कुनकुरी में सड़क हादसा बना कड़वी सच्चाई का आईना — मर गया सरकारी सिस्टम और मर गई मानवीय संवेदना !

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कुनकुरी,05/12/2025 गुरुवार शाम तपकरा रोड गड़ाकटा में हुए एक सड़क हादसे ने न सिर्फ एक व्यक्ति की जान ले ली, बल्कि यह भी उजागर कर दिया कि इस शहर में सरकारी सिस्टम और मानवीय संवेदना — दोनों की सांसें कब की थम चुकी हैं। दरअसल,कुंजारा निवासी 47 वर्षीय चंद्रिका यादव गुरुवार शाम साढ़े छह बजे अपनी मोटरसाइकिल सड़क किनारे खड़ी कर मोबाइल पर बात कर रहे थे। तभी अचानक पीछे से आई तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। बाइक सवार कथित रूप से नशे में था और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वह पीडब्ल्यूडी विभाग का कर्मचारी बताया जा रहा है। टक्कर इतनी भीषण थी कि चंद्रिका सड़क पर ही गिर पड़ा और तड़पते रहा।   लेकिन असली दर्दनाक कहानी उसके बाद शुरू हुई—घायल चंद्रिका काफी देर तक सड़क पर पड़े-पड़े जान बचाने की उम्मीद लिए तड़पता रहा, मगर न तो 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची, न वहां कार से गुजर रहे शहर के संभ्रांत युवाओं ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। प्रत्यक्षदर्शी विकास यादव के शब्दों में, “जब तक उनमें प्राण थे, कोई मदद के लिए नहीं आया… जब प्राण निकल गए तब सरकारी शववाहन जरूर आ गया।”   कुनकुरी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।   लेकिन यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं… यह सवाल है उस सिस्टम पर जो अक्सर समय पर नहीं जागता, उस समाज पर जो मोबाइल से वीडियो तो बना लेता है, पर गिरते इंसान को उठाने का साहस नहीं करता। कुनकुरी इलाके में यदि जीते जी इलाज नहीं मिलता और मरने के बाद कभी शववाहन भी नसीब नहीं होता, तो यह घटना बयान कर गई कि यहां सरकारी सिस्टम की मौत तो पहले ही हो चुकी थी — अब मानवीय संवेदना भी दम तोड़ चुकी है।

जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!

जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!   जशपुर – जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के गोवासी गांव में रविवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। नवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा ने प्रिंसिपल की प्रताड़ना से तंग आकर फांसी लगा ली। छात्रा स्कूल के भीतर ही संचालित अवैध हॉस्टल में रहती थी, जिसे स्कूल प्रिंसिपल कुलदीप टोपनो खुद चलाता था।   ❗ सुसाइड नोट में बड़ा खुलासा — बैड टच, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की बातें लिखीं पुलिस को घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में छात्रा ने साफ लिखा है कि प्रिंसिपल उसके साथ बैड टच करता था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। नाबालिग की पीड़ा पढ़कर जांच टीम भी सन्न रह गई।   ❗ आरोपी प्रिंसिपल हिरासत में, अवैध हॉस्टल का काला सच सामने   सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और आरोपी प्राचार्य कुलदीप टोपनो को हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि ग्रामीण शिक्षा समिति द्वारा संचालित इस स्कूल में 124 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें 33 बच्चे प्राचार्य द्वारा चलाए जा रहे अवैध हॉस्टल में रह रहे थे। मृत छात्रा भी इसी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।जिसने बीती रात हॉस्टल के स्टडी रूम में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।   ❗ प्रशासनिक तंत्र हरकत में — कई अधिकारी मौके पर   घटना के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीईओ, एसडीएम, बीईओ, सहायक आयुक्त, तहसीलदार, एसडीओपी और पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी पहुंच गए हैं। मृतका का कमरा सील कर दिया गया है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।   ❗ एसएसपी का बड़ा बयान   एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि, “यह नाबालिग छात्रा की आत्महत्या का मामला है। सुसाइड नोट मिला है जिसमें प्रताड़ना का जिक्र है। जांच गंभीरता से चल रही है।”   ❗ जिले में उबाल — निजी स्कूलों व हॉस्टलों पर सवाल घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोग अवैध हॉस्टलों और निजी स्कूलों की लचर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले भी पोर्तेंगा मिशन स्कूल में अवैध हॉस्टल में बच्चों के धर्मांतरण की कोशिश के आरोप के साथ ही उन्हें शारीरिक प्रताड़ना देने का मामला आया था।वहीं कुनकुरी में नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में एक प्रिंसिपल द्वारा जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आ चुका है। ऐसे में जिले के अंदर निजी स्कूलों और संस्थाओं की निगरानी पर भी अब बड़ी बहस शुरू हो गई है। यह दिल दहला देने वाली घटना न केवल एक छात्रा की जिंदगी छीन ले गई, बल्कि जिले में संचालित निजी शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर गई है।

