खबर जरा हटके : ‘गुरुजी’ ने राजनैतिक दल की सदस्यता लेकर किया सेवा नियमों का उल्लंघन,सोशल मीडिया में गुरुजी की पोल पर बजी ढोल

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  जशपुर,12 अक्टूबर 2024 – विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का तमगा लिए भारतीय जनता पार्टी का सदस्यता अभियान जशपुर जिले में बड़ा तूफानी चल रहा है।इस तूफान की जद में सरकारी कर्मचारी भी आ चुके हैं।ताजा मामला बगीचा विकासखंड का है,जहां एक शिक्षक ने विधिवत भाजपा की सदस्यता ले ली है। दरअसल,भारतीय शासन व्यवस्था में चाहे व केंद्र की शासन व्यवस्था हो या राज्य की,कोई भी शासकीय सेवक किसी भी राजनैतिक दल का सदस्य नहीं बन सकता है।गूगल करने पर भी जानकारी मिली कि , कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं बन सकता. इसके अलावा, वह किसी राजनीतिक आंदोलन या गतिविधि में भी हिस्सा नहीं ले सकता. सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कुछ और नियम ये रहे: सरकारी कर्मचारी किसी विधानसभा या स्थानीय प्राधिकरण के चुनाव में प्रचार नहीं कर सकता. सरकारी कर्मचारी चुनाव में हस्तक्षेप नहीं कर सकता. सरकारी कर्मचारी चुनाव में अपने प्रभाव का इस्तेमाल नहीं कर सकता. सरकारी कर्मचारी सरकार की नीति या किसी कार्रवाई की आलोचना नहीं कर सकता. सरकारी कर्मचारी अपने नाम से कोई कारोबार नहीं खोल सकता. वहीं Quora डॉट कॉम में सीधे इसे गैरकानूनी बताया गया है।ऐसा करने से कर्मचारी को सेवा निलंबित किया जा सकता है। इसी से जुड़ी 10 साल पुरानी खबर दैनिक भास्कर में मिली जिसमें लिखा मिला कि 1965 के नियम 5 के अनुसार शासकीय सेवक राजनीतिक दल या राजनीति से जुड़े संगठन का सदस्य नहीं बन सकता। न ही वह संगठन से किसी तरह का संबंध रख सकता है। ऐसा करना नियम विरुद्ध है। (एडवोकेट कैलाश पाठक के मुताबिक) अब इससे यह साफ समझा जा सकता है कि शिक्षक विश्वनाथ प्रधान ने राजनैतिक दल भाजपा की सदस्यता लेकर गैर कानूनी काम किया है। हम आपको इतना बताते चलें कि आज के समय भाजपा की सदस्यता लेना इतना आसान भी नहीं है।सदस्यता रिनिवल कराने में लोगों के पसीने छूट रहे हैं। नए सदस्य बनने के लिए ऑनलाइन आपको फार्म भरना होगा जिसमें पूरी जानकारी भरनी होगी।इसके बाद आपके नम्बर पर ओटीपी आएगा जिसे डालने के बाद ही आपको सदस्यता मिलेगी। ऐसी स्थिति में अगर शिक्षक विश्वनाथ प्रधान यह कहकर बचना भी चाहे ‘गलती से हो गया’,नहीं बच सकता।जानकारों के मुताबिक उसे अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी का सदस्य बनना चाहिए। हालांकि इस मामले में खबर जनपक्ष ने शिक्षक विश्वनाथ प्रधान से उनके मोबाइल नम्बर  9340084125 पर  सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मोबाइल कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। विश्वनाथ प्रधान के बारे में जो जानकारी मिली है उसके अनुसार श्री प्रधान का मूल पद शिक्षक का है जो सरबकोम्बो माध्यमिक शाला में पदस्थ हैं लेकिन वहां अध्यापन कार्य न करके व्यवस्था में तीन छात्रावासों में अधीक्षक के पद पर कार्य कर रहे हैं।विश्वनाथ प्रधान इतने व्यवहार कुशल हैं कि कोई भी सहायक आयुक्त हों उन्हें अपनी विलक्षण क्षमता से प्रभावित कर पद पर बने रहते हैं।इसी के साथ वे सत्ताधारी राजनैतिक दल के नेता-विधायकों से भी अच्छा तालमेल बिठा लेते हैं।यही वजह है कि कांग्रेस की पिछली सरकार में योग्यता न होते हुए भी विधायक विनय भगत की कथित कृपा से तीन -तीन छात्रावासों के अधीक्षक बन गए।अब भाजपा सरकार में वर्तमान विधायक श्रीमती रायमुनी भगत की कथित कृपा से कंटीन्यू काम कर रहे हैं। वहीं,भाजपा की सदस्यता लेने के बाद दशहरे के दिन बगीचा के कई व्हाट्सप ग्रुपों में गुरुजी खूब चर्चा में हैं। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि क्या जिला प्रशासन गैरकानूनी तरीके से राजनैतिक दल की सदस्यता ले चुके सरकारी शिक्षक/हॉस्टल अधीक्षक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की हिम्मत दिखा पाएगा?

