देश में कट्टरता बढ़ी, पर ‘मानवतावादी कट्टरता’ की मिसाल बने यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर — दो मजदूरों की पीड़ा ने पुलिस अधिकारी को रुला दिया
रायपुर (छत्तीसगढ़ ) – समाज में कट्टरता अक्सर नकारात्मक रूप में देखी जाती है, लेकिन जब यही कट्टरता मानवता के प्रति समर्पण बन जाए तो वह समाज को रोशन करने का काम करती है। रायपुर में पदस्थ यातायात निरीक्षक विशाल कुजूर ऐसी ही ‘कट्टर मानवता’ की मिसाल बनकर सामने आए हैं। शनिवार की शाम उनके व्यवहार और एक भावुक घटना से यह स्पष्ट हो गया कि व्यवस्था संभालने वाले हाथ यदि संवेदनाओं से भरे हों तो किसी की कठिन यात्रा भी आसान बनाई जा सकती है।
दरअसल, इन्स्पेक्टर विशाल कुजूर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया। रोज की तरह जब वे अपने क्षेत्र में यातायात व्यवस्था देख रहे थे, तभी उनके मुंशी ने दो थके-हारे युवकों को देखकर संदेह जताया और उन्हें बातचीत के लिए बुलाया। बात करने पर पता चला कि दोनों युवक — प्रदीप और संतोष — उड़ीसा के सुंदरगढ़ जिले के एक अंदरूनी गांव से मछली पकड़ने के काम के लिए किसी एजेंट के माध्यम से गोवा ले जाए गए थे।
तीन महीने काम करने के बावजूद उन्हें तनख्वाह नहीं मिली। जब उन्होंने विरोध किया तो जहाज मालिक ने मारपीट कर उन्हें वहां से भगा दिया। भय के कारण ये दोनों गोवा पुलिस तक नहीं गए। जेब में 100 रुपये तक नहीं थे। किसी तरह ट्रेन के बाथरूम में छिपते-छिपाते वे नागपुर पहुँचे, और फिर वहाँ से पाँच दिनों तक पैदल चलकर रायपुर पहुँचे।
दोनों डरे हुए थे, टूटी-फूटी हिंदी बोल रहे थे, और पिछले 7 दिनों की भूख और मुश्किलें उनके चेहरों पर साफ दिख रही थीं। उनका आधार कार्ड, फोन और अन्य दस्तावेज गोवा में ही कंपनी के मालिक के पास बंधक पड़े थे। इनके घरवालों का मोबाइल भी कवरेज की कमी के कारण स्विच ऑफ मिला।

स्थिति जानकर विशाल कुजूर ने तुरंत भोजन कराया, कुछ आर्थिक मदद की और दोनों का झारसुगुड़ा तक का टिकट बनवाकर उन्हें ट्रेन में बैठाया। साथ ही अपना मोबाइल नंबर दिया और स्थानीय थाना में शिकायत करने के लिए कहा। दोनों युवकों ने इसकी हामी भरी।
लेकिन इन्स्पेक्टर विशाल को सबसे अधिक भावुक कर देने वाली बात तब सामने आई, जब उन्होंने पूछा कि 8 दिनों तक बिना पैसे के खाना कैसे खाया? दोनों ने सिर झुकाकर जवाब दिया—
“नागपुर से रायपुर तक रेलवे ट्रैक के किनारे गिरे पैकेट जमा करके खाते हुए आए हैं…”
इस जवाब ने अधिकारी का दिल दहला दिया।
उन्होंने लिखा—
“कल इन दो दोस्तों ने सचमुच रुला दिया… अब बस उनके कॉल का इंतज़ार है।”
कुजूर ने लोगों से अपील की है कि रास्ते में ऐसे किसी जरूरतमंद को देखें तो जरूर पूछें और मदद करें। उन्होंने यह भी याद किया कि कोरोना काल में जब वे कुनकुरी थाना प्रभारी थे, तब जशपुर और कुनकुरी के लोगों ने पैदल लौट रहे मजदूरों की जो मिसाल पेश की थी, वह आज भी यादगार है।
दिलचस्प संयोग यह कि 22 नवंबर 2025 को घटी यह घटना उसी तारीख की याद दिलाती है जब 2017 में — ठीक 22 नवंबर को — इन्स्पेक्टर विशाल की पोस्टिंग कुनकुरी थाना में हुई थी।

मानवता के प्रति ऐसी कट्टरता ही आज के समय में समाज को जोड़ने और लोगों के जीवन में आशा की लौ जलाने का काम करती है।





















