कुनकुरी थाना: खाकी के आंगन में महकी नारी शक्ति, अनोखे अंदाज में मनाया गया महिला दिवस

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कुनकुरी थाना: खाकी के आंगन में महकी नारी शक्ति, अनोखे अंदाज में मनाया गया महिला दिवस कुनकुरी – समाज की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले हाथों ने जब सम्मान में फूल थामे और पुलिस परिवार के पुरुषों ने जब सेवा की कमान संभाली, तो कुनकुरी थाना परिसर एक मिसाल बन गया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यहाँ केवल एक कार्यक्रम नहीं हुआ, बल्कि नारी शक्ति के प्रति कृतज्ञता का एक ऐसा उत्सव मना जिसे देख हर कोई गदगद हो उठा। सम्मान और आत्मीयता का अनूठा संगम कार्यक्रम के मुख्य अतिथि SDOP विनोद कुमार मंडावी और थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राकेश यादव ने महिला पुलिस कर्मियों को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनके अटूट साहस को सलाम किया। उत्सव का आगाज महिला पुलिस कर्मियों द्वारा केक काटकर किया गया। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पुलिसिया अनुशासन के बीच खुशियों के रंग भर दिए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने महिलाओं के जज्बे को नई उड़ान दी: SDOP विनोद कुमार मंडावी: “आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। विशेषकर पुलिस विभाग में उनकी भूमिका कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है।” TI राकेश यादव: “यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संकल्प का है। महिला पुलिस कर्मियों की निष्ठा समाज के लिए प्रेरणा है और हम उनके अधिकारों व सशक्तिकरण के प्रति सदैव प्रतिबद्ध हैं।” जब पुरुषों ने संभाली जिम्मेदारी: एक भावुक पहल इस आयोजन की सबसे प्रेरक और अनूठी बात यह रही कि पहली बार पुलिस परिवार की महिलाओं के लिए इसे ‘ऐतिहासिक क्षण’ बनाया गया। > खास बात: पूरे कार्यक्रम के दौरान खाने-पीने से लेकर संगीत और मेहमाननवाजी तक की सारी व्यवस्था पुरुष पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाली। यह उनके बीच के आपसी प्रेम, सम्मान और समानता के भाव को प्रदर्शित करने वाला एक सशक्त संदेश था। एक सकारात्मक बदलाव की लहर कुनकुरी थाने में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब कार्यस्थल एक परिवार बन जाता है, तो वहां सम्मान और सुरक्षा की भावना अपने आप प्रबल हो जाती है। पुलिस परिवार की महिलाओं ने इस सम्मान को अपने जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण बताया।