डबल इंजन:विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम: चार नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए 1020 करोड़ रुपये का ई-टेंडर जारी

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  रायपुर, 11 अक्टूबर 2024 – छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार ने चार नए मेडिकल कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए 1020.60 करोड़ रुपये का ई-टेंडर जारी किया है। इस कदम से राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की उम्मीद है। इन नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, मनेंद्रगढ़ और दंतेवाड़ा के गीदम में किया जाएगा। इन कॉलेजों की प्लानिंग, डिजाइनिंग और इंजीनियरिंग के साथ-साथ निर्माण कार्य भी उच्च स्तरीय होगा, और इसे छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा 24 महीनों के भीतर पूरा किया जाएगा। ई-टेंडर प्रक्रिया की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो गई है, और बोली जमा करने की अंतिम तिथि 7 नवंबर 2024 तय की गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मौके पर कहा, “हमारी प्राथमिकता राज्य के हर नागरिक को उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। इन मेडिकल कॉलेजों से न केवल राज्य के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा में नए अवसर मिलेंगे, बल्कि स्थानीय जनता को भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।” राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के इस बड़े कदम की व्यापक सराहना की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय और स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में जो सुधारात्मक और विकासात्मक योजनाएं बनाई हैं, वे राज्य को एक बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह परियोजना न केवल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी। इस कदम से प्रदेशवासियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विश्वास और भी मजबूत होगा।  

