गिनाबहार में ईसाई उरांव समाज ने करम त्यौहार मनाया,आदिवासी परम्परा से पूजा सम्पन्न

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 जशपुर/कुनकुरी 13 अक्टूबर2024 – आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले में इन दिनों करम त्यौहार की धूम मची हुई है।गिनाबहार में निर्माणाधीन उरांव सामाजिक भवन के सामने कुनकुरी क्षेत्र के ईसाई उरांव जनजाति के लोगों ने पवित्र करम त्यौहार मनाया। उरांव समाज के एमेरियुस लकड़ा ने करम त्यौहार के बारे में बताया कि यह उरांव जनजाति के उन युवाओं के लिए खास त्यौहार है जो विवाह योग्य हो गए हैं।करम गाड़ने की विधि बताते हुए कहा कि पहले अखड़ा(नृत्य स्थल) की साफ-सफाई की जाती है,जिसे गोबर से लिपाई कर पूजा के लिए तैयार किया जाता है।इसके बाद उपवास किये हुए कुंवारे युवक-युवतियां जंगल जाते हैं और करम वृक्ष के नीचे इकट्ठा होकर हल्दी पानी छिड़ककर स्थल शुद्धिकरण किया जाता है।फिर कुंवारा युवक करम वृक्ष की डाल काटता है जिसे जमीन में गिरने से पहले ही कुंवारी युवतियां उसे अपने हाथों में ले लेती हैं।इसके बाद विधि-विधान से अखड़ा में करम डाल गाड़ा गया।इसके बाद करम पर्व से जुड़ी कथा कुँड़ुख़ भाषा ( उरांव जनजाति की भाषा) में कही गई। उन्होंने आगे बताया कि दिन भर उपवास रहते हुए करम राजा के चारों ओर नृत्य करते हैं।शाम को उपवास तोड़ने के बाद पाहन करम डाल को उखाड़ते हैं और फिर कुंवारी लड़कियां उन्हें लेकर पास के नदी-तालाब में ले जाकर विसर्जन किया गया। इस आयोजन में ईसाई आदिवासी महासभा के जिलाध्यक्ष वाल्टर कुजूर, उरांव समाज के शिक्षाविद डॉ. किशोर एक्का,अनिमानन्द,हेमंत, रॉबर्ट,दिलीप केरकेट्टा,अलमा सहित बड़ी संख्या में युवक-युवती,महिला-पुरुष शामिल होकर मांदर की थाप पर नृत्य करते दिखे।

*मीनाक्षी शेषाद्रि ने चक्रधर समारोह में शास्त्रीय नृत्य से मोहा मन, 30 साल बाद भारत में किया यादगार प्रदर्शन*

