*बड़ी खबर* *धान खरीदी: किसानों के हित में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर अतिरिक्त दो दिवस धान खरीदी की व्यवस्था*

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*धान खरीदी: किसानों के हित में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर अतिरिक्त दो दिवस धान खरीदी की व्यवस्था* रायपुर 3 फरवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेश में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए धान खरीदी की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है। इसके अंतर्गत तीन श्रेणियों के किसानों को धान विक्रय हेतु अतिरिक्त दो दिवस – 05 एवं 06 फरवरी 2026 तक खरीदी की अनुमति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार तीन प्रकार के किसान इस अतिरिक्त अवधि में धान विक्रय कर सकेंगे— ऐसे किसान, जिनके द्वारा 10 जनवरी 2026 के पश्चात टोकन हेतु आवेदन किया गया, किंतु सत्यापन नहीं हो पाया है। ऐसे किसान, जिनके द्वारा 10 जनवरी 2026 के पश्चात आवेदन किया गया तथा सत्यापन उपरांत उनके पास धान पाया गया है। ऐसे किसान, जिन्हें दिनांक 28 जनवरी 2026, 29 जनवरी 2026 एवं 30 जनवरी 2026 को टोकन प्राप्त हुआ था, परंतु किसी कारणवश वे निर्धारित तिथि पर धान विक्रय नहीं कर पाए थे। किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए बारदाना एवं हमालों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। राज्य सरकार का यह निर्णय किसानों के प्रति संवेदनशीलता और उनकी उपज के सुरक्षित एवं सुचारु विक्रय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष

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बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष   जशपुर : अखिल भारतीय आदिवासी कंवर समाज विकास समिति का तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन केंद्रीय कार्यालय पमशाला, जिला जशपुर में भव्य व गरिमामय वातावरण में संपन्न हो रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन सर्वसम्मति से राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिसमें श्रीमती कौशल्या विष्णुदेव साय को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। उल्लेखनीय है कि श्रीमती कौशल्या साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी हैं और समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी भूमिका लंबे समय से सक्रिय, समर्पित और प्रभावशाली रही है। सम्मेलन में मंगरु साय पैंकरा को राष्ट्रीय महासचिव, अनंत राम पाकरगांव को न्याय समिति अध्यक्ष, श्रीमती शांता साय (लैलूंगा) को राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष तथा हरिशंकर साय (मधुबन) को राष्ट्रीय युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष चुना गया। इस अवसर पर समाज उत्थान, शिक्षा, संगठन विस्तार और जनकल्याण के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही समाज और जनसेवा को मजबूत करने के उद्देश्य से “ मिलनसार समाज एवं जनसेवा दौरा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत नवचयनित पदाधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाजजनों से सीधा संवाद करेंगे। नवचयनित पदाधिकारियों को पूर्व पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बधाई देते हुए विश्वास जताया कि श्रीमती कौशल्या साय के नेतृत्व में कंवर समाज को नई दिशा, संगठनात्मक मजबूती और जनसेवा को व्यापक विस्तार मिलेगा।

देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान!प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान! जशपुर से बड़ी खबर जशपुर जिले में धान खरीदी के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर किसानों का धान खरीदी केंद्र से राइस मिल जाता है, लेकिन जशपुर में मामला बिल्कुल उल्टा निकला — राइस मिल से धान निकालकर सीधे खरीदी केंद्र ले जाने की कोशिश पकड़ी गई है। ताजा मामला कांसाबेल विकासखंड का है। यहां बगिया स्थित वेदांश राइस मिल से अवैध रूप से धान निकालकर उसे चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। 🚜 दो ट्रैक्टर पकड़े गए, 100 क्विंटल धान जब्त कार्रवाई के दौरान राइस मिल से निकलकर धान खरीदी केंद्र की ओर जा रहे दो ट्रैक्टरों को रोका गया। ट्रैक्टरों में करीब 100 क्विंटल धान लोड था। ट्रैक्टर चालकों मानेश्वर सिदार और यमन बेहरा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि धान राइस मिल से चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। यह कार्रवाई राइस मिल के पास ही, खरीदी केंद्र के रास्ते में की गई। फिलहाल दोनों ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए हैं और दस्तावेजों की जांच जारी है। ❓ पुराने धान को नया बताकर खपाने की आशंका प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक आशंका है कि राइस मिल में रखा पुराना धान नए धान के रूप में खरीदी केंद्र में खपाने की कोशिश की जा रही थी। अगर ऐसा साबित होता है, तो यह सीधे-सीधे सरकारी खरीदी प्रणाली से बड़ा खेल माना जाएगा। 🔍 और भी जगहों से मिल रही शिकायतें धान मंडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सिंगीबहार क्षेत्र की एक राइस मिल से भी आसपास की मंडियों में इसी तरह धान भेजे जाने की चर्चा है।हमारी पड़ताल जारी है। इतना ही नहीं, गड़बड़ी पकड़ने के लिए उपरकछार बेरियर पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की दिशा भी संदिग्ध बताई जा रही है। कैमरा सड़क की बजाय पुलिस चौकी को कवर कर रहा है। जानकारों का दावा है कि जिला प्रशासन राइस मिलों के सीसीटीवी कैमरे में धान लद रहे विजुअल और धान खरीदी में लगे सीसीटीवी कैमरे से धान उतरते विजुअल की मिलान करे तो बिचौलिए और राइस मिलर बेपर्दा हो जाएंगे। आज दोपहर करीब 2 बजे बेरियर पर कोई भी अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे ग्रामीणों के आरोपों को और बल मिलता है। 🏛️ संरक्षण का आरोप, बड़ा खेल होने की चर्चा ग्रामीणों और मंडी सूत्रों का दावा है कि यह खेल छोटे स्तर का नहीं, बल्कि बड़े संरक्षण में चल रहा है। चर्चा है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण राइस मिलरों को मिल रहा है। ⚠️ प्रशासन सख्त, बड़ी कार्रवाई के संकेत अधिकारियों का कहना है कि धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के बाद राइस मिल संचालक पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। 👉 जशपुर में धान खरीदी को लेकर उठे ये सवाल अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव की कृपा से किसान को मिला पट्टा,फिर भी नहीं बेच पा रहा धान,,,सुशासन पर बड़ा सवाल