समसामयिक लेख : *संजौली और मंडी में मस्जिद निर्माण पर विवाद:एक गहरी दृष्टि *

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निर्मल कुमार हिमाचल प्रदेश के संजौली और मंडी में हाल ही के विरोध प्रदर्शनों की जड़ अवैध मस्जिद निर्माण के आरोप हैं। अवैध निर्माण की चिंता ने इन विरोधों को जन्म दिया है, लेकिन यह मुद्दा केवल कानूनी मामलों तक सीमित नहीं है। यह साम्प्रदायिक सौहार्द्र, सामाजिक संतुलन, और धार्मिक आस्थाओं के आपसी मेल-जोल से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इस्लाम के अनुसार, मस्जिद का निर्माण नैतिक और वैध जमीन पर होना चाहिए ताकि पूजा और इबादत का स्थान पवित्र और वैध रहे। इससे संबंधित विवाद न केवल धार्मिक जिम्मेदारियों को प्रभावित करते हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सौहार्द्र को भी चुनौती देते हैं। मस्जिद का निर्माण: इस्लामी मान्यताएँ और सिद्धांत इस्लाम में, मस्जिद केवल एक पूजा स्थल नहीं है; यह एक सामुदायिक केंद्र, आध्यात्मिकता का स्रोत, और नैतिकता का प्रतीक होती है। इसे इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार एक पवित्र स्थान के रूप में देखा जाता है जहाँ केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और नैतिकता का पालन भी होता है। मस्जिद के निर्माण की प्रक्रिया से लेकर उसके संचालन तक हर कदम नैतिकता और कानून के दायरे में होना चाहिए। मस्जिद निर्माण के लिए शरीयत (इस्लामिक कानून) के तहत यह अनिवार्य है कि उसका निर्माण केवल वैध, विवाद-मुक्त जमीन पर ही किया जाए। हदीस और कुरान की शिक्षाओं के अनुसार, किसी भी मस्जिद का निर्माण अनैतिक साधनों, जैसे अवैध भूमि या भ्रष्टाचार के धन से नहीं किया जाना चाहिए। अवैध या विवादित भूमि पर मस्जिद बनाकर उस स्थान की पवित्रता को खतरे में डालने से मस्जिद में की गई नमाज़ भी प्रश्नों के घेरे में आ सकती है। इसलिए, मस्जिद का निर्माण पूरी तरह से पारदर्शी, नैतिक और कानूनी रूप से शुद्ध होना चाहिए। इस्लामी धर्मशास्त्र और धार्मिक स्थलों की पवित्रता इस्लाम में धार्मिक स्थलों की पवित्रता का एक गहरा महत्व है। केवल बाहरी रूप से मस्जिद का निर्माण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसका आधार, उसकी प्रक्रिया, और उसमें उपयोग की गई सामग्री भी धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के लिए, कुरान में इस बात पर बल दिया गया है कि अवैध तरीके से प्राप्त संपत्ति को धार्मिक कार्यों में शामिल करना निषिद्ध है। ऐसे में अवैध भूमि पर बनी मस्जिद की वैधता संदेह के घेरे में आ जाती है। हदीस के अनुसार, मस्जिद एक शुद्ध, विवाद-मुक्त और पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा बनाई जानी चाहिए। यदि मस्जिद का निर्माण विवादित या अवैध भूमि पर किया जाता है, तो वह मस्जिद सामुदायिक असंतोष का कारण बन सकती है। इससे समाज में शांति की बजाय अशांति फैलने की संभावना बढ़ जाती है, जो कि मस्जिद के वास्तविक उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत है। मस्जिद एक ऐसा स्थान होना चाहिए जहाँ लोग एकजुट होकर ईश्वर की इबादत कर सकें और नैतिकता के उच्चतम मानकों का पालन कर सकें। स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान मस्जिद निर्माण के विवाद का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे सांस्कृतिक और स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करना चाहिए। जब धार्मिक स्थल अवैध रूप से बनाए जाते हैं, तो यह समाज में असंतुलन और गलतफहमियों को जन्म देता है। भारत जैसे विविध और बहु-धार्मिक देश में, धार्मिक स्थलों का निर्माण न केवल धार्मिक भावना का सम्मान करना चाहिए, बल्कि स्थानीय समुदायों के रीति-रिवाजों और भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में, जहाँ सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता है, बाहरी लोगों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाहरी समुदायों को शरण देने और स्थानीय संस्कृति को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। अगर किसी बाहरी समुदाय की गतिविधियों से स्थानीय सांस्कृतिक संतुलन बिगड़ता है, तो यह साम्प्रदायिक तनाव को जन्म दे सकता है। इसलिए, मस्जिद निर्माण के दौरान यह ध्यान रखना चाहिए कि स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान हो और साम्प्रदायिक सौहार्द्र बना रहे। साम्प्रदायिक सौहार्द्र का महत्व भारत में धार्मिक विविधता सदियों से एक मजबूत पहलू रही है। यहाँ सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं और धार्मिक स्थलों का सम्मान करते हैं। मस्जिद, मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा—हर धार्मिक स्थल को साम्प्रदायिक सौहार्द्र के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जब किसी धार्मिक स्थल का निर्माण कानून का पालन करते हुए और स्थानीय समुदाय की सहमति से होता है, तो वह एकता और शांति का संदेश देता है। संजौली और मंडी में मस्जिद निर्माण के विवाद के बाद, मस्जिद प्रबंधन समितियों ने जो कदम उठाए, वे सराहनीय हैं। उन्होंने अवैध निर्माण के हिस्सों को गिराने का निर्णय लिया, ताकि समाज में साम्प्रदायिक तनाव न बढ़े और शांति बनी रहे। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो यह दर्शाता है कि कानून का पालन करते हुए धार्मिक स्थलों का निर्माण किया जाना चाहिए। कानून और सामुदायिक जिम्मेदारियाँ धार्मिक स्थलों का निर्माण केवल धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी भी है। भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करता है कि इस अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया जाए। जब कोई धार्मिक स्थल, जैसे मस्जिद, मंदिर, या चर्च, वैध प्रक्रिया और कानून के तहत बनाए जाते हैं, तो इससे समाज में विश्वास और एकता बढ़ती है। कानूनी तौर पर, भूमि का स्वामित्व विवादित नहीं होना चाहिए और सभी आवश्यक अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाना चाहिए। मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों के अवैध निर्माण से सामाजिक असंतोष पैदा हो सकता है, जो कि साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकता है। *धार्मिक स्थल: एकता का केंद्र* धार्मिक स्थल जैसे मस्जिद, मंदिर, और चर्च समाज में शांति, एकता और सामंजस्य का प्रतीक होते हैं। इनका उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं होता, बल्कि समाज के लोगों को एकजुट करना और नैतिकता का पालन करना होता है। जब किसी धार्मिक स्थल का निर्माण विवादों में घिर जाता है, तो उसका वास्तविक उद्देश्य खो जाता है। मस्जिद का निर्माण अगर विवाद-मुक्त और नैतिक तरीके से किया जाता है, तो वह समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। महात्मा गांधी के विचार भी इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण और उसका संचालन नैतिकता, अहिंसा और सभी धर्मों के प्रति सम्मान के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने हमेशा कहा कि धार्मिक … Read more

