जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!

जशपुर में दहला देने वाली घटना — प्रिंसिपल के बैड टच से त्रस्त नाबालिग छात्रा ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में खोले काले राज… अवैध हॉस्टल में चल रहा था दरिंदगी का खेल!   जशपुर – जिले के बगीचा थाना क्षेत्र के गोवासी गांव में रविवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। नवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा ने प्रिंसिपल की प्रताड़ना से तंग आकर फांसी लगा ली। छात्रा स्कूल के भीतर ही संचालित अवैध हॉस्टल में रहती थी, जिसे स्कूल प्रिंसिपल कुलदीप टोपनो खुद चलाता था।   ❗ सुसाइड नोट में बड़ा खुलासा — बैड टच, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की बातें लिखीं पुलिस को घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में छात्रा ने साफ लिखा है कि प्रिंसिपल उसके साथ बैड टच करता था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। नाबालिग की पीड़ा पढ़कर जांच टीम भी सन्न रह गई।   ❗ आरोपी प्रिंसिपल हिरासत में, अवैध हॉस्टल का काला सच सामने   सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और आरोपी प्राचार्य कुलदीप टोपनो को हिरासत में ले लिया। जांच में सामने आया कि ग्रामीण शिक्षा समिति द्वारा संचालित इस स्कूल में 124 बच्चे पढ़ते हैं, जिनमें 33 बच्चे प्राचार्य द्वारा चलाए जा रहे अवैध हॉस्टल में रह रहे थे। मृत छात्रा भी इसी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।जिसने बीती रात हॉस्टल के स्टडी रूम में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।   ❗ प्रशासनिक तंत्र हरकत में — कई अधिकारी मौके पर   घटना के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीईओ, एसडीएम, बीईओ, सहायक आयुक्त, तहसीलदार, एसडीओपी और पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी पहुंच गए हैं। मृतका का कमरा सील कर दिया गया है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।   ❗ एसएसपी का बड़ा बयान   एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि, “यह नाबालिग छात्रा की आत्महत्या का मामला है। सुसाइड नोट मिला है जिसमें प्रताड़ना का जिक्र है। जांच गंभीरता से चल रही है।”   ❗ जिले में उबाल — निजी स्कूलों व हॉस्टलों पर सवाल घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोग अवैध हॉस्टलों और निजी स्कूलों की लचर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इससे पहले भी पोर्तेंगा मिशन स्कूल में अवैध हॉस्टल में बच्चों के धर्मांतरण की कोशिश के आरोप के साथ ही उन्हें शारीरिक प्रताड़ना देने का मामला आया था।वहीं कुनकुरी में नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में एक प्रिंसिपल द्वारा जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आ चुका है। ऐसे में जिले के अंदर निजी स्कूलों और संस्थाओं की निगरानी पर भी अब बड़ी बहस शुरू हो गई है। यह दिल दहला देने वाली घटना न केवल एक छात्रा की जिंदगी छीन ले गई, बल्कि जिले में संचालित निजी शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर गई है।

ईसाई आदिवासी महासभा ने क्यों कहा “जशपुर के ईसाई फर्जी नहीं, इतिहास और कानून दोनों हमें वैध साबित करते हैं”