संडे स्पेशल : देश में कट्टरता बढ़ी, पर ‘मानवतावादी कट्टरता’ की मिसाल बने यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर — दो मजदूरों की पीड़ा ने पुलिस अधिकारी को रुला दिया

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देश में कट्टरता बढ़ी, पर ‘मानवतावादी कट्टरता’ की मिसाल बने यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर — दो मजदूरों की पीड़ा ने पुलिस अधिकारी को रुला दिया   रायपुर (छत्तीसगढ़ ) – समाज में कट्टरता अक्सर नकारात्मक रूप में देखी जाती है, लेकिन जब यही कट्टरता मानवता के प्रति समर्पण बन जाए तो वह समाज को रोशन करने का काम करती है। रायपुर में पदस्थ यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर ऐसी ही ‘कट्टर मानवता’ की मिसाल बनकर सामने आए हैं। शनिवार की शाम उनके व्यवहार और एक भावुक घटना से यह स्पष्ट हो गया कि व्यवस्था संभालने वाले हाथ यदि संवेदनाओं से भरे हों तो किसी की कठिन यात्रा भी आसान बनाई जा सकती है।   दरअसल, इन्स्पेक्टर विशाल कुजूर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया। रोज की तरह जब वे अपने क्षेत्र में यातायात व्यवस्था देख रहे थे, तभी उनके मुंशी ने दो थके-हारे युवकों को देखकर संदेह जताया और उन्हें बातचीत के लिए बुलाया। बात करने पर पता चला कि दोनों युवक — प्रदीप और संतोष — उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के एक अंदरूनी गांव से मछली पकड़ने के काम के लिए किसी एजेंट के माध्यम से गोवा ले जाए गए थे।   तीन महीने काम करने के बावजूद उन्हें तनख्वाह नहीं मिली। जब उन्होंने विरोध किया तो जहाज मालिक ने मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया। भय के कारण ये दोनों गोवा पुलिस तक नहीं गए। जेब में 100 रुपये तक नहीं थे। किसी तरह ट्रेन के बाथरूम में छिपते-छिपाते वे नागपुर पहुँचे, और फिर वहाँ से पाँच दिनों तक पैदल चलकर रायपुर पहुँचे।   दोनों डरे हुए थे, टूटी-फूटी हिंदी बोल रहे थे, और पिछले 7 दिनों की भूख और मुश्किलें उनके चेहरों पर साफ दिख रही थीं। उनका आधार कार्ड, फोन और अन्य दस्तावेज गोवा में ही कंपनी के मालिक के पास बंधक पड़े थे। इनके घरवालों का मोबाइल भी कवरेज की कमी के कारण स्विच ऑफ मिला। स्थिति जानकर विशाल कुजूर ने तुरंत भोजन कराया, कुछ आर्थिक मदद की और दोनों का झारसुगुड़ा तक का टिकट बनवाकर उन्हें ट्रेन में बैठाया। साथ ही अपना मोबाइल नंबर दिया और स्थानीय थाना में शिकायत करने के लिए कहा। दोनों युवकों ने इसकी हामी भरी।   लेकिन इन्स्पेक्टर विशाल को सबसे अधिक भावुक कर देने वाली बात तब सामने आई, जब उन्होंने पूछा कि 8 दिनों तक बिना पैसे के खाना कैसे खाया? दोनों ने सिर झुकाकर जवाब दिया— “नागपुर से रायपुर तक रेलवे ट्रैक के किनारे गिरे पैकेट जमा करके खाते हुए आए हैं…”   इस जवाब ने अधिकारी का दिल दहला दिया। उन्होंने लिखा— “कल इन दो दोस्तों ने सचमुच रुला दिया… अब बस उनके कॉल का इंतज़ार है।”   कुजूर ने लोगों से अपील की है कि रास्ते में ऐसे किसी जरूरतमंद को देखें तो जरूर पूछें और मदद करें। उन्होंने यह भी याद किया कि कोरोना काल में जब वे कुनकुरी थाना प्रभारी थे, तब जशपुर और कुनकुरी के लोगों ने पैदल लौट रहे मजदूरों की जो मिसाल पेश की थी, वह आज भी यादगार है।   दिलचस्प संयोग यह कि 22 नवंबर 2025 को घटी यह घटना उसी तारीख की याद दिलाती है जब 2017 में — ठीक 22 नवंबर को — इन्स्पेक्टर विशाल की पोस्टिंग कुनकुरी थाना में हुई थी। मानवता के प्रति ऐसी कट्टरता ही आज के समय में समाज को जोड़ने और लोगों के जीवन में आशा की लौ जलाने का काम करती है।

