ऑपरेशन सिंदूर की वीरांगना कर्नल सोफिया कुरैशी का वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से कितना गहरा है कनेक्शन? बड़ा खुलासा पढ़िए

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भारतीय सेना की दो महिला अधिकारी — कर्नल सोफिया कुरैशी और कर्नल व्योमिका सिंह ने दिखाई शौर्य गाथा | पहलगाम हमले का लिया बदला | रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ा पारिवारिक इतिहास आया सामने सेंट्रल डेस्क, ख़बर जनपक्ष न्यूज़,9 मई 2025 भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़ा और निर्णायक कदम उठाया। यह जवाब था कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का, जिसमें 26 भारतीय पर्यटक शहीद हुए थे। इस सैन्य कार्रवाई की अगुवाई दो जांबाज महिला सैन्य अधिकारियों — कर्नल सोफिया कुरैशी और कर्नल व्योमिका सिंह — ने की। कर्नल सोफिया की परदादी थीं झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेनानी ऑपरेशन के बाद सोशल मीडिया X पर कर्नल सोफिया को लेकर जो जानकारी सामने आई, उसने पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया। पांचजन्य द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, कर्नल सोफिया ने स्वयं बताया कि उनकी परदादी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी थीं।एक इंटरव्यू में कर्नल सोफिया ने बताया है “मेरी परदादी ने रानी लक्ष्मीबाई के साथ रहकर अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे।” इतिहासकार आचार्य सत्यम ने की पुष्टि इतिहासकार आचार्य सत्यम (Satyanarayan) ने इस तथ्य को ऐतिहासिक प्रमाणों के साथ जोड़ते हुए लिखा: “यह सत्य है कि सोफिया का परिवार बुंदेलखंडी है और महारानी झांसी की सेना में झांसी के प्रधान तोपची मोहम्मद गौस तथा सेनापति काले खान के अतिरिक्त कई मुस्लिम सैनिक और वीरांगनाएं थीं।” सोशल मीडिया पर सराहना और सीख इस गौरवशाली जानकारी को साझा करने के लिए यूजर @AmitMishra1207 ने लिखा: “धन्यवाद बताने के लिए, उम्मीद है धर्म विशेष को गाली देने और बात-बात पर उनसे अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए कहने वाले ‘सांस्कृतिक संगठन’ और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाले सोशल मीडिया हैंडल इस कहानी को याद रखेंगे!” कर्नल सोफिया कुरैशी और कर्नल व्योमिका सिंह ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की बेटियां न केवल जमीनी जंग में बल्कि इतिहास की विरासत में भी सबसे आगे हैं। रानी लक्ष्मीबाई की परंपरा को जीवित रखते हुए कर्नल सोफिया ने आतंक के खिलाफ निर्णायक प्रहार कर देश की आन-बान-शान को कायम रखा है।

भीख मांगती सुमित्रा बाई और सोती सरकार — मयूरचुंदी में जनकल्याण योजनाओं की पोल खुली,अंत्योदय का नारा यहां कैसे हुआ फेल? मरे विपक्ष के कारण गिद्धों की मौज

