*मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने बचाई जान: आर्थिक सहायता से रामविलास पाठक की सफल हार्ट सर्जरी*

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*रायपुर, 10 सितम्बर 2024* – छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण ने एक बार फिर से एक परिवार को नई उम्मीद और जीवन की सौगात दी है। बालोद जिले के दल्लीराजरा निवासी  रामविलास पाठक, जिन्हें इस वर्ष जून माह में अचानक दिल का दौरा पड़ा था, अब स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। यह संभव हो पाया मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत मिली आर्थिक मदद से, जिसने रामविलास पाठक की हार्ट सर्जरी का खर्च उठाया। श्री पाठक के परिवार के लिए यह एक बहुत ही कठिन समय था। जब उनके दिल की जटिल स्थिति का पता चला और डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी, तो परिवार की आर्थिक स्थिति ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। 5 लाख रुपये का खर्च परिवार के लिए असंभव था। लेकिन ऐसे कठिन समय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सहायता ने एक किरण बनकर परिवार को राहत दी। श्री रामविलास पाठक के बेटे रजनीश कुमार ने बताया, “हमारी संयुक्त परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि हम पिताजी की सर्जरी का खर्च उठा सकें। हमने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। परंतु, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के बारे में पता चलने के बाद, हमें एक नई आशा मिली।” श्री रजनीश ने अपने पिताजी के इलाज का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री निवास पहुँचकर मदद की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री श्री साय ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की। उनके हस्तक्षेप से 5 लाख 29 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई, जिससे एम्स रायपुर में रामविलास पाठक की सफल सर्जरी हो पाई। आज, श्री पाठक पूर्णतः स्वस्थ हैं और अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी जीवन बिता रहे हैं। उनका परिवार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त करता है। परिवार ने कहा, “मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता ने हमारे परिवार में एक पिता, पति और दादा को नया जीवन दिया है।” श्री साय के इस संवेदनशील और सहायक रवैये ने एक बार फिर साबित किया है कि उनका शासन केवल नीतिगत निर्णयों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें एक मानवीय पक्ष भी है, जो जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति रखता है।

शिक्षक दिवस विशेष – पढ़ाई के साथ चूल्हा भी सम्हाल रहे हैँ शिक्षक,पहाड़ी कोरवा बाहुल्य सिहारडांड में उजागर हुई संकुल की बड़ी लापरवही,

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  ( सोनू जायसवाल की रिपोर्ट ) जशपुर –  जी हाँ,आप ठीक पढ़ रहे हैँ, जिले में एक स्कूल ऐसा भी है जहां शिक्षक किताबों के साथ स्कूल का चूल्हा – चौका भी सम्हालते हैँ ताकि स्कूली बच्चो को ज्ञान और मध्यान भोजन दोनों मिलता रहे। मामला जिले के बगीचा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कलिया के सिहारडांड पूर्व माध्यमिक स्कूल का है। इस स्कूल में निर्धारित समय पर स्कूल पहुंचने के साथ ही प्रधान पाठक सहित सारे शिक्षक मध्यान भोजन के लिए लकड़ी जुटाने के साथ अनाज को साफ करने और इसे पकाने की व्यवस्था करने में जुट जाते हैं। बीते 6 माह से यह काम निरंतर चला आ रहा है। इससे शिक्षकों को परेशानी तो हो रही है,लेकिन बच्चों की भूख और स्वास्थ्य को बनाएं रखने के लिए सभी शिक्षक मिल कर मध्यान भोजन पका कर खिलाने का आदर्श प्रस्तुत कर रहें हैं। यहां के प्रधान पाठक नारायण राम यादव ने बताया कि सितम्बर 2023 में बीमारी के कारण स्कूल में पदस्थ रसोईया की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से ही यह पद रिक्त है। उन्होनें बताया कि स्कूल में चालू शिक्षा सत्र में 33 बच्चे अध्ययनरत हैं। रसोईया के अभाव में बच्चों को मध्यान भोजन से वंचित करना ठीक नहीं था। इसलिए उन्होनें संस्था में पदस्थ शिक्षकों से चर्चा की। सबने मिल कर निर्णय किया कि जब तक रसोईया की नियुक्ति नहीं हो जाती है,सब मिल कर बच्चों के लिए मध्यान भोजन तैयार करेगें। स्कूल पहुंचने के साथ ही शिक्षक मध्यान भोजन की तैयारी में जुट जाते हैं। प्रधानपाठक ने बताया कि जिस शिक्षक का पिरीयड खाली होता है,वह अनाज को साफ करने,सब्जी काटने और चुल्हा जलाने के काम में सहयोग करते हैं। सब मिल कर बच्चों के लिए मध्यान भोजन पकाते हैं और उन्हें खिलाते है। प्रायः देखा जाता है कि रसोईया ना होने या कोई और समस्या होने पर शिक्षक रसोई बंद कर देते हैं,जिससे अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। बच्चे और अभिभावक इसकी शिकायत लेकर उच्च अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के पास पहुंच जाते हैं। शिक्षक दिवस पर ऐसे सेवाभावी शिक्षकों को खबर जनपक्ष का बारम्बार प्रणाम। प्रधान पाठक नारायण राम यादव ने कहा कि मध्यान भोजन संचालित करने में संस्था के सभी षिक्षकों का योगदान सराहनीय है। उन्होनें बताया कि रसोईया की नियुक्ति को लेकर वे पंचायत के साथ विभागिय अधिकारियों से लगातार संपर्क कर रहें हैं,उम्मीद है कि जल्द ही नियुक्ति हो जाएगी।

*राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह कुछ ही देर में* *प्रदेश के महान साहित्यकारों के नाम पर 3 शिक्षकों को स्मृति पुरस्कार* *52 राज्यपाल शिक्षक सम्मान से होंगे सम्मानित*

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रायपुर – शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में 05 सितंबर 2024 को प्रातः 11 बजे से राजभवन के दरबार हॉल में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे। शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में 55 शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें से 52 शिक्षक राज्यपाल शिक्षक सम्मान और 3 शिक्षकों को प्रदेश के महान साहित्यकारों के नाम पर राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। *राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार वर्ष 2024* शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह में प्रदेश के तीन महान साहित्यिक विभूतियों के नाम पर तीन शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान से नवाजा जाएगा। इनमें बिलासपुर जिले की व्याखाता डॉ. रश्मि सिंह धुर्वे को ’’डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बक्शी स्मृति पुरस्कार’’, कबीरधाम जिले के शिक्षक री राजर्षि पाण्डेय को ’’डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार’’, दुर्ग जिले की उच्च वर्ग शिक्षक डॉ. श्रीमती सरिता साहू को ’’डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार’’ प्रदान किया जाएगा। *राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार वर्ष 2023-24* राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार वर्ष 2023-24 से सम्मानित होने वाले 52 शिक्षकों में दंतेवाड़ा जिले की व्याख्याता श्रीमती नेहा नाथ और शिक्षक एलबी कुमारी माधुरी उके, सरगुजा जिले की प्रधान पाठक कुमारी मधु सोनवानी और व्याख्याता श्रीमती नीतु सिंह यादव, सूरजपुर जिले की व्याख्याता एलबी श्रीमती रीता गिरी और प्रधान पाठक कुमारी विनिता सिंह, बालोद जिले के व्याख्याता एलबी धमेंन्द्र कुमार और व्याख्याता डॉ. भरतलाल साहसी, जशपुर जिले के व्याख्याता एलबी  टुमनु गोसाई और अयोध किशोर गुप्ता, सुकमा जिले की प्रधान पाठक श्रीमती जयमाला और हपका मुत्ता, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के सहायक शिक्षक नीलकंठ कोमरे और अंगद सलामें, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की सहायक शिक्षक श्रीमती स्वप्निल सिंह पवार और शिक्षक एलबी अर्चना सामुएल मसीह, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के व्याख्याता एलबी श्री मानस साहू और सहायक शिक्षक एलबी श्री महादीप जंघेल, उत्तर बस्तर कांकेर जिले के व्याख्याता श्री सेवक राम निषाद और व्याख्याता एलबी श्री पवन कुमार सेन, कोण्डागांव जिले की व्याख्याता श्रीमती तनुजा देवांगन और उच्च श्रेणी शिक्षक श्रीमती सरस्वती नाग, कोरिया जिले की सहायक शिक्षक एलबी श्रीमती श्वेता सोनी और श्रीमती अर्पणा मिश्रा, राजनांदगांव जिले के व्याख्याता एलबी श्री गोकुल दास जंघेल और श्री जयप्रकाश साहू के नामों की विधिवत् घोषणा की। राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार 2023 के लिए चयनित शिक्षकों में नारायणपुर जिले की शिक्षक एलबी श्रीमती कविता हिरवानी और व्याख्याता एलबी श्रीमती लता मानिकपुरी, जांजगीर-चांपा जिले के व्याख्याता एलबी दिनेश कुमार चतुर्वेदी और सहायक शिक्षक एलबी  कामता प्रसाद सिंह, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सहायक शिक्षक एलबी सुनिता यादव और व्याख्याता श्री पूनम सिंह साहू, बेमेतरा जिले की सहायक शिक्षक एलबी सुश्री हिमकल्याणी और व्याख्याता एलबी  भुवनलाल साहू, महासमुंद जिले के व्याख्याता प्रमोद कुमार कन्नौजे और व्याख्याता एलबी शैलेन्द्र कुमार नायक, बलरामपुर जिले के शिक्षक  श्याम कुमार गुप्ता और प्रधान पाठक विनोद कुमार पंथ, मुंगेली जिले के शिक्षक एलबी डॉ. सत्यनारायण तिवारी और प्रधान पाठक  जितेन्द्र गेंदले, गरियाबंद जिले के सहायक शिक्षक एलबी  डिगेश्वर कुमार साहू और उच्च श्रेणी शिक्षक किशोर कुमार निर्मलकर, धमतरी जिले की व्याख्याता एलबी श्रीमती ज्योति मगर और डॉ. आशीष नायक, रायगढ़ जिले की प्रधान पाठक डॉ. मनीषा त्रिपाठी और सुशील कुमार गुप्ता, कोरबा जिले के व्याख्याता भुपेन्द्र कुमार राठौर और सहायक शिक्षक श्रीमती वसुंधरा कुर्रे, जगदलपुर जिले की व्याख्याता श्रीमती मीरा हिरवानी और मोहम्मद अकबर खान, बीजापुर जिले के प्रधान पाठक पवन कुमार सिन्हा और शिक्षक एलबी  ककेम नारायण के नाम शामिल हैं।

