*नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर जशपुर में जश्न, पार्टी नेताओं ने जताई खुशी*

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*नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर जशपुर में जश्न, पार्टी नेताओं ने जताई खुशी* जशपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा के प्रभारी एवं बिहार सरकार के मंत्री श्री नितिन नबीन के भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त होने पर जशपुर जिले में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं में भारी उत्साह देखा गया। इस अवसर पर जशपुर जिले के विभिन्न स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़े, मिठाइयां बांटी और एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी मनाई। इस दौरान पार्टी नेताओं ने कहा कि नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना संगठन की मजबूती और कार्यकर्ता आधारित राजनीति की जीत है। उनके नेतृत्व में भाजपा देशभर में और अधिक सशक्त होकर जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाएगी। पूर्व प्रदेश महामंत्री *कृष्ण कुमार राय* ने कहा कि नितिन नबीन का छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में कार्यकाल अत्यंत सफल और प्रेरणादायी रहा है। उनके प्रभारी रहते छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिली, कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आया और भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की। अब उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पूरे देश में पार्टी को इसी तरह सशक्त नेतृत्व मिलेगा। पूर्व राज्यसभा सांसद *रणविजय सिंह जूदेव* ने कहा कि नितिन नबीन एक अनुभवी, दूरदर्शी और संगठन के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित नेता हैं। उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना भाजपा के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। जशपुर विधायक *रायमुनी भगत* ने कहा कि यह नियुक्ति पूरे भाजपा परिवार के लिए गर्व का विषय है। नितिन नबीन के नेतृत्व में पार्टी गरीब, किसान, महिला और आदिवासी समाज के कल्याण के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करेगी। पत्थलगांव विधायक *गोमती साय* ने कहा कि नितिन नबीन का लंबा संगठनात्मक अनुभव और कार्यशैली भाजपा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। इससे कार्यकर्ताओं में नया जोश और आत्मविश्वास पैदा हुआ है। जिला पंचायत अध्यक्ष *सालिक साय* ने कहा कि नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों के विकास को भी नई दिशा देगा। उनके नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का संकल्प और मजबूत होगा। भाजपा जिलाध्यक्ष *भरत सिंह* ने कहा कि जशपुर जिले के सभी कार्यकर्ता इस ऐतिहासिक निर्णय से अत्यंत उत्साहित हैं। नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पार्टी की संगठनात्मक शक्ति और अनुशासन का प्रतीक है। उनके नेतृत्व में भाजपा राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को और दृढ़ता से आगे बढ़ाएगी। उक्त जानकारी देते हुए जिला भाजपा मीडिया प्रभारी फैज़ान सरवर खान ने बताया कि जशपुर बस स्टैंड में कार्यक्रम के समय मुख्य रूप से बलरामपुर जिला संगठन प्रभारी ओमप्रकाश सिन्हा, नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जनपद अध्यक्ष गंगा राम भगत, संतोष सिंह, मुकेश सोनी, शरद चौरसिया, पिंटू गोस्वामी, रागिनी भगत, सुधीर पाठक, रविन्द्र पाठक, विनोद निकुंज, विजय सहाय, राजा सोनी, आकाश गुप्ता, दीपक गुप्ता, सज्जू खान, नीतीश गुप्ता, राहुल गुप्ता, नागेंद्र भगत सहित भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।

बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष

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बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष   जशपुर : अखिल भारतीय आदिवासी कंवर समाज विकास समिति का तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन केंद्रीय कार्यालय पमशाला, जिला जशपुर में भव्य व गरिमामय वातावरण में संपन्न हो रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन सर्वसम्मति से राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिसमें श्रीमती कौशल्या विष्णुदेव साय को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। उल्लेखनीय है कि श्रीमती कौशल्या साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी हैं और समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी भूमिका लंबे समय से सक्रिय, समर्पित और प्रभावशाली रही है। सम्मेलन में मंगरु साय पैंकरा को राष्ट्रीय महासचिव, अनंत राम पाकरगांव को न्याय समिति अध्यक्ष, श्रीमती शांता साय (लैलूंगा) को राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष तथा हरिशंकर साय (मधुबन) को राष्ट्रीय युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष चुना गया। इस अवसर पर समाज उत्थान, शिक्षा, संगठन विस्तार और जनकल्याण के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही समाज और जनसेवा को मजबूत करने के उद्देश्य से “ मिलनसार समाज एवं जनसेवा दौरा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत नवचयनित पदाधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाजजनों से सीधा संवाद करेंगे। नवचयनित पदाधिकारियों को पूर्व पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बधाई देते हुए विश्वास जताया कि श्रीमती कौशल्या साय के नेतृत्व में कंवर समाज को नई दिशा, संगठनात्मक मजबूती और जनसेवा को व्यापक विस्तार मिलेगा।

भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी

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भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी सार – जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। रायगढ़,09 जनवरी,2025 रायगढ़ जिले में ग्राम बंगुरसिया के धान खरीदी केंद्र में इन दिनों एक अनोखा लेकिन बेहद चिंताजनक दृश्य देखने को मिल रहा है। लगातार 15 से 20 दिनों से हर रात जंगली हाथियों का झुंड धान मंडी तक पहुंच रहा है और वहां से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर ले जा रहा है। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जंगलों में बदलती स्थिति और भूखे वन्यजीवों की मजबूरी की तस्वीर है। रात होते ही जुटती है ग्रामीणों की भीड़ जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि हाथी अब तक किसी तरह की तोड़फोड़ या आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं। वन विभाग सतर्क, हाथी मित्र दल तैनात वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाथी मित्र दल की टीम मौके पर तैनात है, जो हाथियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही है और उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास कर रही है। हालांकि, हाथियों का बार-बार लौट आना यह संकेत देता है कि जंगलों में उनके लिए पर्याप्त भोजन नहीं बचा है। तस्वीरें बता रही हैं जंगल की सच्चाई हाथियों के ये वीडियो और तस्वीरें साफ संदेश दे रही हैं कि जंगल भले ही हाथियों का प्राकृतिक घर हों, लेकिन वहां भोजन का संकट गहराता जा रहा है। जंगलों में घटता प्राकृतिक आहार, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और विकास गतिविधियां हाथियों को इंसानी इलाकों की ओर खींच रही हैं। गणेश के स्वरूप गजराज संकट में भारत में हाथी को भगवान गणेश के रूप में पूजा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यही पूजनीय जीव आज अपने अस्तित्व और भोजन के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जंगल में इंसानों की बढ़ती दखलअंदाजी और हाथियों की भोजन तलाश में बस्तियों तक पहुंच है। सिर्फ नुकसान की नहीं, चेतावनी की खबर बंगुरसिया की धान मंडी में उठती धान की बोरियां केवल सरकारी नुकसान की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि यह भविष्य के बड़े टकराव की चेतावनी भी हैं। यदि जंगलों में हाथियों के लिए भोजन और सुरक्षित रास्ते नहीं बनाए गए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। स्थायी समाधान जरूरी वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाना,हाथी कॉरिडोर का संरक्षण,और मानव बस्तियों से हाथियों की सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यह खबर हाथियों की नहीं, हमारी जिम्मेदारी की कहानी भी है।

युवती ने शादी से मना किया तो प्रेमी फंदे पर झूल गया,प्रेमी के भाई ने लगाए गंभीर आरोप

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कुनकुरी में युवक ने लगाई फांसी, प्रेम संबंध को लेकर प्रताड़ना का आरोप कुनकुरी,09 जनवरी 2026 – कुनकुरी थाना क्षेत्र के ठेठेटांगर में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे एक 20 वर्षीय युवक ने अपने ही घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दिलेश्वर यादव के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही कुनकुरी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि दिलेश्वर यादव का पड़ोस के गांव की एक सजातीय युवती से प्रेम संबंध था और वह उससे विवाह करना चाहता था। परिजनों के अनुसार इस रिश्ते से युवती के पिता और चाचा नाराज थे और उन्होंने दिलेश्वर को जान से मारने की धमकी देते हुए युवती से दूर रहने के लिए बार-बार आमने-सामने और फोन पर दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर दिलेश्वर ने यह कदम उठाया। परिजनों ने यह भी दावा किया कि दिलेश्वर यादव ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उसने युवती का नाम लेते हुए अपनी मौत का कारण प्रेम और विवाह को लेकर हुए कथित धोखे को बताया है। वहीं कुनकुरी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दिलेश्वर यादव ने अपने घर के म्यार (छज्जे/अंदरूनी हिस्से) में फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस का कहना है कि मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की जा रही है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस संभवतः सोशल मीडिया पोस्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच करेगी।

आरटीओ चाचा की अटैची से उड़ाए लाखों! भतीजी ने बॉयफ्रेंड संग रची चोरी की खौफनाक स्क्रिप्ट