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जशपुर/दुलदुला, 6 मई – “जब पेट भूखा हो, बच्चे रोते हों, और सरकार चुप — तब सवाल उठता है कि किसके लिए बने हैं ये योजनाएं?” दुलदुला विकासखंड के मयूरचूंदी पंचायत की सुमित्रा बाई,आज गांव-गांव घूमकर भीख मांगने को मजबूर है। हाथ में अंत्योदय का राशन कार्ड है, पर पेट खाली। दो छोटे बच्चों के साथ यह विधवा महिला अब सरकारी दुकानों के आगे नहीं, बल्कि गांववालों के दरवाजे पर झोली फैला रही है। यह एक महिला की नहीं, पूरे सिस्टम की विफलता की कहानी है। राशन कार्ड है, चावल नहीं — यह कैसा न्याय? सुमित्रा को अप्रैल में केवल चना मिला, चावल देने से मना कर दिया गया। कई बार दुकान गई, मिन्नतें कीं, लेकिन जवाब मिला – “चावल नहीं है।” क्या यही है ‘जनकल्याणकारी राज्य’ का चेहरा? सत्ता-तंत्र की संवेदनहीनता एक ओर सरकारें करोड़ों के विज्ञापन देती हैं – “हर गरीब को मिलेगा राशन” – वहीं जमीनी हकीकत सुमित्रा बाई जैसे हजारों लोगों की चीख बनकर उठती है, जिसे कोई सुनने को तैयार नहीं। जनप्रतिनिधि खामोश, अफसर नदारद पंचायत से लेकर जनपद तक, कोई जवाबदेही नहीं। जिन प्रतिनिधियों को सुमित्रा ने चुनकर भेजा, वे आज सत्ता की गर्मी में गुम हैं।जब सरपँच ही दुकानदार है तो सुमित्रा भला उम्मीद किससे करेगी? एक ही सवाल — कब मिलेगा न्याय? पंचायत के लोगों ने कहा कि “हम मांग करते हैं कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और सुमित्रा बाई जैसे हर जरूरतमंद को तत्काल राशन उपलब्ध कराया जाए।” बड़ी बात सुमित्रा को न तो सुशासन तिहार के बारे में जानकारी है न ही आवेदन कैसे बनता है,यह वो जानती है। ऐसी सामान्य महिलाएं हों या पुरुष जिनके दर्द को जब विपक्ष भी नहीं समझता तो ऐसे मरे विपक्ष के कारण पंचायती गिद्ध तो मौज उड़ाएंगे ही। तो,सुमित्रा की यह करुण कहानी आपको कैसी लगी? कमेंट करके बताइए ताकि आपके कमेंट से ऐसी और कहानियां ढूंढकर खबर ज़नपक्ष आपके सामने लाता रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सार्थक पहल से जशपुर में 3 छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की मिली सौगात

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Jashpur विकास खंड के ग्राम आरा पत्थलगांव विकास खंड के ग्राम कुडे़केला और बगीचा विकास खंड के ग्राम छिछली अ में बैंक खोलने की मिली स्वीकृति किसानों और आम नागरिकों को अब लम्बी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी जशपुर वासियों में खुशी की लहर मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद जशपुर 5 मई 2025/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सार्थक पहल से जशपुर जिले के जनता को 3 छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की सौगात मिली है। संवेदनशील मुख्यमंत्री ने दूरस्थ अंचलों के आम जनता की समस्याओं को देखते हुए जशपुर विकास खंड के ग्राम आरा और पत्थलगांव विकास खंड के कुडे़केला (घरजियाबथान) दूरस्थ और पाठ क्षेत्र बगीचा विकास खंड के ग्राम छिछली अ में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक खोलने की स्वीकृति मिल गई। अब क्षेत्र किसानों,आम नागरिकों को बैंक के लिए लम्बी दूरी तय करनी नहीं पड़ेगी। किसानों का समय और आवागमन करने के लिए पैसे की भी बचत होगी। जशपुर वासियों ने खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है। कलेक्टर  रोहित व्यास ने बताया कि लोगों की सुविधा का ध्यान रखते हुए ग्राम पंचायत के द्वारा गांव में भवन उपलब्ध कराया गया है। जहां बैंक का संचालन किया जाएगा।

विष्णु का सुशासन: क्रेडा अधिकारी पर रिश्वत और ठेकेदारी के आरोप पर तत्काल तबादला – जांच समिति गठित

