नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि

नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि

 नई दिल्ली – हिंदी बाल-पत्रकारिता जगत के लिए अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। लोकप्रिय बाल पत्रिका लोटपोट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले वरिष्ठ प्रकाशक पी. के. बजाज का निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी प्रख्यात कार्टूनिस्ट एवं ‘मोटू पतलू’ के सर्जक डॉ. हरविंदर मांकड़ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से साझा की।
डॉ. मांकड़ ने भावुक शब्दों में लिखा कि आज मन भारी है और शब्द साथ नहीं दे रहे। उन्होंने बताया कि पी. के. बजाज ने अपने पूज्य पिता ए. पी. बजाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ‘लोटपोट’ और मायापुरी जैसी पत्रिकाओं को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में ये पत्रिकाएं पाठकों के बीच सबसे अधिक पढ़ी और सराही जाने वाली पत्रिकाओं में शामिल रहीं।
नए रचनाकारों के संरक्षक थे बजाज जी
डॉ. मांकड़ के अनुसार, पी. के. बजाज केवल एक प्रकाशक नहीं थे, बल्कि वे प्रतिभाओं को पहचानने वाले साधक थे। नए रचनाकारों को अवसर देना, उनकी प्रतिभा पर विश्वास करना और उन्हें आगे बढ़ाने का साहस देना उनकी कार्यशैली का स्वाभाविक हिस्सा था।
उन्होंने बताया कि उनका बजाज जी से 47 वर्षों का आत्मीय संबंध रहा। उनके जीवन की पहली बड़ी पहचान ‘मोटू पतलू’ को प्रकाशित करने का श्रेय भी बजाज जी को ही जाता है। आज यह किरदार घर-घर में मुस्कुराहट बाँट रहा है तो उसमें बजाज जी का विश्वास, आशीर्वाद और दूरदर्शिता शामिल है।
संघर्ष में देखा संभावना, अनजान को दी पहचान
डॉ. मांकड़ ने अपने संदेश में लिखा कि जब वे संघर्ष के दौर में थे, तब बजाज जी ने उनमें संभावना देखी। जब वे अनजान थे, तब उन्होंने पहचान दी। हर मोड़ पर उन्होंने संबल और हौसला प्रदान किया।
उनके निधन से बाल साहित्य, कॉमिक्स और पत्रिका प्रकाशन जगत में शोक की लहर है। ‘लोटपोट’ का हर पन्ना, हर मुस्कुराता चेहरा और हर छपी हुई रेखा मानो उन्हें नमन कर रही है।
ईश्वर से प्रार्थना की जा रही है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों व शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
सेलिब्रिटी क्लब ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।