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पटवारी–पोर्टल की जुगलबंदी में पिसता किसान: बी-1 खसरा गड़बड़ी से धान अटका, मुख्यमंत्री के गृहजिले में सुशासन पर उठा बड़ा सवाल जशपुर,13/012026 – जिले के कांसाबेल तहसील का एक किसान बी वन में दर्ज आधिकारिक खसरे नम्बर के कारण न तो सरकार को धान बेच पा रहा है, न सोलर पैनल लगवा पा रहा है,न ही अपनी खेती को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन ले पा रहा है। दरअसल,तिलंगा गांव का किसान दिलबंधु तिर्की को पिता की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच जमीन बंटवारे के बाद पट्टा नहीं मिल रहा था।जिसको लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपनी तकलीफ बताई। मुख्यमंत्री कार्यालय बगिया के त्वरित सक्रियता से पटवारी ने किसान का पट्टा बनाकर दे दिया। अब परेशानी तब खड़ी हो गई जब दिलबंधन तिर्की अपनी खेती का धान बेचने के लिए पंजीयन कराने सहकारी समिति गया।जहां देखा गया की पट्टे में दर्ज खसरा नंबर सरकार के भू रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग है। दरअसल, वर्ष 2022–23 की बंटवारा सूची में खाता विभाजन पूरी तरह वैधानिक रूप से हुआ था। बंटवारे के आधार पर दर्ज खसरा नंबर हैं— 666/6, 666/9, 666/1 ठ, 666/13, 666/15, 666/20, 672/7, 666/5, 666/8, 666/11, 666/1 ण, 666/17, 666/19, 672/1उ। इन खसरा नंबरों के आधार पर बंटवारा सूची पूरी तरह सही है। यही नहीं, इसी आधार पर ऋण पुस्तिका भी विधिवत जारी की गई, जिसे 23 जून 2025 को पटवारी द्वारा प्रदान किया गया था। लेकिन समस्या तब सामने आई जब किसान ने ऑनलाइन बी-1 रिकॉर्ड निकाला। बी-1 में खसरा नंबर 666/2, 666/12, 666/16, 666/21, 666/5, 666/17 दर्ज मिले, जो न तो बंटवारा सूची से मेल खाते हैं और न ही ऋण पुस्तिका से। इसी तकनीकी विसंगति के कारण सहकारी समिति ने किसान का धान पंजीयन करने से इंकार कर दिया। नतीजतन, किसान का धान आज भी घर में रखा हुआ है। इस संबंध में जब किसान पटवारी के पास गया तो पटवारी ने साफ कह दिया कि खसरा नंबर पट्टे वाले ही पोर्टल पर चढ़ाया लेकिन नहीं लिया।अब खसरा नंबर चेंज नहीं हो सकता।पटवारी की दो टूक बातें सुनकर किसान हताश हो गया और उसका पंजीयन नहीं होने से धान घर में रखा हुआ है।   इस संबंध में जब हमने हल्का पटवारी विक्की गुप्ता से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि दिलबंधन तिर्की के साथ ही उसके दो भाइयों का भी खसरा नंबर पोर्टल में बदल गया है। ऐसा कइयों का हुआ है।जो खसरा नंबर बी वन में दिख रहा है, वही मान्य है।किसान सीमांकन करा सकता है लेकिन किसान इस बात को समझ नहीं पा रहा है। वहीं पीड़ित किसान ने बताया कि पटवारी के मनमानी से तंग आकर नायब तहसीलदार कांसाबेल के न्यायालय में खसरा नंबर को ठीक करने के लिए आवेदन दिया गया है।जो बी वन में खसरा नंबर है,वह मेरे भाइयों की जमीन है।ऐसे में भविष्य में विवाद पैदा हो सकता है।किसान ने पटवारी पर तहसीलदार के आदेश नहीं मानने और किसान का धान नहीं बिकने पर हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।   बहरहाल,यह बड़ा सवाल है कि ऐसे में विष्णु का सुशासन कैसे सफल होगा कि एक किसान सरकारी सिस्टम के कारण अपना धान नहीं बेच पा रहा है? यह स्थापित लोकल्याणकारी राज्य में शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राही को पहुंचा कर देना है न कि उसे दफ्तरों के चक्कर लगवाने हैं। अब देखना है कि मुख्यमंत्री के गृहजिले में ऐसे किसानों को न्याय कब तक मिलेगा या कागजी घोड़े दौड़ते रहेंगे।

भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी

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भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी सार – जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। रायगढ़,09 जनवरी,2025 रायगढ़ जिले में ग्राम बंगुरसिया के धान खरीदी केंद्र में इन दिनों एक अनोखा लेकिन बेहद चिंताजनक दृश्य देखने को मिल रहा है। लगातार 15 से 20 दिनों से हर रात जंगली हाथियों का झुंड धान मंडी तक पहुंच रहा है और वहां से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर ले जा रहा है। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जंगलों में बदलती स्थिति और भूखे वन्यजीवों की मजबूरी की तस्वीर है। रात होते ही जुटती है ग्रामीणों की भीड़ जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि हाथी अब तक किसी तरह की तोड़फोड़ या आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं। वन विभाग सतर्क, हाथी मित्र दल तैनात वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाथी मित्र दल की टीम मौके पर तैनात है, जो हाथियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही है और उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास कर रही है। हालांकि, हाथियों का बार-बार लौट आना यह संकेत देता है कि जंगलों में उनके लिए पर्याप्त भोजन नहीं बचा है। तस्वीरें बता रही हैं जंगल की सच्चाई हाथियों के ये वीडियो और तस्वीरें साफ संदेश दे रही हैं कि जंगल भले ही हाथियों का प्राकृतिक घर हों, लेकिन वहां भोजन का संकट गहराता जा रहा है। जंगलों में घटता प्राकृतिक आहार, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और विकास गतिविधियां हाथियों को इंसानी इलाकों की ओर खींच रही हैं। गणेश के स्वरूप गजराज संकट में भारत में हाथी को भगवान गणेश के रूप में पूजा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यही पूजनीय जीव आज अपने अस्तित्व और भोजन के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जंगल में इंसानों की बढ़ती दखलअंदाजी और हाथियों की भोजन तलाश में बस्तियों तक पहुंच है। सिर्फ नुकसान की नहीं, चेतावनी की खबर बंगुरसिया की धान मंडी में उठती धान की बोरियां केवल सरकारी नुकसान की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि यह भविष्य के बड़े टकराव की चेतावनी भी हैं। यदि जंगलों में हाथियों के लिए भोजन और सुरक्षित रास्ते नहीं बनाए गए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। स्थायी समाधान जरूरी वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाना,हाथी कॉरिडोर का संरक्षण,और मानव बस्तियों से हाथियों की सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यह खबर हाथियों की नहीं, हमारी जिम्मेदारी की कहानी भी है।

