विशेष लेख : एकता दिवस का महत्व : भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन (निर्मल कुमार)

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विशेष लेख : एकता दिवस का महत्व : भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन (निर्मल कुमार) हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) मनाता है, ताकि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती का सम्मान किया जा सके — एक ऐसे महान नेता जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने एक एकीकृत भारत की नींव रखी। “भारत के लौह पुरुष” के रूप में प्रसिद्ध पटेल के नेतृत्व में स्वतंत्रता के बाद 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण हुआ, जिसने आज के इस अखंड, संप्रभु राष्ट्र को जन्म दिया। एकता दिवस केवल उनकी विरासत को श्रद्धांजलि नहीं है — यह भारत की विविधता में एकता की स्थायी प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि है। लौह पुरुष और भारत का एकीकरण 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश को 560 से अधिक रियासतों का जटिल ताना-बाना विरासत में मिला — प्रत्येक रियासत की अपनी स्वायत्तता और अलग निष्ठाएँ थीं। सरदार पटेल ने इन रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने की चुनौती स्वीकार की — एक ऐसा कार्य जिसके लिए अद्वितीय कूटनीति, साहस और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता थी। उनकी स्थिर दृष्टि और अटूट निश्चय ने उन्हें “लौह पुरुष” का ख़िताब दिलाया। राजनैतिक समझदारी और व्यवहारिकता के संयोजन से पटेल ने हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर जैसी महत्वपूर्ण रियासतों का विलय कराया, जिससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हुई। “एकता के बिना मनुष्यबल कोई शक्ति नहीं है; जब तक वह उचित रूप से संगठित न हो जाए, तब तक वह एक आध्यात्मिक शक्ति नहीं बन सकता।” — सरदार वल्लभभाई पटेल पटेल के लिए राष्ट्र की सच्ची शक्ति केवल सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके लोगों की एकता में निहित थी। राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत वर्ष 2014 में भारत सरकार ने सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य नागरिकों में एकता की भावना को पुनर्जीवित करना और पटेल की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की दृष्टि को सम्मानित करना है। इस दिन देशभर में Run for Unity, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ, और शपथ समारोह आयोजित किए जाते हैं — स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों से लेकर सेना और समुदायों तक। मुख्य समारोह गुजरात के एकता नगर स्थित “Statue of Unity” (182 मीटर ऊँची पटेल की भव्य प्रतिमा) पर आयोजित होता है, जो भारत की शक्ति, साहस और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। एक दृष्टि जो समय से परे है सरदार पटेल की राजनीतिक बुद्धिमत्ता और दूरदृष्टि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता के समय थी। उनका सामाजिक समरसता और समावेशिता में विश्वास आज के विभाजित विश्व में भी प्रेरणा देता है। “सत्य और न्याय के मार्ग पर चलो — क्योंकि वही सभी के लिए सही मार्ग है।” — सरदार पटेल ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि भारत के सामाजिक ताने-बाने में न्याय, परस्पर सम्मान और शांति बनाए रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है। एकता दिवस उस भारत की भावना को पुनर्स्थापित करता है जो अपनी विविधता में फलता-फूलता है, न कि उसके बावजूद। यह हर नागरिक को राष्ट्र की एकता के प्रति समर्पण की याद दिलाता है और भाषा, क्षेत्र और धर्म के बीच मजबूत बंधन बनाने का आह्वान करता है। आधुनिक भारत में एकता दिवस का महत्व आज जब भारत क्षेत्रीय असमानताओं, सामाजिक विभाजनों और वैचारिक मतभेदों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब एकता दिवस का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक प्रगति की भावना का पुनर्जागरण है। हर वर्ष Statue of Unity पर आयोजित समारोह देशभक्ति और गर्व की भावना को फिर से प्रज्वलित करता है। यह संदेश देता है कि भारत चाहे जितना विशाल और विविध क्यों न हो — उसका दिल और आत्मा एक है। “मेरी केवल एक इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक बने और देश में कोई भूखा न रहे, किसी की आँखों में आँसू न हों।” — सरदार पटेल उनका यह विचारशील राष्ट्रवाद सेवा और एकता पर आधारित नेतृत्व का सर्वोत्तम उदाहरण है। एकता की अमर विरासत   राष्ट्रीय एकता दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है — यह उस शक्ति की याद दिलाता है जो एकता से आती है। यह भारत के संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, और उस कालातीत विचार का प्रतिबिंब है कि एकता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति है।   एक विभाजित होती दुनिया में पटेल का उदाहरण हमें अनुशासन, एकजुटता और सामूहिक नियति में विश्वास का संदेश देता है। हर वर्ष 31 अक्टूबर को जब भारत एकता दिवस मनाता है, तब यह हमें याद दिलाता है कि पटेल की कल्पित एकता कोई स्थिर अवधारणा नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति है। “कार्य ही पूजा है, श्रम ही ईश्वर है, और जो व्यक्ति सही भावना से कार्य करता है, वह सदा शांत और प्रसन्न रहता है।” — सरदार वल्लभभाई पटेल ये वचन हर पीढ़ी को राष्ट्र की प्रगति और एकता में योगदान देने का आह्वान करते हैं। सरदार पटेल की विरासत इतिहास से परे है — वह भारत की आत्मा में सजीव है। हर वर्ष एकता दिवस यह सुनिश्चित करता है कि यह भावना कभी मंद न पड़े, भारत सदैव एक रहे, और पटेल का सुदृढ़ सामंजस्य सदा हमारा मार्गदर्शक बना रहे। (लेखक निर्मल कुमार सामाजिक,आर्थिक मुद्दों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।)