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जशपुर,05 मई 2025- ख़बर ज़नपक्ष की खबर पर एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है। जशपुर जिले के क्रेडा जिला प्रभारी उप अभियंता नीलेश श्रीवास्तव पर रिश्वत लेने और ठेकेदारी में संलिप्तता के गंभीर आरोप सामने आने के बाद शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाकर सरगुजा भेज दिया है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा शुरू किए गए सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। क्षेत्रीय समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया में लगातार यह आरोप सामने आ रहे थे कि क्रेडा की परियोजनाओं में कार्य दिलाने के नाम पर मोबाइल पेमेंट ऐप्स से रिश्वत ली जा रही है। प्रमुख कार्यपालन अधिकारी  राजेश सिंह राणा के निर्देश पर यह सख्त निर्णय लिया गया। अब जशपुर का क्रेडा प्रभार संदीप कुमार मार्को को सौंपा गया है, जबकि नीलेश श्रीवास्तव को सरगुजा में पदस्थ किया गया है। मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 7 दिनों के भीतर जांच समिति अपनी प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके लिए वंदना राजवाड़े को जिला प्रभारी, क्रेडा सरगुजा का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। ख़बरजनपक्ष ने इस खबर को प्रमुखता से उठाया था, जिसकी गूंज अब कार्रवाई के रूप में सामने आई है। सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्यवाही सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।  

‘साइड इन्कम’ के लिए सरकारी हेडमास्टर ने किया ऐसा घिनौना काम,गया जेल

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पैसे कमाने की भूख इस कदर किसी इंसान के मन में बढ़ जाती है कि वह भूख मिटाने के लिए लोक-लाज,नियम-धर्म,क़ानून सब ताक में रख देता है।ऐसी ही भूख एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर को लगी और देशी,विदेशी सुराप्रेमियों को झारखण्ड की शराब,देशी महुए की शराब बेचने लगा। जशपुर/04 मई 2025 –जशपुर जिले में एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर की अवैध शराब तस्करी ने सभी को चौंका दिया है। फरसाबहार थाना क्षेत्र के खुटगांव गांव में पदस्थ शिक्षक पंकज कुमार को पुलिस ने किराना दुकान की आड़ में अंग्रेजी और देशी शराब बेचते हुए गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई “ऑपरेशन आघात” के तहत की गई। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी अपने घर और दुकान में अवैध रूप से शराब बेच रहा है। फरसाबहार पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में आरोपी के घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान घर के आंगन से बोरी से ढंके कार्टन और जरकिन में कुल 24 लीटर 300 मिलीलीटर अवैध शराब बरामद की गई, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹9,600 आंकी गई है। उसके कब्जे से पुलिस टीम ने 18 नग रॉयल व्हिस्की,10 नग गॉडफादर बियर,7 लीटर महुआ शराब – देसी हाथ भट्टी से बनी बरामद किया। आरोपी के पास शराब रखने या बिक्री का कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। जिसके बाद पुलिस ने 34(2) छत्तीसगढ़ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कार्रवाई में इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका : सहायक उप निरीक्षक शांतिएल टोप्पोमहिला प्रधान आरक्षक सुशीला सिंहआरक्षक राजकुमार भगत,नगरसैनिक शिवनंदन पैंकरा एसपी शशि मोहन सिंह ने क्या कहा? “ऑपरेशन आघात के तहत पुलिस का मुखबिर तंत्र पूरी तरह सक्रिय है। अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।”

छत्तीसगढ़ की सियासत को हिला देने वाली वारदात: थाने से महज 200 मीटर दूर युवती से दुष्कर्म,कामांध युवक सलाखों के पीछे