खबर का असर: कमिश्नर ने आत्मानन्द स्कूल के प्रिंसिपल को किया निलंबित, आदेश जारी कर कमिश्नर ने डीईओ ऑफिस में उवस्थिति देने का दिया आदेश,

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जशपुर(कुनकुरी) – 28 अगस्त 2024 को स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दो छात्रों की पिटाई के मामले को सबसे पहले खबर जनपक्ष ने प्रमुखता से उठाया।जिसका असर हुआ कि कमिश्नर सरगुजा ने आज प्रिंसिपल इकबाल खान को निलंबित कर दिया। कमिश्नर ने अपने निलंबन आदेश में प्रिंसिपल पर बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के दूसरे स्कूल के छात्र को प्रवेश देना,नियम विरुद्ध बताया है। आदेश की प्रति देखें

*वक्फ बोर्ड सुधार: एक मुस्लिम महिला की आवाज से सशक्त होगा समुदाय*

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  हालांकि सरकार के प्रस्तावित संशोधन सही दिशा में एक कदम हैं, फिर भी वक्फ बोर्डों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए और कदम उठाए जा सकते हैं। निर्मल कुमार (लेखक अंतर्राष्ट्रीय समाजिक,आर्थिक मामलों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।) वक्फ बोर्ड, जो 1995 के वक्फ अधिनियम के तहत स्थापित किए गए थे, का उद्देश्य इस्लामी कानून के अनुसार धार्मिक, परोपकारी, और पवित्र उद्देश्यों के लिए संपत्तियों का प्रबंधन और सुरक्षा करना था। हालांकि, हाल के वर्षों में इन बोर्डों की शक्तियों के दुरुपयोग, पारदर्शिता की कमी, और प्रबंधन में असफलता को लेकर आलोचना की गई है। इसके चलते सुधार की मांग उठी है, और सरकार ने इन मुद्दों को सुलझाने के लिए वक्फ अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए हैं। ये संशोधन सरकार की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाते हैं, जो लंबे समय से उठे हुए मुद्दों को हल करने और सचर समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए वक्फ बोर्डों का दायरा बढ़ाने की दिशा में है। वर्तमान वक्फ बोर्डों की एक मुख्य समस्या उनकी “असीमित शक्तियाँ” हैं, जो उन्हें बिना उचित निगरानी या सत्यापन के किसी भी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित करने की अनुमति देती हैं। इस कारण से वक्फ बोर्डों द्वारा संपत्ति हड़पने और वक्फ अधिनियम के प्रावधानों का दुरुपयोग करने की कई शिकायतें मिली हैं। कुछ मामलों में बोर्डों ने याचिकाकर्ताओं को न्यायपालिका से न्याय प्राप्त करने से भी रोका है, जिससे कानून का उल्लंघन हुआ है। संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया में उचित सत्यापन की कमी और मनमाने ढंग से संपत्तियों को वक्फ घोषित करना आम जनता और विभिन्न मुस्लिम समुदायों में असंतोष को बढ़ा रहा है। इन चिंताओं के जवाब में, सरकार ने वक्फ अधिनियम में संशोधन के कई प्रस्ताव दिए हैं, जिनका उद्देश्य जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना है। इन संशोधनों में केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों की संरचना को पुनर्गठित करने का प्रावधान है ताकि बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके, जिसमें महिलाओं का अनिवार्य समावेश भी शामिल है। एक महत्वपूर्ण संशोधन में यह प्रावधान है कि किसी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित करने से पहले उसका अनिवार्य सत्यापन किया जाएगा। यह मनमाने और अनुचित घोषणाओं को रोकने के लिए किया गया है, जो विवाद और दुरुपयोग का कारण बने हैं। प्रस्तावित बदलावों में विवादित संपत्तियों की न्यायिक जांच का प्रावधान भी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें उचित और पारदर्शी तरीके से वक्फ संपत्ति घोषित किया जाए। इसके अलावा, विधेयक में उन धाराओं को निरस्त करने का प्रावधान है जो बोर्डों को अत्यधिक शक्तियाँ देती हैं, जिससे उनके द्वारा इन शक्तियों के दुरुपयोग को रोका जा सके। ये संशोधन वक्फ बोर्डों के कामकाज को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। सरकार ने इन सुधारों के लिए मुस्लिम बुद्धिजीवियों और संगठनों से सुझाव भी प्राप्त किए हैं। हालांकि सरकार के प्रस्तावित संशोधन सही दिशा में एक कदम हैं, फिर भी वक्फ बोर्डों की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए और कदम उठाए जा सकते हैं। सभी वक्फ संपत्तियों के लिए एक डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग सिस्टम लागू कर पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है। इन रिकॉर्डों तक जनता की पहुँच होने से ज्यादा निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। एक स्वतंत्र निगरानी समिति की स्थापना, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, सामुदायिक नेता, और सरकारी प्रतिनिधि शामिल हों,जो वक्फ बोर्डों की गतिविधियों की निगरानी कर सकती है और कानून का पालन सुनिश्चित कर सकती है। यह वक्फ बोर्ड के सदस्यों और कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम करते हुए उनके कानूनी, वित्तीय, और प्रशासनिक पहलुओं की समझ को सुधार सकता है, जिससे वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन हो सके। स्थानीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन समुदाय की जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप हो। सरकार द्वारा केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में महिलाओं के अनिवार्य समावेश के प्रस्ताव के अलावा, इन भूमिकाओं में महिलाओं को सशक्त और समर्थन करने के लिए विशेष कार्यक्रम और पहल बनाना महत्वपूर्ण होगा। इसमें नेतृत्व प्रशिक्षण, मेंटरशिप कार्यक्रम और यह सुनिश्चित करना कि महिलाओं को वक्फ प्रबंधन के सभी पहलुओं में भाग लेने के बराबर अवसर मिलें, शामिल हो सकते हैं। प्रस्तावित संशोधनों ने मुस्लिम महिलाओं की आवाज को सशक्त किया है, वक्फ बोर्डों में मुस्लिम महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करके उनकी सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाया है। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में महिलाओं का समावेश लैंगिक समानता और समावेशी निर्णय-निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इन सुधारों के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपाय भी महत्वपूर्ण हैं, ताकि वक्फ प्रणाली में विश्वास बहाल हो सके और यह निष्पक्ष और न्यायपूर्ण ढंग से संचालित हो, जिससे हमारे समाज के सभी सदस्यों को लाभ हो।

छात्रों की लड़ाई में पिसता प्रिंसिपल,आत्मानन्द में हुई मारपीट के पीछे की सच और साजिश की क्या है कहानी?

