आतंकवादियों के खातमे तक जारी रहेगा आपरेशन सिंदूर : विष्णुदेव साय,तपती दुपहरी में तिरंगा थाम कर पदयात्रा में निकले सीएम

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जशपुर 18 मई 2025 : ‘ पाकिस्तान प्रायोजित जिन आतंकवादियों ने भारत की माताओ की मांग के सिंदूर पर कुदृष्टि डालने का दुसाहस किया था,भारत के वीर जवानो ने उन्हें ध्वस्त कर दिया है। यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। पाकिस्तान में छुपे बैठे आतंकियों के पुरी तरह से खत्म होने तक यह आपरेशन चलता रहेगा‘। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उक्त बातें कही। सीएम साय शनिवार को कुनकुरी विधान सभा क्षेत्र के चराईडांड में आयोजित तिरंगा यात्रा के बाद आम बगीचा में आयोजित सभा को सम्बोधित कर रहे थे। इससे पहले चराईडांड में स्थित शिव मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। देश भक्ति गानो और भारत माता की जयकारे की गूंज के बीच चिलचिलाती गर्मी में मुख्यमंत्री साय हाथ में तिरंगा झंडा लेकर सैकड़ो लोगो के साथ पदयात्रा करते हुए आम बगीचा पहुँचे। यहां पद यात्रा आम सभा में तब्दील हो गई। आम सभा को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश के दुश्मनो के खिलाफ भारतीय सेना जो भी कार्रवाई कर रही है,पुरी देश की जनता एकजुट हो कर सेना के साथ ख़डी हुई है। उन्होंने कहा कि उरी और पुलवामा में हुई आतंकी घटना के बाद भारतीय सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अपने नापाक हरकतों से बाज आएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 22 अप्रेल को आतंकवादियों ने पहलगाम में 26 सैलानियों की हत्या कर देश को चुनौती दी। जिसका जवाब भारत ने आपरेशन सिंदूर से दिया है। साय ने कहा कि तिरंगा यात्रा एक रैली नहीं यह हम भारतीयों की एकजुटता और दृढ संकल्प का प्रतीक है। तिरंगा गौरव यात्रा में जशपुर विधायक रायमुनी भगत, पूर्व प्रदेश महामंत्री कृष्ण कुमार राय, पूर्व विधायक भरत साय, जिलाध्यक्ष भरत सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष नरेश नंदे, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह,, पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव,  नपा अध्यक्ष अरविंद भगत, उपेन्द्र यादव, गंगा राम भगत, राजकुमार सिंह, संतोष सहाय, राजकुमार गुप्ता, शंकर गुप्ता, रूपेश सोनी, संतोष सिंह, फैज़ान सरवर खान, शरद चौरसिया,शांति भगत, अनिता सिंह, पिंकी गुप्ता, ममता कश्यप, विष्णु गुप्ता सहित हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे।

“ऑपरेशन सिंदूर” की गौरवगाथा को समर्पित तिरंगा यात्रा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रहेंगे शामिल चराईडाँड़ से आम्बाबगीचा तक निकलेगा जनगौरव का सैलाब, सेना की वीरता को मिलेगा सम्मान

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जशपुर,16 मई 2025 सेना के साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतीक “ऑपरेशन सिंदूर” की स्मृति में 17 मई 2025 को सुबह 11 बजे एक ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा चराईडाँड़ मंदिर से शुरू होकर आम्बा बगीचा बाजारडाँड़ तक निकाली जाएगी। इस गौरवमयी कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय श्री विष्णु देव साय स्वयं शामिल होकर वीर जवानों को नमन करेंगे और जनमानस को देशभक्ति के रंग में रंगेंगे। तिरंगा यात्रा का उद्देश्य न केवल भारतीय सेना के अदम्य साहस को जन-जन तक पहुंचाना है, बल्कि राष्ट्रभक्ति, एकता और अखंडता का संदेश देना भी है। “ऑपरेशन सिंदूर” में सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए दुश्मन के मंसूबों को नेस्तनाबूद किया था। अब इस सफलता को आमजन के बीच लेकर जाने की बारी है। कार्यक्रम विवरण: स्थान: चराईडाँड़ मंदिर से आम्बा बगीचा बाजारडाँड़ तिथि: 17 मई 2025 समय: प्रातः 11:00 बजे से  भाजपा की अपील,,आइए, हम सब मिलकर इस तिरंगा यात्रा को ऐतिहासिक बनाएं और हमारे जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें।

