
जशपुर,07 जनवरी 2025 – ईसा मसीह पर विवादित टिप्पणी के मामले में जशपुर की भाजपा विधायक रायमुनी भगत के खिलाफ न्यायालय ने अपराध दर्ज किया है। यह मामला अब केवल विधायक तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्ता की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट जशपुर ने यह आदेश ढेगनी निवासी हेरमोन कुजूर द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिया।
घटना और विवाद का पृष्ठभूमि:
1 सितंबर 2024 को ढेगनी गांव में भुईहर समाज के सामाजिक भवन के लोकार्पण समारोह के दौरान विधायक रायमुनी भगत ने अपने संबोधन में कथित तौर पर ईसा मसीह पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “अगर ईसा मसीह मरने के बाद जीवित हो सकते हैं तो मतांतरितों को कब्रिस्तान की जरूरत क्यों पड़ती है?” इस बयान को लेकर ईसाई समुदाय के लोगों ने इसे ईसा मसीह का अपमान बताते हुए विरोध किया और जिले के विभिन्न थाना और चौकी में शिकायतें दर्ज कराईं।
पुलिस की भूमिका पर सवाल:

न्यायालय का हस्तक्षेप:
पुलिस से निराश होकर, ढेगनी निवासी हेरमोन कुजूर ने 10 दिसंबर 2024 को जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया। परिवादी के अधिवक्ता विष्णु कुलदीप ने न्यायालय में छह प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कराए और घटना का वीडियो प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार चौहान ने विधायक रायमुनी भगत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 196, 299 और 302 के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया:
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सत्ता में रहते हुए भाजपा विधायक के विवादित बयान और पुलिस की भूमिका पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं। ईसाई समुदाय के नेताओं ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ सरकार ने जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश की। वहीं, न्यायालय के फैसले को लेकर समुदाय में संतोष देखा जा रहा है।
नोटिस जारी और अगली सुनवाई:
न्यायालय ने विधायक रायमुनी भगत को 10 जनवरी 2025 को अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली सुनवाई पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायिक प्रक्रिया क्या मोड़ लेती है?





