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जशपुर/कुनकुरी – बीते 28 अगस्त को स्वामी आत्मानन्द विशिष्ट अंग्रेजी मीडियम हाईस्कूल कुनकुरी में छात्रों के बीच हुई मारपीट के मामले में पड़ी धुंध हटती जा रही है।पुलिसिया और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच खबर जनपक्ष को ऐसी जानकारियां मिलीं हैं, जिन्हें पाठकों के सामने रखना जरूरी समझा। क्यों हुई मारपीट? यह बताने से पहले हम छात्रों के बदले हुए नाम से सच्ची कहानी बताते हैं – इसमें चांद,सूरज और पृथ्वी तीन किरदार हैं।दरअसल,उस दिन और दिनों की तरह पढाई चल रही थी।रेसिस टाईम में करीब 10:10 बजे सुबह चांद और सूरज के बीच छात्र चुनाव को लेकर बहस होने लगी।जिसमें बात बढ़ते-बढ़ते हाथापाई पर उतर आई।पृथ्वी ने बताया कि सबसे पहले सूरज ने चांद के चेहरे पर मुक्का मारा,फिर चांद ने मुक्का मारा जो सूरज को नहीं लगा,दुबारा मुक्का मारा जो सूरज के कान के पीछे पड़ा,जिससे सूरज के सिर से खून बहने लगा।चांद ने फाइटर से मारा हालांकि चांद का कहना है पृथ्वी पूरा सच नहीं बता रहा है,मैंने अंगूठी पहनी थी,जिससे सूरज को चोट लगी है।खून निकलता देख सूरज का दोस्त पृथ्वी अपने दो-तीन दोस्तों के साथ बीच-बचाव किया।तब तक स्कूल के टीचर दीपक यादव, वाइस प्रिंसिपल चौहान स्टेज के पीछे हो-हल्ला सुनकर पहुंचे।उन्होंने घायल सूरज को अस्पताल पहुंचाया।जहां सिर में टांके लगने के बाद सूरज वापस स्कूल आ गया। घटना के समय प्रिंसिपल इकबाल खान कहाँ थे? इस घटना के दौरान स्कूल के प्रिंसिपल इकबाल खान आवश्यक बैठक में जशपुर कलेक्ट्रेट में थे।जैसे ही उन्हें पता चला वे बैठक से निकल गए।तब तक इधर मामला थाने तक जा पहुंचा।सूरज अपने साथियों के साथ थाने में और चांद सीधे घर।प्रिंसिपल सीधे थाने पहुंचे और घायल सूरज से मिले।मामला सुलझाने और समझौता करने-कराने की बात पर समय निकलता गया।छात्रों की लड़ाई में दो समुदाय का तड़का लगते ही एफआईआर हो गया।माहौल में गर्मी बढ़ता देख प्रिंसिपल इकबाल घर चले गए क्योंकि चांद तो उनका ही बेटा था।दूसरे दिन इस बात पर चिल्लम-चिल्ली होती रही कि चांद ने फाइटर से मारकर सिर फोड़ा है या चांद की अंगूठी से लगकर सूरज को गहरी चोट आई है। कलेक्टर के निर्देश पर जांच फिर प्रिंसिपल पर गिरी गाज मामला सुर्खियों में आने के बाद जिला शिक्षाधिकारी पी.के.भटनागर ने स्कूल में एक जांच टीम भेजी।जांच टीम ने सम्बंधित पक्षों उनके पालकों, शिक्षकों और छात्रों के बयान लिए और प्रतिवेदन बनाकर डीईओ श्री भटनागर को सौंप दिया गया।