न्याय के मंदिर में बाल श्रम का आरोप: न्यायालय परिसर में शौचालय निर्माण में बच्चों से काम कराने की शिकायत, पुलिस जांच में जुटी

जशपुर/कुनकुरी 10/04/2026 – न्याय का प्रतीक माने जाने वाले न्यायालय परिसर में ही बाल श्रम का गंभीर आरोप सामने आने से हड़कंप मच गया है। कुनकुरी स्थित व्यवहार न्यायालय परिसर के अंदर शौचालय निर्माण कार्य में कथित तौर पर बाल श्रमिकों से काम कराए जाने की शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार कुनकुरी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विष्णु कुलदीप ने इस संबंध में कुनकुरी थाने में फोन के जरिए शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि न्यायालय परिसर के अंदर चल रहे शौचालय निर्माण कार्य में नाबालिग बालकों से मजदूरी कराई जा रही है, जो कानूनन अपराध है।
शिकायत मिलते ही पुलिस टीम व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित निर्माण स्थल पर पहुंची और वहां काम करवा रहे ठेकेदार के मैनेजर को पूछताछ के लिए थाने ले गई। पुलिस ने मौके पर मौजूद बालकों से भी उनकी उम्र और पहचान संबंधी जानकारी ली।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट विष्णु कुलदीप ने मीडिया से चर्चा में कहा कि न्यायालय परिसर, न्याय का मंदिर कहा जाता है, वहां बच्चों से जोखिम भरे निर्माण कार्य कराना बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने तीन बालकों के नाम बताते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। यदि विधिसम्मत कार्रवाई नहीं होती है तो इस पर बार एसोसिएशन कड़ी आपत्ति दर्ज कराएगा। साथ ही अध्यक्ष ने कोर्ट के प्रवेश द्वार के बगल में मिट्टी डंप करने पर भी आपत्ति उठाई है।

इधर पुलिस पूछताछ में कथित बाल श्रमिकों में से दो युवकों ने अपनी उम्र 18 वर्ष बताई है, जबकि एक ने स्वयं को नाबालिग बताया है। बालिग बताने वाले आयुष तिर्की ने पुलिस को अपना आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया है, जबकि दूसरे युवक का आधार कार्ड मंगाया गया है। वहीं एक बालक ने अपनी उम्र 16 वर्ष बताई है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है।
बाल श्रम अधिनियम के तहत क्या हो सकती है कार्रवाई
भारत में बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक या जोखिम भरे कार्यों में लगाना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि नाबालिग से निर्माण कार्य कराया गया है, तो ठेकेदार या जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें—
*6 महीने से 2 साल तक की जेल*
*20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना*
*या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती है।*
साथ ही संबंधित बालक को श्रम विभाग के माध्यम से संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया में भी शामिल किया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दस्तावेजों के आधार पर बालकों की वास्तविक उम्र की पुष्टि की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।




