मुख्यमंत्री श्री साय की विशेष पहल से सर्पदंश और जंगली हाथियों के हमलों से हो रही मौतों पर रोक, जनमन महाअभियान के तहत वनवासियों को मिले पक्के मकान

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( विशेष रिपोर्ट ) जशपुर और सरगुजा संभाग में जंगली हाथियों के हमले और सर्पदंश से हो रही मौतों पर रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल रंग ला रही है। राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए जनमन महाअभियान के तहत जंगलों और झाड़ियों में रहने वाले वनवासियों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए सरकार ने लोगों को अंधविश्वास से निकालकर तत्काल चिकित्सा सुविधा दिलाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल ने जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सर्पदंश जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी लोगों को समय पर इलाज मिल सके। सर्पदंश के मामलों में जागरुकता बढ़ी जिले में सर्पदंश के शिकार लोगों को झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों से दूर रखने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए जनजागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. मित्तल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे गांवों में लोगों को जागरूक करें कि सांप काटने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में आकर इलाज कराएं। आज सुबह सन्ना निवासी रसेल राम को जहरीले बंबू पिट वाइपर सांप ने काट लिया। पहले उन्होंने झाड़-फूंक का सहारा लिया, लेकिन जब स्थिति बिगड़ी तो वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सन्ना पहुंचे। वहां पर चिकित्सकों ने उन्हें तुरंत एंटी स्नेक वेनम का इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद उनकी हालत सामान्य हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें अंधविश्वासों से दूर रहने और भविष्य में किसी भी सर्पदंश की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी। जनजागरुकता अभियान के सकारात्मक परिणाम चिकित्सकों ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार गांवों में जागरुकता फैलाने का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। पहले जहां लोग झाड़-फूंक का सहारा लेते थे, अब वे स्वास्थ्य केंद्रों में आकर अपना इलाज करा रहे हैं। सन्ना सीएचसी के डॉक्टर सुनील लकड़ा  ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोग जागरूक होकर समय पर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे हैं, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी है। मुख्यमंत्री की इस पहल और कलेक्टर के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और जागरुकता बढ़ने से ग्रामीण अंचलों में सर्पदंश से होने वाली मौतों में कमी आ रही है, जो सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है।  