BLACK FRIDAY : छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल

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BLACK FRIDAY : छत्तीसगढ़ में सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत, 50 से अधिक घायल छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को सड़क हादसों ने बड़ा कहर बरपाया। जशपुर और बलौदाबाजार जिलों में हुए दो अलग-अलग भीषण सड़क हादसों में कुल 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक यात्री घायल हो गए। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। जशपुर: ब्रेक फेल होने से बस पलटी, 5 की मौत जशपुर जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। झारखंड के कुरडेग से कुनकुरी आ रही अनमोल बस (CG 14 G 0263) करडेगा चौकी क्षेत्र के गोड़अंबा गांव में अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में 5 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 17 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह करीब 9:45 बजे ढलान के दौरान बस का ब्रेक फेल हो गया। बस में सवार एक यात्री ने बस रोकने के लिए कहा, तभी कंडक्टर ने चिल्लाकर बताया कि ब्रेक फेल हो गया है। कुछ ही क्षण बाद बस अनियंत्रित होकर सुरेंद्र साय के निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास में पलट गई। बस में दो दर्जन से अधिक यात्री सवार थे। घटना के बाद गोड़अंबा गांव के दिगंबर यादव ने तुरंत मदद की पहल की। उनके साथ सरपंच पति शिवशंकर साय, उपसरपंच दशरथ प्रसाद यादव और प्रभाशंकर यादव ने प्रशासन को सूचना दी और राहत कार्य शुरू कराया। जेसीबी की मदद से बस हटाकर यात्रियों को बाहर निकाला गया। करीब 11 बजे एसडीएम नंदजी पांडे, एसडीओपी विनोद मंडावी समेत प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। प्रशासनिक वाहनों और 7 एम्बुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल भेजा गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर कुनकुरी डॉ. के. कुजूर ने हादसे में 5 लोगों की मौत की पुष्टि की है। मृतकों में पति-पत्नी और पिता-पुत्र शामिल हैं। मृतकों के नाम महेश राम (45), ग्राम मकरीबंधा, तहसील दुलदुला बिमला (42), ग्राम मकरीबंधा (पति-पत्नी) संपति देवी (52), जिला सिमडेगा, झारखंड दिगेश्वर (40), ग्राम ढोढी, तहसील कुरडेग, जिला सिमडेगा घनश्याम (5 माह), ग्राम ढोढी (पिता-पुत्र) घायलों का इलाज कुनकुरी, जिला अस्पताल और अन्य अस्पतालों में किया जा रहा है। 4 गंभीर घायलों को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। हादसे की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पत्नी कौशल्या देवी साय कुनकुरी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज व सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि यह हादसा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में हुआ है। बलौदाबाजार: नेशनल हाईवे पर बस को ट्रक ने मारी टक्कर, 5 की मौत इधर बलौदाबाजार जिले में रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे पर भी भीषण सड़क हादसा हो गया। दरचुरा के पास RBS यात्री बस को पीछे से तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि बस सवारी चढ़ाने के लिए सड़क किनारे रुकी हुई थी, तभी पीछे से आ रहे ट्रक ने बस को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस सड़क से नीचे खेत में जा घुसी। इस हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 35 से अधिक यात्री घायल हो गए। घायलों को सिमगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जबकि गंभीर घायलों को रायपुर रेफर किया गया है। सिमगा पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य में जुटी हुई है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में शुक्रवार को हुए इन दो बड़े सड़क हादसों में कुल 10 लोगों की जान चली गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। प्रशासन दोनों घटनाओं की जांच में जुटा हुआ है।  

रांची में ‘TCI प्रोड्यूसर्स मीट 2026’ का समापन, आदिवासी सिनेमा को मिलेगा नया मंच

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रांची में ‘TCI प्रोड्यूसर्स मीट 2026’ का समापन, आदिवासी सिनेमा को मिलेगा नया मंच रांची, 1 मार्च 2026 – Tribal Cinema of India (TCI) के द्वारा रांची के बगाइचा सोशल सेंटर में दो दिवसीय ‘TCI प्रोड्यूसर्स मीट 2026’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 28 फरवरी और 1 मार्च को हुआ। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से फिल्म बनाने वाले लोग, निर्देशक, लेखक और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आदिवासी और क्षेत्रीय फिल्मों को मजबूत बनाना और उन्हें देश-विदेश तक पहुंचाना था। पहले दिन क्या हुआ? पहले दिन चर्चा हुई कि आदिवासी फिल्मों को सिर्फ कला तक सीमित न रखकर इसे रोजगार और उद्योग के रूप में कैसे आगे बढ़ाया जाए। फिल्म बनाने में आने वाली दिक्कतों—जैसे पैसों की कमी, सही मार्गदर्शन का अभाव और फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाने की समस्या—पर खुलकर बात हुई। डिजिटल प्लेटफॉर्म मेरा टीवी की ओर से भी जानकारी दी गई कि अब गांव और क्षेत्रीय भाषा की फिल्में भी ऑनलाइन माध्यम से देश-विदेश में दिखाई जा सकती हैं। दूसरे दिन क्या निर्णय हुए ? दूसरे दिन फिल्म निर्माण को बेहतर बनाने और नई तकनीक अपनाने पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्रीय फिल्मों को सिर्फ स्थानीय दर्शकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अच्छी डबिंग और तकनीक से इन फिल्मों को दूसरी भाषाओं में भी दिखाया जा सकता है। बैठक में ‘प्रोड्यूसर्स कंसोर्टियम’ यानी निर्माताओं का एक समूह बनाने का प्रस्ताव रखा गया। यह समूह फिल्मों के निर्माण और वितरण में आपसी सहयोग करेगा। साथ ही एक कार्यकारी टीम और रिसर्च टीम बनाने की भी बात कही गई। फिल्म पिचिंग सेशन भी हुआ कार्यक्रम के अंतिम चरण में नए फिल्मकारों ने अपने फिल्म प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इससे उन्हें निवेशकों से जुड़ने और भविष्य में फिल्म बनाने का अवसर मिल सकेगा। कई राज्यों से पहुंचे प्रतिभागी इस कार्यक्रम में झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार से करीब 50 फिल्म निर्माता, निर्देशक और कलाकार शामिल हुए। आयोजकों ने कहा कि TCI आगे भी आदिवासी संस्कृति और पहचान को मजबूत करने के लिए काम करता रहेगा। अनामिका मरियन टोप्पो ने ट्राइबल सिनेमा ऑफ इंडिया (TCI) की प्रेस विज्ञप्ति जारी की। कार्यक्रम को सफल बनाने में बीजू टोप्पो, दीपक बड़ा, एनुस कुजूर, जगत लकड़ा, सुरेंद्र कुजूर, अंकित बागची, रामकृष्ण सोरेन, इशाराज मुर्मू, साहेब नागपुरिया, निशिता रॉय, राजीव सिन्हा, मिथिलेश छेत्री, सृष्टि मरांडी, सौरव मुंडा, दीप्ति मिंज, अनामिका टोप्पो, अजित टुडू, संजय शुभम, आकृति लकड़ा, आनंद हेंब्रम, अनिकेत उरांव, आनंद सोरेन, पवनदीप खाखा और राकेश रोशन किड़ो आदि ने सक्रिय योगदान दिया। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन जेनिफर बाखला द्वारा किया गया।

नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि

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नहीं रहे पी. के. बजाज, ‘लोटपोट’ को ऊँचाइयों तक पहुंचाने वाले युगपुरुष को भावभीनी श्रद्धांजलि  नई दिल्ली – हिंदी बाल-पत्रकारिता जगत के लिए अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। लोकप्रिय बाल पत्रिका लोटपोट को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले वरिष्ठ प्रकाशक पी. के. बजाज का निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी प्रख्यात कार्टूनिस्ट एवं ‘मोटू पतलू’ के सर्जक डॉ. हरविंदर मांकड़ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से साझा की। डॉ. मांकड़ ने भावुक शब्दों में लिखा कि आज मन भारी है और शब्द साथ नहीं दे रहे। उन्होंने बताया कि पी. के. बजाज ने अपने पूज्य पिता ए. पी. बजाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ‘लोटपोट’ और मायापुरी जैसी पत्रिकाओं को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके नेतृत्व में ये पत्रिकाएं पाठकों के बीच सबसे अधिक पढ़ी और सराही जाने वाली पत्रिकाओं में शामिल रहीं। नए रचनाकारों के संरक्षक थे बजाज जी डॉ. मांकड़ के अनुसार, पी. के. बजाज केवल एक प्रकाशक नहीं थे, बल्कि वे प्रतिभाओं को पहचानने वाले साधक थे। नए रचनाकारों को अवसर देना, उनकी प्रतिभा पर विश्वास करना और उन्हें आगे बढ़ाने का साहस देना उनकी कार्यशैली का स्वाभाविक हिस्सा था। उन्होंने बताया कि उनका बजाज जी से 47 वर्षों का आत्मीय संबंध रहा। उनके जीवन की पहली बड़ी पहचान ‘मोटू पतलू’ को प्रकाशित करने का श्रेय भी बजाज जी को ही जाता है। आज यह किरदार घर-घर में मुस्कुराहट बाँट रहा है तो उसमें बजाज जी का विश्वास, आशीर्वाद और दूरदर्शिता शामिल है। संघर्ष में देखा संभावना, अनजान को दी पहचान डॉ. मांकड़ ने अपने संदेश में लिखा कि जब वे संघर्ष के दौर में थे, तब बजाज जी ने उनमें संभावना देखी। जब वे अनजान थे, तब उन्होंने पहचान दी। हर मोड़ पर उन्होंने संबल और हौसला प्रदान किया। उनके निधन से बाल साहित्य, कॉमिक्स और पत्रिका प्रकाशन जगत में शोक की लहर है। ‘लोटपोट’ का हर पन्ना, हर मुस्कुराता चेहरा और हर छपी हुई रेखा मानो उन्हें नमन कर रही है। ईश्वर से प्रार्थना की जा रही है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों व शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। सेलिब्रिटी क्लब ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