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जशपुर/कुनकुरी,27 अप्रैल 2025 – जशपुर जिले से सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसमें कुनकुरी थाने से महज 200 मीटर की दूरी पर एक दरिंदे ने युवती को हवस का शिकार बनाया और फरार हो गया हालांकि क्राइम किलर एसएसपी शशिमोहन सिंह ने 24 घण्टे के भीतर हवस के दरिंदे को पकड़कर सलाखों के पीछे धकेल दिया। घटना कैसे घटी: दिनांक 25 अप्रैल को रात 8.30 बजे, पीड़िता अपने किराए के मकान के बाहर टहल रही थी। तभी एक अनजान युवक आया, पानी मांगा और मौका पाकर दरवाजा बंद कर उसके साथ दुष्कर्म किया।थाने से चंद कदम दूर, इस दुस्साहसी वारदात ने स्थानीय प्रशासन को शर्मसार कर दिया। वारदात के बाद आरोपी ने फ़िल्मी अंदाज में पीड़िता से कहा — “सलमा(बदला हुआ नाम) से कहना कि अंकित आया था!” यही वह डायलॉग बाद में पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग बना। पुलिस की चुनौती और आरोपी की गिरफ्तारी: आरोपी अज्ञात था, ना नाम, ना पहचान। पुलिस ने ब्लर सीसीटीवी फुटेज और पीड़िता द्वारा बताए गए एक वाक्य के सहारे जांच आगे बढ़ाई। मुखबिर के जरिए आरोपी अंकित खाखा (30 वर्ष) को आदर्श नगर कुनकुरी से पकड़ा गया। पीड़िता ने उसकी शिनाख्त कर दी और आरोपी ने अपना जुर्म भी कबूल लिया।आरोपी ने बताया कि वह एमए तक पढ़ालिखा है लेकिन नौकरी नहीं मिलने से पुताई वगैरह का काम करता था।उसके दोस्तों ने बताया था कि एक लड़की है जो जिस्मफरोशी का काम करती है जिसपर वह उसे ढूंढने गया था लेकिन वह नहीं मिली। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का बयान: एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया — “पुलिस ने 24 घंटे के भीतर आरोपी को पकड़कर जेल भेजा.आरोपी को पकड़ने में शामिल पुलिस टीम को नगद पुरस्कार दिया जाएगा.’

व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर युवती का प्राइवेट वीडियो बनाकर किया वायरल, आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार

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मैट्रोमोनी साइट पर हुई पहचान,वीडियो वायरल कर सोशल मीडिया पर की बदनाम करने की कोशिश जशपुर/कुनकुरी 22 अप्रैल 2025 जशपुर जिले की साइबर सेल और कुनकुरी पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवती की अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने वाले आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान रोहित प्रसाद (27 वर्ष), निवासी सबरी मठ, थाना जलालपुर, जिला सारण, बिहार के रूप में हुई है। यह पूरा मामला कुनकुरी थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक युवती ने 17 जनवरी 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया कि साल 2023 में उसने शादी डॉट कॉम वेबसाइट पर अपना बायोडाटा अपलोड किया था। वहीं से आरोपी रोहित प्रसाद से उसकी पहचान हुई। दोनों के बीच मैसेज और मोबाइल पर बातचीत होने लगी। 21 दिसंबर 2023 को आरोपी ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर युवती से निजी अंगों का प्रदर्शन करने को कहा, और विश्वास में आई युवती ने ऐसा कर भी दिया। आरोपी ने इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। कुछ समय बाद जब युवती को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उसने आरोपी से बातचीत बंद कर दी। इसी के बाद रोहित प्रसाद ने वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुनकुरी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 509(ख) भादवि और आईटी एक्ट की धारा 67(ए) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। साइबर सेल की निगरानी से हुई गिरफ्तारी पुलिस ने आरोपी के मोबाइल नंबर को साइबर सेल की निगरानी में रखा। लगातार ट्रैकिंग के बाद आरोपी की लोकेशन सागरपुर, दिल्ली में पाई गई। इसके बाद एक विशेष पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई और वहां से आरोपी को हिरासत में लेकर वापस जशपुर लाई गई। पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिसमें वीडियो रिकॉर्डिंग सहित अन्य सबूत पाए गए। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का बयान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने इस मामले को लेकर कहा कि, “जशपुर पुलिस महिला संबंधी अपराधों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। आरोपी चाहे कहीं भी हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाएगा। सोशल मीडिया पर इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।” इस मामले में थाना प्रभारी राकेश यादव, सहायक उप निरीक्षक ईश्वर वारले, आरक्षक चंद्रशेखर बंजारे और नंदलाल यादव सहित साइबर सेल की टीम की भूमिका उल्लेखनीय रही।