विष्णु के सुशासन की सुंदर तस्वीर बनकर कैसे आगे बढ़ रहा घुघरी पँचायत? पढ़िए विकास की यह कहानी,,,

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*विष्णु के सुशासन में तेजी से बदल रही गांव की तस्वीर* *विकास और समाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ग्राम पंचायत घुघरी विकास और बदलाव की नई परिभाषा गढ़ रहा* *महिला सशक्तिकरण के तहत् स्व सहायता समूहों की 412 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया* जशपुर 10 अक्टूबर 2024/छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में  राज्य के गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। शासन के प्रयासों और पंचायती राज योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के गांव अब विकास और समाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नई कहानियां लिख रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत घुघरी की। जिला मुख्यालय जशपुर से 93 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव विकास और बदलाव की नई परिभाषा गढ़ रहा है। यहां पंचायत की बैठकों में जनभागीदारी के माध्यम से गांव के हर चुनौतीका समाधान किया जाता है। गांव में 567 लोगों का राशन कार्ड बनाया गया हैं जिनमें 37 एपीएल कार्ड, 407 बीपीएल कार्ड शामिल हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र के माध्यम से 216 बच्चों को पोषण का लाभ मिल रहा है। धात्री और गर्भवती महिलाओं के लिए भी पोषण की व्यवस्था की गई है। समाजिक सुरक्षा के लिए 2 लाख 10 हजार खर्च किए गए हैं। साथ ही 342 लोगों को पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया है। घुघरी निवासी मंगरी बाई ने बताया कि उन्हें हर महिना 500 रूपए पेंशन मिलती है। उसी पैसे से अपना जीवन यापन करती हैं। परिवार के पालन पोषण करने में सहायता मिल रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत् 56 जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए गए हैं। 483 परिवारों के मनरेगा जॉब कार्ड बनाए गए हैं। पीछे दो वर्षाे में मनरेगा के 20 व्यक्तिगत तालाबों का निर्माण कराया गया है। ग्राम पंचायत घुघरी के विनोद राम ने बताया कि उनके गांव में अक्टूबर और नवम्बर में मनरेगा का कार्य चालू होता है। उसमें गांव के लोग काम करने जाते हैं। गांव के लोगों का जॉब कार्ड है। मनरेगा में कार्य करके सभी परिवार मिलकर 28 हजार रूपए कमा लेते हैं। इसे घर परिवार अच्छा से चल रहा है। महिला सशक्तिकरण के उददेश्य से 36 स्व सहायता समूहों का गठन कर 412 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। ग्राम पंचायत घुघरी की यह कहानी संवरते छत्तीसगढ़ के सुरक्षित होते भविष्य की कहानी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राष्ट्रीय डाक दिवस पर दी बधाई,जानिए डिजिटल युग में डाक विभाग की भूमिका ,,,