जशपुर से बड़ी खबर : ड्राइवर महासंगठन की मांगों पर सरकार से मिला सकारात्मक आश्वासन, बस स्टैंड पर मना जश्न

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जशपुर से बड़ी खबर : ड्राइवर महासंगठन की मांगों पर सरकार से मिला सकारात्मक आश्वासन, बस स्टैंड पर मना जश्न जशपुर,कुनकुरी 26 अक्टूबर 2025 – अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंगठन को आखिरकार बड़ी सफलता मिल गई है। रविवार को जशपुर बस स्टैंड पर उस समय खुशी का माहौल बन गया जब संघ के पदाधिकारियों ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दे दिया है। इस सूचना के मिलते ही बस स्टैंड जशपुर,कुनकुरी पर मौजूद ड्राइवरों और संगठन के सदस्यों ने जोरदार आतिशबाजी की और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर अपनी खुशी जाहिर की। माहौल में खुशी और एकजुटता की झलक स्पष्ट दिखाई दी। संघ के जिलाध्यक्ष फिरन यादव, उपाध्यक्ष ललित यादव, सचिव मुन्ना खान और वरिष्ठ सदस्य चार्जे तिर्की ने बताया कि सरकार से मिले इस सकारात्मक आश्वासन ने पूरे ड्राइवर संघ में नई ऊर्जा भर दी है। उन्होंने कहा — “हमने अपनी जायज मांगों को सरकार के सामने रखा था, और अब जब उस पर सहमति बनी है, तो यह हमारे पूरे समुदाय के लिए बड़ी जीत है।” संघ के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं जशपुर जिले से आते हैं, इसलिए उन्होंने ड्राइवर समाज की समस्याओं को करीबी दृष्टि से समझा और संवेदनशीलता के साथ समाधान का आश्वासन दिया। पदाधिकारियों ने कहा — “हमारे मुख्यमंत्री का जशपुर से होना हमारे लिए गर्व की बात है। उन्होंने हमारी तकलीफों को समझा और हमारी आवाज को महत्व दिया। हम तहे दिल से उनका धन्यवाद करते हैं।” बस स्टैंड पर मिठाइयों का वितरण भी किया गया और ड्राइवरों ने इस सफलता को “संघ की एकजुटता की जीत” बताया।

छत्तीसगढ़ ड्राईवर महासंघ के आंदोलन का आज दूसरा दिन,कुनकुरी बस स्टैंड में हुआ बवाल,पुलिस ने दी समझाइश