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**आरटीओ चाचा की अटैची से उड़ाए लाखों! भतीजी ने बॉयफ्रेंड संग रची चोरी की खौफनाक स्क्रिप्ट** जशपुर,09 जनवरी 2025 कहते हैं लालच जब हदें पार कर जाए तो रिश्ते, भरोसा और इज्जत—सब कुछ बिखर जाता है। जशपुर जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र से सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं, जहाँ आरटीओ चाचा विजय निकुंज की अटैची में रखे लाखों रुपए और सोने की ज्वेलरी पर भतीजी की नजर पड़ी—और यहीं से शुरू हुआ अपराध का खतरनाक सफर। आईफोन की चाह… और पहली चोरी कहानी की शुरुआत होती है तब, जब कॉलेज में पढ़ने वाली भतीजी मिनल निकुंज साफ-सफाई के बहाने चाचा के कमरे में पहुंचती है। दीवान के भीतर रखी एक अटैची खोलते ही उसकी आंखें चौंधिया जाती हैं—नगद नोटों के बंडल और चमकता सोना। पहले सिर्फ आईफोन खरीदने के लिए दो लाख रुपए उठाए गए। किसी को भनक नहीं लगी… और यहीं से उसका हौसला बढ़ता गया। बॉयफ्रेंड की एंट्री, अपराध को मिली रफ्तार सोशल मीडिया से शुरू हुआ प्यार, जल्द ही लिव-इन रिलेशनशिप में बदल चुका था। बॉयफ्रेंड अनिल प्रधान को जब पैसों की भनक लगी, तो लालच ने दोनों को एक ही राह पर ला खड़ा किया—अपराध की राह। फिर एक-एक कर अटैची से पैसे निकलते रहे… पिकनिक, पार्टी, होटल, शराब—सब चलता रहा। पूरा सूटकेस ही उड़ा ले गए लेकिन असली खेल तब हुआ, जब भतीजी ने दादी से चाबी चुराई और पूरी अटैची ही बॉयफ्रेंड और उसके साथियों के हवाले कर दी। अटैची खुली—तो निकले 15 लाख नगद, सोने के बिस्किट और जेवरात। इसके बाद शुरू हुआ अय्याशी का दौर— रायपुर में विला बुक हुआ, जन्मदिन मनाया गया, लाखों उड़ाए गए और चोरी के पैसों से 25 लाख की लग्जरी कार खरीद ली गई। सोना बेचा, पैसा बांटा… लेकिन किस्मत ने नहीं दिया साथ आरोपी सोने के बिस्किट बेचने ओडिशा तक पहुंच गए। पैसा आपस में बांटा गया। मगर जल्द ही आरटीओ चाचा को चोरी की भनक लग गई और पुलिस में मामला दर्ज हो गया। इधर, चोरी के माल पर हाथ साफ करने वालों के बीच ही एक और चोरी हो गई, जब उनके किराए के मकान से बाकी सोना भी गायब हो गया। रांची के होटल में टूटा सपनों का महल पुलिस की साइबर टीम और मुखबिरों ने लोकेशन ट्रेस की। आखिरकार रांची के एक होटल में भतीजी और बॉयफ्रेंड को दबोच लिया गया। पूछताछ में पूरा काला सच सामने आया—रिश्तों से गद्दारी, लालच और अपराध की पूरी कहानी। 51 लाख की चोरी, सलाखों के पीछे पांच आरोपी अब तक इस मामले में पांच आरोपी जेल पहुंच चुके हैं।मीनल निकुंज,अनिल प्रधान ,अभिषेक इंद्रवार (28 वर्ष),लंकेश्वर बड़ाईक (35 वर्ष),अलीशा भगत (29 वर्ष)। पुलिस ने हरियर कार, नगद रकम, सोने के बिस्किट, ज्वेलरी और मोबाइल फोन बरामद कर लिए हैं। चोरी गए माल की कुल कीमत 51 लाख रुपए से अधिक आंकी गई है। सबक साफ है… यह कहानी सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है— लालच जब रिश्तों पर भारी पड़ जाए, तो अंजाम सिर्फ सलाखें होती हैं।

मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन”