कुसमी मारपीट कांड: एक आदिवासी ग्रामीण की मौत के बाद एसडीएम पर गंभीर सवाल, एसडीएम करुण डहरिया गिरफ्तार

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कुसमी मारपीट कांड: एक ग्रामीण की मौत के बाद प्रशासन पर गंभीर सवाल, एसडीएम गिरफ्तार बलरामपुर,16 फरवरी 2026 – बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत मारपीट की एक गंभीर घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अवैध बॉक्साइट खनन की कथित जांच के दौरान हुए विवाद के बाद एक आदिवासी ग्रामीण की मौत और दो अन्य के घायल होने से एसडीएम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, कुसमी ब्लॉक के हंसपुर क्षेत्र में जांच के दौरान स्थानीय ग्रामीणों और एसडीएम करुण कुमार डहरिया के बीच विवाद हुआ। एसडीएम के साथ उनके निजी लोग थे जिन्हें बचाने के लिए और यह दिखाने के लिए कि यह मारपीट एक राजस्व विभाग की कार्रवाई के दौरान हुई है,एसडीएम ने नायब तहसीलदार को फोन करके दो पुलिसकर्मियों को लेकर आने का आदेश दिया। आरोप है कि इस दौरान कुसमी एसडीएम करुण डहरिया एवं उनके साथ मौजूद निजी लोगों द्वारा ग्रामीणों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। घायल ग्रामीणों का कहना है कि वे गेहूं के खेत में सिंचाई कर रात करीब 8 बजे लौट रहे थे, तभी एसडीएम की गाड़ी और एक अन्य वाहन में सवार 6–7 लोगों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और लाठी-डंडे व रॉड से पिटाई की। मारपीट के बाद तीनों ग्रामीणों को कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां इलाज के दौरान राम नरेश राम (60 वर्ष) की मौत हो गई, जबकि अजीत उरांव (60 वर्ष) और आकाश अगरिया (20 वर्ष) घायल हैं। घटना के बाद स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका को देखते हुए कुसमी थाना एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। जांच के लिए बलरामपुर एडिशनल एसपी विश्व दीपक त्रिपाठी कुसमी पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, मारपीट की घटना के बाद एसडीएम की सूचना पर पहुंचे तहसीलदार पारस शर्मा को भी इस पूरे मामले में साजिश के तहत फंसाने की कोशिश किए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि नायब तहसीलदार, जो घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे, उनके साथ दो पुलिसकर्मियों को भी जबरन इस मामले में लपेटने का प्रयास किया गया, जिससे तहसीलदार संघ में भारी आक्रोश है और संघ इस मुद्दे पर सक्रिय हो गया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि एसडीएम करुणा डहरिया का व्यवहार पूर्व से ही आक्रामक रहा है और वे जनभावनाओं के विपरीत कार्य करते रहे हैं। उनके पुराने मामलों को लेकर भी किशोरावस्था में अपने पिता की हत्या करने के गंभीर दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक या न्यायिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि जांच प्रशासनिक थी, तो एसडीएम सरकारी वाहन और सुरक्षा बल के साथ क्यों नहीं गए, और निजी लोगों की मौजूदगी में ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी? फिलहाल,कार्रवाई जारी है।