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छत्तीसगढ़ ड्राईवर महासंघ के आंदोलन का आज दूसरा दिन,कुनकुरी बस स्टैंड में हुआ बवाल,पुलिस ने दी समझाइश जशपुर,26 अक्टूबर 2025 – छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंतर्गत जशपुर जिले भर में ड्राइवर महासंघ के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर 25 अक्टूबर से आंदोलन जारी है।जिसमें आज सुबह कुनकुरी बस स्टैंड में बस ड्राईवर से बस नहीं चलाने को लेकर बवाल हो गया। दरअसल,सुबह ड्राईवर संघ के जिलाध्यक्ष फिरन यादव अन्य पदाधिकारियों के साथ बस स्टैंड चाय पीने पहुंचा,जहां लावाकेरा से गुमला चलने वाली बालाजी बस के ड्राईवर को आंदोलन का साथ देने कहा।जिस पर ड्राईवर तैयार नहीं हुआ।इस बात से संघ के पदाधिकारी अध्यक्ष समेत नाराज हो गए और गाड़ी नहीं ले जाने का दवाब बनाने लगे।ऐसी स्थिति में बस एजेंटों ने यात्रियों के साथ मिलकर कुनकुरी थाने में शिकायत कर दी।छठ पूजा में यात्रियों को हो रही परेशानी को देखते हुए कुनकुरी थाना प्रभारी राकेश यादव ने आंदोलनकारियों को थाने बुलाया और जबरन किसी भी बस,ट्रक,टैक्सी को रोकने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी।जिस पर जिलाध्यक्ष फिरन यादव ने संघ की ओर से लिखित पत्र देकर पुलिस को आश्वस्त किया। जिलाध्यक्ष फिरन यादव ने बताया कि यह आंदोलन जशपुरनगर, कुनकुरी, पत्थलगांव, बगीचा, फरसाबहार समेत पूरे जिले में एक साथ चल रहा है। उड़ीसा की भाजपा सरकार ने हमारी मांगों पर सकारात्मक पहल दिखाते हुए एक मांग पूरी कर दी है।बाकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है। ड्राइवर संघ आज छग सरकार से इन मांगों को पूरा करने के लिए लोदाम और लावाकेरा बार्डर पर धरना दे रहा है। # छत्तीसगढ़ पूरे प्रदेश में पूर्ण रूप से शराब बंद लागू किया जाए # ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार पर कठोर कार्रवाई हो। # ड्राइवरों के लिए बीमा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू की जाएं। # ड्राइवर संघ और प्रशासन के बीच स्थायी वार्ता समिति बनाई जाए, ताकि समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके। आम सड़क पर कितना है असर? आज सड़कों पर बसें,पिकप की आवाजाही दिख रही है।वहीं टैक्सी,सीमेंट,कोयले के ट्रक ड्राइवर आंदोलन में शामिल हैं। दोनों बार्डर पर जाम की स्थिति नहीं है।धरना जारी है।सड़क किनारे कई स्थानों पर ट्रक खड़े दिखे।जिलाध्यक्ष फिरन यादव ने बताया कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह धरना प्रदर्शन अनिश्चितकालीन बढ़ाया जा सकता है।

रायकेरा में दोहरी हत्या से दहशत — सास और दामाद की निर्मम हत्या, गांव में मचा हड़कंप

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रायकेरा गांव में दोहरी हत्या से सनसनी सास और दामाद की देर रात हत्या, गांव में मचा हड़कंप। पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर जांच में जुटी। एक महिला समेत दो संदेहियों से पूछताछ जारी। प्राथमिक जांच में पैसे के लेन-देन का मामला आया सामने।   रायकेरा (रायगढ़)। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र के रायकेरा गांव में देर रात हुए दोहरे हत्याकांड से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सास और दामाद की हत्या की खबर से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हुई है।   घटना देर रात की बताई जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद हत्या की वजह हो सकती है। पुलिस ने संदेह के आधार पर एक महिला सहित दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।   हत्या की वारदात की जानकारी मिलते ही घरघोड़ा थाना पुलिस ने इलाके को घेर लिया और एफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। गांव में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए हैं, वहीं घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।   पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और हत्या के कारणों की जांच में तेजी लाई जा रही है। थाना प्रभारी के अनुसार, प्राथमिक जांच में आर्थिक लेनदेन को लेकर विवाद सामने आया है, हालांकि पुलिस अन्य सभी बिंदुओं पर भी गहनता से जांच कर रही है।  

