पर्यवेक्षक ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह की सूझबूझ से भाजपा ने दर्ज की बड़ी जीत, गायत्री नागेश बनीं अध्यक्ष, अरविंद गुप्ता बने उपाध्यक्ष
जशपुर/बगीचा, 4 मार्च 2025 – भारतीय जनता पार्टी ने बगीचा जनपद पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर अपनी रणनीतिक बढ़त साबित करते हुए परचम लहरा दिया। भाजपा की ओर से गायत्री नागेश ने अध्यक्ष और अरविंद गुप्ता ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।
इस चुनाव में भाजपा का मुकाबला निर्दलीयों से था, क्योंकि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं था, जिससे वह अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं कर पाई। हालांकि, कांग्रेस की रणनीति भाजपा को नुकसान पहुंचाने की जरूर थी, लेकिन भाजपा के जिला उपाध्यक्ष व बगीचा पर्यवेक्षक ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह की दूरदृष्टि और सूझबूझ ने कांग्रेस की इस चाल को नाकाम कर दिया। इस रणनीति में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ भाजपा नेताओं को शामिल किया।
कैसे फेल हुई कांग्रेस की रणनीति?
पर्यवेक्षक पुरुषोत्तम सिंह को आभास हो गया था कि भाजपा और कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट लोग उपाध्यक्ष पद पर खेल कर सकते हैं। इसे भांपते हुए उन्होंने भाजपा के दोनों दावेदारों भारत गुप्ता और अरविंद गुप्ता को गुप्त रूप से चुनाव लड़ने की छूट दी, जिससे किसी भी तरह के जोड़तोड़ की संभावना समाप्त हो गई और भाजपा को सीधा लाभ मिला।
मतदान में भाजपा को मिली शानदार जीत
*अध्यक्ष पद पर भाजपा की गायत्री नागेश को 14 मत मिले।
*उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के अरविंद गुप्ता को 12 मत मिले।
यह जीत शुद्ध रूप से भाजपा के विष्णु सरकार के सुशासन की जीत है,दोनों पदों पर हमारे प्रत्याशी जीतकर आये हैं। इस जीत का श्रेय स्थानीय नेताओं और जनपद सदस्यों को देता हूँ- ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह
भाजपा कार्यालय में जश्न, जमकर मना विजय उत्सव
जीत दर्ज करने के बाद दोनों विजयी प्रत्याशियों ने भाजपा कार्यालय पहुंचकर पार्टी पदाधिकारियों का आशीर्वाद लिया। कार्यकर्ताओं ने फूलमालाओं से स्वागत किया, जमकर आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटी।
इस दौरान भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा, शंकर गुप्ता, मंडल अध्यक्ष हरीश यादव, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रभात सिदाम, महामंत्री पवन सिंह, जिला पंचायत सदस्य गेंदबिहारी महराज, रीना बरला, राजकिशोर जायसवाल, सुमित्रा पैंकरा, पार्वती यादव सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भाजपा की रणनीतिक जीत, कांग्रेस हाशिए पर
इस चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भाजपा संगठन की रणनीतिक पकड़ मजबूत है। कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और कमजोर संख्या बल के कारण वह मुकाबले से बाहर हो गई। वहीं, भाजपा ने एकजुटता और समझदारी से जीत हासिल कर अपने वर्चस्व को और मजबूत कर लिया।





















