भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी

भूख हाथियों को धान मंडी तक खींच लाई,छत्तीसगढ़ में 20 रातों से धान की बोरियां उठाकर जंगल ले जा रहे जंगली हाथी

सार – जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं।

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रायगढ़,09 जनवरी,2025

रायगढ़ जिले में ग्राम बंगुरसिया के धान खरीदी केंद्र में इन दिनों एक अनोखा लेकिन बेहद चिंताजनक दृश्य देखने को मिल रहा है। लगातार 15 से 20 दिनों से हर रात जंगली हाथियों का झुंड धान मंडी तक पहुंच रहा है और वहां से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर ले जा रहा है।

यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जंगलों में बदलती स्थिति और भूखे वन्यजीवों की मजबूरी की तस्वीर है।

रात होते ही जुटती है ग्रामीणों की भीड़

जैसे ही अंधेरा घिरता है, ग्रामीणों को हाथियों के आने की खबर मिल जाती है। इसके बाद धान खरीदी केंद्र के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। लोग मोबाइल कैमरों से उस दृश्य को रिकॉर्ड करते हैं, जहां विशालकाय हाथी शांति से धान की बोरियां उठाकर जंगल की ओर लौट जाते हैं।

हैरानी की बात यह है कि हाथी अब तक किसी तरह की तोड़फोड़ या आक्रामकता नहीं दिखा रहे हैं।

वन विभाग सतर्क, हाथी मित्र दल तैनात

वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हाथी मित्र दल की टीम मौके पर तैनात है, जो हाथियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रही है और उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने का प्रयास कर रही है।

हालांकि, हाथियों का बार-बार लौट आना यह संकेत देता है कि जंगलों में उनके लिए पर्याप्त भोजन नहीं बचा है।

तस्वीरें बता रही हैं जंगल की सच्चाई

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हाथियों के ये वीडियो और तस्वीरें साफ संदेश दे रही हैं कि जंगल भले ही हाथियों का प्राकृतिक घर हों, लेकिन वहां भोजन का संकट गहराता जा रहा है। जंगलों में घटता प्राकृतिक आहार, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप और विकास गतिविधियां हाथियों को इंसानी इलाकों की ओर खींच रही हैं।

गणेश के स्वरूप गजराज संकट में

भारत में हाथी को भगवान गणेश के रूप में पूजा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यही पूजनीय जीव आज अपने अस्तित्व और भोजन के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जंगल में इंसानों की बढ़ती दखलअंदाजी और हाथियों की भोजन तलाश में बस्तियों तक पहुंच है।

सिर्फ नुकसान की नहीं, चेतावनी की खबर

बंगुरसिया की धान मंडी में उठती धान की बोरियां केवल सरकारी नुकसान की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि यह भविष्य के बड़े टकराव की चेतावनी भी हैं। यदि जंगलों में हाथियों के लिए भोजन और सुरक्षित रास्ते नहीं बनाए गए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

स्थायी समाधान जरूरी

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाना,हाथी कॉरिडोर का संरक्षण,और मानव बस्तियों से हाथियों की सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है।

यह खबर हाथियों की नहीं, हमारी जिम्मेदारी की कहानी भी है।