बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष

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बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष   जशपुर : अखिल भारतीय आदिवासी कंवर समाज विकास समिति का तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन केंद्रीय कार्यालय पमशाला, जिला जशपुर में भव्य व गरिमामय वातावरण में संपन्न हो रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन सर्वसम्मति से राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिसमें श्रीमती कौशल्या विष्णुदेव साय को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। उल्लेखनीय है कि श्रीमती कौशल्या साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी हैं और समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी भूमिका लंबे समय से सक्रिय, समर्पित और प्रभावशाली रही है। सम्मेलन में मंगरु साय पैंकरा को राष्ट्रीय महासचिव, अनंत राम पाकरगांव को न्याय समिति अध्यक्ष, श्रीमती शांता साय (लैलूंगा) को राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष तथा हरिशंकर साय (मधुबन) को राष्ट्रीय युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष चुना गया। इस अवसर पर समाज उत्थान, शिक्षा, संगठन विस्तार और जनकल्याण के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही समाज और जनसेवा को मजबूत करने के उद्देश्य से “ मिलनसार समाज एवं जनसेवा दौरा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत नवचयनित पदाधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाजजनों से सीधा संवाद करेंगे। नवचयनित पदाधिकारियों को पूर्व पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बधाई देते हुए विश्वास जताया कि श्रीमती कौशल्या साय के नेतृत्व में कंवर समाज को नई दिशा, संगठनात्मक मजबूती और जनसेवा को व्यापक विस्तार मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव की कृपा से किसान को मिला पट्टा,फिर भी नहीं बेच पा रहा धान,,,सुशासन पर बड़ा सवाल

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पटवारी–पोर्टल की जुगलबंदी में पिसता किसान: बी-1 खसरा गड़बड़ी से धान अटका, मुख्यमंत्री के गृहजिले में सुशासन पर उठा बड़ा सवाल जशपुर,13/012026 – जिले के कांसाबेल तहसील का एक किसान बी वन में दर्ज आधिकारिक खसरे नम्बर के कारण न तो सरकार को धान बेच पा रहा है, न सोलर पैनल लगवा पा रहा है,न ही अपनी खेती को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन ले पा रहा है। दरअसल,तिलंगा गांव का किसान दिलबंधु तिर्की को पिता की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच जमीन बंटवारे के बाद पट्टा नहीं मिल रहा था।जिसको लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपनी तकलीफ बताई। मुख्यमंत्री कार्यालय बगिया के त्वरित सक्रियता से पटवारी ने किसान का पट्टा बनाकर दे दिया। अब परेशानी तब खड़ी हो गई जब दिलबंधन तिर्की अपनी खेती का धान बेचने के लिए पंजीयन कराने सहकारी समिति गया।जहां देखा गया की पट्टे में दर्ज खसरा नंबर सरकार के भू रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग है। दरअसल, वर्ष 2022–23 की बंटवारा सूची में खाता विभाजन पूरी तरह वैधानिक रूप से हुआ था। बंटवारे के आधार पर दर्ज खसरा नंबर हैं— 666/6, 666/9, 666/1 ठ, 666/13, 666/15, 666/20, 672/7, 666/5, 666/8, 666/11, 666/1 ण, 666/17, 666/19, 672/1उ। इन खसरा नंबरों के आधार पर बंटवारा सूची पूरी तरह सही है। यही नहीं, इसी आधार पर ऋण पुस्तिका भी विधिवत जारी की गई, जिसे 23 जून 2025 को पटवारी द्वारा प्रदान किया गया था। लेकिन समस्या तब सामने आई जब किसान ने ऑनलाइन बी-1 रिकॉर्ड निकाला। बी-1 में खसरा नंबर 666/2, 666/12, 666/16, 666/21, 666/5, 666/17 दर्ज मिले, जो न तो बंटवारा सूची से मेल खाते हैं और न ही ऋण पुस्तिका से। इसी तकनीकी विसंगति के कारण सहकारी समिति ने किसान का धान पंजीयन करने से इंकार कर दिया। नतीजतन, किसान का धान आज भी घर में रखा हुआ है। इस संबंध में जब किसान पटवारी के पास गया तो पटवारी ने साफ कह दिया कि खसरा नंबर पट्टे वाले ही पोर्टल पर चढ़ाया लेकिन नहीं लिया।अब खसरा नंबर चेंज नहीं हो सकता।पटवारी की दो टूक बातें सुनकर किसान हताश हो गया और उसका पंजीयन नहीं होने से धान घर में रखा हुआ है।   इस संबंध में जब हमने हल्का पटवारी विक्की गुप्ता से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि दिलबंधन तिर्की के साथ ही उसके दो भाइयों का भी खसरा नंबर पोर्टल में बदल गया है। ऐसा कइयों का हुआ है।जो खसरा नंबर बी वन में दिख रहा है, वही मान्य है।किसान सीमांकन करा सकता है लेकिन किसान इस बात को समझ नहीं पा रहा है। वहीं पीड़ित किसान ने बताया कि पटवारी के मनमानी से तंग आकर नायब तहसीलदार कांसाबेल के न्यायालय में खसरा नंबर को ठीक करने के लिए आवेदन दिया गया है।जो बी वन में खसरा नंबर है,वह मेरे भाइयों की जमीन है।ऐसे में भविष्य में विवाद पैदा हो सकता है।किसान ने पटवारी पर तहसीलदार के आदेश नहीं मानने और किसान का धान नहीं बिकने पर हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।   बहरहाल,यह बड़ा सवाल है कि ऐसे में विष्णु का सुशासन कैसे सफल होगा कि एक किसान सरकारी सिस्टम के कारण अपना धान नहीं बेच पा रहा है? यह स्थापित लोकल्याणकारी राज्य में शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राही को पहुंचा कर देना है न कि उसे दफ्तरों के चक्कर लगवाने हैं। अब देखना है कि मुख्यमंत्री के गृहजिले में ऐसे किसानों को न्याय कब तक मिलेगा या कागजी घोड़े दौड़ते रहेंगे।

मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन”

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मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जशपुर,08/01/2026 मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नमी, कटौती, अवैध वसूली और बिचौलियों के जरिए धान खरीदी के आरोपों को लेकर जशपुर जिला कांग्रेस कमेटी ने 9 जनवरी शुक्रवार को जिले-व्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस के अनुसार जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में एक साथ सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जिला कांग्रेस अध्यक्ष यूडी मिंज के नेतृत्व में होगा। कार्यक्रम के वरिष्ठ मार्गदर्शक प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस प्रभारी भानु प्रताप सिंह होंगे, जो आंदोलन को संगठनात्मक और रणनीतिक दिशा देंगे। कांग्रेस ने आंदोलन के लिए संयोजक और सह-संयोजक भी तय किए हैं। पूर्व विधायक विनय भगत को मुख्य संयोजक बनाते हुए जशपुर जिला एवं जशपुर विधानसभा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव को कुनकुरी विधानसभा का सह-संयोजक बनाया गया है। वहीं पत्थलगांव विधानसभा में प्रदेश महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य आरती सिंह को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। युवा कांग्रेस प्रभारी रवि शर्मा, महिला कांग्रेस प्रभारी रत्ना पैकरा, सेवा दल एवं सभी प्रकोष्ठों को भी आंदोलन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में पार्टी की ओर से प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, जो ब्लॉक अध्यक्षों और ब्लॉक प्रभारियों के साथ मिलकर आंदोलन को सफल बनाएंगे और किसानों के साथ खड़े रहेंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के जिले में ही किसानों के साथ खुलेआम लूट हो रही है। धान खरीदी केंद्रों में नमी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित 40.680 किलोग्राम (बारदाना सहित) के मानक की अनदेखी कर अधिक तौल की जा रही है। कई केंद्रों पर बिचौलियों के माध्यम से धान खरीदी होने से किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विरोध करने पर किसानों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री महेश त्रिपाठी ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को इन गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस ने मांग की है कि धान की तौल निर्धारित 40.680 किलोग्राम के मानक के अनुसार की जाए, बिचौलियों के जरिए खरीदी पर तत्काल रोक लगे और राइस मिलों को विशेष निगरानी में रखा जाए, जहां से पिक-अप के माध्यम से धान मंडी आने की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही किसानों से दुर्व्यवहार करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा नमी के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पूरी तरह बंद की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी का धरना-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि अन्नदाता के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान न्याय की यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।