युवती ने शादी से मना किया तो प्रेमी फंदे पर झूल गया,प्रेमी के भाई ने लगाए गंभीर आरोप

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कुनकुरी में युवक ने लगाई फांसी, प्रेम संबंध को लेकर प्रताड़ना का आरोप कुनकुरी,09 जनवरी 2026 – कुनकुरी थाना क्षेत्र के ठेठेटांगर में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे एक 20 वर्षीय युवक ने अपने ही घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दिलेश्वर यादव के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही कुनकुरी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि दिलेश्वर यादव का पड़ोस के गांव की एक सजातीय युवती से प्रेम संबंध था और वह उससे विवाह करना चाहता था। परिजनों के अनुसार इस रिश्ते से युवती के पिता और चाचा नाराज थे और उन्होंने दिलेश्वर को जान से मारने की धमकी देते हुए युवती से दूर रहने के लिए बार-बार आमने-सामने और फोन पर दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर दिलेश्वर ने यह कदम उठाया। परिजनों ने यह भी दावा किया कि दिलेश्वर यादव ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उसने युवती का नाम लेते हुए अपनी मौत का कारण प्रेम और विवाह को लेकर हुए कथित धोखे को बताया है। वहीं कुनकुरी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दिलेश्वर यादव ने अपने घर के म्यार (छज्जे/अंदरूनी हिस्से) में फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस का कहना है कि मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की जा रही है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस संभवतः सोशल मीडिया पोस्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच करेगी।

मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन”

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मुख्यमंत्री के जिले में धान खरीदी पर घमासान, 9 जनवरी को 46 केंद्रों में कांग्रेस का जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जशपुर,08/01/2026 मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नमी, कटौती, अवैध वसूली और बिचौलियों के जरिए धान खरीदी के आरोपों को लेकर जशपुर जिला कांग्रेस कमेटी ने 9 जनवरी शुक्रवार को जिले-व्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस के अनुसार जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में एक साथ सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह जिला-व्यापी “धान खरीदी किसान न्याय आंदोलन” जिला कांग्रेस अध्यक्ष यूडी मिंज के नेतृत्व में होगा। कार्यक्रम के वरिष्ठ मार्गदर्शक प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस प्रभारी भानु प्रताप सिंह होंगे, जो आंदोलन को संगठनात्मक और रणनीतिक दिशा देंगे। कांग्रेस ने आंदोलन के लिए संयोजक और सह-संयोजक भी तय किए हैं। पूर्व विधायक विनय भगत को मुख्य संयोजक बनाते हुए जशपुर जिला एवं जशपुर विधानसभा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव को कुनकुरी विधानसभा का सह-संयोजक बनाया गया है। वहीं पत्थलगांव विधानसभा में प्रदेश महासचिव एवं जिला पंचायत सदस्य आरती सिंह को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। युवा कांग्रेस प्रभारी रवि शर्मा, महिला कांग्रेस प्रभारी रत्ना पैकरा, सेवा दल एवं सभी प्रकोष्ठों को भी आंदोलन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि जिले के सभी 46 धान खरीदी केंद्रों में पार्टी की ओर से प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, जो ब्लॉक अध्यक्षों और ब्लॉक प्रभारियों के साथ मिलकर आंदोलन को सफल बनाएंगे और किसानों के साथ खड़े रहेंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के जिले में ही किसानों के साथ खुलेआम लूट हो रही है। धान खरीदी केंद्रों में नमी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित 40.680 किलोग्राम (बारदाना सहित) के मानक की अनदेखी कर अधिक तौल की जा रही है। कई केंद्रों पर बिचौलियों के माध्यम से धान खरीदी होने से किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। विरोध करने पर किसानों से दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री महेश त्रिपाठी ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को इन गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस ने मांग की है कि धान की तौल निर्धारित 40.680 किलोग्राम के मानक के अनुसार की जाए, बिचौलियों के जरिए खरीदी पर तत्काल रोक लगे और राइस मिलों को विशेष निगरानी में रखा जाए, जहां से पिक-अप के माध्यम से धान मंडी आने की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही किसानों से दुर्व्यवहार करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा नमी के नाम पर होने वाली अवैध वसूली पूरी तरह बंद की जाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी का धरना-प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि अन्नदाता के साथ हो रहे अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसान न्याय की यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी।