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रायपुर, 10 अक्टूबर 2024: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर भारतीय डाक विभाग के सभी कर्मियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारतीय डाक विभाग, देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित सरकारी डाक प्रणाली, आज भी अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। हर साल 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिससे इस विभाग द्वारा देश के विकास में दिए गए अमूल्य योगदान को सम्मानित किया जाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय डाक सेवा आज भी दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्क के रूप में जानी जाती है। यह सेवा न केवल शहरों में बल्कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में भी संचार का महत्वपूर्ण साधन बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल युग के इस दौर में भी भारतीय डाक ने अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है और यह सेवा ई-कॉमर्स, बैंकिंग और डिजिटल इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने डाक विभाग की अन्य सेवाओं की सराहना की, जैसे बैंकिंग सुविधा, जोकि ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक रही है। उन्होंने कहा कि यह विभाग न केवल संचार के क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय डाक दिवस, डाक सेवाओं की उपयोगिता और उनकी भूमिका का स्मरण कराता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आधुनिक तकनीक के बावजूद, डाक सेवा का महत्व बना हुआ है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां डिजिटल संसाधन सीमित हैं।भारतीय डाक सेवा दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है। राष्ट्रीय डाक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने डाक विभाग को देश के नागरिकों के साथ बेहतर संचार और सेवाओं को जोड़ने के लिए धन्यवाद दिया और उनके समर्पण की सराहना की।  

“शक्तिमान” बनकर जय हो टीम बाल विवाह रोकने कर रही जन जागरूकता

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जशपुर, 6 अक्टूबर 2024 – जिला प्रशासन और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयास से जिले में बाल विवाह के खिलाफ एक विशेष जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें इससे बचने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के मार्गदर्शन में जय हो टीम के स्वयंसेवकों ने एक अनोखा तरीका अपनाया। आज शहर के बस स्टेशन और मुख्य बाज़ार में स्वयंसेवक शक्तिमान के रूप में नजर आए। उन्होंने बाल विवाह रोकने के संदेश के साथ लोगों से संवाद किया और उन्हें इसके कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर जानकारी दी। शक्तिमान का यह अनूठा अवतार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों, सभी ने इस प्रयास की सराहना की। टीम के सदस्यों ने बताया कि बाल विवाह से बच्चों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर बुरा असर पड़ता है, और इसे रोकने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। कलेक्टर डॉ. मित्तल ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास जशपुर में बाल विवाह को जड़ से मिटाने के लिए बहुत कारगर सिद्ध होगा। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने आस-पास किसी भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करें। यह अभियान लोगों को जागरूक करने और समाज में बाल विवाह के खिलाफ एक मजबूत संदेश फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

जिले में बाल अपराध में कमी लाने, महिला बाल विकास विभाग कर रही जागरूकता अभियान

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जशपुर, 06 अक्टूबर 2024 कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के निर्देशन में जिला कार्यक्रम अधिकारी बी.डी. पटेल,जिला बाल संरक्षण अधिकारी शेखर यादव,जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के मार्गदर्शन के नेतृत्व में गुरुवार 3 सितंबर को शासकीय हाई स्कूल बरपानी में आईसीपीएस एवम चाइल्ड लाइन की टीम के द्वारा आईसीपीएस (बाल संरक्ष्ण इकाई) में चलने वाली सभी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ ही लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण, मानव तस्करी, बाल विवाह, नशा मुक्ति,बाल श्रम,दत्तक ग्रहण, गुड टच बैड टच के बारे जानकारी दी गई। परिवीक्षा अधिकारी श्रीमती अंजना मिश्रा ने बताया कि बच्चों के विरुद्ध हो रहे अपराधों को शून्य स्तर पर लाने हेतु जिलों की भौगोलिक, सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप कार्य योजना तैयार कर बच्चों के सर्वोत्तम हित में बाल अपराधों में कमी लाने हेतु पाठशालाओं, महाविद्यालयों, छात्रावासों, पंचायतों, राज संस्थाओं एवं नवनागरिकों, शासकीय एवं अशासकीय बाल देखभाल संस्थाओं के अधिकारियों/कर्मचारियों के माध्यम से जिलेभर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।इस अभियान में कंचन प्रजापति,अमित तिड़ू, रोहित चौधरी जागरूकता के सन्देश दे रहे हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान: विष्णुदेव साय सरकार की सराहनीय पहल,आंगनबाड़ी केंद्रों में पालकों को किया जा रहा जागरूक