क्रशर प्लांट के विरोध में उतरे ग्रामीण,कूटरचना कर ले ली लीज!प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में लिया

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जशपुर,07/01/2026 – जिले के बागबहार थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकरभुका कोयलापहाड़ी गांव में प्रस्तावित पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की स्थापना को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का जबरदस्त विरोध सामने आया है । सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर सड़क पर उतर आए और क्रशर प्लांट के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।   ग्रामीणों का कहना है कि  जंगल, पहाड़ और पेड़-पौधे ही उनकी जीवनरेखा आस्था और आजीविका का आधार हैं, लेकिन कथित तौर पर दस्तावेजों में कूटरचना कर लंबी अवधि की लीज लेकर यहां पत्थर खदान और क्रशर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट के समीप स्थित गौठान की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया है, साथ ही डभरी को पाटने का भी काम हुआ है। साथ ही स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि क्रशर प्लांट से उड़ने वाली धूल से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ेगा और पूरा गांव प्रदूषण की चपेट में आ जाएगा। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2009 में कथित रूप से फर्जी ग्रामसभा कर लगभग 10 एकड़ भूमि लीज पर ली गई, जहां अब प्लांट लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस पहाड़ की कटाई की जा रही है, उसे आदिवासी समाज ग्राम देवता के रूप में पूजता आ रहा है। आरोप है कि प्लांट के लिए बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई की गई और पहाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया गया है, जिससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने प्लांट संचालक द्वारा जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने बागबहार थाना में लिखित ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पत्थलगांव एसडीएम ऋतुराज सिंह बिसेन, एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल, बागबहार तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान, पत्थलगांव नायब तहसीलदार भीष्म पटेल सहित अन्य अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और पूरे मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की अनुमति तत्काल निरस्त की जाए, ताकि जंगल, पर्यावरण और आदिवासी आस्था की रक्षा हो सके ।

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….*

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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….* जशपुर, 19 दिसंबर 2025/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में जशपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं ने ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बना है। कभी सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने वाला यह जिला आज आधुनिक चिकित्सा ढांचे, सुदृढ़ आपात सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रदेश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जशपुर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां दूरस्थ अंचलों के लोगों को सामान्य उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब जिले में ही उच्च स्तरीय उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। डायलिसिस जैसी जटिल सेवाएं, जो कभी कल्पना से परे थीं, अब जिलेवासियों के लिए सुलभ होती जा रही हैं। *दो वर्षो में मिली स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिलीं जिले को कई ऐतिहासिक सौगातें* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए वित्त विभाग से 359 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलना जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही 220 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपये की मंजूरी ने जिले में उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था की नींव रख दी है।अखिल भारतीय कल्याण आश्रम परिसर में 35 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सालय का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, जो भविष्य में जशपुर को एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। वहीं नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8.78 करोड़ रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिससे जिले को प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। *मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता* मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए कुनकुरी में 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण 8.77 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त जिले में 14 करोड़ रुपये की लागत से फिजियोथेरेपी महाविद्यालय तथा कुनकुरी में 2 करोड़ 62 लाख रुपये से नेचुरोपैथी भवन निर्माण की स्वीकृति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बहुआयामी बनाया है।वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले के फरसाबहार मुख्यालय में बहुत जल्द सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय की स्थापना होगी जो जिले वासियों के साथ पड़ोसी राज्यों को भी इसकी सुविधाएं मुहैया होगी। यह नागलोग क्षेत्र वासियों के लिए बड़ी सौगात है।अब स्वास्थय के क्षेत्र में लोगों के लिए यह वरदान साबित होगी। *जिले में आपातकालीन सेवाओं को मिली नई गति* मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिले में आपात चिकित्सा सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जिले को 10 नई 108 संजीवनी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। अब जिले में कुल 24 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस जीवनरक्षक सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा 102 महतारी एक्सप्रेस की 18 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कर रही हैं। प्रत्येक विकासखंड में शव वाहन की उपलब्धता ने कठिन समय में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी है। *नए स्वास्थ्य केंद्रों की सौगात से ग्रामीण क्षेत्रों को मिला संबल* जिले के स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए कोतबा में 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही जिले के फरसाबहार तहसील के पेटामारा (अंकिरा) एवं गांझियाडीह, दुलदुला तहसील के करडेगा एवं सीरिमकेला तथा कुनकुरी तहसील के केराडीह में 5 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना को मंजूरी मिली है,जो ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाएगी। आज जशपुर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास जिले को एक मजबूत, सक्षम और आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल अधोसंरचना का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की मांग पूरी,जिला मुख्यालय में पत्रकार भवन निर्माण हुआ प्रारंभ,,,

