कुसमी मारपीट कांड: एक ग्रामीण की मौत के बाद प्रशासन पर गंभीर सवाल, एसडीएम गिरफ्तार
बलरामपुर,16 फरवरी 2026 –
बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत मारपीट की एक गंभीर घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अवैध बॉक्साइट खनन की कथित जांच के दौरान हुए विवाद के बाद एक आदिवासी ग्रामीण की मौत और दो अन्य के घायल होने से एसडीएम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दरअसल, कुसमी ब्लॉक के हंसपुर क्षेत्र में जांच के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और एसडीएम करुण कुमार डहरिया के बीच विवाद हुआ। एसडीएम के साथ उनके निजी लोग थे जिन्हें बचाने के लिए और यह दिखाने के लिए कि यह मारपीट एक राजस्व विभाग की कार्रवाई के दौरान हुई है,एसडीएम ने नायब तहसीलदार को फोन करके दो पुलिसकर्मियों को लेकर आने का आदेश दिया।
आरोप है कि इस दौरान कुसमी एसडीएम करुण डहरिया एवं उनके साथ मौजूद निजी लोगों द्वारा ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। घायल ग्रामीणों का कहना है कि वे गेहूं के खेत में सिंचाई कर रात करीब 8 बजे लौट रहे थे, तभी एसडीएम की गाड़ी और एक अन्य वाहन में सवार 6–7 लोगों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और लाठी-डंडे व रॉड से पिटाई की।
मारपीट के बाद तीनों ग्रामीणों को कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां इलाज के दौरान राम नरेश राम (60 वर्ष) की मौत हो गई, जबकि अजीत उरांव (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष) घायल हैं।
घटना के बाद स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका को देखते हुए कुसमी थाना एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। जांच के लिए बलरामपुर एडिशनल एसपी विश्व दीपक त्रिपाठी कुसमी पहुंचे।
सूत्रों के अनुसार, मारपीट की घटना के बाद एसडीएम की सूचना पर पहुंचे तहसीलदार पारस शर्मा को भी इस पूरे मामले में साजिश के तहत फंसाने की कोशिश किए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार, जो घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे, उनके साथ दो पुलिसकर्मियों को भी जबरन इस मामले में लपेटने का प्रयास किया गया, जिससे तहसीलदार संघ में भारी आक्रोश है और संघ इस मुद्दे पर सक्रिय हो गया है।
वहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि एसडीएम करुणा डहरिया का व्यवहार पूर्व से ही आक्रामक रहा है और वे जनभावनाओं के विपरीत कार्य करते रहे हैं। उनके पुराने मामलों को लेकर भी किशोरावस्था में अपने पिता की हत्या करने के गंभीर दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक या न्यायिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि जांच प्रशासनिक थी, तो एसडीएम सरकारी वाहन और सुरक्षा बल के साथ क्यों नहीं गए, और निजी लोगों की मौजूदगी में ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी?
फिलहाल,कार्रवाई जारी है।





