छत्तीसगढ़ की सीमा पर शव वाहन नहीं पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग ने खबरों का किया खंडन,मुकेश ने कहा – मैंने तकलीफ बताई जो सत्य है,,

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*समाचार* खंडन  मुक्तांजली वाहन नहीं मिलने के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने रखा अपना पक्ष जशपुरनगर 18 नवम्बर 2025/* सिंगीबहार निवासी श्री मुकेश नायक के नवजात शिशु के शव को घर तक लाने हेतु मुक्तांजली वाहन की सुविधा नहीं मिलने के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 नवम्बर 2025 को सुबह 09 बजे श्री कुंदन राजपूत एवं श्री मुकेश नायक का फोन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर को प्राप्त हुआ तथा तत्काल जिला प्रबंधक मुक्ताजंली वाहन को इसकी सूचना देते हुए वाहन भेजने हेतु निर्देशित किया गया। जिला प्रबंधक के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फरसाबहार लोकशन पर उपलब्ध वाहन को सूचना दी गई व वाहन रवाना करने के निर्देश दिये गये, किन्तु मुक्तांजली वाहन कर्मचारी फरसाबहार के द्वारा लोकेशन पता करने एवं अन्य आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए श्री मुकेश नायक को फोन किये जाने पर श्री मुकेश नायक के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, इसकी सूचना कर्मचारी के द्वारा तत्काल उच्च अधिकारियों को दिया गया। तत्पश्चात स्वयं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर के द्वारा कॉल बैक करते हुए श्री मुकेश नायक को फोन रिसीव करने को कहा गया। जिस दौरान स्वयं श्री मुकेश नायक के द्वारा नेटवर्क में नहीं होने के कारण बात नहीं हो पाने की जानकारी दिया गया। तत्पश्चात पुनः मुक्तांजली वाहन कर्मचारियों के द्वारा फोन किया गया, किन्तु श्री मुकेश नायक के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। जिससे सम्पर्क नहीं हो सका। घटना स्वास्थ्य विभाग अथवा मुक्तांजली वाहन की लापरवाही से नहीं बल्कि संबंधित से सम्पर्क नहीं होने की वजह से हुआ है। नोट : यह खंडन प्रेस विज्ञप्ति से लिया गया है। इस मामले पर मृत नवजात के पिता और पेशे से पत्रकार मुकेश कुमार ने ख़बर जनपक्ष के सवालों पर कहा कि मैंने कब कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने शव वाहन की व्यवस्था नहीं की।उन्होंने मुझे आश्वस्त किया और मैं इंतजार करता रहा।जब दो घंटे तक शव वाहन नहीं आया तो स्कूटी से शव लेकर घर गया। मैंने तो केवल अपनी तकलीफ बताई जो सत्य है।मुझे और परेशान न किया जाए। बहरहाल,घटना से परिवार में शोक की लहर है।वहीं स्वास्थ्य विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष रख दिया है।ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि मरीजों और मृतकों को समय पर एंबुलेंस और शव वाहन देने की कोशिश पर अब सवाल खड़े नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन… जशपुर : कुनकुरी विसर्जन तालाब सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि प्रकृति को फिर से एक तालाब के चारों ओर उतारने की खूबसूरत कोशिश बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर 98 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस परियोजना ने जनवरी 2025 में गति पकड़ी थी और अब यह लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।   