सत्ता के नशे में चूर सरपंच और उसके पार्टनर का तांडव — ट्रैफिक पुलिस से की बदसलूकी, वर्दी उतरवाने की धमकी, नशे में धुत होकर कहा “ऊपर तक लिंक है”

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कुनकुरी (जशपुर), 6 मई,2025 –  लोकतंत्र में चुने गए प्रतिनिधि जब खुद को कानून से ऊपर समझने लगें, तो यह न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज के लिए भी खतरे की घंटी बन जाता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला कुनकुरी नगर में सामने आया है, जहां कुनकुरी विकाखण्ड के ग्राम पंचायत बेने – चटकपुर का सरपंच नवीन साय शराब के नशे में ट्रैफिक पुलिस से उलझ गया, गाली-गलौच की, वर्दी उतरवाने की धमकी दी और खुद को ‘ऊपर तक पहुँच वाला’ बताते हुए खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आया। घटना का ब्योरा सोमवार शाम लगभग 5 से 6 बजे के बीच बस स्टैण्ड मार्ग पर ट्रैफिक पुलिस ड्यूटी पर तैनात थी, जब एक कार रास्ते में अवरोधक बनी हुई थी। पुलिसकर्मियों ने जब कार हटाने के लिए टोका, तो कार सवार नवीन साय और उसका साथी दीपक पाठक आपे से बाहर हो गए। गुस्से में दोनों ने पुलिस से बहस शुरू कर दी और देखते ही देखते मामला हाथापाई की कगार तक पहुँच गया।तस्वीर में दीपक पाठक दिखाई दे रहा है। पुलिस द्वारा जब मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की गई, तो दीपक पाठक ने मोबाइल छीनकर सड़क पर फेंक दिया। इस दौरान सरपँच खुलेआम गाली देते हुए कहता रहा – “हम ऊपर तक जुड़े हैं, तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा!” इस अभद्रता और सत्ता के घमंड से भरे व्यवहार ने राहगीरों को भी हैरान कर दिया।एक प्रत्यक्षदर्शी ने भाजपा की कार और भाजपाई दबंगों को देखकर चुटकी लेते हुए कहा – ‘हम ही बनाये हैं,हम ही सँवारेंगे।अभी सुशासन तिहार चल रहा है,ऐसे समय में ऐसी तस्वीरें सरकार की छवि खराब करती हैं।’ पुलिस की तत्परता और मेडिकल पुष्टि सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस बल पहुंचा और दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।ट्रैफिक पुलिस की शिकायत पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।आज दोनों को न्यायालय में पेश किया जाएगा। कौन है नवीन साय? नवीन साय वर्तमान में ग्राम पंचायत चटकपुर का सरपंच है। ग्रामीणों के अनुसार, नवीन पहले रायपुर में काम करता था और हाल ही में बेने गांव के लोगों ने उसे बुलाकर सरपंच चुनाव में उतारा और जिताया था। लेकिन सत्ता मिलते ही उसके तेवर बदल गए। ग्रामीणों का आरोप है कि वह अक्सर शराब के नशे में अभद्र व्यवहार करता है और खुद को ‘तोपचन्द’ समझता है।अपनी कार के पीछे भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल का फूल के ऊपर सरपँच लिखवाकर गुंडागर्दी करता है। गाँव में रोष, बर्खास्तगी की मांग इस घटना की खबर जब गांव में फैली, तो लोगों में रोष फैल गया। कई ग्रामीणों ने सरपंच के निलंबन और बर्खास्तगी की मांग की है। लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में चुनी हुई कुर्सी जनसेवा के लिए होती है, न कि पुलिस से बदसलूकी और कानून को चुनौती देने के लिए। प्रशासन सख्त रुख में पुलिस प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ऐसे मामलों में किसी भी राजनीतिक दबाव की परवाह किए बिना सख्त कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, यदि दोष सिद्ध होता है तो सरपंच पद से भी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

