मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 25 सितंबर को ननिहाल जाएंगे, रोड शो कर भाजपा की डबल इंजन सरकार के गिनाएंगे फायदे,दो दिवसीय दौरा कार्यक्रम तय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बगिया गृहनिवास आगमन, भाजपा सदस्यता अभियान और झारखंड के कुरडेग में करेंगे चुनावी रोड शो जशपुर, 24 सितंबर 2024: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 24 सितंबर की शाम अपने गृहनिवास बगिया पहुंचेंगे, जहां वे रात्रि विश्राम करेंगे। मुख्यमंत्री के आगमन से गांव में उत्साह का माहौल है, और उनके स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं। सूत्रों के अनुसार, 25 सितंबर की सुबह मुख्यमंत्री अपने गांव में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान में भाग लेंगे। इस अभियान के दौरान श्री साय नए सदस्यों को भाजपा से जोड़ने का कार्य करेंगे, जिससे संगठन को और मजबूती मिलेगी। इसके बाद वे निर्धारित समयानुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय झारखंड के सिमडेगा जिले के लिए हेलीकॉप्टर से रवाना होंगे, जहां वे एक विशाल चुनावी रोड शो करेंगे। झारखंड में होने वाले इस रोड शो को लेकर काफी उत्साह है और भाजपा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उनकी अगवानी के लिए तैयार हैं।बड़ी बात यह भी कि कुरडेग सीएम साय का ननिहाल है।इस इलाके में श्री साय की अच्छी पकड़ है जिसका लाभ आनेवाले झारखण्ड चुनाव में भाजपा को मिलेगा। अपुष्ट जानकारी के अनुसार श्री साय रोड शो के बाद शाम को फिर से बगिया लौट आएंगे और 27 सितंबर को रायपुर के लिए रवाना होंगे। उनके इस दौरे से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और जनता में भारी उत्साह है, और उनके स्वागत के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

बड़ी खबर:आकाशीय बिजली गिरने से पेड़ के नीचे 22 लोगों में 1 की मौत,कई घायल,घायलों का नजदीकी अस्पताल में ईलाज जारी

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तालाब के किनारे पिकनिक मना रहे लोगों ने बारिश से बचने के लिए बड़े पेड़ के नीचे जमा हुए और बड़े हादसे का शिकार हो गए,पढ़िए खबर जांजगीर-चांपा,22 सितंबर 2024 – जिले के सुकली गांव में पिकनिक मना रहे युवकों पर कुदरत का कहर टूट पड़ा। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 11 साल के चंद्रहास दर्वेश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 9 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस वक्त हुआ जब अचानक मौसम बिगड़ा और बारिश के साथ तेज बिजली चमकने लगी। घटना का विवरण जानकारी के मुताबिक, सुकली गांव के तालाब किनारे लगभग 20 से 22 लोग पिकनिक मना रहे थे। मौसम खराब होने पर वे सभी एक पेड़ के नीचे इकट्ठा हो गए। इसी दौरान अचानक आकाशीय बिजली गिरी और चंद्रहास दर्वेश की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि 9 अन्य लोग घायल हो गए। घायलों को तुरंत जिला अस्पताल जांजगीर ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। यह हादसा दामिनी एप के प्रति जागरूकता की कमी को भी उजागर करता है, जो लोगों को आकाशीय बिजली के बारे में सचेत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की तकनीक और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके। बारिश के दौरान पेड़ों के नीचे इकट्ठा होना जानलेवा साबित हो सकता है, जैसा कि इस घटना में देखने को मिला। जिला प्रशासन ने घटना पर दुख जताते हुए लोगों से अपील की है कि बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें। पेड़ों के नीचे इकट्ठा होने से बचें और दामिनी एप का इस्तेमाल करें, जो आकाशीय बिजली के बारे में समय रहते चेतावनी देता है। घायलों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी जरूरी मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई है। वहीं, मृतक चंद्रहास दर्वेश के परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया गया है।  

*बड़ी खबर: 20 लाख के चार इनामी माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, लोन वर्राटू अभियान के तहत हुई बड़ी सफलता**मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुनर्वास नीति का बड़ा असर*