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मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जशपुर,08/01/2026 मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नमी, कटौती, अवैध वसूली और बिचौलियों के जरिए धान खरीदी के आरोपों को लेकर जशपुर जिला कांग्रेस कमेटी ने 9 जनवरी शुक्रवार को जिले-व्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस के अनुसार जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में एक साथ सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जिला कांग्रेस अध्यक्ष यूडी मिंज के नेतृत्व में होगा। कार्यक्रम के वरिष्ठ मार्गदर्शक प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस प्रभारी भानु प्रताप सिंह होंगे, जो आंदोलन को संगठनात्मक और रणनीतिक दिशा देंगे। कांग्रेस ने आंदोलन के लिए संयोजक और सह-संयोजक भी तय किए हैं। पूर्व विधायक विनय भगत को मुख्य संयोजक बनाते हुए जशपुर जिला एवं जशपुर विधानसभा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव को कुनकुरी विधानसभा का सह-संयोजक बनाया गया है। वहीं पत्थलगांव विधानसभा में प्रदेश महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य आरती सिंह को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। युवा कांग्रेस प्रभारी रवि शर्मा, महिला कांग्रेस प्रभारी रत्ना पैकरा, सेवा दल एवं सभी प्रकोष्ठों को भी आंदोलन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में पार्टी की ओर से प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, जो ब्लॉक अध्यक्षों और ब्लॉक प्रभारियों के साथ मिलकर आंदोलन को सफल बनाएंगे और किसानों के साथ खड़े रहेंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के जिले में ही किसानों के साथ खुलेआम लूट हो रही है। धान खरीदी केंद्रों में नमी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित 40.680 किलोग्राम (बारदाना सहित) के मानक की अनदेखी कर अधिक तौल की जा रही है। कई केंद्रों पर बिचौलियों के माध्यम से धान खरीदी होने से किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विरोध करने पर किसानों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री महेश त्रिपाठी ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को इन गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस ने मांग की है कि धान की तौल निर्धारित 40.680 किलोग्राम के मानक के अनुसार की जाए, बिचौलियों के जरिए खरीदी पर तत्काल रोक लगे और राइस मिलों को विशेष निगरानी में रखा जाए, जहां से पिक-अप के माध्यम से धान मंडी आने की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही किसानों से दुर्व्यवहार करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा नमी के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पूरी तरह बंद की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी का धरना-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि अन्नदाता के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान न्याय की यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।

क्रशर प्लांट के विरोध में उतरे ग्रामीण,कूटरचना कर ले ली लीज!प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में लिया

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जशपुर,07/01/2026 – जिले के बागबहार थाना क्षेत्र अंतर्गत कुकरभुका कोयलापहाड़ी गांव में प्रस्तावित पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की स्थापना को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का जबरदस्त विरोध सामने आया है । सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के महिला-पुरुष हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर सड़क पर उतर आए और क्रशर प्लांट के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।   ग्रामीणों का कहना है कि  जंगल, पहाड़ और पेड़-पौधे ही उनकी जीवनरेखा आस्था और आजीविका का आधार हैं, लेकिन कथित तौर पर दस्तावेजों में कूटरचना कर लंबी अवधि की लीज लेकर यहां पत्थर खदान और क्रशर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट के समीप स्थित गौठान की भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया गया है, साथ ही डभरी को पाटने का भी काम हुआ है। साथ ही स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि क्रशर प्लांट से उड़ने वाली धूल से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ेगा और पूरा गांव प्रदूषण की चपेट में आ जाएगा। ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2009 में कथित रूप से फर्जी ग्रामसभा कर लगभग 10 एकड़ भूमि लीज पर ली गई, जहां अब प्लांट लगाया जा रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस पहाड़ की कटाई की जा रही है, उसे आदिवासी समाज ग्राम देवता के रूप में पूजता आ रहा है। आरोप है कि प्लांट के लिए बड़े-बड़े पेड़ों की कटाई की गई और पहाड़ियों को काटकर रास्ता बनाया गया है, जिससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने प्लांट संचालक द्वारा जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने बागबहार थाना में लिखित ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पत्थलगांव एसडीएम ऋतुराज सिंह बिसेन, एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल, बागबहार तहसीलदार कृष्णमूर्ति दीवान, पत्थलगांव नायब तहसीलदार भीष्म पटेल सहित अन्य अधिकारी पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और पूरे मामले को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि पत्थर खदान और क्रशर प्लांट की अनुमति तत्काल निरस्त की जाए, ताकि जंगल, पर्यावरण और आदिवासी आस्था की रक्षा हो सके ।

छत्तीसगढ़ के साहित्य-सूर्य हुए अस्त: हिंदी के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन

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छत्तीसगढ़ के साहित्य-सूर्य हुए अस्त: हिंदी के महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन “लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है”—यह कहने वाले छत्तीसगढ़ के धरोहर, हिंदी साहित्य के अप्रतिम साधक और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल ने आज दुनिया को अलविदा कह दिया। वे 89 वर्ष के थे। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। विनोद कुमार शुक्ल छत्तीसगढ़ के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार थे। उनकी लेखनी में साधारण जीवन की असाधारण गहराई, मानवीय संवेदना और मौन की भाषा बोलती थी। वे शब्दों के शोर में नहीं, बल्कि सादगी, ठहराव और संवेदनशीलता में विश्वास करने वाले रचनाकार थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1937 को मध्यप्रदेश (अब छत्तीसगढ़) में हुआ था। उन्होंने कविता, उपन्यास और निबंध—तीनों विधाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘नौकर की कमीज’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, ‘खिलेगा तो देखेंगे’ जैसी रचनाएं शामिल हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और नई भाषा दी। उनकी रचनाओं पर फिल्में और रंगमंचीय प्रस्तुतियां भी हुईं। विनोद कुमार शुक्ल की लेखनी किसी आंदोलन की घोषणा नहीं करती थी, बल्कि चुपचाप मनुष्य के भीतर उतर जाती थी। वे उन दुर्लभ साहित्यकारों में थे, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि साहित्य ऊंची आवाज़ नहीं, बल्कि गहरी अनुभूति से जीवित रहता है। उनके निधन को साहित्य जगत “साहित्य के सूर्य के अस्त” के रूप में देख रहा है। उनकी कमी शब्दों से नहीं, बल्कि उस खालीपन से महसूस होगी, जिसे केवल उनकी सादगी और मौन भर सकता था। आज हिंदी साहित्य ने अपना एक मौन साधक, छत्तीसगढ़ ने अपनी एक अमूल्य धरोहर और पाठकों ने अपने मन का एक सच्चा साथी खो दिया है। विनोद कुमार शुक्ल भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी रचनाएं सांस की तरह आने वाली पीढ़ियों के साथ जीवित रहेंगी।

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….*

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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….* जशपुर, 19 दिसंबर 2025/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में जशपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं ने ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बना है। कभी सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने वाला यह जिला आज आधुनिक चिकित्सा ढांचे, सुदृढ़ आपात सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रदेश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जशपुर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां दूरस्थ अंचलों के लोगों को सामान्य उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब जिले में ही उच्च स्तरीय उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। डायलिसिस जैसी जटिल सेवाएं, जो कभी कल्पना से परे थीं, अब जिलेवासियों के लिए सुलभ होती जा रही हैं। *दो वर्षो में मिली स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिलीं जिले को कई ऐतिहासिक सौगातें* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए वित्त विभाग से 359 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलना जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही 220 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपये की मंजूरी ने जिले में उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था की नींव रख दी है।अखिल भारतीय कल्याण आश्रम परिसर में 35 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सालय का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, जो भविष्य में जशपुर को एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। वहीं नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8.78 करोड़ रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिससे जिले को प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। *मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता* मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए कुनकुरी में 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण 8.77 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त जिले में 14 करोड़ रुपये की लागत से फिजियोथेरेपी महाविद्यालय तथा कुनकुरी में 2 करोड़ 62 लाख रुपये से नेचुरोपैथी भवन निर्माण की स्वीकृति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बहुआयामी बनाया है।वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले के फरसाबहार मुख्यालय में बहुत जल्द सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय की स्थापना होगी जो जिले वासियों के साथ पड़ोसी राज्यों को भी इसकी सुविधाएं मुहैया होगी। यह नागलोग क्षेत्र वासियों के लिए बड़ी सौगात है।अब स्वास्थय के क्षेत्र में लोगों के लिए यह वरदान साबित होगी। *जिले में आपातकालीन सेवाओं को मिली नई गति* मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिले में आपात चिकित्सा सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जिले को 10 नई 108 संजीवनी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। अब जिले में कुल 24 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस जीवनरक्षक सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा 102 महतारी एक्सप्रेस की 18 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कर रही हैं। प्रत्येक विकासखंड में शव वाहन की उपलब्धता ने कठिन समय में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी है। *नए स्वास्थ्य केंद्रों की सौगात से ग्रामीण क्षेत्रों को मिला संबल* जिले के स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए कोतबा में 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही जिले के फरसाबहार तहसील के पेटामारा (अंकिरा) एवं गांझियाडीह, दुलदुला तहसील के करडेगा एवं सीरिमकेला तथा कुनकुरी तहसील के केराडीह में 5 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना को मंजूरी मिली है,जो ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाएगी। आज जशपुर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास जिले को एक मजबूत, सक्षम और आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल अधोसंरचना का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