डीईओ ने इसे कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के समक्ष प्रशासनिक कार्यवाही के लिए रखा।जिसका अवलोकन करने के बाद इस घटना में प्रिंसिपल की घोर लापरवाही पाई गई।जिसमें प्रमुख कारण यह माना गया कि अपने स्कूल में सक्षम प्राधिकारी के बिना अनुमति बाहरी स्कूल के 2 छात्रों को प्रवेश दिया गया।तीन दिन का समय देकर कारण बताओ नोटिस प्रिंसिपल को दिया गया। कैसा रहा है प्रिंसिपल इकबाल खान का शिक्षकीय व प्रशासकीय सफर? एक नजर —– 1988 से अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत करनेवाले इकबाल अहमद खान नारायणपुर थाना अंतर्गत दाराखरिका गांव से आते हैं।इनके बारे में जब हमने जानकारी जुटानी शुरू की तो 36 वर्षों के शिक्षकीय,गैर शिक्षकीय व प्रशासनिक कार्यों में बेदाग रहे।ये राज्यपाल, मुख्यमंत्री व जिला कलेक्टरों द्वारा 2021 से अब तक अपनी कुशल अध्यापन व प्रशासनिक दक्षता से सम्मानित होते आये हैं।इन्होंने मानवता की मिसाल पेश करते हुए 3 नवम्बर 2013 को खेत से लौटते हुए एक बेसुध वृद्ध महिला को देखा,जिसके पैर में बड़ा घाव जिसमें कीड़े रेंग रहे थे।इकबाल उसे अपने घर ले गए और सेवा करने लगे।घाव से कीड़े खुद साफ करते,खाना खिलाते।इसका घर में विरोध भी हुआ लेकिन उन्होंने उसकी सेवा करते हुए उसे ठीक कर दिया।वृद्ध महिला की याददाश्त चली गई थी तो वह इकबाल को ही अपना बेटा मानकर घर में ही रही। सरबकोम्बो हाईस्कूल में प्रिंसिपल के पद पर रहते हुए अपने भाई सुल्तान से 51,000/- रुपये दान में लेकर छात्रों के लिए सायकिल स्टैंड बनवाया।वहीं हाईस्कूल के लिए रास्ते के लिए जनप्रतिनिधियों से बार-बार मांग कर रास्ता तैयार कराया।वर्ष 2022 में राज्य शासन से इन्हें प्रतिनियुक्ति में स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्ट अंग्रेजी विद्यालय का प्रिंसिपल बनाया।आत्मानन्द स्कूल के शिक्षकों ने इनके कार्यकाल को अनुशासन व अध्ययन-अध्यापन के लिए स्वर्णिम काल बताया है।वहीं 28 तारीख की घटना के बाद प्रिंसिपल खान के स्थानान्तरण की आशंका से कई विद्यार्थी और उनके अभिभावकों में निराशा है और अब बीच सत्र में ही टीसी लेकर दूसरे स्कूलों में जाने का मन बना रहे हैं। बहरहाल, दो छात्रों की लड़ाई में गैरहाजिर रहे प्रिंसिपल इकबाल खान पिसते नजर आ रहे हैं।जानकारों की मानें तो जब संकल्प कोचिंग के छात्र दूसरे स्कूल के छात्र हो सकते हैं तो प्रिंसिपल के बेटे-भतीजे अनुमति लेकर दूसरे स्कूल में पढ़ रहे हैं तो इसमें इतना बवाल क्यों? अब देखना होगा कि जो आरोप उनके ऊपर लगे हैं वो कितना सही है।