NH-43 पर वाहन चेकिंग के दौरान युवक से मारपीट,ASI मनोज भगत लाइन अटैच, SDOP को सौंपी गई जांच

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जशपुर 01 मई 2025 – थाना लोदाम क्षेत्र में मंगलवार शाम NH-43 पर वाहन चेकिंग कर रहे एएसआई मनोज भगत ने एक कार सवार युवक के साथ मारपीट कर दी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद एसएसपी शशि मोहन सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एएसआई को लाइन अटैच कर दिया है। मामले की जांच का जिम्मा एसडीओपी चंद्रशेखर परमा को सौंपा गया है। एसएसपी ने जिले के सभी पुलिसकर्मियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वाहन चेकिंग के दौरान संयमित और मर्यादित व्यवहार करें। किसी से अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कुनकुरी के पूर्व विधायक यूडी मिंज के फेसबुक पोस्ट से मचा बवाल,यूडी मिंज पर राजद्रोह के तहत मामला दर्ज हो- गौरीशंकर श्रीवास

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रायपुर/कुनकुरी,27 अप्रैल 2025 – कांग्रेस लीडर पूर्व कुनकुरी विधायक यूडी मिंज ने फेसबुक पोस्ट में बेसरण (पहलगाम) आतंकवादी हमले को लेकर बयान दिया जो पूरे प्रदेश में विवादित हो गया है।मिंज ने भारत को पाकिस्तान पर हमला करने पर हार जाने की बात कही है हालांकि एक पोस्ट में मोबाइल हैक हो जाने की जानकारी देते हुए फेसबुक पोस्ट के जरिये अपना पक्ष रखा है। वहीं,भाजपा प्रदेश प्रवक्ता गौरी शंकर श्रीवास ने बयान जारी करते हुए कहा कि यूडी मिंज के सोशल मीडिया में जो पोस्ट है वो गद्दारी तथा सेना का मनोबल तोड़ने वाला पोस्ट है जिसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा पहलगाम में हुए सैलानियों पर हमले के बाद से पूरा देश आक्रोशित है ऐसे में अपने सोशल मीडिया हैंडल से भारत -पाक युद्ध में देश की हार तय करते हुए कायरता पूर्ण पोस्ट शेयर किया है जो कि कांग्रेस पार्टी के मूल चरित्र को प्रदर्शित करता है और ये पहला मौका नहीं है इसके पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँगकर देश को राष्ट्रीय पटल पर अपमानित करने का काम कांग्रेसी नेताओ ने किया था जिसे राष्ट्र नहीं भुला है! पहलगाम टेरर अटैक में छत्तीसगढ़ ने दिनेश मिरानिया के रूप में अपना लाल खोया है जिसे लेकर प्रदेश में जनता की सेना की तरफ़ टकटकी लगाकर देख रही इस गमगीन स्थिति में युद्ध के पूर्व परिणाम अपने देश के ख़िलाफ़ देने वाला एक गद्दार ही हो सकता है अतः पूर्व विधायक मिंज के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही की जाए। इधर गौरी शंकर श्रीवास के ट्वीट करने के बाद पोस्ट तेज़ी से वायरल होने लगा जिसके बाद पूर्व विधायक यूडी मिंज ने आज शाम फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उनका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था जिसके चलते उनके अकाउंट से किसी ने पोस्ट कर दिया। लेकिन गौर करने वाली बार ये है कि श्री मिंज का ये विवादित पोस्ट एक दिन पुराना है जिस पर विवाद की स्थित निर्मित होने के बाद उन्होंने हैक होने का सहारा लिया है। देखें वह पोस्ट –   