कुनकुरी का सरकारी अस्पताल बना किडनी मरीजों के लिए नई उम्मीद की किरण,मरीजों ने कहा- ‘जीवन वापसी के लिए धन्यवाद’

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जशपुर,कुनकुरी 19 अप्रैल 2025 – आदिवासी बहुल जिला जशपुर के हृदयस्थल कुनकुरी में अब किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत और जीवन की नयी उम्मीद का केंद्र बन चुका है – कुनकुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत संचालित किडनी डायलिसिस सेंटर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और दृढ़ संकल्प से यह सेंटर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और पीएमएनडीपी के तहत 21 फरवरी 2025 से शुरू किया गया। दीपचंद्र डायलिसिस सेंटर, दिल्ली के सहयोग से संचालित यह सुविधा आज सैकड़ों मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। मरीजों की जुबानी – जीवन वापसी की कहानी   फरसाबहार विकासखंड के देवरी गांव से आये विजय कुमार एक्का, एक रिटायर्ड फौजी हैं। वे सीकेडी स्टेज 5 से पीड़ित हैं और पहले रांची व अंबिकापुर जाकर डायलिसिस कराने की परेशानी झेलते थे। अब कुनकुरी में उपचार मिल रहा है तो विजय एक्का और उनकी पत्नी को राहत की सांस मिली है। विजय कहते हैं, ” जीने की उम्मीद छोड़ दिया था,अब लगता है जीवन लंबा और आसान रहेगा। बस एक ब्लड बैंक की सुविधा और हो जाए तो  किडनी मरीजों को और राहत मिल जाएगी।” बेमताटोली के प्रदीप पाल पहले रायपुर जाकर डायलिसिस कराते थे। हर यात्रा में 8 से 10 हजार रुपये खर्च हो जाते थे। वे बताते हैं, “अब कुनकुरी में फ्री डायलिसिस से राहत मिली है, जिससे मुझे कर्ज से निकलने की राह दिखाई दे रही है।” चटकपुर के लाल बहादुर सिंह को सप्ताह में चार बार डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। वे अब आसानी से हर बार मोटरसाइकिल से 50 रुपये के पेट्रोल से कर आ-जा पाते हैं। उनका कहना है, “सरकार ने सारी सुविधाएं मुफ्त दी हैं, हम जैसे गरीबों के लिए यह बहुत बड़ी बात है।” ऐसे ही अनुभव और भी मरीजों ने ख़बरजनपक्ष से शेयर किए। आधुनिक मशीनें ,महानगरों जैसी सुविधा भी सेंटर मैनेजर अभिषेक कुमार गिरी और सीनियर टेक्नीशियन सुमित मिश्रा मरीजों की सेवा में पूरी तल्लीनता से जुटे हैं। मरीजों को समय पर डायलिसिस, परामर्श और जीवन जीने की प्रेरणा भी दी जा रही है। अब तक सेंटर पर – 21 से 28 फरवरी के बीच 14 डायलिसिस सेशन हुए, मार्च महीने में 185 डायलिसिस सेशन, 17 एक्टिव मरीजों के साथ, और 1 से 18 अप्रैल तक 116 सेशन हो चुके हैं। सेंटर हर दिन सुबह 7:30 से शाम 4:30 तक चालू रहता है। एक मरीज के डायलिसिस में करीब 4 घंटे का समय लगता है। खास बात यह है कि यहाँ की मशीनें अत्याधुनिक हैं, जो किसी भी बड़े शहर के अस्पताल से कम नहीं। जरूरत – बंद ब्लड बैंक शुरू करने की कई मरीजों ने बताया  कि डायलिसिस से पहले ब्लड की आवश्यकता होती है, पर कुनकुरी में ब्लड बैंक बंद होने के कारण जशपुर जाकर ब्लड चढ़वाना पड़ता है। इससे न सिर्फ आर्थिक बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी वे परेशान होते हैं। यदि कुनकुरी में ही ब्लड बैंक की सुविधा मिले तो मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। जानकारी का आभाव-बाकी विकासखंडों तक पहुंचे यह संदेश इस बेहतरीन सुविधा की जानकारी अभी केवल कुनकुरी और आसपास के क्षेत्र तक सीमित है। जबकि दुलदुला, कांसाबेल, बगीचा और फरसाबहार जैसे विकासखंडों के कई मरीज अभी तक इससे अनजान हैं। जरूरत है कि शासन और प्रशासन द्वारा इन इलाकों में जागरूकता फैलाकर अधिक से अधिक मरीजों को इसका लाभ दिलाया जाए। कुनकुरी का यह डायलिसिस सेंटर एक मिसाल बन चुका है – जहां सरकार की नीतियां, तकनीकी उन्नति और संवेदनशीलता का संगम दिखाई देता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह पहल आदिवासी क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। यह सिर्फ एक हेल्थ सेंटर नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की मुस्कान और उम्मीदों का केंद्र बन गया है।