तालाब को आधुनिक और हरा-भरा स्वरूप देने में ठेकेदार महेश त्रिपाठी और राजू भारती दिन-रात जुटे हुए हैं। हालांकि अतिक्रमण और तालाब के भीतर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर को अभी तक नहीं हटाया जाना परियोजना की प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। युवाओं का नैचुरल हैंगआउट बन चुका है तालाब तालाब की सुंदरता ऐसी है कि पिछले दो माह से यह युवाओं का पसंदीदा ठिकाना बन गया है। सुबह की धूप हो या शाम की ठंडी हवा – लोग यहां प्रकृति से जुड़ने, सुकून लेने और यादगार रील्स बनाने पहुंच रहे हैं। तालाब में डाली गई रूपचंदा रंगीन मछलियाँ बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। कई लोग अपने घरों से लाए पालतू कछुओं को यहां छोड़कर उन्हें प्राकृतिक आवास भी दे रहे हैं।   प्रकृति की सेवा अब बन गई सामाजिक जिम्मेदारी तालाब में लगाए गए आकर्षक पौधों की देखभाल शहर के निवासी प्रकाश कुजूर कर रहे हैं। उनका तालाब से भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है। प्रकाश ने अमर उजाला को बताया,“मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हमारे बड़े भाई जैसे हैं। वे हमारे यहां किराए के घर में रहकर पढ़ाई किए थे। उनका यह सुंदर प्रयास सफल हो, इसलिए तालाब की सेवा कर रहा हूं।”   मुख्यमंत्री ने निरीक्षण कर बढ़ाई उम्मीदें       बीते 28 अक्टूबर को छठ पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री सपरिवार तालाब का निरीक्षण करने पहुंचे। आसपास की हरियाली और बनती सुंदरता को देखकर उन्होंने अतिरिक्त 60 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही निर्देश दिया कि तालाब के अंदर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर और खंभे को तुरंत बाहर शिफ्ट किया जाए, ताकि तालाब की सुंदरता और सुरक्षा दोनों में कोई बाधा न रहे। स्थल पर मौजूद कलेक्टर रोहित व्यास ने भरोसा दिलाया कि यह तालाब कुनकुरी की पहचान बनेगा और इससे भी बेहतर स्वरूप दिया जाएगा।   एक तालाब—जो सिर्फ पानी नहीं, प्रकृति के पुनर्जागरण की कहानी बन रहा है कुनकुरी का विसर्जन तालाब अब शहर की नई हरित पहचान बनकर उभर रहा है। यहां बनने वाली पगडंडियाँ, पानी में तैरती रंगीन मछलियाँ, किनारे हिलते पौधे और युवा,यह सब मिलकर बताते हैं कि किस तरह एक तालाब पूरे शहर की आत्मा को फिर से जीवंत कर सकता है।   नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील और सीएमओ की लगातार उपस्थिति के कारण विसर्जन तालाब सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के रिश्ते को फिर से मजबूत करने की कहानी बन रहा है। ठेकेदार महेश त्रिपाठी ने बताया कि विसर्जन तालाब सौंदर्यीकरण में फूल-पौधे रूप दिए गए हैं।पौधों की देखभाल के लिए स्प्रिंकलर लगाया गया है।चारों ओर रेलिंग पर एलईडी लाइट लगाकर तालाब में रोशनी की गई है।अतिक्रमण और ट्रांसफार्मर हटाने का काम जल्दी पूरा होने से निर्माण कार्य एक महीने में पूरा हो जाएगा।

