जशपुर,12 जनवरी 2025 – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मानवीय दृष्टि और त्वरित निर्णय क्षमता ने 32 साल पुराने एक पीड़ादायक प्रकरण को न्याय की राह दिखा दी। भालू के हमले में अपनी दोनों आंखें गंवाने वाले केंदपानी गांव के बाल बच्चन सिंह को आखिरकार मुआवजा राशि का चेक सौंपा गया। यह ऐतिहासिक क्षण मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय ने बगिया में आयोजित एक कार्यक्रम में भावुक वातावरण के बीच चेक प्रदान कर साकार किया।

1992 की त्रासदी और तीन दशक का संघर्ष
24 सितंबर 1992 की सुबह जब बाल बच्चन जंगल में नित्यकर्म के लिए गए थे, तभी एक भालू के प्राणघातक हमले ने उनकी जिंदगी अंधकारमय कर दी। दोनों आंखें गंवाने के बाद उनका जीवन आर्थिक तंगी और मानसिक पीड़ा से गुजरता रहा। परिवार ने पूरी हिम्मत के साथ उनका साथ दिया, लेकिन वन विभाग का मुआवजा देने का आश्वासन दशकों तक अधूरा रहा।
जब हर दरवाजा बंद हो गया, तब बाल बच्चन ने 25 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जनदर्शन कार्यक्रम में अपनी आपबीती सुनाई। मुख्यमंत्री ने इस दुखद प्रकरण पर गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल वन विभाग को मुआवजा राशि जारी करने का निर्देश दिया।
बाल बच्चन को मिले 2 लाख रुपये से उनकी उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं। उन्होंने कहा, “इस राशि से मैं अपनी बेटियों की पढ़ाई पूरी करूंगा और उनके विवाह में इसका उपयोग करूंगा। मुख्यमंत्री ने हमें नई रोशनी दी है।”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने न केवल एक पीड़ित परिवार की दशकों पुरानी पीड़ा को समझा, बल्कि अपनी त्वरित कार्रवाई से एक मिसाल कायम की। यह घटना उनकी जनसेवा, न्यायप्रियता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट परिचायक है।





















