बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष

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बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष   जशपुर : अखिल भारतीय आदिवासी कंवर समाज विकास समिति का तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन केंद्रीय कार्यालय पमशाला, जिला जशपुर में भव्य व गरिमामय वातावरण में संपन्न हो रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन सर्वसम्मति से राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिसमें श्रीमती कौशल्या विष्णुदेव साय को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। उल्लेखनीय है कि श्रीमती कौशल्या साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी हैं और समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी भूमिका लंबे समय से सक्रिय, समर्पित और प्रभावशाली रही है। सम्मेलन में मंगरु साय पैंकरा को राष्ट्रीय महासचिव, अनंत राम पाकरगांव को न्याय समिति अध्यक्ष, श्रीमती शांता साय (लैलूंगा) को राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष तथा हरिशंकर साय (मधुबन) को राष्ट्रीय युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष चुना गया। इस अवसर पर समाज उत्थान, शिक्षा, संगठन विस्तार और जनकल्याण के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही समाज और जनसेवा को मजबूत करने के उद्देश्य से “ मिलनसार समाज एवं जनसेवा दौरा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत नवचयनित पदाधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाजजनों से सीधा संवाद करेंगे। नवचयनित पदाधिकारियों को पूर्व पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बधाई देते हुए विश्वास जताया कि श्रीमती कौशल्या साय के नेतृत्व में कंवर समाज को नई दिशा, संगठनात्मक मजबूती और जनसेवा को व्यापक विस्तार मिलेगा।

देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान!प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान! जशपुर से बड़ी खबर जशपुर जिले में धान खरीदी के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर किसानों का धान खरीदी केंद्र से राइस मिल जाता है, लेकिन जशपुर में मामला बिल्कुल उल्टा निकला — राइस मिल से धान निकालकर सीधे खरीदी केंद्र ले जाने की कोशिश पकड़ी गई है। ताजा मामला कांसाबेल विकासखंड का है। यहां बगिया स्थित वेदांश राइस मिल से अवैध रूप से धान निकालकर उसे चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। 🚜 दो ट्रैक्टर पकड़े गए, 100 क्विंटल धान जब्त कार्रवाई के दौरान राइस मिल से निकलकर धान खरीदी केंद्र की ओर जा रहे दो ट्रैक्टरों को रोका गया। ट्रैक्टरों में करीब 100 क्विंटल धान लोड था। ट्रैक्टर चालकों मानेश्वर सिदार और यमन बेहरा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि धान राइस मिल से चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। यह कार्रवाई राइस मिल के पास ही, खरीदी केंद्र के रास्ते में की गई। फिलहाल दोनों ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए हैं और दस्तावेजों की जांच जारी है। ❓ पुराने धान को नया बताकर खपाने की आशंका प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक आशंका है कि राइस मिल में रखा पुराना धान नए धान के रूप में खरीदी केंद्र में खपाने की कोशिश की जा रही थी। अगर ऐसा साबित होता है, तो यह सीधे-सीधे सरकारी खरीदी प्रणाली से बड़ा खेल माना जाएगा। 🔍 और भी जगहों से मिल रही शिकायतें धान मंडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सिंगीबहार क्षेत्र की एक राइस मिल से भी आसपास की मंडियों में इसी तरह धान भेजे जाने की चर्चा है।हमारी पड़ताल जारी है। इतना ही नहीं, गड़बड़ी पकड़ने के लिए उपरकछार बेरियर पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की दिशा भी संदिग्ध बताई जा रही है। कैमरा सड़क की बजाय पुलिस चौकी को कवर कर रहा है। जानकारों का दावा है कि जिला प्रशासन राइस मिलों के सीसीटीवी कैमरे में धान लद रहे विजुअल और धान खरीदी में लगे सीसीटीवी कैमरे से धान उतरते विजुअल की मिलान करे तो बिचौलिए और राइस मिलर बेपर्दा हो जाएंगे। आज दोपहर करीब 2 बजे बेरियर पर कोई भी अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे ग्रामीणों के आरोपों को और बल मिलता है। 🏛️ संरक्षण का आरोप, बड़ा खेल होने की चर्चा ग्रामीणों और मंडी सूत्रों का दावा है कि यह खेल छोटे स्तर का नहीं, बल्कि बड़े संरक्षण में चल रहा है। चर्चा है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण राइस मिलरों को मिल रहा है। ⚠️ प्रशासन सख्त, बड़ी कार्रवाई के संकेत अधिकारियों का कहना है कि धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के बाद राइस मिल संचालक पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। 👉 जशपुर में धान खरीदी को लेकर उठे ये सवाल अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव की कृपा से किसान को मिला पट्टा,फिर भी नहीं बेच पा रहा धान,,,सुशासन पर बड़ा सवाल