धर्मांतरण के दबाव के मामले में विंसी जोसफ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

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कुनकुरी, जशपुर 11 अपैल 2025 माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायालय कुनकुरी ने शुक्रवार को धर्मांतरण के दबाव के मामले में आरोपी हॉलीक्रॉस नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या विंसी जोसफ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विंसी जोसफ पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही कॉलेज की एक गैर-ईसाई छात्रा पर नन बनने के लिए धर्म बदलने का दबाव बनाया। छात्रा की शिकायत पर यह मामला प्रकाश में आया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई की। पीड़िता के अनुसार, विंसी जोसफ ने उसे मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की और ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और कई सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस द्वारा मामले की विवेचना जारी है।

समसामयिक लेख: ‘वक्फ़ संशोधन विधेयक’ पर इतना हल्ला क्यों मचा है?

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निर्मल कुमार “धर्म जनता के लिए अफीम के समान है।” – यह प्रसिद्ध कथन कार्ल मार्क्स का है, जो यह इंगित करता है कि धर्म कई बार समाज में तर्कसंगत सोच को दबाकर केवल भावनात्मक प्रभाव डालता है। यह कथन वर्तमान में वक्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर बनाए जा रहे विमर्श पर सटीक बैठता है। कुछ समूह इस विधेयक को इस्लामिक संस्थानों पर सीधा हमला बताने का प्रयास कर रहे हैं और इसे धार्मिक अधिकारों के हनन के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। इस तरह की भ्रामक व्याख्याओं का उद्देश्य जनता की धार्मिक भावनाओं को भड़काना और वास्तविक मुद्दे से ध्यान भटकाना है। लेकिन जब इस विधेयक के प्रावधानों का गहराई से विश्लेषण किया जाता है, तो यह स्पष्ट होता है कि सरकार का उद्देश्य किसी भी धार्मिक समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि वक्फ़ बोर्डों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। दरअसल,भारत में वक्फ़ संपत्तियाँ व्यापक पैमाने पर फैली हुई हैं और बड़ी मात्रा में भूमि वक्फ़ के अधीन है। सरकार द्वारा प्रस्तुत यह संशोधन विधेयक इन संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर रोक और न्यायिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ऐतिहासिक रूप से, वक्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, जिनमें अनियमितताएँ, गैर-कानूनी अतिक्रमण, संपत्तियों के दुरुपयोग और वक्फ़ बोर्डों की जवाबदेही की कमी प्रमुख समस्याएँ रही हैं। वर्तमान संशोधन विधेयक का उद्देश्य इन सभी समस्याओं को दूर करना और वक्फ़ संपत्तियों का वास्तविक उपयोग समाज के कल्याण और विकास में सुनिश्चित करना है। क्या वक्फ़ इस्लामिक शरीयत का अनिवार्य भाग है? वक्फ़ की अवधारणा इस्लामी शरीयत में सीधे तौर पर उल्लिखित नहीं है। यदि हम क़ुरआन का अध्ययन करें, तो यह परोपकार और दान करने को प्रोत्साहित करता है, लेकिन वक्फ़ जैसी किसी संस्था की स्थापना का कोई प्रत्यक्ष निर्देश नहीं देता। क़ुरआन में कई आयतें दान और परोपकार को बढ़ावा देने की बात करती हैं, जैसे: “तुम्हें सच्ची भलाई तब तक नहीं मिलेगी, जब तक कि तुम अपनी प्रिय वस्तुओं में से (अल्लाह की राह में) खर्च न करो। और जो कुछ तुम खर्च करते हो, अल्लाह उसे भली-भांति जानता है।” (सूरह आले-इमरान: 92) “जो लोग अल्लाह के मार्ग में अपना धन खर्च करते हैं और फिर अपनी दानशीलता को एहसान जताने या ठेस पहुँचाने वाली बातों से व्यर्थ नहीं करते, उनके लिए उनके रब के पास प्रतिफल है।” (सूरह अल-बक़रा: 262) इन आयतों से स्पष्ट होता है कि इस्लाम में दान और परोपकार को महत्व दिया गया है, लेकिन वक्फ़ एक संस्थागत रूप में बाद में विकसित हुआ। यह सामाजिक और सांस्कृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अस्तित्व में आया और धीरे-धीरे इसे धार्मिक मान्यता मिलती चली गई। इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो वक्फ़ संशोधन विधेयक को केवल