हॉलीक्रॉस नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या पर गंभीर आरोप : धर्मांतरण का दबाव बनाकर रेपिस्ट को बचाने की कोशिश?

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जशपुर, 06 अप्रैल 2025- जिले के प्रतिष्ठित हॉलीक्रॉस नर्सिंग कॉलेज कुनकुरी की प्राचार्या नन विंसी जोसफ एक गंभीर विवाद के केंद्र में हैं। एक छात्रा ने उन पर न सिर्फ मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है, बल्कि यह भी कहा है कि उन्होंने उसे ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया ताकि वह अपने साथ हुए यौन अपराध के आरोपी को माफ कर कोर्ट में बयान बदल दे। पीड़िता के अनुसार, यह मामला वर्ष 2020 से जुड़ा है। जब वह वर्ष 2021-22 में फर्स्ट ईयर नर्सिंग में दाखिल हुई, तभी से सिस्टर विंसी जोसफ उस पर लगातार दबाव बनाती रहीं कि वह आरोपी को माफ कर दे और बयान बदल दे। पीड़िता का दावा है कि आरोपी का पिता हॉलीक्रॉस अस्पताल में कर्मचारी है, और यही वजह रही कि प्राचार्या ने आरोपी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। छात्रा बताती है कि जब उसने इस दबाव की जानकारी अपनी मां को दी तो मां ने कहा—”वो तो सिस्टर है, उसने बेटी नहीं जनी है, इस दर्द को क्या समझेगी?” पीड़िता ने आगे बताया कि कुछ महीनों तक सिस्टर विंसी ने बेहद आत्मीयता दिखाते हुए उसे यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उसका भविष्य हिंदू धर्म में अंधकारमय है, क्योंकि ‘खराब नाम वाली लड़की से कौन शादी करेगा’, इसलिए ‘सिस्टर लाइन’ में आ जाना ही बेहतर होगा। पीड़िता ने यह भी बताया कि प्राचार्या उसकी पढ़ाई और काबिलियत से खुश थीं, और यही वजह रही कि शुरू में उसका विश्वास जीतने की कोशिश की गई। परंतु जब 2023 में आरोपी को सजा हो गई और छात्रा ने धर्मांतरण से इनकार कर दिया, तो सिस्टर विंसी का रवैया पूरी तरह बदल गया। बार-बार अनुपस्थित दिखाकर परेशान किया गया और अंततः 1 अप्रैल 2024 को उसे हॉस्टल से निकाल दिया गया। इसके बाद जब वह अस्पताल में ड्यूटी पर जाती थी तो वहां भी उसे काम नहीं करने दिया गया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि ईसाई समाज के कुछ लोग अब उसकी सहेलियों को धमका रहे हैं, जबकि उन्हें सच्चाई सामने लाने के लिए आगे आना चाहिए। “अगर आप उन लड़कियों से जाकर बात करें जो कोर्स बीच में छोड़ चुकी हैं, तो सारा मामला साफ हो जाएगा,” छात्रा ने कहा। फिलहाल छात्रा ने जशपुर कलेक्टर और स्थानीय पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत पर कलेक्टर ने जांच बिठा दी है। सवाल यह है कि क्या इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच हो पाएगी? क्या प्राचार्या पर लगे आरोप सही साबित होंगे, या यह एक सुनियोजित साजिश है? जांच के नतीजों का इंतजार अब पूरे जिले को है।