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पटवारी–पोर्टल की जुगलबंदी में पिसता किसान: बी-1 खसरा गड़बड़ी से धान अटका, मुख्यमंत्री के गृहजिले में सुशासन पर उठा बड़ा सवाल जशपुर,13/012026 – जिले के कांसाबेल तहसील का एक किसान बी वन में दर्ज आधिकारिक खसरे नम्बर के कारण न तो सरकार को धान बेच पा रहा है, न सोलर पैनल लगवा पा रहा है,न ही अपनी खेती को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन ले पा रहा है। दरअसल,तिलंगा गांव का किसान दिलबंधु तिर्की को पिता की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच जमीन बंटवारे के बाद पट्टा नहीं मिल रहा था।जिसको लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपनी तकलीफ बताई। मुख्यमंत्री कार्यालय बगिया के त्वरित सक्रियता से पटवारी ने किसान का पट्टा बनाकर दे दिया। अब परेशानी तब खड़ी हो गई जब दिलबंधन तिर्की अपनी खेती का धान बेचने के लिए पंजीयन कराने सहकारी समिति गया।जहां देखा गया की पट्टे में दर्ज खसरा नंबर सरकार के भू रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग है। दरअसल, वर्ष 2022–23 की बंटवारा सूची में खाता विभाजन पूरी तरह वैधानिक रूप से हुआ था। बंटवारे के आधार पर दर्ज खसरा नंबर हैं— 666/6, 666/9, 666/1 ठ, 666/13, 666/15, 666/20, 672/7, 666/5, 666/8, 666/11, 666/1 ण, 666/17, 666/19, 672/1उ। इन खसरा नंबरों के आधार पर बंटवारा सूची पूरी तरह सही है। यही नहीं, इसी आधार पर ऋण पुस्तिका भी विधिवत जारी की गई, जिसे 23 जून 2025 को पटवारी द्वारा प्रदान किया गया था। लेकिन समस्या तब सामने आई जब किसान ने ऑनलाइन बी-1 रिकॉर्ड निकाला। बी-1 में खसरा नंबर 666/2, 666/12, 666/16, 666/21, 666/5, 666/17 दर्ज मिले, जो न तो बंटवारा सूची से मेल खाते हैं और न ही ऋण पुस्तिका से। इसी तकनीकी विसंगति के कारण सहकारी समिति ने किसान का धान पंजीयन करने से इंकार कर दिया। नतीजतन, किसान का धान आज भी घर में रखा हुआ है। इस संबंध में जब किसान पटवारी के पास गया तो पटवारी ने साफ कह दिया कि खसरा नंबर पट्टे वाले ही पोर्टल पर चढ़ाया लेकिन नहीं लिया।अब खसरा नंबर चेंज नहीं हो सकता।पटवारी की दो टूक बातें सुनकर किसान हताश हो गया और उसका पंजीयन नहीं होने से धान घर में रखा हुआ है।   इस संबंध में जब हमने हल्का पटवारी विक्की गुप्ता से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि दिलबंधन तिर्की के साथ ही उसके दो भाइयों का भी खसरा नंबर पोर्टल में बदल गया है। ऐसा कइयों का हुआ है।जो खसरा नंबर बी वन में दिख रहा है, वही मान्य है।किसान सीमांकन करा सकता है लेकिन किसान इस बात को समझ नहीं पा रहा है। वहीं पीड़ित किसान ने बताया कि पटवारी के मनमानी से तंग आकर नायब तहसीलदार कांसाबेल के न्यायालय में खसरा नंबर को ठीक करने के लिए आवेदन दिया गया है।जो बी वन में खसरा नंबर है,वह मेरे भाइयों की जमीन है।ऐसे में भविष्य में विवाद पैदा हो सकता है।किसान ने पटवारी पर तहसीलदार के आदेश नहीं मानने और किसान का धान नहीं बिकने पर हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।   बहरहाल,यह बड़ा सवाल है कि ऐसे में विष्णु का सुशासन कैसे सफल होगा कि एक किसान सरकारी सिस्टम के कारण अपना धान नहीं बेच पा रहा है? यह स्थापित लोकल्याणकारी राज्य में शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राही को पहुंचा कर देना है न कि उसे दफ्तरों के चक्कर लगवाने हैं। अब देखना है कि मुख्यमंत्री के गृहजिले में ऐसे किसानों को न्याय कब तक मिलेगा या कागजी घोड़े दौड़ते रहेंगे।