*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….*

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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में स्वास्थ्य क्रांति, दो वर्षों में बदली जिले की तस्वीर, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मिली बड़ी सौगात….* जशपुर, 19 दिसंबर 2025/मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में जशपुर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं ने ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बना है। कभी सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझने वाला यह जिला आज आधुनिक चिकित्सा ढांचे, सुदृढ़ आपात सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रदेश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जशपुर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां दूरस्थ अंचलों के लोगों को सामान्य उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब जिले में ही उच्च स्तरीय उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। डायलिसिस जैसी जटिल सेवाएं, जो कभी कल्पना से परे थीं, अब जिलेवासियों के लिए सुलभ होती जा रही हैं। *दो वर्षो में मिली स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिलीं जिले को कई ऐतिहासिक सौगातें* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए वित्त विभाग से 359 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलना जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इसके साथ ही 220 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपये की मंजूरी ने जिले में उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था की नींव रख दी है।अखिल भारतीय कल्याण आश्रम परिसर में 35 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सालय का निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है, जो भविष्य में जशपुर को एक प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। वहीं नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 8.78 करोड़ रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिससे जिले को प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। *मातृ-शिशु स्वास्थ्य को मिली प्राथमिकता* मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए कुनकुरी में 50 बिस्तरों वाले मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण 8.77 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त जिले में 14 करोड़ रुपये की लागत से फिजियोथेरेपी महाविद्यालय तथा कुनकुरी में 2 करोड़ 62 लाख रुपये से नेचुरोपैथी भवन निर्माण की स्वीकृति ने स्वास्थ्य सेवाओं को बहुआयामी बनाया है।वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले के फरसाबहार मुख्यालय में बहुत जल्द सत्य साईं मातृत्व शिशु चिकित्सालय की स्थापना होगी जो जिले वासियों के साथ पड़ोसी राज्यों को भी इसकी सुविधाएं मुहैया होगी। यह नागलोग क्षेत्र वासियों के लिए बड़ी सौगात है।अब स्वास्थय के क्षेत्र में लोगों के लिए यह वरदान साबित होगी। *जिले में आपातकालीन सेवाओं को मिली नई गति* मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिले में आपात चिकित्सा सेवाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य आपात स्थितियों में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जिले को 10 नई 108 संजीवनी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। अब जिले में कुल 24 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस जीवनरक्षक सेवा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा 102 महतारी एक्सप्रेस की 18 एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कर रही हैं। प्रत्येक विकासखंड में शव वाहन की उपलब्धता ने कठिन समय में ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत दी है। *नए स्वास्थ्य केंद्रों की सौगात से ग्रामीण क्षेत्रों को मिला संबल* जिले के स्वास्थ्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए कोतबा में 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही जिले के फरसाबहार तहसील के पेटामारा (अंकिरा) एवं गांझियाडीह, दुलदुला तहसील के करडेगा एवं सीरिमकेला तथा कुनकुरी तहसील के केराडीह में 5 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना को मंजूरी मिली है,जो ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ जाएगी। आज जशपुर स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में किए गए ये ऐतिहासिक प्रयास जिले को एक मजबूत, सक्षम और आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह परिवर्तन केवल अधोसंरचना का नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

संपादकीय : छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी : संरचनात्मक विफलता और शासन की नैतिक जिम्मेदारी