*कुनकुरी को मिला स्वास्थ्य सेवाओं का नया वरदान, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर 8 करोड़ 77 लाख की लागत से गिनाबहार में 50 बिस्तरीय मातृ-शिशु चिकित्सालय का निर्माण कार्य शुरू…*

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जशपुर/कुनकुरी –  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जिलेवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी सौगात दी है। जिले के कुनकुरी ब्लॉक अंतर्गत गिनाबहार में 50 बिस्तरीय मातृ-शिशु चिकित्सालय का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। लगभग 8 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से बनने वाला यह अस्पताल क्षेत्रवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण, जिले के विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके बन जाने से न केवल जशपुर बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों की माताओं, बहनों और बच्चों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर उपचार और देखभाल मिल सकेगी। उन्होंने अधिकारियों व निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो और निर्धारित समय सीमा में अस्पताल का निर्माण पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। क्षेत्रवासियों ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री साय का आभार व्यक्त किया और कहा कि अब मरीजों को इलाज के लिए दूर दराज नहीं जाना पड़ेगा। *स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में बढ़ता जशपुर* मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में लगातार स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है। हाल के वर्षों में अनेक योजनाओं को मूर्त रूप दिया गया है। जिले को 220 बिस्तर का आधुनिक अस्पताल मिल चुका है, वहीं 35 करोड़ की लागत से कल्याण आश्रम में अत्याधुनिक अस्पताल का निर्माण हो रहा है। आधा दर्जन नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्वीकृति दी गई है, 11 अतिरिक्त एम्बुलेंस और 2 शव वाहन की व्यवस्था भी की गई है। मातृ-शिशु देखभाल को प्राथमिकता देते हुए नए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू किया गया है। इन पहलों से आने वाले समय में जिले के आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा और जशपुर स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में प्रदेश का अग्रणी जिला बनकर उभरेगा।

हाथी के हमले में महिला की मौत,ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

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हाथी के हमले में महिला की मौत, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप जशपुर जिले में जंगली हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष कम करने के दावों के बीच एक बुरी खबर आई है,जिसमें जंगली मशरूम बीन रही महिला एक जंगली हाथी की चपेट में आ गई।ग्रामीणों के शोरगुल से जंगली हाथी ने महिला को बुरी तरह घायल कर दिया।स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग की मदद से घायल को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। जशपुर,20 सितंबर 2025 – कुनकुरी विकासखंड के कुड़ुकेला जंगलपारा में हाथी के हमले से एक महिला की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार 44 वर्षीय ग्रामीण महिला ज्योति मिंज शुक्रवार की सुबह जंगल से खुखड़ी (जंगली मशरुम) बीनकर लौट रही थी। घर से महज 200 मीटर दूर जंगल की सीमा पर हाथी ने उस पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल हालत में उसे तत्काल कुनकुरी के होलीक्रॉस अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।   घटना से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद वन विभाग की ओर से मुनादी नहीं कराई गई और न ही लोगों को सावधान किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है। वहीं वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि हाथियों के विचरण को लेकर विभिन्न संचार माध्यमों से लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।लोग जंगल में जाते समय लापरवाही कर रहे हैं।घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस से घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने हाथियों की लगातार आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने और लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

कुनकुरी: खेत में पेड़ पर टंगी अधेड़ की लाश, मवेशी तस्करी से जुड़ाव की आशंका, सनसनी