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जिला मुख्यालय में पत्रकार भवन निर्माण हुआ प्रारंभ… सूरजपुर. जिला मुख्यालय के कर्मा चौक के पास पत्रकार भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। 25 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत प्रस्तावित पत्रकार भवन का पूर्व दिनांक 7 अक्टूबर 2023 में विधिवत भूमि पूजन किया गया था। नक्शा त्रुटि को सुधार कर अब नए सिरे से आवश्यक कार्यवाही पूर्ण होने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। जिसमें सभी आवश्यक सुविधाओ का ध्यान रखा गया है। ज्ञात हो कि इसकी पहल करते हुए अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति जिला सूरजपुर जिलाध्यक्ष राजेश सोनी ने जिले के पत्रकारों की परेशानियों समस्याओं को देखते छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से जिला मुख्यालय में पत्रकार भवन बनाने की मांग रखी थी साथ ही भूमि उपलब्ध करने का आग्रह किया था जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल पत्रकार भवन के लिए 25 लाख रुपये की घोषणा कर भूमि आबंटन के लिए कलेक्टर को निर्देश किया था। जिसका विधिवत भूमि पूजन कर बोर्ड लगा दिया गया था। सोमवार को अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति जिला सूरजपुर के जिलाध्यक्ष राजेश सोनी,ओमकार पांडेय, ओपी तिवारी,अंकित सोनी, नोसाद अहमद, दिलशाद खान, एजाज अहमद, जानी खान,इमाम हसन, प्रताप नारायण,नीरज साहू,फिरोज खान,विक्की तिवारी,सीपी साहू,नीरज सिंह,अनिल साहू,शमरोज खान,आकाश कसेरा,राकेश जायसवाल,आशीष साहू,आशीष साहू,सुभाष गुप्ता,सुनील अग्रवाल,नितेश गुप्ता,दीपक पासवान,सुरेंद्र साहू सहित जिले के तमाम पत्रकारों सहित जिला जनसम्पर्क अधिकारी प्रदीप कवर की उपस्थित में पत्रकार भवन का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया सड़क हादसे पर गहरा दुख

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया हादसे पर गहरा दुःख  आज सुबह नेशनल हाईवे 43 पर तेज रफ्तार कार और ट्रेलर में हुई भिड़ंत में पांच लोगों की हुई मौत जशपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43, पतराटोली के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में पाँच लोगों की मौत की खबर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि हादसे की सूचना अत्यंत दुखद है और इस दुखद घड़ी में वे शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

विष्णु सरकार की छवि बिगाड़ने वाले अधिकारियों की तानाशाही पर पत्रकारों ने खोला मोर्चा,मुकेश नायक की पीड़ा छापनेवाले पत्रकारों को टारगेट करने पर मामला गरमाया