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ईसाई आदिवासी महासभा ने क्यों कहा “जशपुर के ईसाई फर्जी नहीं, इतिहास और कानून दोनों हमें वैध साबित करते हैं” जशपुर – हाल ही में एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने यूट्यूब चैनल के जरिए यह दावा किया कि “जशपुर जिले में 1968 के धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति वैधानिक रूप से ईसाई नहीं बना है, इसलिए जशपुर के ईसाई फर्जी हैं।” इस दावे के बाद कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाते हुए शहर में क्रिश्चन के हॉली प्लेस खड़कोना में धार्मिक कार्यक्रम का विरोध भी किया। इन आरोपों को ईसाई आदिवासी महासभा, जिला जशपुर ने पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। महासभा के जिला अध्यक्ष वाल्टर कुजूर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जशपुर के ईसाइयों का इतिहास सौ साल से भी पुराना है और उन्हें “फर्जी” कहना अज्ञानता है। ईसाई समुदाय के नेता वाल्टर कुजूर ने बताया कि जशपुर रियासत में ईसाई धर्म अपनाने की शुरुआत 1906–07 में हुई थी। 1908 से 1947 के बीच लगभग      99 प्रतिशत ईसाई परिवारों के पूर्वज ईसाई बने । करीब 1 प्रतिशत लोगों ने 1908 से 1947 की अवधि में धीरे–धीरे धर्म अपनाया। महासभा ने बताया कि यह पूरा समय ऐसा था जब किसी धर्म परिवर्तन के लिए सरकार को सूचना देने या किसी अधिनियम का पालन करने की जरूरत नहीं थी।महासभा ने स्पष्ट किया कि धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 21 अक्टूबर 1968 से लागू हुआ था।1968 के पहले हुए धर्मांतरण पर यह कानून लागू नहीं होता।इसलिए 1906–47 के धर्म परिवर्तन के कोई सरकारी दस्तावेज मिलना संभव नहीं है। 1858 की महारानी विक्टोरिया की घोषणा में थी धर्म की स्वतंत्रता महासभा ने बताया कि 1858 में ब्रिटिश शासन की ओर से जारी घोषणा–पत्र में धर्म की स्वतंत्रता,समान अधिकार,और धार्मिक आधार पर भेदभाव न करने की गारंटी दी गई थी, जिसके आधार पर जशपुर रियासत में धर्म परिवर्तन पूरी तरह वैध था। “जशपुर के ईसाई उतने ही वैध हैं जितने देश–दुनिया के अन्य ईसाई” वाल्टर कुजूर ने कहा कि जशपुर के ईसाई उतने ही वैध हैं जितने देश–दुनिया के अन्य ईसाई । जशपुर के ईसाइयों को फर्जी कहना न केवल गलत है, बल्कि समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि “जिस तरह बाबा साहेब आंबेडकर ने 1956 में लाखों अनुयायियों के साथ वैध रूप से बौद्ध धर्म अपनाया, उसी तरह जशपुर के आदिवासियों ने 1906 से 1947 के बीच वैध रूप से ईसाई धर्म अपनाया है। महासभा ने ऐसे भ्रामक दावे फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

विष्णु सरकार की छवि बिगाड़ने वाले अधिकारियों की तानाशाही पर पत्रकारों ने खोला मोर्चा,मुकेश नायक की पीड़ा छापनेवाले पत्रकारों को टारगेट करने पर मामला गरमाया