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  *रायगढ़ 12 सितंबर 2024 – चक्रधर समारोह की बीती रात बेहद खास रही, जब दिग्गज अभिनेत्री और नृत्यांगना मीनाक्षी शेषाद्रि ने 30 साल बाद भारत में अपने पहले शास्त्रीय नृत्य प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रायगढ़ में आयोजित इस प्रतिष्ठित सांस्कृतिक समारोह के मंच पर मीनाक्षी ने भरतनाट्यम और ओडिशी की जादुई प्रस्तुति दी, जिसने सभी का दिल जीत लिया।  नृत्य से की भगवान गणेश की स्तुति अपने प्रदर्शन की शुरुआत मीनाक्षी ने भगवान गणेश की स्तुति, गणेश वंदना के साथ की। उनका हर भाव, हर मुद्रा और ताल से ताल मिलाता कदम दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराई और सुंदरता में खोने पर मजबूर कर रहा था। लंबे समय तक भारतीय मंच से दूर रहने के बावजूद मीनाक्षी का प्रदर्शन पूरी तरह से लाजवाब था। हर बार जब उन्होंने मंच पर अपनी कला दिखाई, पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी।  30 साल बाद वापसी से चौंकाया मीनाक्षी शेषाद्रि ने 30 साल पहले भारतीय फिल्म और नृत्य जगत को अलविदा कह दिया था, और उसके बाद अमेरिका में अपने परिवार के साथ बस गई थीं। हालांकि, उन्होंने कभी भी नृत्य को खुद से दूर नहीं होने दिया। अमेरिका में भी उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा दी और इसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया। चक्रधर समारोह में उनकी वापसी के बारे में किसी ने यह नहीं सोचा था कि इतने सालों के बाद भी वह अपनी कला में उतनी ही प्रवीण होंगी। लेकिन मीनाक्षी ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया और यह साबित किया कि कला और कलाकार कभी पुराने नहीं होते। रायगढ़ के चक्रधर समारोह में मीनाक्षी के प्रदर्शन को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। हर उम्र के दर्शकों ने उनके नृत्य को बेहद सराहा।जशपुर से पहुंचे दर्शक दिलीप राम ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक पल था। मीनाक्षी शेषाद्रि को इतने सालों बाद लाइव देखना और उनका नृत्य देखना एक अविस्मरणीय अनुभव था।”  मीनाक्षी का संदेश प्रदर्शन के बाद मीनाक्षी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भारत में 30 साल बाद नृत्य करना मेरे लिए बेहद खास है। रायगढ़ के दर्शकों का जो प्यार और समर्थन मिला, उससे मैं अभिभूत हूं। मैं हमेशा से भारतीय शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी रही हूं और आगे भी इसे बढ़ावा देने का प्रयास करती रहूंगी।”उन्होंने कोलकाता में हुए दुष्कर्म की घटना पर अपनी फिल्म दामिनी को याद करते हुए कहा कि “हम कब इंसान बनेंगे?हिंसा और अपराध इंसान की कमजोरी है।”उन्होंने फिल्मी दुनिया मे वापसी करने के सवाल पर कहा कि “अभी इंतजार कीजिये।” इस साल के चक्रधर समारोह में मीनाक्षी शेषाद्रि की प्रस्तुति निस्संदेह मुख्य आकर्षण रही। उनके नृत्य ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया, और उनके प्रदर्शन को समारोह के इतिहास में एक यादगार पल के रूप में दर्ज किया जाएगा। 60 वर्षीया मीनाक्षी शेषाद्रि की इस शानदार वापसी ने एक बार फिर से साबित किया कि कला की कोई उम्र नहीं होती, और एक सच्चा कलाकार हर समय अपने दर्शकों का दिल जीत सकता है।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से कंवर समाज के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य मुलाकात* *करमा महोत्सव का आमंत्रण दिया*

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  रायपुर, 10 सितंबर 2024/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के यहां उनके निवास कार्यालय में कंवर समाज के प्रतिनिधि मंडल ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज के अध्यक्ष श्री हरवंश सिँह मिरी के नेतृत्व में सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय को युवा कंवर समाज द्वारा आयोजित होने वाले *करमा महोत्सव के कार्यक्रम* में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधि मंडल को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कंवर समाज के महासचिव श्री नकुल चंद्रवंशी, श्री टूकेश कंवर भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के साथ उत्तर बस्तर कांकेर जिले के चारामा विकासखंड के जेपरा सहित विभिन्न गांवों में विकास कार्यों से संबंधित विषयों पर विचार विमर्श किया।

*मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने बगिया में मनाया तीज पर्व , पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की ईश्वर से कामना की*