शव वाहन न मिलने पर पत्रकार पिता ने मोटरसाइकिल से लाया नवजात का शव,जशपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

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शव वाहन न मिलने पर पत्रकार पिता ने मोटरसाइकिल से लाया नवजात का शव,जशपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल   जशपुर/फरसाबहार –  दिल को चीर देने वाली यह घटना फरसाबहार के पत्रकार मुकेश नायक के साथ घटी। रविवार–सोमवार की रात 2 बजे उनकी गर्भवती पत्नी को अचानक तेज दर्द उठा। मुकेश उन्हें तुरंत लेकर सुंदरगढ़ अस्पताल पहुंचे। सुबह 5 बजे प्रसव हुआ, लेकिन गंदा पानी पीने की वजह से नवजात ने आधे घंटे में ही दम तोड़ दिया।   ओडिशा सरकार का शववाहन छत्तीसगढ़ सीमा पर रुक गया   ओडिशा सरकार ने बच्चे के शव को अस्पताल से सीमा तक पहुंचाने के लिए वाहन दिया, लेकिन जैसे ही गाड़ी लुलकीडीह पुलिया पहुंची, चालक ने आगे बढ़ने से मना कर दिया। उसका साफ कहना था— “साहब, गाड़ी में जीपीएस लगा है… दूसरे राज्य में ले गया तो नौकरी चली जाएगी।”   छत्तीसगढ़ में मदद नहीं मिली—दो घंटे इंतजार के बाद टूटा दिल   इसके बाद पत्रकार पिता ने छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य अधिकारियों से शववाहन की मदद मांगी। सीएमएचओ ने बताया कि फरसाबहार में वाहन उपलब्ध नहीं है, कुछ देर में व्यवस्था की जाएगी। मुकेश नायक अपने मासूम बेटे के शव के साथ दो घंटे तक इंतजार करते रहे। लेकिन कोई गाड़ी नहीं आई।   आखिर मजबूरी में उन्होंने अपने नवजात बेटे को गोद में उठाया… मोटरसाइकिल स्टार्ट की… और छत्तीसगढ़ की सीमा से अपने गांव सिंगीबहार तक खुद शव लेकर चले आए।   गांव और पत्रकार जगत में गहरी पीड़ा और गुस्सा   जब लोगों को यह जानकारी मिली, तो पूरे इलाके में दुःख और गुस्सा फैल गया। लोगों का कहना है— “एक पिता को अपने मृत बच्चे को बाइक पर लाना पड़े… इससे बड़ी लाचारी और क्या होगी?”   मुख्यमंत्री की विधानसभा में व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना   यह घटना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विधानसभा क्षेत्र में हुई, जहां—घायल को समय पर एंबुलेंस नहीं,गर्भवती महिला को 102 की सुविधा नहीं,मृत्यु पर शव वाहन भी उपलब्ध नहीं।ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती रही हैं, लेकिन हालात नहीं बदल रहे।   अपने मासूम बच्चे को बाहों में लेकर घर लौटे पिता बस इतना ही कह पाए— “आज जो मेरे साथ हुआ… वह किसी और के साथ न हो।”

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल – कुनकुरी को मिला बड़ा उपहार,359 करोड़ की लागत से बनेगा शासकीय मेडिकल कॉलेज भवन*

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल – कुनकुरी को मिला बड़ा उपहार, 359 करोड़ की लागत से बनेगा शासकीय मेडिकल कॉलेज भवन स्वास्थ्य, सिंचाई और सड़क परियोजनाओं को मिली करोड़ों की स्वीकृति, जशपुर जिले के सर्वांगीण विकास को नई रफ्तार   रायपुर/जशपुर, 11 नवम्बर 2025. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में विकास की गूंज अब गांव-गांव तक सुनाई देने लगी है। मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और जनहितैषी नेतृत्व के परिणामस्वरूप जशपुर जिले को आज बड़ा तोहफा मिला है। प्रदेश सरकार ने कुनकुरी में 359 करोड़ रुपये की लागत से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए वित्त विभाग से सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।   यह मेडिकल कॉलेज जशपुर जैसे आदिवासी अंचल के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे स्थानीय युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के सुनहरे अवसर मिलेंगे और क्षेत्र के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ अपने ही जिले में उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को नई दिशा मिल रही है, जिससे प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी।   मुख्यमंत्री साय ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि “विकास की दौड़ में कोई क्षेत्र पीछे न रहे” — यही सोच अब धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है।   इसके साथ ही वित्त विभाग ने जिले में कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी हरी झंडी दी है —   कांसाबेल विकासखंड की मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबयुक्त उद्वहन सिंचाई योजना के लिए ₹79.38 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित होगी, जिससे वर्षभर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी।   फरसाबहार तहसील क्षेत्र में तुमला से मेडर (ओडिशा सीमा) तक 12.80 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य हेतु ₹27.73 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।   वहीं फरसाबहार विकासखंड की कोकिया व्यपवर्तन योजना के लिए ₹16.17 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है, जो जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार लाएगी। इन योजनाओं के माध्यम से विष्णुदेव साय ने एक बार फिर साबित किया है कि उनका लक्ष्य केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि “धरातल पर विकास की मजबूत नींव” रखना है।   कुनकुरी और पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र में स्वीकृत ये परियोजनाएँ न केवल स्वास्थ्य, कृषि और सड़क सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगी, बल्कि आने वाले वर्षों में जशपुर जिले को प्रदेश के विकास मानचित्र पर अग्रणी स्थान पर ले जाएँगी।  