*खेल अलंकरण समारोह में सुश्री एलिजाबेथ बेक को मिला शहीद पंकज विक्रम सम्मान*

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*जशपुरनगर, 30 अगस्त 2024*: राज्य के खेल जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, जशपुर जिले की सायकलिस्ट सुश्री एलिजाबेथ बेक को शहीद पंकज विक्रम सम्मान 2022-23 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें साइक्लिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर दिया गया है। राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस राज्य खेल अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हाथों से कुल 502 प्रतिभावान खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया गया और 01 करोड़ 36 लाख रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई। सुश्री एलिजाबेथ बेक, जो जशपुर जिले के बगीचा तहसील के महादेवडांड (दर्रीटोली) गांव की निवासी हैं, 2015 से साइक्लिंग में सक्रिय हैं और अब तक विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 7 मेडल जीत चुकी हैं। उन्होंने पुणे, केरल, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, गुजरात और गोवा जैसी जगहों पर आयोजित नेशनल गेम्स और प्रतियोगिताओं में अपने कौशल का प्रदर्शन किया है। सम्मान प्राप्त करने के बाद, सुश्री बेक ने मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें आगे भी राज्य का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करेगा। उनकी इस उपलब्धि पर जशपुर जिले के कई गणमान्य व्यक्तियों, जैसे जिला हॉकी संघ के अध्यक्ष वाल्टर कुजूर, उपाध्यक्ष संतोष चौधरी, डॉ. पी.सी. कुजूर, नवीन रोशन बेक, ज्योति प्रकाश लकड़ा, डेविड कुजूर, अभय मिंज और प्रेस क्लब जशपुर के उपाध्यक्ष दीपक सिंह, संजीत यादव ने उन्हें बधाई दी। खेल अलंकरण समारोह में 2021-22 और 2022-23 के लिए कुल 97 पुरस्कारग्राही खिलाड़ियों को 76 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई, जबकि पदक विजेता 502 खिलाड़ियों के बैंक खातों में 60.33 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इस अवसर पर शहीद राजीव पांडेय, शहीद कौशल यादव, वीर हनुमान सिंह, शहीद पंकज विक्रम, शहीद विनोद चौबे सम्मान और मुख्यमंत्री ट्रॉफी सहित विभिन्न पुरस्कार भी प्रदान किए गए। कुल मिलाकर खिलाड़ियों को 01 करोड़ 36 लाख 33 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई।

**जशपुर की बेटी अर्चना बुनकर ने कूडो चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक, नेशनल में बनाई जगह**

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जशपुर/मनोरा:छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग में आयोजित 4th छत्तीसगढ़ स्टेट कूडो ट्रेनिंग सेमिनार एवं 3rd छत्तीसगढ़ स्टेट कूडो टूर्नामेंट 2024-2025 में जशपुर जिले की ग्राम मनोरा की बेटी अर्चना बुनकर ने कांस्य पदक जीतकर अपने जिले का नाम रोशन किया है। यह प्रतियोगिता 20 से 24 अगस्त तक स्वामी विवेकानंद हॉल में आयोजित की गई थी, जिसमें छत्तीसगढ़ के 21 जिलों के महिला और पुरुष खिलाड़ियों ने भाग लिया। अर्चना बुनकर ने सबजूनियर, जूनियर, और सीनियर वर्ग के विभिन्न वजन श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करते हुए इस पदक को हासिल किया। उनकी इस सफलता ने न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे जशपुर जिले का मान बढ़ाया है। अब अर्चना गुजरात में होने वाले राष्ट्रीय कूड़ो चैंपियनशिप 2024-25 में हिस्सा लेंगी, जहां वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी और अपने राज्य के लिए पदक जीतने का प्रयास करेंगी। बलरामपुर कूड़ो संघ के अध्यक्ष विकास दोहरे, सरगुजा संभाग के सेंसई हेमलाल पनिका, प्रदेश संघ के अध्यक्ष राजा कौशल, और राष्ट्र कूड़ो संघ के हेड कोच सिहान जैस्मिन मकवाना ने अर्चना और अन्य खिलाड़ियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। कूड़ो प्रशिक्षक सेंसई विकास दोहरे ने यह जानकारी साझा की और बताया कि अर्चना की मेहनत और समर्पण ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। **कूड़ो खेल के बारे में:** कूड़ो एक मार्शल आर्ट और स्पोर्ट्स डिसिप्लिन है, जो जापान में उत्पन्न हुआ और इसमें कराटे, जूडो, और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स जैसी तकनीकों का समावेश होता है। इस खेल में खिलाड़ी अपनी मानसिक और शारीरिक ताकत के साथ-साथ तकनीकी कौशल का प्रदर्शन करते हैं। कूड़ो का अभ्यास न केवल आत्मरक्षा के लिए किया जाता है, बल्कि यह शरीर और मन की मजबूती को भी बढ़ावा देता है। छत्तीसगढ़ में कूड़ो खेल धीरे-धीरे लोकप्रियता हासिल कर रहा है, और राज्य के कई युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