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पत्रकार मुकेश नायक की अपील पर कुनकुरी में पत्रकारों की आपात बैठक, जिला प्रशासन पर फूटा आक्रोश — मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन, जनसम्पर्क व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट कर पत्रकारों ने संघर्ष का बिगुल फूंका   जशपुर/कुनकुरी जशपुर जिले में पत्रकार मुकेश नायक के साथ हुई अमानवीय और संवेदनहीन घटना को लेकर गुरुवार को कुनकुरी में पत्रकारों की जिला स्तरीय आपात बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिले के सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब मीडिया से जुड़े पत्रकार मौजूद रहे। बैठक में प्रशासनिक उदासीनता, गलत तथ्यों के प्रसार और पत्रकारों को दबाव में लेने के बढ़ते प्रयासों को लेकर व्यापक आक्रोश देखा गया। स्वास्थ्य विभाग झूठ बोल रहा है,मुझ पर दवाब बनाना बंद करें – मुकेश की भावुक अपील बैठक में पत्रकार मुकेश नायक ने बताया कि 17 नवंबर को ओडिशा के सुंदरगढ़ अस्पताल में जन्मे उनके नवजात शिशु की मौत हो गई। अस्पताल की शव वाहन सेवा अंतरराज्यीय सीमा पार नहीं कर सकती थी, इसलिए वे छत्तीसगढ़ की 102 मुक्तांजली वाहन सेवा से सहयोग की उम्मीद में बार-बार कॉल करते रहे, लेकिन न फोन रिसीव हुआ, न कोई सहायता मिली। सीएमएचओ से आश्वासन मिलने के बाद भी 102 सेवा ने साफ कह दिया कि वे शव परिवहन नहीं करते। अंततः मजबूरी में उन्हें नवजात के शव को मोटरसाइकिल से घर लाना पड़ा। मुकेश नायक ने कहा कि “इतना कष्ट झेलने के बाद भी जनसम्पर्क विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झूठा दावा कर दिया कि स्वास्थ्य विभाग ने मुझे फोन किया पर मैंने रिसीव नहीं किया। यह असत्य बयान मेरे दर्द पर नमक छिड़कने जैसा है।व्हाट्सएप कॉल करके मुझपर मामला ठंडा करने का दवाब बनाया जा रहा है।”   पत्रकारों ने प्रशासनिक तानाशाही पर जताया तीखा विरोध   पत्रकारों ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति का दुख नहीं, बल्कि पूरे जिले में फैली संवेदनहीन कार्यशैली की पहचान है। बैठक में जनसम्पर्क विभाग के एक व्हाट्सएप ग्रुप को लेकर भी कड़ी नाराज़गी व्यक्त की गई। पत्रकारों ने बताया कि इस ग्रुप को अक्सर पत्रकारों को अप्रत्यक्ष रूप से धमकाने, दबाव बनाने और प्रशासनिक पक्ष को थोपने के “टूल” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।पत्रकारों ने जनसंपर्क व्हाट्सएप ग्रुप का स्क्रीनशॉट दिखाते हुए कहा कि 25 साल के इतिहास में नौकरशाही इस हद तक बेकाबू नहीं हुई थी। चर्चा के बाद पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हो रहे इस अतिक्रमण के विरोध में जिले के सभी पत्रकारों ने सामूहिक रूप से जनसंपर्क व्हाट्सएप ग्रुप लेफ्ट कर अपना पहला औपचारिक विरोध दर्ज कराया।   मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तैयार — दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नाम एक विस्तृत ज्ञापन भेजा जाएगा। ज्ञापन में इन मांगों को शामिल किया गया है — पत्रकार मुकेश नायक के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच गलत जानकारी प्रसारित करने वाले तथा संवेदनहीन रवैया अपनाने वाले दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई जिले में “प्रशासनिक आतंकवाद” की बढ़ती प्रवृत्ति पर तत्काल रोक शासन की छवि खराब करने वाले अधिकारियों को जशपुर जिले से हटाया जाए स्वास्थ्य सेवाओं और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए पत्रकारों ने कहा कि यदि एक पत्रकार को न्याय नहीं मिलता, तो आम जनता की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।   बैठक में उपस्थित पत्रकार वरिष्ठ पत्रकार विष्णु नारायण जोशी, विनोद शर्मा, रविन्द्र थवाईत, संतोष चौधरी, राजेश पांडेय, विकास पांडे, दीपक वर्मा, प्रदीप तिग्गा, नवीन ओझा, दीपक सिंह, संजीत यादव, प्रियल जिंदल, सागर जोशी, कुंदन सिंह, शैलेन्द्र चिंतानवीस, एजाज खान, धवलेश्वर सिंह, मयंक शर्मा, तरुण शर्मा, सुनील सिन्हा, निरंजन मोहंती, रुद्रदामन पाठक, नीतीश यादव, राजेश राम भगत, मुकेश नायक, सोनू जायसवाल सहित अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।वहीं इस मामले पर विजय त्रिपाठी, रमेश शर्मा, प्रशांत सहाय, योगेश थवाईत, सुरेन्द्र चेतवानी, शिव प्रताप सिंह, मिथलेश साहू, श्याम चौहान समेत कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी प्रशासनिक तानाशाही पर तीखा विरोध दर्ज किया है। पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष मुकेश नायक को न्याय दिलाने के साथ-साथ जिले में प्रशासनिक जवाबदेही की स्थापना के लिए है। उन्होंने कहा कि “जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और जिले में मानवीय व जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक यह मुद्दा लगातार उठाया जाएगा।”

छत्तीसगढ़ की सीमा पर शव वाहन नहीं पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग ने खबरों का किया खंडन,मुकेश ने कहा – मैंने तकलीफ बताई जो सत्य है,,