युवती ने शादी से मना किया तो प्रेमी फंदे पर झूल गया,प्रेमी के भाई ने लगाए गंभीर आरोप

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कुनकुरी में युवक ने लगाई फांसी, प्रेम संबंध को लेकर प्रताड़ना का आरोप कुनकुरी,09 जनवरी 2026 – कुनकुरी थाना क्षेत्र के ठेठेटांगर में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे एक 20 वर्षीय युवक ने अपने ही घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दिलेश्वर यादव के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही कुनकुरी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि दिलेश्वर यादव का पड़ोस के गांव की एक सजातीय युवती से प्रेम संबंध था और वह उससे विवाह करना चाहता था। परिजनों के अनुसार इस रिश्ते से युवती के पिता और चाचा नाराज थे और उन्होंने दिलेश्वर को जान से मारने की धमकी देते हुए युवती से दूर रहने के लिए बार-बार आमने-सामने और फोन पर दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर दिलेश्वर ने यह कदम उठाया। परिजनों ने यह भी दावा किया कि दिलेश्वर यादव ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उसने युवती का नाम लेते हुए अपनी मौत का कारण प्रेम और विवाह को लेकर हुए कथित धोखे को बताया है। वहीं कुनकुरी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दिलेश्वर यादव ने अपने घर के म्यार (छज्जे/अंदरूनी हिस्से) में फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस का कहना है कि मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की जा रही है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस संभवतः सोशल मीडिया पोस्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच करेगी।

आरटीओ चाचा की अटैची से उड़ाए लाखों! भतीजी ने बॉयफ्रेंड संग रची चोरी की खौफनाक स्क्रिप्ट

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**आरटीओ चाचा की अटैची से उड़ाए लाखों! भतीजी ने बॉयफ्रेंड संग रची चोरी की खौफनाक स्क्रिप्ट** जशपुर,09 जनवरी 2025 कहते हैं लालच जब हदें पार कर जाए तो रिश्ते, भरोसा और इज्जत—सब कुछ बिखर जाता है। जशपुर जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं, जहाँ आरटीओ चाचा विजय निकुंज की अटैची में रखे लाखों रुपए और सोने की ज्वेलरी पर भतीजी की नजर पड़ी—और यहीं से शुरू हुआ अपराध का खतरनाक सफर। आईफोन की चाह… और पहली चोरी कहानी की शुरुआत होती है तब, जब कॉलेज में पढ़ने वाली भतीजी मिनल निकुंज साफ-सफाई के बहाने चाचा के कमरे में पहुंचती है। दीवान के भीतर रखी एक अटैची खोलते ही उसकी आंखें चौंधिया जाती हैं—नगद नोटों के बंडल और चमकता सोना। पहले सिर्फ आईफोन खरीदने के लिए दो लाख रुपए उठाए गए। किसी को भनक नहीं लगी… और यहीं से उसका हौसला बढ़ता गया। बॉयफ्रेंड की एंट्री, अपराध को मिली रफ्तार सोशल मीडिया से शुरू हुआ प्यार, जल्द ही लिव-इन रिलेशनशिप में बदल चुका था। बॉयफ्रेंड अनिल प्रधान को जब पैसों की भनक लगी, तो लालच ने दोनों को एक ही राह पर ला खड़ा किया—अपराध की राह। फिर एक-एक कर अटैची से पैसे निकलते रहे… पिकनिक, पार्टी, होटल, शराब—सब चलता रहा। पूरा सूटकेस ही उड़ा ले गए लेकिन असली खेल तब हुआ, जब भतीजी ने दादी से चाबी चुराई और पूरी अटैची ही बॉयफ्रेंड और उसके साथियों के हवाले कर दी। अटैची खुली—तो निकले 15 लाख नगद, सोने के बिस्किट और जेवरात। इसके बाद शुरू हुआ अय्याशी का दौर— रायपुर में विला बुक हुआ, जन्मदिन मनाया गया, लाखों उड़ाए गए और चोरी के पैसों से 25 लाख की लग्जरी कार खरीद ली गई। सोना बेचा, पैसा बांटा… लेकिन किस्मत ने नहीं दिया साथ आरोपी सोने के बिस्किट बेचने ओडिशा तक पहुंच गए। पैसा आपस में बांटा गया। मगर जल्द ही आरटीओ चाचा को चोरी की भनक लग गई और पुलिस में मामला दर्ज हो गया। इधर, चोरी के माल पर हाथ साफ करने वालों के बीच ही एक और चोरी हो गई, जब उनके किराए के मकान से बाकी सोना भी गायब हो गया। रांची के होटल में टूटा सपनों का महल पुलिस की साइबर टीम और मुखबिरों ने लोकेशन ट्रेस की। आखिरकार रांची के एक होटल में भतीजी और बॉयफ्रेंड को दबोच लिया गया। पूछताछ में पूरा काला सच सामने आया—रिश्तों से गद्दारी, लालच और अपराध की पूरी कहानी। 51 लाख की चोरी, सलाखों के पीछे पांच आरोपी अब तक इस मामले में पांच आरोपी जेल पहुंच चुके हैं।मीनल निकुंज,अनिल प्रधान ,अभिषेक इंद्रवार (28 वर्ष),लंकेश्वर बड़ाईक (35 वर्ष),अलीशा भगत (29 वर्ष)। पुलिस ने हरियर कार, नगद रकम, सोने के बिस्किट, ज्वेलरी और मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं। चोरी गए माल की कुल कीमत 51 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है। सबक साफ है… यह कहानी सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है— लालच जब रिश्तों पर भारी पड़ जाए, तो अंजाम सिर्फ सलाखें होती हैं।