युवक कांग्रेस के जेल भरो आंदोलन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोजसागर यादव भी हुए गिरफ़्तार, कुनकुरी में युंकाइयों ने विष्णु सरकार के खिलाफ लगाए नारे

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  जशपुर/कुनकुरी,26 अगस्त 2024 – प्रदेश युवक कांग्रेस के आह्वान पर आज कुनकुरी बस स्टैंड में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी,जेल भेजे जाने के  विरोध में जेल भरो आंदोलन किया गया। मुट्ठीभर युंकाइयो ने विष्णु सरकार के खिलाफ नारे लगाए।बड़े प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए शहर भर में भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया। ज्ञात हो कि बलौदाबाजार हिंसा के बाद पुलिस की कार्रवाई में भिलाई से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव पर सतनामी समाज को उकसाने के मामले में कार्रवाई की गई।जिसमें उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।इसी को लेकर कांग्रेस इन दिनों सड़क पर है।कुनकुरी में जेल भरो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष संजय पाठक ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से तत्काल विधायक देवेंद्र यादव को जेल से रिहा करने की मांग की।कार्यक्रम को पूर्व जिला युंकाध्यक्ष रवि शर्मा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि 8 महीने की सरकार में इतनी हिंसा हो रही है जिसको सम्भालने में मुख्यमंत्री फेल हैं।अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए विष्णु सरकार इस तरीके से अत्याचार कर रही है।जिसका हम सब विरोध कर रहे हैं। बस स्टैंड से कांग्रेसियों ने रैली निकाली और सरकारी अस्पताल,नेशनल हाइवे की ओर जाने की कोशिश करने लगे लेकिन पुलिस के जवानों ने उन्हें रोक किया।फिर रैली तपकरा रोड पर निक्की जिन्हें कुंती लॉज के सामने तिराहे पर डग्गा और बेरिकेट लगाकर रोका गया जहां से प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर डग्गे में डालकर अस्थाई जेल ले जाया गया।जेल भरो आंदोलन में कुल 64 लोगों ने गिरफ्तारी दी।जिसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोजसागर यादव,पूर्व जिला युंकाध्यक्ष रवि शर्मा,वाल्टर कुजूर,शाहस्त्रांशु पाठक,विवेकानंद महंत, नीरज पारीक,अशोक ताम्रकार,इरफान खान सक्रिय रहे।बाद में सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों को मुचलके पर छोड़ा गया।

**राष्ट्रपति से मुलाकात कर लौटी छात्राओं ने की श्रीमती कौशल्या साय से सौजन्य भेंट,श्रीमती साय ने दी बधाई,शुभकामना**

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  *जशपुर, 25 अगस्त 2024* – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर लौटीं शासकीय हाईस्कूल बगिया की दो छात्राएं, रजनी चौहान और रिया साय, ने शनिवार को श्रीमती कौशल्या साय से सौजन्य भेंट की। दोनों छात्राएं कक्षा 9 में पढ़ाई कर रही हैं और हाल ही में रक्षाबंधन के अवसर पर सरगुजा संभाग के पांच छात्राओं के साथ राष्ट्रपति से मिली थीं। श्रीमती कौशल्या साय, जो मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी हैं, ने छात्राओं का स्वागत किया और उन्हें उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उन्होंने छात्राओं को मेहनत और लगन से पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा दी और कहा कि सच्चे मन से किया गया परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता। रजनी और रिया ने श्रीमती साय के साथ अपने दिल्ली यात्रा के अनुभवों को साझा किया, जिसमें राष्ट्रपति से मुलाकात और राजधानी के महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण शामिल था। इस मौके पर शासकीय हाईस्कूल बगिया के प्रिंसिपल,  दिनेश शर्मा भी उपस्थित थे। गौरतलब है कि खेल, संगीत और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर इन छात्राओं का चयन किया गया था, जिसके अंतर्गत सरगुजा संभाग से पांच छात्राएं राष्ट्रपति से मिलने गईं थीं, जिनमें जशपुर जिले से रजनी और रिया का चयन हुआ था।