बादलखोल से बगीचा तक: शिव बाबा को मिला भाजपा पि.व.मोर्चा का बड़ा दायित्व

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बादलखोल से बगीचा तक: शिव बाबा को मिला भाजपा पि.व.मोर्चा का बड़ा दायित्व बगीचा (जशपुर) –  वनवासी अंचल बादलखोल में भारतीय जनता पार्टी का झंडा मजबूती से गाड़ने वाले जनप्रिय नेता शिव कुमार यादव को भारतीय जनता पार्टी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा का बगीचा मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति पिछड़ा वर्ग मोर्चा जशपुर के जिलाध्यक्ष अनूप नारायण सिंह द्वारा की गई। देखिए सूची विकास की राह में संघर्ष का दूसरा नाम बन चुके शिव कुमार यादव—जिन्हें क्षेत्र में लोग स्नेह से शिव बाबा कहते हैं—ने एक बार फिर अपनी नेतृत्व क्षमता साबित की है। संगठन के भीतर सक्रियता और जनसमस्याओं को लेकर सतत संघर्ष उनकी पहचान बन चुका है। उपसरपंच पद पर दूसरी बार निर्विरोध जीत जनपद पंचायत बगीचा की ग्राम पंचायत गायलूँगा में 8 मार्च को संपन्न उपसरपंच चुनाव में शिव कुमार यादव ने निर्विरोध जीत दर्ज कर दूसरी बार यह पद हासिल किया। इससे पहले वे निर्विरोध पंच भी चुने जा चुके हैं। वरिष्ठ नेताओं का आभार नवनियुक्त मंडल अध्यक्ष शिव कुमार यादव ने नई जिम्मेदारी मिलने पर मोर्चा जिलाध्यक्ष अनूप नारायण सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष भरत सिंह सहित सभी वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। गांव की आवाज बने ‘शिव बाबा’ शिव बाबा सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि गांव की आवाज बन चुके हैं। सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर उनके संघर्ष और धरना-प्रदर्शनों ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया है। भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में वे गांव के समग्र विकास को अपनी प्राथमिकता मानते हैं। नियुक्ति पर जश्न   उनकी नियुक्ति की खबर मिलते ही पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई, एक-दूसरे को गुलाल लगाया और मिठाइयां बांटी। संघर्ष से सफलता तक—शिव बाबा की कहानी गायलूँगा से लेकर पूरे बगीचा क्षेत्र तक शिव बाबा के संघर्षों की गूंज सुनाई देती है। सड़क हो, बिजली हो या अन्य बुनियादी जरूरतें—वे हर मुद्दे पर जनता के साथ खड़े नजर आते हैं। उनका मिलनसार स्वभाव और हर दुख-सुख में गांववासियों के साथ रहने की प्रवृत्ति ही उन्हें सबसे अलग बनाती है।

बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष

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बड़ी खबर : कंवर समाज को मिला नया राष्ट्रीय नेतृत्व, छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बनीं राष्ट्रीय अध्यक्ष   जशपुर : अखिल भारतीय आदिवासी कंवर समाज विकास समिति का तीन दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन केंद्रीय कार्यालय पमशाला, जिला जशपुर में भव्य व गरिमामय वातावरण में संपन्न हो रहा है। सम्मेलन के दूसरे दिन सर्वसम्मति से राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चयन किया गया, जिसमें श्रीमती कौशल्या विष्णुदेव साय को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। उल्लेखनीय है कि श्रीमती कौशल्या साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी हैं और समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी भूमिका लंबे समय से सक्रिय, समर्पित और प्रभावशाली रही है। सम्मेलन में मंगरु साय पैंकरा को राष्ट्रीय महासचिव, अनंत राम पाकरगांव को न्याय समिति अध्यक्ष, श्रीमती शांता साय (लैलूंगा) को राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष तथा हरिशंकर साय (मधुबन) को राष्ट्रीय युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष चुना गया। इस अवसर पर समाज उत्थान, शिक्षा, संगठन विस्तार और जनकल्याण के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही समाज और जनसेवा को मजबूत करने के उद्देश्य से “ मिलनसार समाज एवं जनसेवा दौरा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत नवचयनित पदाधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में जाकर समाजजनों से सीधा संवाद करेंगे। नवचयनित पदाधिकारियों को पूर्व पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने बधाई देते हुए विश्वास जताया कि श्रीमती कौशल्या साय के नेतृत्व में कंवर समाज को नई दिशा, संगठनात्मक मजबूती और जनसेवा को व्यापक विस्तार मिलेगा।

देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान!प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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देखिए धान की “उल्टी गंगा” — राइस मिल से सीधे खरीदी केंद्र पहुंच रहा धान! जशपुर से बड़ी खबर जशपुर जिले में धान खरीदी के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर किसानों का धान खरीदी केंद्र से राइस मिल जाता है, लेकिन जशपुर में मामला बिल्कुल उल्टा निकला — राइस मिल से धान निकालकर सीधे खरीदी केंद्र ले जाने की कोशिश पकड़ी गई है। ताजा मामला कांसाबेल विकासखंड का है। यहां बगिया स्थित वेदांश राइस मिल से अवैध रूप से धान निकालकर उसे चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। 🚜 दो ट्रैक्टर पकड़े गए, 100 क्विंटल धान जब्त कार्रवाई के दौरान राइस मिल से निकलकर धान खरीदी केंद्र की ओर जा रहे दो ट्रैक्टरों को रोका गया। ट्रैक्टरों में करीब 100 क्विंटल धान लोड था। ट्रैक्टर चालकों मानेश्वर सिदार और यमन बेहरा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि धान राइस मिल से चोंगरीबहार धान खरीदी केंद्र ले जाया जा रहा था। यह कार्रवाई राइस मिल के पास ही, खरीदी केंद्र के रास्ते में की गई। फिलहाल दोनों ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए हैं और दस्तावेजों की जांच जारी है। ❓ पुराने धान को नया बताकर खपाने की आशंका प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक आशंका है कि राइस मिल में रखा पुराना धान नए धान के रूप में खरीदी केंद्र में खपाने की कोशिश की जा रही थी। अगर ऐसा साबित होता है, तो यह सीधे-सीधे सरकारी खरीदी प्रणाली से बड़ा खेल माना जाएगा। 🔍 और भी जगहों से मिल रही शिकायतें धान मंडी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सिंगीबहार क्षेत्र की एक राइस मिल से भी आसपास की मंडियों में इसी तरह धान भेजे जाने की चर्चा है।हमारी पड़ताल जारी है। इतना ही नहीं, गड़बड़ी पकड़ने के लिए उपरकछार बेरियर पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे की दिशा भी संदिग्ध बताई जा रही है। कैमरा सड़क की बजाय पुलिस चौकी को कवर कर रहा है। जानकारों का दावा है कि जिला प्रशासन राइस मिलों के सीसीटीवी कैमरे में धान लद रहे विजुअल और धान खरीदी में लगे सीसीटीवी कैमरे से धान उतरते विजुअल की मिलान करे तो बिचौलिए और राइस मिलर बेपर्दा हो जाएंगे। आज दोपहर करीब 2 बजे बेरियर पर कोई भी अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था, जिससे ग्रामीणों के आरोपों को और बल मिलता है। 🏛️ संरक्षण का आरोप, बड़ा खेल होने की चर्चा ग्रामीणों और मंडी सूत्रों का दावा है कि यह खेल छोटे स्तर का नहीं, बल्कि बड़े संरक्षण में चल रहा है। चर्चा है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण राइस मिलरों को मिल रहा है। ⚠️ प्रशासन सख्त, बड़ी कार्रवाई के संकेत अधिकारियों का कहना है कि धान खरीदी में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच के बाद राइस मिल संचालक पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। 👉 जशपुर में धान खरीदी को लेकर उठे ये सवाल अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। आने वाले दिनों में जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव की कृपा से किसान को मिला पट्टा,फिर भी नहीं बेच पा रहा धान,,,सुशासन पर बड़ा सवाल