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कुनकुरी: खेत में पेड़ पर टंगी अधेड़ की लाश, मवेशी तस्करी से जुड़ाव की आशंका, सनसनी कुनकुरी,17 सितम्बर 2025 – कुनकुरी थाना क्षेत्र के गिनाबहार गांव में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब गांव के पास एक खेत में पेड़ से एक अधेड़ व्यक्ति का शव लटका हुआ मिला। सुबह लगभग 9 बजे ग्रामीणों की नजर जब खेत में पेड़ पर लटकी लाश पर पड़ी तो पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पन्ना मास्टर के घर से दो खेत बाद जयनाथ चौहान की बाड़ी में सेंधवार के पेड़ पर एक अज्ञात व्यक्ति रस्सी से लटका मिला। मृतक के पैरों पर खरोंच के गहरे निशान थे, जिनसे खून निकल रहा था। घटनास्थल पर एक टॉर्च भी बरामद की गई है। मृतक ने नीले रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। ग्रामीणों ने मृतक की पहचान के लिए व्हाट्सएप के जरिए तस्वीरें शेयर कर प्रयास किया, लेकिन अब तक उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। आसपास के लोगों का कहना है कि मृतक कुनकुरी थाना क्षेत्र का नहीं लगता। इस घटना को लेकर ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कई लोगों ने आशंका जताई है कि मृतक मवेशी तस्करी से जुड़ा हो सकता है और किसी विवाद में फंसकर हत्या का शिकार हुआ हो। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि उसने खुद ही आत्महत्या कर ली होगी। ग्रामीणों ने बताया कि इस रास्ते का वर्षों से मवेशी तस्कर इस्तेमाल करते आ रहे हैं।   घटना की खबर मिलते ही कुनकुरी थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने सब इंस्पेक्टर राकेश सिंह को टीम के साथ मौके पर रवाना किया। फिलहाल पुलिस ने शव को पेड़ से उतारने की कार्यवाही शुरू कर दी है और मृतक की पहचान में जुट गई है। रहस्य यह है कि क्या यह आत्महत्या का मामला है या फिर हत्या ? पुलिस जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठ पाएगा।

*जशपुर जिले में 56 करोड़ 57 लाख की लागत से 484 नए आंगनबाड़ी भवन निर्माण की मिली स्वीकृति , मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से बच्चों और माताओं के पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य को मिलेगा नया आयाम*

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*जशपुर जिले में 56 करोड़ 57 लाख की लागत से 484 नए आंगनबाड़ी भवन निर्माण की मिली स्वीकृति , मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से बच्चों और माताओं के पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य को मिलेगा नया आयाम* जशपुर,09 सितंबर 2025 । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्राथमिकता हमेशा से प्रदेश के बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं शिक्षा को लेकर रही है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जशपुर जिले में 56 करोड़ से भी अधिक की लागत से 484 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन पर 11 लाख 69 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे। इस प्रकार करोड़ों रुपए की राशि सीधे तौर पर जिले में आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार पर लगाई जाएगी। इससे न केवल बच्चों और माताओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी एक स्थायी और सुसज्जित कार्यस्थल प्राप्त होगा। *जर्जर भवन एवं अस्थाई से स्थायी भवन की ओर* अब तक अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र भवन जर्जर हालत में या किराए के मकानों में संचालित होते थे।ऐसे स्थानों में न तो बच्चों को बैठने की समुचित सुविधा मिलती थी और न ही साफ-सफाई का पर्याप्त वातावरण। लेकिन नए भवन बनने के बाद बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और अनुकूल माहौल उपलब्ध होगा, जिससे उनकी शिक्षा और पोषण संबंधी गतिविधियाँ व्यवस्थित ढंग से संचालित होंगी। *बच्चों और माताओं के लिए एक संपूर्ण केंद्र* नए आंगनबाड़ी भवन सिर्फ पढ़ाई या आहार वितरण का स्थान नहीं होंगे, बल्कि ये ग्रामीण समाज में पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता का केंद्र बनेंगे। इन भवनों में बच्चों को पौष्टिक आहार ,खेल-खेल में सीखने की व्यवस्था,नियमित स्वास्थ्य जांच,माताओं के लिए पोषण व स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रम जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे जिले में कुपोषण को कम करने और शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाने में बड़ी भूमिका निभाई जाएगी। *मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संकल्प अब कोई भी बच्चा शिक्षा की कमी से नहीं होगा वंचित* मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा का संकल्प है कि जशपुर का कोई भी बच्चा अब कुपोषण और शिक्षा की कमी से वंचित नहीं रहेगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर बच्चे और हर माता को स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। नए आंगनबाड़ी भवन आने वाली पीढ़ी के जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगे और प्रदेश में पोषण क्रांति की नींव मजबूत करेंगे। *ग्रामीणों की खुशी और सीएम साय के प्रति आभार* ग्रामीण अंचलों के लोगों ने इस नए आंगनबाड़ी भवन की स्वीकृति का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि यह पहल आने वाली पीढ़ी के भविष्य को उज्ज्वल बनाने वाली साबित होगी। अब बच्चे अस्थायी कमरों में नहीं, बल्कि सुसज्जित भवनों में शिक्षा और पोषण प्राप्त करेंगे।