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पत्रकार मुकेश नायक की अपील पर कुनकुरी में पत्रकारों की आपात बैठक, जिला प्रशासन पर फूटा आक्रोश — मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन, जनसम्पर्क व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट कर पत्रकारों ने संघर्ष का बिगुल फूंका   जशपुर/कुनकुरी जशपुर जिले में पत्रकार मुकेश नायक के साथ हुई अमानवीय और संवेदनहीन घटना को लेकर गुरुवार को कुनकुरी में पत्रकारों की जिला स्तरीय आपात बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिले के सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया से जुड़े पत्रकार मौजूद रहे। बैठक में प्रशासनिक उदासीनता, गलत तथ्यों के प्रसार और पत्रकारों को दबाव में लेने के बढ़ते प्रयासों को लेकर व्यापक आक्रोश देखा गया। स्वास्थ्य विभाग झूठ बोल रहा है,मुझ पर दवाब बनाना बंद करें – मुकेश की भावुक अपील बैठक में पत्रकार मुकेश नायक ने बताया कि 17 नवंबर को ओडिशा के सुंदरगढ़ अस्पताल में जन्मे उनके नवजात शिशु की मौत हो गई। अस्पताल की शव वाहन सेवा अंतरराज्यीय सीमा पार नहीं कर सकती थी, इसलिए वे छत्तीसगढ़ की 102 मुक्तांजली वाहन सेवा से सहयोग की उम्मीद में बार-बार कॉल करते रहे, लेकिन न फोन रिसीव हुआ, न कोई सहायता मिली। सीएमएचओ से आश्वासन मिलने के बाद भी 102 सेवा ने साफ कह दिया कि वे शव परिवहन नहीं करते। अंततः मजबूरी में उन्हें नवजात के शव को मोटरसाइकिल से घर लाना पड़ा। मुकेश नायक ने कहा कि “इतना कष्ट झेलने के बाद भी जनसम्पर्क विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झूठा दावा कर दिया कि स्वास्थ्य विभाग ने मुझे फोन किया पर मैंने रिसीव नहीं किया। यह असत्य बयान मेरे दर्द पर नमक छिड़कने जैसा है।व्हाट्सएप कॉल करके मुझपर मामला ठंडा करने का दवाब बनाया जा रहा है।”   पत्रकारों ने प्रशासनिक तानाशाही पर जताया तीखा विरोध   पत्रकारों ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति का दुख नहीं, बल्कि पूरे जिले में फैली संवेदनहीन कार्यशैली की पहचान है। बैठक में जनसम्पर्क विभाग के एक व्हाट्सएप ग्रुप को लेकर भी कड़ी नाराज़गी व्यक्त की गई। पत्रकारों ने बताया कि इस ग्रुप को अक्सर पत्रकारों को अप्रत्यक्ष रूप से धमकाने, दबाव बनाने और प्रशासनिक पक्ष को थोपने के “टूल” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।पत्रकारों ने जनसंपर्क व्हाट्सएप ग्रुप का स्क्रीनशॉट दिखाते हुए कहा कि 25 साल के इतिहास में नौकरशाही इस हद तक बेकाबू नहीं हुई थी। चर्चा के बाद पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हो रहे इस अतिक्रमण के विरोध में जिले के सभी पत्रकारों ने सामूहिक रूप से जनसंपर्क व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट कर अपना पहला औपचारिक विरोध दर्ज कराया।   मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार — दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नाम एक विस्तृत ज्ञापन भेजा जाएगा। ज्ञापन में इन मांगों को शामिल किया गया है — पत्रकार मुकेश नायक के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच गलत जानकारी प्रसारित करने वाले तथा संवेदनहीन रवैया अपनाने वाले दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई जिले में “प्रशासनिक आतंकवाद” की बढ़ती प्रवृत्ति पर तत्काल रोक शासन की छवि खराब करने वाले अधिकारियों को जशपुर जिले से हटाया जाए स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए पत्रकारों ने कहा कि यदि एक पत्रकार को न्याय नहीं मिलता, तो आम जनता की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।   बैठक में उपस्थित पत्रकार वरिष्ठ पत्रकार विष्णु नारायण जोशी, विनोद शर्मा, रविन्द्र थवाईत, संतोष चौधरी, राजेश पांडेय, विकास पांडे, दीपक वर्मा, प्रदीप तिग्गा, नवीन ओझा, दीपक सिंह, संजीत यादव, प्रियल जिंदल, सागर जोशी, कुंदन सिंह, शैलेन्द्र चिंतानवीस, एजाज खान, धवलेश्वर सिंह, मयंक शर्मा, तरुण शर्मा, सुनील सिन्हा, निरंजन मोहंती, रुद्रदामन पाठक, नीतीश यादव, राजेश राम भगत, मुकेश नायक, सोनू जायसवाल सहित अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।