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जशपुर 7 सितंबर 24/ तीजा पर्व बगिया में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने शिव पार्वती माता की विधि विधान से पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की ईश्वर कामना की । बगिया में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मिलकर तीज पर्व का उत्साह मनाया. तीज़ पर्व, विशेषकर महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पर्व खासकर महिलाओं के लिए समर्पित है और इसे विभिन्न नामों से मनाया जाता है, जैसे कि हरितालिका तीज, कजरी तीज, और हरितालिका तीज। इस पर्व का महत्व महिलाएं इस दिन विशेष पूजा और व्रत करती हैं। वे अपनी पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व तीज़ पर्व के दौरान महिलाएं परंपरागत परिधान पहनती हैं, झूला झूलती हैं, गाती हैं और नाचती हैं। यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने का एक तरीका है। पर्व विशेष रूप से शिव और पार्वती के पूजा का अवसर होता है। इसके माध्यम से महिलाएं धार्मिक आस्था को प्रकट करती हैं और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। महिलाएं एक साथ मिलकर त्योहार मनाती हैं, जो सामाजिक – परिवारिक संबंधों को मजबूत करने में मदद करता है। महिलाओं के तीज़ पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी रखता है।

*तीजा महिलाओं के संकल्प शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक त्यौहार: कौशल्या साय,भाजपा महिला मोर्चा का जिला स्तरीय तीजा महोत्सव संपन्न*

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जशपुर: तीजा सुहागिन महिलाओं का त्यौहार है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रख कर अपने पति और संतान की दीर्घायु की कामना करती है। यह पवित्र त्यौहर भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों का प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय ने उक्त बातें कही। वे शहर के वशिष्ट कम्युनिटी हाल में भाजपा महिला मोर्चा द्वारा आयोजित जिला स्तरीय तीजा महोत्सव को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थी। उन्होनें कहा कि भारत धर्म,संस्कृति और त्यौहारों का देश है। यहां हम सब मिल कर त्यौहार मनाते हैं। त्यौहार का अवसर खुशियां बिखरने का होता है। इससे समाज में उत्साह का संचार होता है। कौशल्या साय ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नेतृत्व वाली भाजपा सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सांसद राधे श्याम राठिया ने कहा कि तीजा पर्व छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। इसे माता और बहने अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना के साथ मनाती है। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुनिल गुप्ता ने कहा कि तीाज का पर्व घर से लेकर समाज तक हर्षोल्लास बिखेरता है। कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष शांति भगत एवं महिला मोर्चा अध्यक्ष ममता कश्यप ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला पंचायत उपाध्यक्ष उपेन्द्र यादव, शहर मण्डल अध्यक्ष संतोष सिंह, डीडीसी राना बरला,अनिता सिंह,पूर्व जनपद अध्यक्ष कमला निराला,अंजू टोप्पो,रेणु विश्वास,गुड़िया यादव,भारती शर्मा,मीना चौहान,सावित्री सिंह,नीतू गुप्ता,सावित्री निकुंज,सुजाता भगत,मुन्नी गुप्ता,प्रतिमा भगत सहित महिला मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीजा के अवसर पर दी बड़ी सौगात, 70 लाख महिलाओं को मिली महतारी वंदन योजना की सातवीं किश्त*

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  **रायपुर, 02 सितंबर 2024:** मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीजा के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की 70 लाख महिलाओं को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित तीजा-पोरा महतारी वंदन तिहार के दौरान, श्री साय ने महतारी वंदन योजना की सातवीं किस्त के रूप में प्रत्येक लाभार्थी महिला के खाते में 1,000 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से अंतरित किए। इस अवसर पर प्रदेश की महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने अपने “विष्णु भैया” का आभार व्यक्त किया। महतारी वंदन योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार करना है। योजना के तहत विवाहित, विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को, जिनकी उम्र 21 वर्ष से अधिक है, हर महीने 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना का शुभारंभ 10 मार्च 2024 को किया था। तब से अब तक योजना की सात किश्तें लाभार्थी महिलाओं के खातों में जमा की जा चुकी हैं। **तीजा-पोरा तिहार का महत्व:** तीजा और पोरा, छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्यौहार हैं, जो विशेष रूप से महिलाओं द्वारा धूमधाम से मनाए जाते हैं। तीजा, जिसे हरतालिका तीज भी कहा जाता है, विशेषकर विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। यह त्यौहार महिलाओं की भक्ति, श्रद्धा, और उनकी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पोरा त्यौहार, कृषि कार्यों की समाप्ति के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन लोग मिट्टी के बैल बनाकर उनका पूजन करते हैं, जो कृषि की समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। महिलाएं इस दिन विशेष पूजा अर्चना करती हैं और खेतों में हल चलाने का प्रतीकात्मक अनुष्ठान करती हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा तीजा-पोरा के मौके पर महतारी वंदन योजना की सातवीं किस्त का वितरण, महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें समाज में एक मजबूत भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