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संपादकीय : छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी : संरचनात्मक विफलता और शासन की नैतिक जिम्मेदारी संतोष चौधरी छत्तीसगढ़ में गौ-तस्करी की बढ़ती घटनाएँ अब केवल आपराधिक गतिविधि भर नहीं रहीं, बल्कि वे राज्य की पशु-कल्याण नीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शासन-प्रणाली की गंभीर संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर कर रही हैं। कुनकुरी में पकड़ी गई हालिया घटना—जिसमें पिकअप वाहन में क्रूरतापूर्वक लदे मवेशियों में से एक बैल और दो गायों की दम घुटने से मृत्यु हो गई—इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि गौ-संरक्षण के दावे और जमीनी वास्तविकता के बीच गहरी खाई मौजूद है। यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक है कि जब सरकार गौ-तस्करी के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती है, तब बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर जैसे कृषि प्रधान जिलों से बड़ी संख्या में मवेशी बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के अंतरराज्यीय मार्गों तक कैसे पहुँच रहे हैं? स्पष्ट है कि यह समस्या केवल तस्करों की चतुराई का परिणाम नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की सीमाओं और प्रशासनिक समन्वय की कमी का द्योतक है। गौ-तस्करी का मूल कारण : आवारा मवेशी और अपर्याप्त गौशालाएँ छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खेतों में फसल नुकसान और मवेशियों की बढ़ती तादाद से किसान विवश होकर मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं। राज्य में उपलब्ध गौशालाओं की संख्या, उनकी क्षमता और संसाधन इस बढ़ते दबाव को संभालने में पूर्णतः अक्षम प्रतीत होते हैं। अनेक गौशालाएँ मात्र औपचारिकता बनकर रह गई हैं—जहाँ न पर्याप्त स्थान है, न चारा, न पशु चिकित्सा सुविधाएँ। इसी शून्य का लाभ गौ-तस्कर उठाते हैं। आवारा मवेशी उनके लिए कच्चा माल बन जाते हैं। नतीजतन, तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा न रहकर नीतिगत विफलता का रूप ले लेती है। कानून प्रवर्तन की सीमाएँ और जोखिम कुनकुरी की घटना में पुलिस की तत्परता सराहनीय है, किंतु यह भी ध्यान देने योग्य है कि कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मी घायल हुए और तस्कर अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गए। यह दर्शाता है कि गौ-तस्करी जैसे संगठित अपराधों से निपटने के लिए वर्तमान व्यवस्था न तो पर्याप्त संसाधनों से लैस है और न ही तकनीकी रूप से सुदृढ़। शासन की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी भारतीय संविधान और पशु-कल्याण से जुड़े अधिनियम राज्य को यह दायित्व सौंपते हैं कि वह मूक पशुओं के संरक्षण और मानवीय व्यवहार को सुनिश्चित करे। गौमाता को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से सम्मान देने का दावा तभी सार्थक होगा, जब उसे सड़कों पर बेसहारा भटकने और तस्करों के वाहनों में दम तोड़ने से बचाया जा सके। आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेप समस्या का समाधान प्रतीकात्मक अभियानों से नहीं, बल्कि ठोस और दीर्घकालिक रणनीति से संभव है। इसके लिए— प्रत्येक विकासखंड में पर्याप्त क्षमता वाली, सुव्यवस्थित गौशालाओं की स्थापना आवारा मवेशियों का पंजीकरण और ट्रैकिंग प्रणाली अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थायी, तकनीक-आधारित निगरानी और गौ-तस्करी में संलिप्त पूरे नेटवर्क पर कठोर, उदाहरणात्मक कार्रवाई अनिवार्य है।   कुनकुरी की घटना एक चेतावनी है—यदि अब भी गौ-तस्करी को केवल पुलिसिया समस्या मानकर टाल दिया गया, तो यह संकट और गहराएगा। तीन गायों की मौत केवल एक समाचार नहीं, बल्कि यह उस व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है जो गौ-संरक्षण की बात तो करती है, पर उसके लिए आवश्यक ढाँचा खड़ा करने में अब तक विफल रही है। शासन को आत्ममंथन करना होगा, क्योंकि गौमाता की दुर्दशा अंततः राज्य की प्रशासनिक और नैतिक साख से जुड़ा प्रश्न है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया सड़क हादसे पर गहरा दुख

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया हादसे पर गहरा दुःख  आज सुबह नेशनल हाईवे 43 पर तेज रफ्तार कार और ट्रेलर में हुई भिड़ंत में पांच लोगों की हुई मौत जशपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43, पतराटोली के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में पाँच लोगों की मौत की खबर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि हादसे की सूचना अत्यंत दुखद है और इस दुखद घड़ी में वे शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और परिजनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।