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 रायपुर/दन्तेवाड़ा,22 सितंबर2024 – लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान के तहत दंतेवाड़ा जिले में माओवादी गतिविधियों पर एक और बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। विष्णु सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर, माओवादी दंपति सहित 20 लाख रुपये के चार इनामी माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पित माओवादियों में रीजनल कंपनी नंबर 02 के दो सदस्य, एक उत्तर सब जोनल ब्यूरो में सक्रिय राजनीतिक टीम की सदस्य और एक केएएमएस (क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन) की पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं। शासन ने इन पर क्रमशः 8-8 लाख, 3 लाख और 1 लाख रुपये के इनाम घोषित किए थे। माओवादियों की पृष्ठभूमि रीजनल कंपनी नंबर 02 के सदस्य हुंगा तामो और उनकी पत्नी आयती ताती, दोनों पर 8 लाख रुपये का इनाम था। हुंगा तामो 2018 में छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर पुलिस पार्टी पर हमले में शामिल था। वहीं, राजनीतिक टीम सदस्य देवे वंजाम नए कैडर को नक्सली विचारधारा सिखाने का कार्य करती थी, जिस पर 3 लाख रुपये का इनाम था। इनके अलावा, केएएमएस की पूर्व अध्यक्ष माड़वी आयते, जिन पर 1 लाख रुपये का इनाम था, भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल थी। माओवादियों ने लोन वर्राटू अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर यह निर्णय लिया। नक्सल संगठनों में बढ़ते मतभेद, अमानवीय जीवनशैली, और जंगलों में कठिन जीवन ने इन माओवादियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने पर मजबूर किया। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने अपने भविष्य को समाज में सकारात्मक योगदान देने का संकल्प लिया है। अभियान की अब तक की उपलब्धियां लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान और पुनर्वास नीति के तहत अब तक 872 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिसमें 197 इनामी माओवादी शामिल हैं। जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ की मदद से चलाए जा रहे इस अभियान में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई है। पुनर्वास और पुनर्स्थापन आत्मसमर्पित माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण और आवास की सुविधा भी प्रदान की जाएगी ताकि वे समाज में पुनर्वासित होकर एक नई शुरुआत कर सकें। इस सफलता के पीछे जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स का विशेष योगदान रहा है।  

ब्रेकिंग – सन्ना-जशपुर रोड जाम,किसानों ने किया जाम,छुट्टेवेशियों से परेशान किसान कर रहे नारेबाजी

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जशपुर,22 सितंबर 2024/ आवारा पशुओं से परेशान किसानों ने सन्ना – जशपुर सड़क जाम कर दी है।किसानों का कहना है कि आवारा मवेशियों को खुला छोड़े जाने पर महीने भर पहले से ही मवेशी मालिकों और प्रशासन को कंट्रोल करने कहा गया था।कोई सुनवाई नहीं होने और सुबह 8 बजे से ही सड़क पर चक्का जाम कर दिए हैं।स्थानीय पुलिस व तहसीलदार मौके पर जाम खुलवाने के लिए प्रदर्शनकारियों से बात कर रहे हैं लेकिन पर्दशनकारी मानने को फिलहाल तैयार नहीं हैं।

महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने नक्सल पीड़ितों की कहानी उनकी जुबानी सुनी,पीड़ितों ने मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार