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पटवारी–पोर्टल की जुगलबंदी में पिसता किसान: बी-1 खसरा गड़बड़ी से धान अटका, मुख्यमंत्री के गृहजिले में सुशासन पर उठा बड़ा सवाल जशपुर,13/012026 – जिले के कांसाबेल तहसील का एक किसान बी वन में दर्ज आधिकारिक खसरे नम्बर के कारण न तो सरकार को धान बेच पा रहा है, न सोलर पैनल लगवा पा रहा है,न ही अपनी खेती को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन ले पा रहा है। दरअसल,तिलंगा गांव का किसान दिलबंधु तिर्की को पिता की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच जमीन बंटवारे के बाद पट्टा नहीं मिल रहा था।जिसको लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को अपनी तकलीफ बताई। मुख्यमंत्री कार्यालय बगिया के त्वरित सक्रियता से पटवारी ने किसान का पट्टा बनाकर दे दिया। अब परेशानी तब खड़ी हो गई जब दिलबंधन तिर्की अपनी खेती का धान बेचने के लिए पंजीयन कराने सहकारी समिति गया।जहां देखा गया की पट्टे में दर्ज खसरा नंबर सरकार के भू रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग है। दरअसल, वर्ष 2022–23 की बंटवारा सूची में खाता विभाजन पूरी तरह वैधानिक रूप से हुआ था। बंटवारे के आधार पर दर्ज खसरा नंबर हैं— 666/6, 666/9, 666/1 ठ, 666/13, 666/15, 666/20, 672/7, 666/5, 666/8, 666/11, 666/1 ण, 666/17, 666/19, 672/1उ। इन खसरा नंबरों के आधार पर बंटवारा सूची पूरी तरह सही है। यही नहीं, इसी आधार पर ऋण पुस्तिका भी विधिवत जारी की गई, जिसे 23 जून 2025 को पटवारी द्वारा प्रदान किया गया था। लेकिन समस्या तब सामने आई जब किसान ने ऑनलाइन बी-1 रिकॉर्ड निकाला। बी-1 में खसरा नंबर 666/2, 666/12, 666/16, 666/21, 666/5, 666/17 दर्ज मिले, जो न तो बंटवारा सूची से मेल खाते हैं और न ही ऋण पुस्तिका से। इसी तकनीकी विसंगति के कारण सहकारी समिति ने किसान का धान पंजीयन करने से इंकार कर दिया। नतीजतन, किसान का धान आज भी घर में रखा हुआ है। इस संबंध में जब किसान पटवारी के पास गया तो पटवारी ने साफ कह दिया कि खसरा नंबर पट्टे वाले ही पोर्टल पर चढ़ाया लेकिन नहीं लिया।अब खसरा नंबर चेंज नहीं हो सकता।पटवारी की दो टूक बातें सुनकर किसान हताश हो गया और उसका पंजीयन नहीं होने से धान घर में रखा हुआ है।   इस संबंध में जब हमने हल्का पटवारी विक्की गुप्ता से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि दिलबंधन तिर्की के साथ ही उसके दो भाइयों का भी खसरा नंबर पोर्टल में बदल गया है। ऐसा कइयों का हुआ है।जो खसरा नंबर बी वन में दिख रहा है, वही मान्य है।किसान सीमांकन करा सकता है लेकिन किसान इस बात को समझ नहीं पा रहा है। वहीं पीड़ित किसान ने बताया कि पटवारी के मनमानी से तंग आकर नायब तहसीलदार कांसाबेल के न्यायालय में खसरा नंबर को ठीक करने के लिए आवेदन दिया गया है।जो बी वन में खसरा नंबर है,वह मेरे भाइयों की जमीन है।ऐसे में भविष्य में विवाद पैदा हो सकता है।किसान ने पटवारी पर तहसीलदार के आदेश नहीं मानने और किसान का धान नहीं बिकने पर हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।   बहरहाल,यह बड़ा सवाल है कि ऐसे में विष्णु का सुशासन कैसे सफल होगा कि एक किसान सरकारी सिस्टम के कारण अपना धान नहीं बेच पा रहा है? यह स्थापित लोकल्याणकारी राज्य में शासन की योजनाओं का लाभ हितग्राही को पहुंचा कर देना है न कि उसे दफ्तरों के चक्कर लगवाने हैं। अब देखना है कि मुख्यमंत्री के गृहजिले में ऐसे किसानों को न्याय कब तक मिलेगा या कागजी घोड़े दौड़ते रहेंगे।

युवती ने शादी से मना किया तो प्रेमी फंदे पर झूल गया,प्रेमी के भाई ने लगाए गंभीर आरोप

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कुनकुरी में युवक ने लगाई फांसी, प्रेम संबंध को लेकर प्रताड़ना का आरोप कुनकुरी,09 जनवरी 2026 – कुनकुरी थाना क्षेत्र के ठेठेटांगर में शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे एक 20 वर्षीय युवक ने अपने ही घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दिलेश्वर यादव के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही कुनकुरी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि दिलेश्वर यादव का पड़ोस के गांव की एक सजातीय युवती से प्रेम संबंध था और वह उससे विवाह करना चाहता था। परिजनों के अनुसार इस रिश्ते से युवती के पिता और चाचा नाराज थे और उन्होंने दिलेश्वर को जान से मारने की धमकी देते हुए युवती से दूर रहने के लिए बार-बार आमने-सामने और फोन पर दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर दिलेश्वर ने यह कदम उठाया। परिजनों ने यह भी दावा किया कि दिलेश्वर यादव ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उसने युवती का नाम लेते हुए अपनी मौत का कारण प्रेम और विवाह को लेकर हुए कथित धोखे को बताया है। वहीं कुनकुरी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दिलेश्वर यादव ने अपने घर के म्यार (छज्जे/अंदरूनी हिस्से) में फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस का कहना है कि मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की जा रही है और आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस संभवतः सोशल मीडिया पोस्ट, परिजनों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच करेगी।