धार्मिक चश्मे से देखना अनुचित होगा, क्योंकि यह संस्था पूरी तरह से धार्मिक आदेशों पर आधारित नहीं है, बल्कि इसका प्रशासनिक और कानूनी पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वक्फ़ प्रबंधन और गैर-मुस्लिम प्रशासकों की भूमिका इस्लामी कानून की हनफ़ी व्याख्या, जिसे भारत के अधिकांश मुस्लिम समुदाय द्वारा अपनाया जाता है, यह अनिवार्य नहीं मानती कि वक्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन केवल मुस्लिम प्रशासकों द्वारा किया जाए। प्रसिद्ध इस्लामी शिक्षा केंद्र दारुल उलूम देवबंद ने अपने फ़तवा संख्या 34944 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि यदि कोई व्यक्ति वक्फ़ मामलों की गहरी समझ रखता है, ईमानदार और सक्षम है, तो वह किसी भी धर्म से हो सकता है और वक्फ़ संपत्तियों का प्रशासन कर सकता है। इस संदर्भ में, गैर-मुस्लिम प्रशासकों की भागीदारी को लेकर जताई जा रही आपत्तियाँ निराधार प्रतीत होती हैं। वक्फ़ संपत्तियों का प्रबंधन एक प्रशासनिक कार्य है, जिसका उद्देश्य संसाधनों का कुशल उपयोग और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है। इसके लिए किसी विशेष धार्मिक पहचान की आवश्यकता नहीं है, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और कार्यकुशलता की आवश्यकता होती है। सरकार द्वारा प्रस्तुत वक्फ़ संशोधन विधेयक का उद्देश्य वक्फ़ अधिनियम की संरचनात्मक कमियों को दूर करना और वक्फ़ बोर्डों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी बनाना है। इसके तहत कुछ महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए गए हैं: 1. वक्फ़ संपत्तियों का सत्यापन – अब किसी भी भूमि को वक्फ़ संपत्ति घोषित करने से पहले एक विस्तृत और पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे फर्जी दावों पर रोक लगेगी और वास्तविक संपत्तियों की रक्षा होगी। 2. न्यायिक निगरानी – यदि किसी संपत्ति को वक्फ़ संपत्ति घोषित करने पर विवाद उत्पन्न होता है, तो न्यायालय इसमें हस्तक्षेप कर सकता है और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करेगा। इससे कानूनी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। 3. वक्फ़ बोर्डों का पुनर्गठन – वक्फ़ बोर्डों की संरचना को अधिक प्रतिनिधिक और समावेशी बनाया जाएगा। इसमें महिलाओं और विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों के व्यक्तियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा, जिससे प्रबंधन अधिक विविध और उत्तरदायी बन सके। 4. मनमानी शक्तियों पर अंकुश – वर्तमान कानून में वक्फ़ बोर्डों को कुछ मामलों में असीमित अधिकार दिए गए हैं, जिससे कई बार शक्तियों का दुरुपयोग देखा गया है। संशोधन विधेयक के माध्यम से इन अधिकारों को संतुलित किया जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था इनका दुरुपयोग न कर सके। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि यह विधेयक धार्मिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार का हिस्सा है वक्फ़ संशोधन विधेयक को धार्मिक विवाद के रूप में प्रस्तुत करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का भी प्रयास है। यह विधेयक किसी विशेष समुदाय को लक्षित करने के लिए नहीं, बल्कि वक्फ़ बोर्डों की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लाया गया है। धर्म और शासन को अलग रखना आवश्यक है ताकि प्रशासनिक संस्थाएँ कुशलता से कार्य कर सकें और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके। यह संशोधन विधेयक न केवल संविधान की भावना के अनुरूप है, बल्कि इस्लामी परोपकार की मूल भावना का भी समर्थन करता है, जो पारदर्शिता, ईमानदारी और न्याय पर आधारित है। अब समय आ गया है कि हम धार्मिक भावनाओं से परे जाकर एक निष्पक्ष और तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाएँ और यह सुनिश्चित करें कि वक्फ़ संपत्तियाँ वास्तव में समाज की भलाई के लिए उपयोग की जाएँ, न कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का अड्डा बनें। (लेखक अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक,आर्थिक मामलों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।)