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  नई दिल्ली, 22 सितंबर 2024 – छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र से 70 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल आज राष्ट्रपति भवन पहुंचा, जहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। बस्तर में दशकों से माओवाद के आतंक का सामना कर रहे ये लोग, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल के तहत अपनी आवाज देश की सर्वोच्च सत्ता तक पहुंचाने में सक्षम हुए। राष्ट्रपति ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि बस्तर के लोग पिछले 40 वर्षों से माओवादी आतंक का शिकार हो रहे हैं।जिनमें से कुछ लोग आपके सामने जीवित बचकर आये हैं।उन्होंने बताया कि माओवादियों के हमलों में हजारों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों स्थायी रूप से अपंग हो चुके हैं। बारूदी सुरंगों और बम विस्फोटों ने न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें गहरा आघात दिया है। उन्होंने बताया कि माओवादी आतंक ने उनके घरों, जमीन और सांस्कृतिक धरोहर को बर्बाद कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले ढाई दशकों में 8,000 से अधिक लोग इस हिंसा के शिकार हुए हैं, और आज भी कई लोग नक्सलियों के डर में जी रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के सामने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सराहना करते हुए बताया कि  बस्तर में शांति बहाली और विकास के कई महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय की संवेदनशील पहल के तहत बस्तर के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनकी योजनाओं ने बस्तरवासियों में एक नई उम्मीद का संचार किया है। प्रतिनिधियों ने बताया कि मुख्यमंत्री साय ने न केवल नक्सल उन्मूलन के लिए ठोस कदम उठाए हैं, बल्कि वहां के लोगों को एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर करने के लिए भी काम किया है। उनके नेतृत्व में बस्तर में शांति बहाली और पुनर्निर्माण के लिए गम्भीर प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर शांति समिति के प्रतिनिधियों मंगऊ राम कावड़े और जयराम दास ने राष्ट्रपति से अपील की कि बस्तर को माओवादी आतंक से मुक्त कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने बस्तर को फिर से उसकी प्राकृतिक सुंदरता और शांति लौटाने की मांग की। महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिनिधियों की पीड़ा को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि सरकार बस्तर में शांति और विकास के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि बस्तरवासियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नक्सलवाद से मुक्ति पाने के लिए  छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री की नई पहल की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।यह मुलाकात नक्सल पीड़ितों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। वहीं,राष्ट्रपति से मिलने का यह अवसर बस्तरवासियों के लिए एक आशा की किरण साबित हो सकता है, जो वर्षों से नक्सली हिंसा के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।नक्सल प्रभावित लोगों में उम्मीद जागी है,जो आने वाले समय में बस्तर के भविष्य को एक नई दिशा दे सकता है।  

*भर्तियों की सुनामी : साय सरकार में युवाओं के दुख भरे दिन बीते* *मुख्यमंत्री ने ग्रामीण आजीविका मिशन में 237 पदों पर भर्ती को दी मंजूरी*

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रायपुर 21 सितम्बर 2024/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्य के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर देने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेकर विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती को मंजूरी दे रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा स्वास्थ्य विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में रिक्त पदों की भर्ती के प्रस्ताव को हरी झण्डी दी गई है। इसके तहत राष्ट्रीय आजीविका मिशन में 237 पदों पर नई भर्ती की जाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में भर्ती के प्रस्ताव को वित्त विभाग ने मंजूरी प्रदान कर दी है। जिसमें राज्य स्तर के कुल 09 और जिला स्तरीय 228 पद शामिल हैं। राज्य स्तरीय पदों में सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (वित्तीय प्रबंधन), सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (फार्म आजीविका), प्रोग्रामर व लेखापाल के एक-एक पद एवं भृत्य के दो पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी गई है। जिला मिशन प्रबंधन इकाई के 228 पदों में जिला मिशन प्रबंधक के 02, जिला कार्यक्रम प्रबंधक के विभिन्न 21, विकास खण्ड परियोजना प्रबंधक के 23 पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय समन्वयक के 98, लेखापाल के 10 एवं लेखा सह एमआईएस सहायक के 49, कार्यालय सहायक, ऑपरेटर के 17 और भृत्य के 8 पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी गई है। इन पदों पर भर्ती होने से मिशन की योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा हाल में ही पीएचई में इंजीनियर्स सहित 181 पदों और स्वास्थ्य विभाग में 650 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई है।

*दर्दनाक हादसा: प्लांट में काम कर रहे मजदूर की ऊंचाई से गिरकर मौत,सेफ्टी रूल्स की अनदेखी बनी वजह,पुलिस जांच में जुटी*