*श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की मची धूम, महाकुल समाज की अनूठी परंपरा, नगर भ्रमण के साथ खेला गया दही कादो……….*

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  दोकड़ा/जशपुर – श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दूसरे दिन मंगलवार को भी जिले में जन्माष्टमी महोत्सव की धूम मची हुई थी।जिले भर में अनेक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन कर बड़ी उत्साह के साथ धूम धाम से मनाया गया। महाकुल समाज द्वारा अनेक स्थानों पर विशेष रूप से श्री कृष्ण जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया है। ग्राम गरीयादोहर में महाकूल समाज के लोगों द्वारा श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है,भजन कीर्तन के साथ भक्ति भाव में लोग जुट गए थे।यहां आजादी के पूर्व से ही श्री कृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाया जाता रहा है,समाज के लोग एकजुट होकर पारंपरिक तौर पर मनाते हैं। रात भर श्री कृष्ण जी के भक्ति में डूबे रहते हैं।रात 12 बजे श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ ,इसके बाद झूला झूलाने एवं माखन मिश्री खिलाने का दौर शुरू हो गया। इसके पश्चात मंगलवार की सुबह से नगर भ्रमण कर सभी घरों में श्री कृष्ण जी का आगमन हुआ,सभी घरों में भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हुए माखन मिश्री का भोग लगाकर गांव की सुख समृद्धि की मनोकामना की।महाप्रसाद वितरण पश्चात कार्यक्रम का समापन किया जाएगा।

**देवघर: सावन पूर्णिमा पर रक्षाबंधन और श्रावणी मेला का अंतिम दिन, भक्तों ने बाबा बैजनाथ धाम में अर्पित किया जल**

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देवघर, झारखंड – सावन पूर्णिमा के अवसर पर आज रक्षाबंधन और श्रावणी मेला का अंतिम दिन भी एक साथ आया, जिससे भक्तों के बीच धार्मिक उत्साह और भी बढ़ गया। आज देवघर के प्रसिद्ध बैजनाथ धाम मंदिर में पांचवीं और अंतिम सोमवारी के दिन, सुबह से ही जल अर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा के अनुसार, तीर्थ पुरोहितों ने सरकारी पूजा के बाद बाबा भोलेनाथ के शिवलिंग पर रक्षा सूत्र अर्पित किया। इसके पश्चात आम श्रद्धालुओं के लिए जल अर्पण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस बार सावन मास में पांच सोमवारी का अद्वितीय संयोग बना, जिसे धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान पांचवीं सोमवारी के दिन शंख की उत्पत्ति हुई थी, जो शिव भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करता है। इस बार सावन में चंद्र और सूर्य मास के अनुसार पांच सोमवारी का संयोग भी मिला, जो बेहद दुर्लभ होता है। आज बाबा बैजनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, क्योंकि रक्षाबंधन के पर्व के कारण अधिकांश श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के लिए नहीं पहुंच सके। हालांकि, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ शिव भक्तों को जल अर्पण कराया जा रहा है। कल से भादो मेला की शुरुआत भी हो जाएगी। लंबोदर पंडा बाबा ने इसे बहुत बड़ा संयोग बताते हुए कहा कि यह धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार करेगा। श्रावणी मेला के समापन के साथ ही देवघर में शिव भक्तों की आस्था और श्रद्धा का यह पर्व समाप्त हो रहा है, लेकिन भादो मेला की शुरुआत के साथ ही बाबा बैजनाथ धाम में भक्तों की भक्ति का सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गांव बगिया में शिव भक्ति की बही बयार,तीन दिनों तक हुआ शिव महापुराण का वाचन