एसएसपी शशिमोहन सिंह ने जिले के नागरिकों से की अपील,धरना – रैली – जलूस से पूर्व दें सूचना

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*// अपील //*   वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर  शशि मोहन सिंह द्वारा जिले के सभी *नागरिकों से अपील किया है कि कोई भी सांस्कृतिक, राजनीतिक या सामाजिक धरना, प्रदर्शन, रैली अथवा कार्यक्रम आयोजित* किया जाता है तो *उसकी सूचना पूर्व में ही प्रशासन को दिया जाये,* तभी समुचित पुलिस बल लगाना संभव होता है।   👉 *पूर्व सूचना मिलने पर ही आवश्यकतानुसार* पुलिस बल तैनात किया जा सकता है और उचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।   *कल की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का एक मुख्य कारण यह भी रहा कि* गणेश विसर्जन के साथ निकाले गए डीजे एवं जुलूस की जानकारी पुलिस एवं जिला प्रशासन को पूर्व में नहीं दी गई थी, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था लगाना संभव नहीं हो पाया। इस घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए तथा मूल्यवान जनहानि हुई, जिस पर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन गहरा दुख व्यक्त करता है।   अतः पुनः सभी नागरिकों से आग्रह है कि *भविष्य में किसी भी प्रकार का जुलूस/कार्यक्रम आयोजित करने से पूर्व प्रशासन को सूचित करें, ताकि पर्याप्त पुलिस बल* एवं सुरक्षा व्यवस्था लगाई जा सके और ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृत्ति न हो।   – शशि मोहन सिंह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जशपुर

“ऑनलाइन रिकॉर्ड और CCTV अनिवार्य: कुनकुरी में मेडिकल स्टोर्स पर प्रशासन का शिकंजा”

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कुनकुरी,28 अगस्त 2025 – कुनकुरी शहर के मेडिकल स्टोर्स पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। एसडीएम नंदजी पांडेय के नेतृत्व में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त बैठक CSC भवन में आयोजित की गई, जिसमें सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को कड़े निर्देश दिए गए। बैठक में तय किया गया कि मेडिकल स्टोर्स में बिकने वाली दवाओं का पूरा रिकॉर्ड अब ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही हर दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगाना और उन्हें चालू रखना जरूरी है। बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी भी मरीज को दवा नहीं दी जाएगी। नियम तोड़ने पर सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। निर्देशों के बाद संयुक्त टीम ने सुनील मेडिकल, दीपक मेडिकल और रारा मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया। संचालकों को दवाओं का रिकॉर्ड समय पर अपडेट करने और सीसीटीवी व्यवस्था दुरुस्त रखने की हिदायत दी गई।   इस कार्रवाई से मेडिकल व्यवसायियों में हलचल मच गई है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम जनता की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए उठाया गया है और भविष्य में भी इस तरह की जांचें जारी रहेंगी।   निरीक्षण के दौरान एसडीएम नंदजी पांडेय, एसडीओपी विनोद कुमार मंडावी, थाना प्रभारी राकेश यादव, बीएमओ मैडम कुजूर और पुलिस विभाग की टीम मौजूद रही।