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बड़ी खबर : प्लांट में मजदूर की मौत से प्रबंधन की सुरक्षा मानकों के पालन में गम्भीर चूक सामने आई है,पुलिस घटनास्थल पहुंचकर जांच में जुटी रायगढ़, 21 सितंबर: रायगढ़ जिले के पूंजीपथरा थाना क्षेत्र अंतर्गत अंजनी स्टील प्लांट में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया है। बिना सेफ्टी बेल्ट के ऊंचाई पर काम कर रहे एक मजदूर की गिरने से मौत हो गई। मृतक मजदूर की पहचान राकेश (28), निवासी बिहार के रूप में हुई है। हादसे के बाद घायल मजदूर को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। राकेश बिना सेफ्टी बेल्ट के काम कर रहा था, जिसके चलते यह हादसा हुआ। प्लांट में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय मजदूरों का कहना है कि इस तरह की दुर्घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं, लेकिन प्रबंधन द्वारा सुरक्षा उपायों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। घटना के बाद पूंजीपथरा थाना ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि प्लांट प्रबंधन द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। प्रारंभिक जांच में लापरवाही की बात सामने आ रही है, जिससे प्रबंधन की जिम्मेदारी तय हो सकती है। रायगढ़ जिले के विभिन्न औद्योगिक प्लांटों में आए दिन इस तरह की दुर्घटनाएं हो रही हैं। मजदूरों का कहना है कि प्लांट प्रबंधन सुरक्षा उपायों की अनदेखी कर रहा है, जिसके कारण मजदूरों की जान जोखिम में पड़ रही है। बावजूद इसके, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों की ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। मजदूरों की लगातार हो रही मौतों के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर से रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। जिले के कई प्लांटों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे मजदूरों की जान जोखिम में है।  

बड़ी खबर:आईजी ने थाना के पूरे स्टाफ को ही हटा दिया,दो अधिकारी सस्पेंड,जांच कर रहे डीएसपी को भी बदला,,,,

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 प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी दीपक झा ने बड़ा खुलासा किया,जिसमें लोहारीडीह आगजनी कांड में 170 में 60 गिरफ्तार,विवेचना में लापरवाही पर    कवर्धा, 21 सितम्बर: लोहारीडीह आगजनी कांड के बाद प्रशासनिक और पुलिस विभाग की कार्रवाई में तेजी आई है। कवर्धा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी दीपक झा ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि लोहारीडीह प्रकरण में अब तक पांच एफआईआर दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 170 लोगों को नामजद किया गया है और 60 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, विवेचना के दौरान कई खामियां पाई गईं, जिसके चलते रेंगाखार थाना के सभी 28 स्टाफ को लाइन अटैच कर दिया गया है। आईजी दीपक झा ने स्वीकार किया कि घटना की जांच में लापरवाही हुई है और कई गिरफ्तारियां वैधानिक तरीके से नहीं की गई थीं। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए रेंगाखार थाना के सभी स्टाफ को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है। साथ ही, दो अधिकारियों को नामजद शिकायत के आधार पर निलंबित किया गया है। इसके अलावा, जांच में एसडीओ पी की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं, जिसके चलते उन्हें हटाकर नए डीएसपी को रेंगाखार थाना का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ कार्रवाई: प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आईजी दीपक झा ने यह भी कहा कि लोहारीडीह में महिलाओं पर अत्याचार और मारपीट के मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, और सभी दोषियों के खिलाफ वैधानिक दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही, मारपीट का शिकार हुए पांच लोगों को इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी पर पुनर्विचार: आईजी ने कहा कि अगर किसी निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारी पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस तरह, आईजी ने यह स्पष्ट कर दिया कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहनता से की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।    

कवर्धा लोहारीडीह आगजनी कांड के बाद प्रशासनिक बदलाव, नए कलेक्टर और एसपी की नियुक्ति