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और,,, जशपुर –  बगिया के श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय 51 हजार पार्थिव शिवलिंग, रुद्राभिषेक हवन पूजन के साथ समापन हुआ।इस मौके पर शिव महापुराण की कथा का भी शुक्रवार को विशाल भंडारा के साथ संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय की उपस्थिति में सैकड़ों श्रद्वालुओं ने 51 हजार पार्थिव शिवलिंग बना कर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चन कर,शिव महापुराण की कथा का श्रवण किया। उल्लेखनिय है कि बगिया के श्रीफलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में शिव कथा महापुराण एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण पूजन का आयोजन हर साल किया जाता है। इस साल यह आयोजन बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ था। बीते तीन दिनों से सुप्रसिद्व कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री की कथा सुनने के लिए श्रद्वालु यहां जुट रहे थे। आयोजन के अंतिम दिन पंडित राधेश्याम मिश्रा,गगन शर्मा,केयूर भूषण तिवारी,आजाद शर्मा,नवीन शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि विधान से भगवान महादेव की पूजा संपन्न कराया। कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी शास्त्री ने श्रद्वालुओं को कथा सुनाते हुए कहा कि पार्थिव शिव लिंग की पूजा कभी खाली नहीं जाती। भगवान महादेव श्रद्वालुओं की मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। उन्होनें कहा कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दिखावा नहीं,श्रद्वा की जरूरत होती है। हवन और पूजन के बाद विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। यहां हजारों श्रद्वालुओं ने भगवान महादेव की प्रसाद ग्रहण किया। शिव महापुराण की कथा का सफलता पूर्वक आयोजन संपन्न होने पर कौशल्या साय ने आयोजन में सहयोग देने वाले कार्यकर्ताओं और श्रद्वालुओं का आभार जताया है।

*उत्कल ब्राह्मण महिला मंडल ने मनाया भव्य सावन मिलन समारोह* *नई पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों के बारे में मिली जानकारी*

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**जशपुर/कुनकुरी, 3 अगस्त 2023** – उत्कल ब्राह्मण महिला मंडल द्वारा शनिवार को आयोजित सावन मिलन समारोह एक भव्य और हर्षोल्लासपूर्ण आयोजन के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर समाज की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए और इस आयोजन को विशेष बना दिया। समारोह की शुरुआत समाज की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई। महिलाओं ने सावन के गीतों और पारंपरिक नृत्यों से सबका मन मोह लिया। इस अवसर पर ‘मां के नाम एक पेड़ लगाने’ का संकल्प लेते हुए सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और ‘प्लास्टिक मुक्त कुनकुरी’ का संकल्प भी लिया। समाज की वरिष्ठ महिलाओं को विशेष सम्मान देते हुए उन्हें श्रीफल और सुहाग सामग्री भेंट की गई, साथ ही उनसे सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद लिया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ महिलाओं के अनुभवों और समाज के प्रति उनके योगदान को भी याद किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की उत्साही भागीदारी से आयोजन में नई ऊर्जा का संचार हुआ। सावन मिलन समारोह ने न केवल समाज को एकजुट किया बल्कि हिंदू संस्कृति और परंपराओं को भी सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस भव्य आयोजन ने समाज के बीच भाईचारे और एकजुटता को मजबूत किया और आने वाले समय में समाज सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के संकल्प को दोहराया। समारोह की सफलता के लिए सभी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का सराहनीय योगदान रहा। यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करता है। ऐसे आयोजनों से समाज में एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होती है और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का सुअवसर मिलता है।