संपादकीय : छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी : संरचनात्मक विफलता और शासन की नैतिक जिम्मेदारी

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संपादकीय : छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी : संरचनात्मक विफलता और शासन की नैतिक जिम्मेदारी संतोष चौधरी छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी की बढ़ती घटनाएँ अब केवल आपराधिक गतिविधि भर नहीं रहीं, बल्कि वे राज्य की पशु-कल्याण नीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शासन-प्रणाली की गंभीर संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर कर रही हैं। कुनकुरी में पकड़ी गई हालिया घटना—जिसमें पिकअप वाहन में क्रूरतापूर्वक लदे मवेशियों में से एक बैल और दो गायों की दम घुटने से मृत्यु हो गई—इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि गौ-संरक्षण के दावे और जमीनी वास्तविकता के बीच गहरी खाई मौजूद है। यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक है कि जब सरकार गौ-तस्करी के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती है, तब बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर जैसे कृषि प्रधान जिलों से बड़ी संख्या में मवेशी बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के अंतरराज्यीय मार्गों तक कैसे पहुँच रहे हैं? स्पष्ट है कि यह समस्या केवल तस्करों की चतुराई का परिणाम नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की सीमाओं और प्रशासनिक समन्वय की कमी का द्योतक है। गौ-तस्करी का मूल कारण : आवारा मवेशी और अपर्याप्त गौशालाएँ छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खेतों में फसल नुकसान और मवेशियों की बढ़ती तादाद से किसान विवश होकर मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं। राज्य में उपलब्ध गौशालाओं की संख्या, उनकी क्षमता और संसाधन इस बढ़ते दबाव को संभालने में पूर्णतः अक्षम प्रतीत होते हैं। अनेक गौशालाएँ मात्र औपचारिकता बनकर रह गई हैं—जहाँ न पर्याप्त स्थान है, न चारा, न पशु चिकित्सा सुविधाएँ। इसी शून्य का लाभ गौ-तस्कर उठाते हैं। आवारा मवेशी उनके लिए कच्चा माल बन जाते हैं। नतीजतन, तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा न रहकर नीतिगत विफलता का रूप ले लेती है। कानून प्रवर्तन की सीमाएँ और जोखिम कुनकुरी की घटना में पुलिस की तत्परता सराहनीय है, किंतु यह भी ध्यान देने योग्य है कि कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मी घायल हुए और तस्कर अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गए। यह दर्शाता है कि गौ-तस्करी जैसे संगठित अपराधों से निपटने के लिए वर्तमान व्यवस्था न तो पर्याप्त संसाधनों से लैस है और न ही तकनीकी रूप से सुदृढ़। शासन की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भारतीय संविधान और पशु-कल्याण से जुड़े अधिनियम राज्य को यह दायित्व सौंपते हैं कि वह मूक पशुओं के संरक्षण और मानवीय व्यवहार को सुनिश्चित करे। गौमाता को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से सम्मान देने का दावा तभी सार्थक होगा, जब उसे सड़कों पर बेसहारा भटकने और तस्करों के वाहनों में दम तोड़ने से बचाया जा सके। आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेप समस्या का समाधान प्रतीकात्मक अभियानों से नहीं, बल्कि ठोस और दीर्घकालिक रणनीति से संभव है। इसके लिए— प्रत्येक विकासखंड में पर्याप्त क्षमता वाली, सुव्यवस्थित गौशालाओं की स्थापना आवारा मवेशियों का पंजीकरण और ट्रैकिंग प्रणाली अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थायी, तकनीक-आधारित निगरानी और गौ-तस्करी में संलिप्त पूरे नेटवर्क पर कठोर, उदाहरणात्मक कार्रवाई अनिवार्य है।   कुनकुरी की घटना एक चेतावनी है—यदि अब भी गौ-तस्करी को केवल पुलिसिया समस्या मानकर टाल दिया गया, तो यह संकट और गहराएगा। तीन गायों की मौत केवल एक समाचार नहीं, बल्कि यह उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है जो गौ-संरक्षण की बात तो करती है, पर उसके लिए आवश्यक ढाँचा खड़ा करने में अब तक विफल रही है। शासन को आत्ममंथन करना होगा, क्योंकि गौमाता की दुर्दशा अंततः राज्य की प्रशासनिक और नैतिक साख से जुड़ा प्रश्न है।