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कवर्धा, 21 सितम्बर: कवर्धा के लोहारीडीह गांव में हाल ही में हुए आगजनी कांड के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से कवर्धा के कलेक्टर और एसपी का तबादला कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया। कवर्धा के नए कलेक्टर के रूप में गोपाल वर्मा की नियुक्ति की गई है, वहीं राजेश अग्रवाल को जिले के नए पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव लोहारीडीह में हुई हिंसा और आगजनी की गंभीरता को देखते हुए किया गया है, जिससे कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके और क्षेत्र में शांति बहाल हो। दरअसल, लोहारीडीह में कुछ दिनों पहले तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिसके परिणामस्वरूप कुछ घरों और संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया।जिसमें पूर्व सरपंच की जली हुई लाश मिली थी। इस घटना ने जिले में भय का माहौल पैदा कर दिया और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया: घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तत्काल गृहमंत्री विजय शर्मा के साथ आपात बैठक की। बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि कवर्धा के वर्तमान कलेक्टर और एसपी को बदल दिया जाए, ताकि क्षेत्र में बेहतर प्रशासनिक और पुलिस प्रबंधन स्थापित किया जा सके। IAS गोपाल वर्मा और IPS राजेश अग्रवाल दोनों ही अपने अनुभव और कार्यकुशलता के लिए जाने जाते हैं। इनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द से जल्द लोहारीडीह और कवर्धा में स्थिरता और शांति स्थापित करेंगे, साथ ही दोषियों को सख्त सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई को जनता ने सराहा है और उम्मीद जताई है कि नए प्रशासनिक अधिकारी क्षेत्र की स्थिति में सुधार करेंगे तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कठोर कदम उठाएंगे।  

जशपुर पुलिस का “ऑपरेशन शंखनाद” जारी: 13 मवेशियों को तस्करी से बचाया, 2 आरोपी गिरफ्तार,मुख्य तस्कर पर भी कसेगा शिकंजा

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जशपुर, 20 सितंबर 2024: जशपुर पुलिस के “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत आज सुबह एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई जब 13 मवेशियों को तस्करी से बचाया गया और 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मवेशियों का मालिक और मुख्य तस्कर फिलहाल फरार है, जिसकी पुलिस द्वारा तलाश जारी है। यह कार्रवाई थाना आस्ता क्षेत्र के नडार जंगल में की गई। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को आज सुबह सूचना मिली कि कुछ मवेशी तस्कर सन्ना क्षेत्र से गौ-वंश की तस्करी करते हुए आस्ता के जंगली रास्ते से झारखंड ले जा रहे हैं। इस सूचना के आधार पर, थाना प्रभारी आस्ता उप निरीक्षक संतोष सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नडार के जंगल में चारों ओर से घेराबंदी कर 2 आरोपियों—गुलाब राम (28 वर्ष) और दिनेश तिग्गा (25 वर्ष)—को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से तस्करी की जा रही 13 मवेशियों को बरामद किया। पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा पूछताछ के दौरान, आरोपी गुलाब राम ने खुलासा किया कि आस्ता थाना क्षेत्र का एक गौ-तस्कर उससे 8,000 रुपये में 2 मवेशी खरीद चुका था। उसी तस्कर ने गुलाब राम और दिनेश तिग्गा से कहा कि वे 500-500 रुपये लेकर मवेशियों को खड़कोना गांव तक पहुंचाएं, जहां से वह उन्हें झारखंड के बिर्री गांव ले जाएगा। इसी योजना के तहत आरोपी क्रूरतापूर्वक मवेशियों को सन्ना क्षेत्र से नडार जंगल के पास ले आए थे। आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 एवं पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 के तहत मामला पंजीकृत किया गया है। दोनों आरोपियों को आज न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी आस्ता उप निरीक्षक संतोष सिंह, सहायक उप निरीक्षक अमरबेल मिंज, प्रधान आरक्षक सुरेश गौर, प्रधान आरक्षक संदीप तिग्गा, प्रधान आरक्षक कोसमोस बड़ा, आरक्षक जगनारायण राम, आरक्षक अबिज मिंज और अन्य स्टाफ का विशेष योगदान रहा। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा, “थाना आस्ता की पुलिस टीम ने आज तस्करी की जा रही 13 मवेशियों को जप्त कर 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी फरार है, जिसे जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।”