COLLECTOR VISIT:*मुख्यमंत्री ने कुनकुरी छठ घाट के सौन्दर्यकरण हेतु 5 करोड़ 17 लाख दी स्वीकृति* *कलेक्टर ने डेम किनारे गणमान्य नागरिकों के साथ की चर्चा,बताया प्लान* 

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*कलेक्टर श्री व्यास ने कुनकुरी छठ घाट का किया निरीक्षण*  *मुख्यमंत्री ने कुनकुरी छठ घाट के सौन्दर्यकरण हेतु 5 करोड़ 17 लाख दी स्वीकृति*  *जशपुर 30 अक्टूबर 2025/* कलेक्टर  रोहित व्यास ने गुरुवार को‌ नगरी निकाय कुनकुरी के छठ घाट का निरीक्षण किया और स्थानीय जनप्रतिनिधीयों के साथ समीक्षा बैठक लेकर कुनकुरी के छठ घाट के सौंदर्यीकरण के लिए सुझाव भी लिए। कलेक्टर ने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कुनकुरी छठ घाट के सौंदर्यीकरण के लिए 5 करोड़ 17 लाख की स्वीकृति दी गई है। इस राशि का उपयोग कुनकुरी के विकास कार्यों के लिए किया जाएगा। उन्होंने कुनकुरी छठ घाट के आस-पास सीमांकन करने और मुआवजा राशि का भी समाधान करने के निर्देश दिए हैं। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार यादव, एसडीएम नन्द जी पांडे, नगर निकाय के अधिकारी और आम नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इस दौरान उपस्थित जनप्रतिनीधियों के साथ आम नागरिकों ने सुझाव भी दिए हैं। कलेक्टर ने कुनकुरी विसर्जन तालाब, उद्यान आदि अन्य जगहों के देख-रेख साफ सफाई के लिए समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि जन आस्था का सम्मान और लोक संस्कृति का संवर्धन हेतु शहर में छठ तालाब विकास की स्वीकृति मिली है। जिसके तहत् कुनकुरी छठ घाट की सफाई की जाएगी। रिटर्निंग वाल, गाद की साफ सफाई, दो स्वागत गेट, पचरी निर्माण, 10 नग वोट , फाउंटेन,10 नग पैर वाले वोट, सौलर लाइट, 50 नग लाइट, पाथ-वे, सेल्फी पाइंट, बच्चों के खेलने के लिए छोटे उद्यान और ओपन जिम की व्यवस्था, बैठने की चेयर, शौचालय, चेंजिंग रूम, आदि अन्य कार्य किया जाएगा।

जनप्रतिनिधि से दुर्व्यवहार पर तहसीलदार सन्ना की कार्यशैली विवाद में, वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमाया

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जशपुर,30 अक्टूबर 2025 – सन्ना तहसील में पदस्थ महिला तहसीलदार एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। जनपद सदस्य राकेश गुप्ता के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते ही मामला तूल पकड़ लिया है। इसमें तहसीलदार को जनप्रतिनिधि से तीखे लहजे में बात करते और गुस्से में नसीहत देते हुए देखा जा सकता है।इस वीडियो की पुष्टि ख़बर जनपक्ष नहीं करता है।तहसीलदार की ओर से इस मामले पर कोई बयान अभी सामने नहीं आया है।   जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक जमीन विवाद के दौरान जनपद सदस्य राकेश गुप्ता तहसीलदार से चर्चा करने गए थे। इसी दौरान दोनों के बीच कहासुनी हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि माहौल तनावपूर्ण बन गया। जनपद सदस्य का कहना है कि तहसीलदार ने जनप्रतिनिधि के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जो अस्वीकार्य है। पहले भी रह चुकी हैं विवादों में यह कोई पहला मौका नहीं है जब तहसीलदार सन्ना विवादों में आई हों। बगीचा में पदस्थापना के दौरान भी उन पर पटवारियों ने गंभीर आरोप लगाए थे कि उनसे निजी कामों और राशन की मांग की जाती थी। उस समय भी यह मामला चर्चा में रहा था और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे। इसके अलावा, अधिवक्ता संघ द्वारा उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाना भी विवादों की लंबी सूची में शामिल है।सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले तहसील के ही कर्मचारियों ने भी तहसीलदार पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामला जिला स्तर पर सुलझाया गया था।   राजनीतिक गलियारों में हलचल इस ताजा घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई हलचल मचा दी है। कई संगठन और जनप्रतिनिधि प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जनपद सदस्य राकेश गुप्ता ने कहा कि किसी भी अधिकारी को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए, न कि अहंकारपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि यह मामला शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है, जहां निष्पक्षता की अपेक्षा की जा रही थी, लेकिन व्यवहारिक तौर पर भेदभाव झलक रहा है। सोशल मीडिया फेसबुक में यूजर्स तहसीलदार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।वहीं अन्य जनप्रतिनिधियों में भी इस मामले पर तहसीलदार के खिलाफ आक्रोश है। अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर जनप्रतिनिधि के साथ दुर्व्यवहार के आरोप के बाद अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो और लगातार बढ़ते जन असंतोष को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर जांच या कार्रवाई की घोषणा की जा सकती है।