मधेश्वर महादेव: मयाली में शिव भक्ति की धारा, शिवलोक सा नज़ारा

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मयाली,जशपुर, 21 मार्च: जशपुर जिले के मयाली स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव के पास भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। महाशिवपुराण कथा के आयोजन ने इस पवित्र स्थल को और अधिक दिव्यता से भर दिया है। श्रद्धा का रंग इस कदर चढ़ चुका है कि लोग इसे अब शिवलोक कहने लगे हैं। कलश यात्रा में उमड़ा भक्तों का जनसैलाब आज कथा के प्रारंभ से पहले कुनकुरी के बेलजोरा नदी से लेकर मयाली कथा स्थल तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। ग्यारह हजार महिलाएं सिर पर कलश रखकर हर-हर महादेव के जयकारों के साथ आगे बढ़ीं। पूरा वातावरण शिवमय हो गया। इस पवित्र यात्रा में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय भी शामिल हुईं। पं. प्रदीप मिश्रा सुनाएंगे महाशिवपुराण 21 मार्च से 27 मार्च तक प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा महाशिवपुराण कथा का वाचन किया जाएगा। जैसे ही कथा का शुभारंभ हुआ, मयाली का पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय भोलेनाथ” के नारों से गूंज उठा। मधेश्वर महादेव: जहां शिवलोक का अहसास होता है मयाली में स्थित विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग आस्था का केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसे किसी शिवलोक से कम नहीं मानते। कहते हैं कि इस प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो जाता है। भक्तों में भारी उत्साह महाशिवपुराण कथा सुनने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु यहां शिव की भक्ति में लीन होकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं। मयाली की पावन भूमि शिवधाम जैसी अनुभूति करा रही है। इस ऐतिहासिक आयोजन के साथ, मधेश्वर महादेव शिवलिंग पर आस्था का रंग पूरी तरह चढ़ चुका है और यह स्थान शिव भक्तों के लिए एक दिव्य तीर्थ बनता जा रहा है।  

कुनकुरी नगर पंचायत का उपाध्यक्ष कौन बनेगा? कांग्रेस-भाजपा के अंदरखाने की हलचल ये है,,,