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जशपुर,05 अक्टूबर 2024: 2015 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में लड़कियों की सुरक्षा, शिक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत कन्या भ्रूण हत्या रोकने, बाल विवाह के खिलाफ सख्त कदम उठाने, और बेटियों की शिक्षा में प्रगति लाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी के तहत कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के निर्देश पर पालकों को आंगनबाड़ी केंद्रों में बुलाकर बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ के बारे में जागरूक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार बेटियों को सशक्त बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उनका भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने के लिए हमें उनके जन्म से लेकर शिक्षा और अधिकारों तक हर स्तर पर साथ देना होगा।” उन्होंने विशेष रूप से कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ कड़े कदम उठाने और बाल विवाह को रोकने के लिए कड़े कानूनों के पालन की बात कही। शिक्षा को बढ़ावा: विष्णुदेव साय सरकार ने बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं को अमल में लाया है। इस अभियान के तहत बेटियों को स्कूलों में दाखिला दिलाने और उनकी पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियानों के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है। इसके तहत कई छात्राओं को सरकारी योजनाओं से सीधे लाभान्वित किया जा रहा है, जिससे उनकी शिक्षा में बाधाएं दूर हो रही हैं। सामाजिक जागरूकता और बदलाव: बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में विभिन्न सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। इसके साथ ही बाल विवाह को रोकने के लिए सख्त कानूनों का पालन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की अपील: मुख्यमंत्री ने समाज से अपील करते हुए कहा कि “हमें अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा और अवसर प्रदान करना होगा ताकि वे समाज में समान अधिकारों के साथ आगे बढ़ सकें। यह हमारा कर्तव्य है कि हम बेटियों को सशक्त बनाएं और उनकी सुरक्षा और शिक्षा में कोई कमी न हो।”  

*प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की उन्नति जय जवान-जय किसान के नारे को कर रही है सार्थक : विष्णु देव साय*

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*प्रदेश के किसानों की ओर से मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का जताया आभार* *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जारी की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 18वीं किस्त* *छत्तीसगढ़ के 24 लाख 98 हजार से अधिक किसानों के खातों में पीएम किसान सम्मान निधि के 566 करोड़ 77 लाख रुपए अंतरित* रायपुर 05 अक्टूबर 2024// प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महाराष्ट्र के वाशिम जिले से देश के लगभग 9 करोड़ 40 लाख से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 18वीं किस्त के रूप में 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे उनके खाते में अंतरित की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 18वीं किस्त के ऑनलाइन अंतरण कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 18वीं किस्त के रूप में प्रदेश के 24 लाख 98 हजार से अधिक किसानों के खातों में 566 करोड़ 77 लाख रुपए से अधिक की राशि अंतरित होने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। श्री साय ने इस मौके पर प्रदेश के किसानों को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 17 वीं किश्त की तुलना में इस बार 66 हजार 485 अधिक किसानों ने योजना का लाभ उठाया है। इससे पहले भी 16 वीं किश्त की तुलना में 17वीं किश्त का लाभ उठाने वाले किसानों की संख्या 01 लाख 11 हजार 518 अधिक थी। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना की किश्त-दर-किश्त लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोतरी होना इस बात का प्रमाण है कि भारत के कृषि क्षेत्र में कितनी तेजी से प्रगति हो रही है। यह मोदी सरकार पर किसानों के मजबूत भरोसे का भी प्रमाण है। श्री साय ने कहा कि 18 वीं किश्त के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के जो किसान भाई-बहन आज लाभान्वित हो रहे हैं, उनमें 02 लाख 49 हजार 867 वन-पट्टा धारक हैं और 30 हजार 408 किसान पीवीटीजी योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में किसानों की उन्नति जय जवान-जय किसान के नारे को सार्थक कर रही है। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा,  ईश्वर साहू, गुरु खुशवंत साहेब और डॉ. रामप्रताप मौजूद रहे।