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*समाचार* खंडन  मुक्तांजली वाहन नहीं मिलने के संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने रखा अपना पक्ष जशपुरनगर 18 नवम्बर 2025/* सिंगीबहार निवासी श्री मुकेश नायक के नवजात शिशु के शव को घर तक लाने हेतु मुक्तांजली वाहन की सुविधा नहीं मिलने के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 नवम्बर 2025 को सुबह 09 बजे श्री कुंदन राजपूत एवं श्री मुकेश नायक का फोन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर को प्राप्त हुआ तथा तत्काल जिला प्रबंधक मुक्ताजंली वाहन को इसकी सूचना देते हुए वाहन भेजने हेतु निर्देशित किया गया। जिला प्रबंधक के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फरसाबहार लोकशन पर उपलब्ध वाहन को सूचना दी गई व वाहन रवाना करने के निर्देश दिये गये, किन्तु मुक्तांजली वाहन कर्मचारी फरसाबहार के द्वारा लोकेशन पता करने एवं अन्य आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए श्री मुकेश नायक को फोन किये जाने पर श्री मुकेश नायक के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, इसकी सूचना कर्मचारी के द्वारा तत्काल उच्च अधिकारियों को दिया गया। तत्पश्चात स्वयं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर के द्वारा कॉल बैक करते हुए श्री मुकेश नायक को फोन रिसीव करने को कहा गया। जिस दौरान स्वयं श्री मुकेश नायक के द्वारा नेटवर्क में नहीं होने के कारण बात नहीं हो पाने की जानकारी दिया गया। तत्पश्चात पुनः मुक्तांजली वाहन कर्मचारियों के द्वारा फोन किया गया, किन्तु श्री मुकेश नायक के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। जिससे सम्पर्क नहीं हो सका। घटना स्वास्थ्य विभाग अथवा मुक्तांजली वाहन की लापरवाही से नहीं बल्कि संबंधित से सम्पर्क नहीं होने की वजह से हुआ है। नोट : यह खंडन प्रेस विज्ञप्ति से लिया गया है। इस मामले पर मृत नवजात के पिता और पेशे से पत्रकार मुकेश कुमार ने ख़बर जनपक्ष के सवालों पर कहा कि मैंने कब कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने शव वाहन की व्यवस्था नहीं की।उन्होंने मुझे आश्वस्त किया और मैं इंतजार करता रहा।जब दो घंटे तक शव वाहन नहीं आया तो स्कूटी से शव लेकर घर गया। मैंने तो केवल अपनी तकलीफ बताई जो सत्य है।मुझे और परेशान न किया जाए। बहरहाल,घटना से परिवार में शोक की लहर है।वहीं स्वास्थ्य विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष रख दिया है।ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि मरीजों और मृतकों को समय पर एंबुलेंस और शव वाहन देने की कोशिश पर अब सवाल खड़े नहीं होंगे।

कन्या भ्रूण हत्या रोकने कलेक्टर की बड़ी पहल,साक्ष्य सहित सूचना देनेवाले को मिलेगा ईनाम,निशाने पर दो बड़े,,,,,