क्रशर प्लांट के विरोध में उतरे ग्रामीण,कूटरचना कर ले ली लीज!प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में लिया

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जशपुर,07/01/2026 – जिले के बागबहार थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकरभुका कोयलापहाड़ी गांव में प्रस्तावित पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की स्थापना को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का जबरदस्त विरोध सामने आया है । सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर सड़क पर उतर आए और क्रशर प्लांट के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।   ग्रामीणों का कहना है कि  जंगल, पहाड़ और पेड़-पौधे ही उनकी जीवनरेखा आस्था और आजीविका का आधार हैं, लेकिन कथित तौर पर दस्तावेजों में कूटरचना कर लंबी अवधि की लीज लेकर यहां पत्थर खदान और क्रशर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट के समीप स्थित गौठान की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया है, साथ ही डभरी को पाटने का भी काम हुआ है। साथ ही स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि क्रशर प्लांट से उड़ने वाली धूल से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ेगा और पूरा गांव प्रदूषण की चपेट में आ जाएगा। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2009 में कथित रूप से फर्जी ग्रामसभा कर लगभग 10 एकड़ भूमि लीज पर ली गई, जहां अब प्लांट लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस पहाड़ की कटाई की जा रही है, उसे आदिवासी समाज ग्राम देवता के रूप में पूजता आ रहा है। आरोप है कि प्लांट के लिए बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई की गई और पहाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया गया है, जिससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने प्लांट संचालक द्वारा जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने बागबहार थाना में लिखित ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पत्थलगांव एसडीएम ऋतुराज सिंह बिसेन, एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल, बागबहार तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान, पत्थलगांव नायब तहसीलदार भीष्म पटेल सहित अन्य अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और पूरे मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की अनुमति तत्काल निरस्त की जाए, ताकि जंगल, पर्यावरण और आदिवासी आस्था की रक्षा हो सके ।

छत्तीसगढ़ के साहित्य-सूर्य हुए अस्त: हिंदी के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन

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छत्तीसगढ़ के साहित्य-सूर्य हुए अस्त: हिंदी के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन “लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है”—यह कहने वाले छत्तीसगढ़ के धरोहर, हिंदी साहित्य के अप्रतिम साधक और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल ने आज दुनिया को अलविदा कह दिया। वे 89 वर्ष के थे। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। विनोद कुमार शुक्ल छत्तीसगढ़ के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार थे। उनकी लेखनी में साधारण जीवन की असाधारण गहराई, मानवीय संवेदना और मौन की भाषा बोलती थी। वे शब्दों के शोर में नहीं, बल्कि सादगी, ठहराव और संवेदनशीलता में विश्वास करने वाले रचनाकार थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1937 को मध्यप्रदेश (अब छत्तीसगढ़) में हुआ था। उन्होंने कविता, उपन्यास और निबंध—तीनों विधाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘नौकर की कमीज’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’ जैसी रचनाएं शामिल हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और नई भाषा दी। उनकी रचनाओं पर फिल्में और रंगमंचीय प्रस्तुतियां भी हुईं। विनोद कुमार शुक्ल की लेखनी किसी आंदोलन की घोषणा नहीं करती थी, बल्कि चुपचाप मनुष्य के भीतर उतर जाती थी। वे उन दुर्लभ साहित्यकारों में थे, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि साहित्य ऊंची आवाज़ नहीं, बल्कि गहरी अनुभूति से जीवित रहता है। उनके निधन को साहित्य जगत “साहित्य के सूर्य के अस्त” के रूप में देख रहा है। उनकी कमी शब्दों से नहीं, बल्कि उस खालीपन से महसूस होगी, जिसे केवल उनकी सादगी और मौन भर सकता था। आज हिंदी साहित्य ने अपना एक मौन साधक, छत्तीसगढ़ ने अपनी एक अमूल्य धरोहर और पाठकों ने अपने मन का एक सच्चा साथी खो दिया है। विनोद कुमार शुक्ल भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी रचनाएं सांस की तरह आने वाली पीढ़ियों के साथ जीवित रहेंगी।

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….*

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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….* जशपुर, 19 दिसंबर 2025/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में जशपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं ने ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बना है। कभी सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने वाला यह जिला आज आधुनिक चिकित्सा ढांचे, सुदृढ़ आपात सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रदेश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जशपुर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां दूरस्थ अंचलों के लोगों को सामान्य उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब जिले में ही उच्च स्तरीय उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। डायलिसिस जैसी जटिल सेवाएं, जो कभी कल्पना से परे थीं, अब जिलेवासियों के लिए सुलभ होती जा रही हैं। *दो वर्षो में मिली स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिलीं जिले को कई ऐतिहासिक सौगातें* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए वित्त विभाग से 359 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलना जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही 220 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपये की मंजूरी ने जिले में उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था की नींव रख दी है।अखिल भारतीय कल्याण आश्रम परिसर में 35 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सालय का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, जो भविष्य में जशपुर को एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। वहीं नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8.78 करोड़ रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिससे जिले को प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। *मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता* मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए कुनकुरी में 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण 8.77 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त जिले में 14 करोड़ रुपये की लागत से फिजियोथेरेपी महाविद्यालय तथा कुनकुरी में 2 करोड़ 62 लाख रुपये से नेचुरोपैथी भवन निर्माण की स्वीकृति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बहुआयामी बनाया है।वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले के फरसाबहार मुख्यालय में बहुत जल्द सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय की स्थापना होगी जो जिले वासियों के साथ पड़ोसी राज्यों को भी इसकी सुविधाएं मुहैया होगी। यह नागलोग क्षेत्र वासियों के लिए बड़ी सौगात है।अब स्वास्थय के क्षेत्र में लोगों के लिए यह वरदान साबित होगी। *जिले में आपातकालीन सेवाओं को मिली नई गति* मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिले में आपात चिकित्सा सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जिले को 10 नई 108 संजीवनी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। अब जिले में कुल 24 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस जीवनरक्षक सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा 102 महतारी एक्सप्रेस की 18 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कर रही हैं। प्रत्येक विकासखंड में शव वाहन की उपलब्धता ने कठिन समय में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी है। *नए स्वास्थ्य केंद्रों की सौगात से ग्रामीण क्षेत्रों को मिला संबल* जिले के स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए कोतबा में 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही जिले के फरसाबहार तहसील के पेटामारा (अंकिरा) एवं गांझियाडीह, दुलदुला तहसील के करडेगा एवं सीरिमकेला तथा कुनकुरी तहसील के केराडीह में 5 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना को मंजूरी मिली है,जो ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाएगी। आज जशपुर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास जिले को एक मजबूत, सक्षम और आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल अधोसंरचना का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

