शव वाहन न मिलने पर पत्रकार पिता ने मोटरसाइकिल से लाया नवजात का शव,जशपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
जशपुर/फरसाबहार –
दिल को चीर देने वाली यह घटना फरसाबहार के पत्रकार मुकेश नायक के साथ घटी। रविवार–सोमवार की रात 2 बजे उनकी गर्भवती पत्नी को अचानक तेज दर्द उठा। मुकेश उन्हें तुरंत लेकर सुंदरगढ़ अस्पताल पहुंचे। सुबह 5 बजे प्रसव हुआ, लेकिन गंदा पानी पीने की वजह से नवजात ने आधे घंटे में ही दम तोड़ दिया।
ओडिशा सरकार का शववाहन छत्तीसगढ़ सीमा पर रुक गया
ओडिशा सरकार ने बच्चे के शव को अस्पताल से सीमा तक पहुंचाने के लिए वाहन दिया, लेकिन जैसे ही गाड़ी लुलकीडीह पुलिया पहुंची, चालक ने आगे बढ़ने से मना कर दिया।
उसका साफ कहना था—
“साहब, गाड़ी में जीपीएस लगा है… दूसरे राज्य में ले गया तो नौकरी चली जाएगी।”
छत्तीसगढ़ में मदद नहीं मिली—दो घंटे इंतजार के बाद टूटा दिल
इसके बाद पत्रकार पिता ने छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य अधिकारियों से शववाहन की मदद मांगी। सीएमएचओ ने बताया कि फरसाबहार में वाहन उपलब्ध नहीं है, कुछ देर में व्यवस्था की जाएगी।
मुकेश नायक अपने मासूम बेटे के शव के साथ दो घंटे तक इंतजार करते रहे। लेकिन कोई गाड़ी नहीं आई।
आखिर मजबूरी में उन्होंने अपने नवजात बेटे को गोद में उठाया… मोटरसाइकिल स्टार्ट की… और छत्तीसगढ़ की सीमा से अपने गांव सिंगीबहार तक खुद शव लेकर चले आए।
गांव और पत्रकार जगत में गहरी पीड़ा और गुस्सा
जब लोगों को यह जानकारी मिली, तो पूरे इलाके में दुःख और गुस्सा फैल गया। लोगों का कहना है—
“एक पिता को अपने मृत बच्चे को बाइक पर लाना पड़े… इससे बड़ी लाचारी और क्या होगी?”
मुख्यमंत्री की विधानसभा में व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना
यह घटना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विधानसभा क्षेत्र में हुई, जहां—घायल को समय पर एंबुलेंस नहीं,गर्भवती महिला को 102 की सुविधा नहीं,मृत्यु पर शव वाहन भी उपलब्ध नहीं।ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती रही हैं, लेकिन हालात नहीं बदल रहे।
अपने मासूम बच्चे को बाहों में लेकर घर लौटे पिता बस इतना ही कह पाए—
“आज जो मेरे साथ हुआ… वह किसी और के साथ न हो।”




















