जशपुर में फगुआ का रंगीन धमाका: “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने मचाई धूम,EX MLA विनय और श्वेता की हिट जोड़ी, यूट्यूब में कमेंट्स की बौछार

जशपुर में फगुआ का रंगीन धमाका: “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने मचाई धूम

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जशपुर, 3 मार्च 2026 –  होली के रंगों के बीच जशपुर की धरती से एक बार फिर सांस्कृतिक सरगम गूंज उठी है। जशपुर के पूर्व विधायक Vinay Bhagat और उनकी पत्नी Shweta Bhagat ने आधुनिक नागपुरी फगुआ एलबम “तोर लागिन जान भी देई देबूं” रिलीज कर होली के जश्न में चार चांद लगा दिए हैं।
दो मार्च को यूट्यूब पर लॉन्च हुए इस एलबम ने महज 20 घंटे में ही 19 हजार व्यूज़ का आंकड़ा पार कर लिया, जो इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह गीत तेजी से वायरल हो रहा है और दर्शकों से जबरदस्त सराहना बटोर रहा है।
एलबम की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन और सांस्कृतिक प्रस्तुति है। जशपुर की नैसर्गिक सुंदरता, पहाड़, हरियाली और स्थानीय परंपराओं को बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है। शूटिंग Sarna Resort Balachhapar में की गई है, जहां होली के रंग में डूबे लोग स्थानीय पारंपरिक पेय हड़िया (चावल से निर्मित राइस बीयर) को मिट्टी के बर्तनों में पीते और पारंपरिक नृत्य करते नजर आते हैं। यह दृश्य एलबम को पूरी तरह से लोक संस्कृति से जोड़ता है।

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दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी दिल छू लेने वाली हैं। एक दर्शक बालमुकुंद यादव ने कमेंट करते हुए लिखा, “यह वीडियो बहुत सुंदर है। कभी भोजपुरी गाना में भी बनाइए, आप लोग भोजपुरी हीरो-हीरोइन जैसे दिखते हो।” ऐसे हजारों सकारात्मक कमेंट्स इस एलबम की सफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
एलबम की प्रस्तुति में Vinay Bhagat और Shweta Bhagat मुख्य कलाकार के रूप में नजर आ रहे हैं, जिनका नृत्य और अभिव्यक्ति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। उनके डांस को जशपुर ही नहीं, बल्कि झारखंड, ओडिशा, असम और बंगाल तक में खूब पसंद किया जाता है।
इस एलबम की प्रोड्यूसर श्वेता विनय भगत हैं। गायन की जिम्मेदारी कयूम अब्बास और केशो देवी ने संभाली है, जबकि कैमरा और एडिटिंग का कार्य अरुण कुमार ने किया है। सह कलाकार संगम और दिव्या ने भी अपने अभिनय से गीत में जीवंतता भर दी है।

होली के इस खास मौके पर “तोर लागिन जान भी देई देबूं” ने यह साबित कर दिया है कि क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति में भी वह ताकत है जो सीमाओं को पार कर दिलों को जोड़ सकती है। जशपुर की धरती से निकला यह रंगीन फगुआ गीत अब पूरे पूर्वी भारत में अपनी छाप छोड़ता नजर आ रहा है।