वहीं इस मामले पर विजय त्रिपाठी, रमेश शर्मा, प्रशांत सहाय, योगेश थवाईत, सुरेन्द्र चेतवानी, शिव प्रताप सिंह, मिथलेश साहू, श्याम चौहान समेत कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी प्रशासनिक तानाशाही पर तीखा विरोध दर्ज किया है। पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष मुकेश नायक को न्याय दिलाने के साथ-साथ जिले में प्रशासनिक जवाबदेही की स्थापना के लिए है। उन्होंने कहा कि “जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और जिले में मानवीय व जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक यह मुद्दा लगातार उठाया जाएगा।”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन… जशपुर : कुनकुरी विसर्जन तालाब सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि प्रकृति को फिर से एक तालाब के चारों ओर उतारने की खूबसूरत कोशिश बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर 98 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस परियोजना ने जनवरी 2025 में गति पकड़ी थी और अब यह लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।   तालाब को आधुनिक और हरा-भरा स्वरूप देने में ठेकेदार महेश त्रिपाठी और राजू भारती दिन-रात जुटे हुए हैं। हालांकि अतिक्रमण और तालाब के भीतर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर को अभी तक नहीं हटाया जाना परियोजना की प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। युवाओं का नैचुरल हैंगआउट बन चुका है तालाब तालाब की सुंदरता ऐसी है कि पिछले दो माह से यह युवाओं का पसंदीदा ठिकाना बन गया है। सुबह की धूप हो या शाम की ठंडी हवा – लोग यहां प्रकृति से जुड़ने, सुकून लेने और यादगार रील्स बनाने पहुंच रहे हैं। तालाब में डाली गई रूपचंदा रंगीन मछलियाँ बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। कई लोग अपने घरों से लाए पालतू कछुओं को यहां छोड़कर उन्हें प्राकृतिक आवास भी दे रहे हैं।   प्रकृति की सेवा अब बन गई सामाजिक जिम्मेदारी तालाब में लगाए गए आकर्षक पौधों की देखभाल शहर के निवासी प्रकाश कुजूर कर रहे हैं। उनका तालाब से भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है। प्रकाश ने अमर उजाला को बताया,“मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हमारे बड़े भाई जैसे हैं। वे हमारे यहां किराए के घर में रहकर पढ़ाई किए थे। उनका यह सुंदर प्रयास सफल हो, इसलिए तालाब की सेवा कर रहा हूं।”   मुख्यमंत्री ने निरीक्षण कर बढ़ाई उम्मीदें       बीते 28 अक्टूबर को छठ पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री सपरिवार तालाब का निरीक्षण करने पहुंचे। आसपास की हरियाली और बनती सुंदरता को देखकर उन्होंने अतिरिक्त 60 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही निर्देश दिया कि तालाब के अंदर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर और खंभे को तुरंत बाहर शिफ्ट किया जाए, ताकि तालाब की सुंदरता और सुरक्षा दोनों में कोई बाधा न रहे। स्थल पर मौजूद कलेक्टर रोहित व्यास ने भरोसा दिलाया कि यह तालाब कुनकुरी की पहचान बनेगा और इससे भी बेहतर स्वरूप दिया जाएगा।   एक तालाब—जो सिर्फ पानी नहीं, प्रकृति के पुनर्जागरण की कहानी बन रहा है कुनकुरी का विसर्जन तालाब अब शहर की नई हरित पहचान बनकर उभर रहा है। यहां बनने वाली पगडंडियाँ, पानी में तैरती रंगीन मछलियाँ, किनारे हिलते पौधे और युवा,यह सब मिलकर बताते हैं कि किस तरह एक तालाब पूरे शहर की आत्मा को फिर से जीवंत कर सकता है।   नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील और सीएमओ की लगातार उपस्थिति के कारण विसर्जन तालाब सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के रिश्ते को फिर से मजबूत करने की कहानी बन रहा है। ठेकेदार महेश त्रिपाठी ने बताया कि विसर्जन तालाब सौंदर्यीकरण में फूल-पौधे रूप दिए गए हैं।पौधों की देखभाल के लिए स्प्रिंकलर लगाया गया है।चारों ओर रेलिंग पर एलईडी लाइट लगाकर तालाब में रोशनी की गई है।अतिक्रमण और ट्रांसफार्मर हटाने का काम जल्दी पूरा होने से निर्माण कार्य एक महीने में पूरा हो जाएगा।