महाकुंभ 2025: भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक और साम्प्रदायिक सौहार्द का वैश्विक उदाहरण

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निर्मल कुमार प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में आयोजित महाकुंभ मेला 2025 न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि यह भारत की “एकता में विविधता” की भावना का भव्य उत्सव भी बना। लाखों श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ के बीच, यह आयोजन सौहार्द और आपसी सहयोग की अद्भुत मिसाल पेश करता दिखा। कुछ नकारात्मक ताकतों द्वारा समाज में वैमनस्यता फैलाने की कोशिशों के बावजूद, इस मेले ने साबित कर दिया कि भारत की असली पहचान शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और परस्पर सम्मान में निहित है। महाकुंभ मेला, जिसे पृथ्वी का सबसे बड़ा मानव समागम कहा जाता है, हिंदू धर्म के लिए एक अत्यंत पवित्र आयोजन है। हर बारह वर्षों में आयोजित होने वाला यह महायोगिक समागम गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर लाखों श्रद्धालुओं को स्नान एवं आस्था के महासंगम का साक्षी बनाता है। हालांकि, इस बार 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या) के दिन एक दुर्भाग्यपूर्ण भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और सैकड़ों श्रद्धालु घायल हो गए। इस कठिन समय में, प्रयागराज के मुस्लिम समुदाय ने अपनी सद्भावना और मानवता का परिचय देते हुए जरूरतमंदों की मदद के लिए अपने घरों, मस्जिदों और दरगाहों के दरवाजे खोल दिए। भगदड़ से प्रभावित 25,000 से अधिक तीर्थयात्रियों को जॉर्ज टाउन, नक्खास कोहना, खुल्दाबाद, बहादुरगंज और जानसेनगंज रोड जैसे इलाकों की मस्जिदों, दरगाहों और इमामबाड़ों में शरण दी गई। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न केवल जरूरतमंदों को आश्रय दिया, बल्कि उनके लिए भंडारे (सामूहिक भोजन वितरण) का आयोजन भी किया। इनमें हलवा-पूरी, चाय, पानी और फलाहार जैसी व्यवस्थाएँ प्रमुख थीं, जिससे थके-मांदे श्रद्धालुओं को राहत मिली। यह सिर्फ एक सेवा कार्य नहीं था, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का एक जीवंत प्रमाण भी था, जो सदियों से इस देश में भाईचारे और मेल-जोल की भावना को पोषित करता आया है। इंसानियत और भाईचारे की मिसाल इस अवसर पर कई ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण सामने आए, जिन्होंने दिखाया कि धर्म के नाम पर विभाजन की राजनीति कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन आम भारतीय लोगों की मानवीयता और सहिष्णुता हमेशा विजयी होती है। बहादुरगंज के निवासी इरशाद ने भावुक होकर कहा, “ये हमारे मेहमान थे, उनकी पूरी देखभाल करना हमारा कर्तव्य था।” वहीं, अपना चौक के शिक्षक मसूद अहमद ने कहा, “मुसलमानों ने कोई उपकार नहीं किया, बल्कि यह हमारा धार्मिक और नैतिक कर्तव्य था कि हम हिंदू श्रद्धालुओं की सहायता करें ताकि वे अपने धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण कर सकें।” सबसे प्रेरणादायक उदाहरणों में से एक रहा फरहान आलम का, जिन्होंने एक 35 वर्षीय श्रद्धालु राम शंकर की जान बचाई। राम शंकर को दिल का दौरा पड़ा था, लेकिन फरहान ने बिना समय गंवाए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देकर उनकी जान बचा ली। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। फरहान का यह साहसिक और निःस्वार्थ कार्य भारतीय समाज में मानवता और परस्पर सहयोग की सुदृढ़ भावना को उजागर करता है। अन्य प्रेरणादायक घटनाएँ महाकुंभ मेला 2025 में बुलंदशहर के मुसलमानों ने भी भाईचारे की मिसाल पेश की। वहाँ के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बन्ने शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाकर कुंभ के श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंगलकामना के लिए विशेष प्रार्थनाएँ कीं। वहीं, प्रयागराज में मुस्लिम भाईयों ने तीर्थयात्रियों का स्वागत फूलों और रामनामी अंगवस्त्र भेंट कर किया। यह एक ऐसा दृश्य था जिसने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की मूल आत्मा भाईचारे, आपसी सम्मान और सांस्कृतिक सौहार्द में निहित है। इसके अलावा, वसीउल्लाह मस्जिद के इमाम और स्थानीय लोगों ने रोशन बाग पार्क में तीर्थयात्रियों के लिए भोजन और पानी वितरण केंद्र स्थापित किया। यह पहल केवल एक सेवा कार्य नहीं थी, बल्कि इस्लाम की करुणा और सेवा भावना का प्रतीक भी थी। प्रोफेसर वी.के. त्रिपाठी: सौहार्द के संदेशवाहक इस मेले में प्रोफेसर वी.के. त्रिपाठी का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने नफरत और भेदभाव को समाप्त करने का संदेश देते हुए हजारों लोगों के बीच शांति और सौहार्द के पर्चे बाँटे। उनका यह प्रयास दर्शाता है कि अगर समाज में कुछ लोग नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं, तो उससे कहीं अधिक लोग प्रेम और एकता का संदेश फैलाने में लगे हुए हैं। गंगा-जमुनी तहजीब की पुनर्स्थापना महाकुंभ मेला 2025 ने यह दिखाया कि कुछ लोग भले ही राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को विभाजित करने की कोशिश करें, लेकिन भारत की असली ताकत इसके आम नागरिकों की एकता, प्रेम और सेवा भावना में ही निहित है। मुस्लिम समुदाय की उदारता, फरहान आलम की बहादुरी और प्रोफेसर त्रिपाठी का शांति संदेश – यह सभी घटनाएँ भारतीय समाज के मूलभूत मूल्यों की याद दिलाती हैं। भारत हमेशा से ही विविधता में एकता का प्रतीक रहा है। सिखों द्वारा लंगर सेवा, हिंदुओं द्वारा मुस्लिम त्योहारों में भागीदारी और मुसलमानों द्वारा कुंभ श्रद्धालुओं की मदद – ये सभी उदाहरण दिखाते हैं कि जब बात मानवता की आती है, तो धर्म, जाति और भाषा की सीमाएँ महत्वहीन हो जाती हैं। महाकुंभ मेला 2025 को सिर्फ एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि भारत के बंधुत्व, सहिष्णुता और सामाजिक समरसता के उत्सव के रूप में भी याद किया जाएगा। ऐसे समय में जब हिंसा और कट्टरता के बीज बोने की कोशिशें हो रही हैं, प्रयागराज की जनता ने दिखा दिया कि असली धर्म दया, करुणा और सहयोग में निहित है। भारत एक ऐसा देश है जिसने विविध संस्कृतियों को आत्मसात कर अपने समाज को मजबूत बनाया है और यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी। महाकुंभ मेला 2025 न केवल आस्था का महापर्व था, बल्कि यह एक संदेश भी था कि जब दुनिया में नफरत बढ़ रही हो, तब प्रेम और भाईचारे की लौ को जलाए रखना ही सच्चा धर्म और सच्ची मानवता है। (लेखक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व सामाजिक मामलों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।)