मुख्यमंत्री के सड़क मार्ग से गुजरने का गड्ढों पर हुआ बड़ा असर,मिट्टी से ही भरने लगे गड्ढे

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आंखो-देखी  जशपुर जिले में अश्वत्थामा का घाव बन चुका नेशनल हाईवे 43 पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कृपा हुई है। गड्ढेयुक्त घाव को मृदा चिकित्सा के जरिए भरा जा रहा है।जिसे देखकर राहगीर अभी राहत महसूस करते हुए भविष्य में उड़ते धूल की आशंका से घबरा भी रहे हैं।हालांकि ज्यादातर लोग इस बात को लेकर खुश हैं कि चलो सीएम साहब सड़क से आए तो इस अहिल्या बनी कुनकुरी का उद्धार होना तय हुआ।यह सुखद खबर कुनकुरी शहर से आई है। दरअसल,तीन दिन पहले कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में छठ पूजा मनाने आए यहां के विधायक मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय जी का वायुमार्ग के अलावा सड़कमार्ग से भी भ्रमण हुआ।इस दौरान उन्हें सड़क पर गड्ढों नहीं,नहीं गड्ढों पर सड़क,नहीं नहीं साफ समझें तो खराब सड़क से दो -चार होना पड़ा होगा। यह अंदाजा लगाकर कहा जा रहा है कि खराब सड़क पर हिचकोले खाने के बाद ही तो आज सड़क के गड्ढे भरते देखे गए हैं।वैसे भी सीएम साहब के बारे में यह क्लियर बात है कि वे सहज,सरल हैं।खस्ताहाल सड़क देखने के बाद हो सकता है उन्होंने यह कहा हो कि ‘सड़क को चलने लायक तो बना दीजिए।’ अब सीएम साहब की मर्जी जानने के बाद अधिकारी हरकत में आए और इस सड़क को फिर से चलने लायक बनाने में जुट गए हैं। VVIP सिटी होने का गौरव हासिल कर चुके कुनकुरी शहर से गुजरने वाली नेशनल हाईवे सड़क पर गड्ढे भरने का काम द्रुतगति से चल रहा है।इसे दुर्गति ना समझें। वैसे भी कुनकुरी क्षेत्र ही नहीं अपितु समस्त जशपुर जिले को पर्यटन के क्षेत्र में,धार्मिक महत्त्व के क्षेत्र में वैश्विक पहचान देने के लिए मुख्यमंत्री जी स्वयं सक्रिय हैं।सुनने में आया है कि पंडित प्रदीप मिश्रा के बाद दिसंबर में बागेश्वर धाम से पंडित धीरेन्द्र शास्त्री आने वाले हैं।ऐसे में जशपुर जिले का नाम पूरे देश की सुर्खियों में रहेगा। राजनीति के पंडितों को कहना है कि जिस प्रकार से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मोदी की गारंटी पर सरलता और सहजता के साथ सरकार चला रहे हैं नहीं लगता कि आने वाले दिनों में उन लोगों को राहत मिल पाए जो कतार में खड़े हैं। दस विभागों के साथ मुख्यमंत्री का ओहदा लेकर चलना हर किसी के वश की बात नहीं है।एक छोटे गांव के जमींदार परिवार से आने वाले सीएम साय सुनते सबकी हैं लेकिन करना कितना है,यह केवल वो ही तय करते हैं। बहरहाल, हमारी सड़क पर काम चालू है।