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कुनकुरी,18 मार्च 2025 – आज 11 बजे से छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित नगरपंचायत कुनकुरी के पार्षद उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे।इस चुनाव में आंकड़े की बात करें तो 8 पार्षद भाजपा के हैं और 7 कांग्रेस के अध्यक्ष को जोड़ने पर आंकड़ा 8 यानी बरोबर। ऐसे में टॉस होगा? जरा ठहरिए,, भाजपा से 8 पार्षद बनते ही पार्षदों में उपाध्यक्ष बनने की होड़ शुरू हो गई थी।जिसमें टॉप 3 में अमन शर्मा,अमित मिश्रा और राजेश ताम्रकार का नाम था।जो समय बीतते-बीतते आज की स्थिति में दावेदार 4 हैं।भाजपा के अंदरखाने में यह बात जमकर चल रही है कि चौथे दावेदार महिला पार्षद गुलापी पैंकरा हैं,जो 20 साल पहले वार्ड पंच रहीं,फिर नगरपंचायत घोषित हुआ तो अनिल तिर्की नगरपंचायत अध्यक्ष और गुलापी उपाध्यक्ष मनोनीत हुईं।फिर हर चुनाव में भाजपा की टिकट पर पार्षद चुनाव जीततीं आ रही हैं।सूत्र बता रहे हैं कि उन्होंने भी उपाध्यक्ष बनने की अपनी मंशा पार्टी हाईकमान के सामने रखी है। वैसे देखा जाय तो जनचर्चा में नगरपंचायत में अध्यक्ष विनयशील को कोई टक्कर दे सकता है तो अमन शर्मा का नाम सबकी जुबान पर है।राजेश ताम्रकार सबसे लोकप्रिय किंतु कांग्रेस की सहानुभूति पाने के कारण खतरे में है।अमित मिश्रा कांग्रेस की जमानत जब्त करके सबसे ज्यादा वोटों से दूसरी बार पार्षद बनकर पहुंचे हैं। ये तो हुई भाजपा के अंदरखाने की हलचल! उधर कांग्रेस भी भूपेश के शपथग्रहण समारोह में आने के बाद बहुत ज्यादा चार्ज में है।जिसका असर कांग्रेस के पार्षदों में भी उपाध्यक्ष बनने की बढ़ती ललक से समझ मे आ रहा है।यही वह वजह है कि ललक पाले हुए पार्षद को अगर उपाध्यक्ष की टिकट नहीं मिली तो क्रॉस वोटिंग कर सकता है,यह भांपकर भूपेश के काफिले में कुनकुरी के सातों पार्षदों को रेस्ट हाउस से अंडर अरेस्ट कर झारसुगुड़ा ले गए।रात भर होटल में रुकवाकर कांग्रेस की बलिदानी घुट्टी पिलाई गई और सूत्र बता रहे हैं कि अभी कुछ देर में शहर लौट जाएंगे रही बात उपाध्यक्ष के दावेदार की तो नम्बर 1 का पार्षद दीपक केरकेट्टा,रुखसाना खातून का नाम सामने आया है।दोनों दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं। अब देखना होगा कि कुनकुरी नगरपंचायत के उपाध्यक्ष पद पर किस पार्षद का नाम जीतकर सामने आता है।

बड़ी खबर: राजनैतिक सौहार्द के मिसाल सालिक साय बने जिला पंचायत अध्यक्ष,उपाध्यक्ष बने शौर्य प्रताप सिंह जूदेव

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जशपुर ,12 मार्च 2025 – आज जिला पंचायत जशपुर के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद का निर्वाचन हो रहा है।जिसमें अंदरखाने से बड़ी खबर निकलकर सामने आई है कि जिला पंचायत सदस्य सालिक साय ने अध्यक्ष पद पर नामांकन दाखिल किया लेकिन अभी 11:40 तक अन्य किसी भी सदस्य ने नामांकन दाखिल नहीं किया।इसी तरह शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने उपाध्यक्ष पद का नामांकन भरा जिनके विरुध्द भी किसी अन्य सदस्य ने नामांकन नहीं भरा। इसका मतलब दोनों पदों पर भाजपा के दावेदार निर्विरोध हो गए हैं।हालांकि अभी इसकी अधिकारिक घोषणा बाकी है।वहीं सालिक साय के निर्विरोध की खबर पाकर जिला पंचायत के बाहर समर्थकों में खुशी देखी जा रही है। हम आपको बता दें कि सालिक साय ने इस बार कांग्रेस के गढ़ रहे तमता क्षेत्र से डीडीसी का चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से चुनाब जीतकर जिला पंचायत पहुंव्हे हैं।इनकी सरलता,सौम्यता के साथ ही सबको साथ लेकर चलने की समझदारी इनकी जीत का बड़ा कारण बनी है।कांग्रेस समर्थित तीन डीडीसी के रहते हुए भी कांग्रेस ने लोकतांत्रिक विरोध भी नहीं किया।