शव वाहन न मिलने पर पत्रकार पिता ने मोटरसाइकिल से लाया नवजात का शव,जशपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

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शव वाहन न मिलने पर पत्रकार पिता ने मोटरसाइकिल से लाया नवजात का शव,जशपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल   जशपुर/फरसाबहार –  दिल को चीर देने वाली यह घटना फरसाबहार के पत्रकार मुकेश नायक के साथ घटी। रविवार–सोमवार की रात 2 बजे उनकी गर्भवती पत्नी को अचानक तेज दर्द उठा। मुकेश उन्हें तुरंत लेकर सुंदरगढ़ अस्पताल पहुंचे। सुबह 5 बजे प्रसव हुआ, लेकिन गंदा पानी पीने की वजह से नवजात ने आधे घंटे में ही दम तोड़ दिया।   ओडिशा सरकार का शववाहन छत्तीसगढ़ सीमा पर रुक गया   ओडिशा सरकार ने बच्चे के शव को अस्पताल से सीमा तक पहुंचाने के लिए वाहन दिया, लेकिन जैसे ही गाड़ी लुलकीडीह पुलिया पहुंची, चालक ने आगे बढ़ने से मना कर दिया। उसका साफ कहना था— “साहब, गाड़ी में जीपीएस लगा है… दूसरे राज्य में ले गया तो नौकरी चली जाएगी।”   छत्तीसगढ़ में मदद नहीं मिली—दो घंटे इंतजार के बाद टूटा दिल   इसके बाद पत्रकार पिता ने छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य अधिकारियों से शववाहन की मदद मांगी। सीएमएचओ ने बताया कि फरसाबहार में वाहन उपलब्ध नहीं है, कुछ देर में व्यवस्था की जाएगी। मुकेश नायक अपने मासूम बेटे के शव के साथ दो घंटे तक इंतजार करते रहे। लेकिन कोई गाड़ी नहीं आई।   आखिर मजबूरी में उन्होंने अपने नवजात बेटे को गोद में उठाया… मोटरसाइकिल स्टार्ट की… और छत्तीसगढ़ की सीमा से अपने गांव सिंगीबहार तक खुद शव लेकर चले आए।   गांव और पत्रकार जगत में गहरी पीड़ा और गुस्सा   जब लोगों को यह जानकारी मिली, तो पूरे इलाके में दुःख और गुस्सा फैल गया। लोगों का कहना है— “एक पिता को अपने मृत बच्चे को बाइक पर लाना पड़े… इससे बड़ी लाचारी और क्या होगी?”   मुख्यमंत्री की विधानसभा में व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना   यह घटना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विधानसभा क्षेत्र में हुई, जहां—घायल को समय पर एंबुलेंस नहीं,गर्भवती महिला को 102 की सुविधा नहीं,मृत्यु पर शव वाहन भी उपलब्ध नहीं।ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती रही हैं, लेकिन हालात नहीं बदल रहे।   अपने मासूम बच्चे को बाहों में लेकर घर लौटे पिता बस इतना ही कह पाए— “आज जो मेरे साथ हुआ… वह किसी और के साथ न हो।”