ब्रेकिंग जशपुर: कटनी–गुमला नेशनल हाईवे पर भीषण हादसा, कार सवार पाँच युवकों की दर्दनाक मौत,इस गांव में मचा हाहाकार,,

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ब्रेकिंग न्यूज़ जशपुर कटनी–गुमला नेशनल हाईवे पर भीषण हादसा, कार सवार पाँच युवकों की दर्दनाक मौत जशपुर,07/12/2025 – कटनी–गुमला नेशनल हाईवे पर दुलदुला थाना क्षेत्र के पतराटोली में देर रात रफ्तार का कहर ऐसा बरपा कि एक तेज रफ्तार कार खड़े ट्रेलर से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार पाँचों युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। दुलदुला थाना प्रभारी के.के. साहू ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतक सभी दुलदुला थाना क्षेत्र के खटंगा गांव के रहने वाले थे। मृतकों के परिजनों ने बताया कि ये सभी आस्ता थाना क्षेत्र के एक मेले से लौट रहे थे कि रास्ते में यह भयावह दुर्घटना हो गई। मृतक राधेश्याम यादव (26) के बड़े भाई महेश्वर यादव ने बताया कि रात करीब देर तक सभी दोस्त साथ थे और घर लौटते समय यह हादसा हुआ। मृतक दीपक राम, अमर राम के घर का इकलौता सहारा था और दोस्तों के साथ मेले से लौट रहा था। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए दुलदुला भेजा जा रहा है। हाईवे पर कुछ देर तक यातायात भी प्रभावित रहा। गांव में शोक की लहर है, परिजन बदहवास हैं और पूरे क्षेत्र में इस दर्दनाक हादसे को लेकर शोक व्याप्त है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!

जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!   जशपुर – जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के गोवासी गांव में रविवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। नवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा ने प्रिंसिपल की प्रताड़ना से तंग आकर फांसी लगा ली। छात्रा स्कूल के भीतर ही संचालित अवैध हॉस्टल में रहती थी, जिसे स्कूल प्रिंसिपल कुलदीप टोपनो खुद चलाता था।   ❗ सुसाइड नोट में बड़ा खुलासा — बैड टच, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की बातें लिखीं पुलिस को घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में छात्रा ने साफ लिखा है कि प्रिंसिपल उसके साथ बैड टच करता था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। नाबालिग की पीड़ा पढ़कर जांच टीम भी सन्न रह गई।   ❗ आरोपी प्रिंसिपल हिरासत में, अवैध हॉस्टल का काला सच सामने   सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और आरोपी प्राचार्य कुलदीप टोपनो को हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि ग्रामीण शिक्षा समिति द्वारा संचालित इस स्कूल में 124 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें 33 बच्चे प्राचार्य द्वारा चलाए जा रहे अवैध हॉस्टल में रह रहे थे। मृत छात्रा भी इसी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।जिसने बीती रात हॉस्टल के स्टडी रूम में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।   ❗ प्रशासनिक तंत्र हरकत में — कई अधिकारी मौके पर   घटना के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीईओ, एसडीएम, बीईओ, सहायक आयुक्त, तहसीलदार, एसडीओपी और पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी पहुंच गए हैं। मृतका का कमरा सील कर दिया गया है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।   ❗ एसएसपी का बड़ा बयान   एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि, “यह नाबालिग छात्रा की आत्महत्या का मामला है। सुसाइड नोट मिला है जिसमें प्रताड़ना का जिक्र है। जांच गंभीरता से चल रही है।”   ❗ जिले में उबाल — निजी स्कूलों व हॉस्टलों पर सवाल घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोग अवैध हॉस्टलों और निजी स्कूलों की लचर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले भी पोर्तेंगा मिशन स्कूल में अवैध हॉस्टल में बच्चों के धर्मांतरण की कोशिश के आरोप के साथ ही उन्हें शारीरिक प्रताड़ना देने का मामला आया था।वहीं कुनकुरी में नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में एक प्रिंसिपल द्वारा जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आ चुका है। ऐसे में जिले के अंदर निजी स्कूलों और संस्थाओं की निगरानी पर भी अब बड़ी बहस शुरू हो गई है। यह दिल दहला देने वाली घटना न केवल एक छात्रा की जिंदगी छीन ले गई, बल्कि जिले में संचालित निजी शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर गई है।