सहज, शांत और संघर्ष से अधिक इंतज़ार को जीवन का हिस्सा मानने वाले लोग हैं। केरसई पंचायत की यह तस्वीर केवल एक गांव की नहीं है, यह उस भारत की झलक है जो विकास के नक्शे पर चिन्हित तो है, लेकिन अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्षरत है। यहां की मिट्टी में अब भी उम्मीद की जड़ें हैं — बस ज़रूरत है, उस जड़ को सींचने वाले हाथों की।