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*पत्थलगांव एवं कुनकुरी विकासखंड क्षेत्र में अवैध भ्रूण जांच की साक्ष्य सहित सूचना देने वाले को मिलेगा इनाम*   *कलेक्टर व्यास की विशेष पहल से कन्या भ्रूण हत्या पर कसेगी नकेल, बालिका लिंगानुपात में होगी सुधार*   *पीसीपीएनडीटी अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने दिए निर्देश*   जशपुर 18 नवम्बर 2025/ कलेक्टर  रोहित व्यास ने जिले में बालिका लिंगानुपात में सुधार तथा अवैध भ्रूण परीक्षण एवं भ्रूण हत्या रोकने हेतु विशेष अभियान प्रारंभ किया है। इस अभियान के अंतर्गत पत्थलगांव एवं कुनकुरी विकासखण्ड में यदि कोई व्यक्ति साक्ष्य सहित अवैध रूप से हो रहे भ्रूण जांच अथवा भ्रूण हत्या की जानकारी प्रशासन को देता है, तो उसे जिला प्रशासन की ओर से उचित इनाम दिया जाएगा। यह पहल समाज में बेटियों के संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। कलेक्टर श्री व्यास ने बताया कि अवैध भ्रूण जांच रोकथाम एवं पीसीपीएनडीटी अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने जिला प्रशासन ने विशेष कार्य योजना लागू की है। इसके अंतर्गत अवैध भ्रूण परीक्षण की सूचना देने वाले व्यक्ति को संबंधित गतिविधि का साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक होगा, जैसे– ऑडियो, वीडियो, फोटो, दस्तावेज़ या अन्य प्रमाण। प्रशासन द्वारा साक्ष्य की सत्यता की पुष्टि कर संबंधित सोनोग्राफी सेंटर पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें जिला प्रशासन द्वारा उचित इनाम प्रदान किया जाएगा।        कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि अवैध भ्रूण जांच केवल कानूनन अपराध ही नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और मानवता के लिए भी खतरा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी स्थान पर ऐसी गतिविधि के होने का संदेह हो, तो साक्ष्य सहित प्रशासन को सूचित करें, ताकि कानून के तहत त्वरित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि भ्रूण हत्या, अवैध सोनोग्राफी केंद्र, दलाल और इसमें सम्मिलित चिकित्सकों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा निगरानी एवं औचक निरीक्षण किया जाएगा। सभी निजी एवं सरकारी सोनोग्राफी केंद्रों को नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में बेटियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए यह प्रशासन की एक सशक्त एवं प्रभावी पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच ने बदली शहर की तस्वीर,विसर्जन तालाब में प्रकृति को उतारने में जुटा नगरीय प्रशासन लेकिन… जशपुर : कुनकुरी विसर्जन तालाब सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि प्रकृति को फिर से एक तालाब के चारों ओर उतारने की खूबसूरत कोशिश बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर 98 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस परियोजना ने जनवरी 2025 में गति पकड़ी थी और अब यह लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है।   तालाब को आधुनिक और हरा-भरा स्वरूप देने में ठेकेदार महेश त्रिपाठी और राजू भारती दिन-रात जुटे हुए हैं। हालांकि अतिक्रमण और तालाब के भीतर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर को अभी तक नहीं हटाया जाना परियोजना की प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। युवाओं का नैचुरल हैंगआउट बन चुका है तालाब तालाब की सुंदरता ऐसी है कि पिछले दो माह से यह युवाओं का पसंदीदा ठिकाना बन गया है। सुबह की धूप हो या शाम की ठंडी हवा – लोग यहां प्रकृति से जुड़ने, सुकून लेने और यादगार रील्स बनाने पहुंच रहे हैं। तालाब में डाली गई रूपचंदा रंगीन मछलियाँ बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। कई लोग अपने घरों से लाए पालतू कछुओं को यहां छोड़कर उन्हें प्राकृतिक आवास भी दे रहे हैं।   प्रकृति की सेवा अब बन गई सामाजिक जिम्मेदारी तालाब में लगाए गए आकर्षक पौधों की देखभाल शहर के निवासी प्रकाश कुजूर कर रहे हैं। उनका तालाब से भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है। प्रकाश ने अमर उजाला को बताया,“मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हमारे बड़े भाई जैसे हैं। वे हमारे यहां किराए के घर में रहकर पढ़ाई किए थे। उनका यह सुंदर प्रयास सफल हो, इसलिए तालाब की सेवा कर रहा हूं।”   मुख्यमंत्री ने निरीक्षण कर बढ़ाई उम्मीदें       बीते 28 अक्टूबर को छठ पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री सपरिवार तालाब का निरीक्षण करने पहुंचे। आसपास की हरियाली और बनती सुंदरता को देखकर उन्होंने अतिरिक्त 60 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही निर्देश दिया कि तालाब के अंदर मौजूद बिजली ट्रांसफार्मर और खंभे को तुरंत बाहर शिफ्ट किया जाए, ताकि तालाब की सुंदरता और सुरक्षा दोनों में कोई बाधा न रहे। स्थल पर मौजूद कलेक्टर रोहित व्यास ने भरोसा दिलाया कि यह तालाब कुनकुरी की पहचान बनेगा और इससे भी बेहतर स्वरूप दिया जाएगा।   एक तालाब—जो सिर्फ पानी नहीं, प्रकृति के पुनर्जागरण की कहानी बन रहा है कुनकुरी का विसर्जन तालाब अब शहर की नई हरित पहचान बनकर उभर रहा है। यहां बनने वाली पगडंडियाँ, पानी में तैरती रंगीन मछलियाँ, किनारे हिलते पौधे और युवा,यह सब मिलकर बताते हैं कि किस तरह एक तालाब पूरे शहर की आत्मा को फिर से जीवंत कर सकता है।   नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील और सीएमओ की लगातार उपस्थिति के कारण विसर्जन तालाब सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि प्रकृति और समाज के रिश्ते को फिर से मजबूत करने की कहानी बन रहा है। ठेकेदार महेश त्रिपाठी ने बताया कि विसर्जन तालाब सौंदर्यीकरण में फूल-पौधे रूप दिए गए हैं।पौधों की देखभाल के लिए स्प्रिंकलर लगाया गया है।चारों ओर रेलिंग पर एलईडी लाइट लगाकर तालाब में रोशनी की गई है।अतिक्रमण और ट्रांसफार्मर हटाने का काम जल्दी पूरा होने से निर्माण कार्य एक महीने में पूरा हो जाएगा।

शव वाहन न मिलने पर पत्रकार पिता ने मोटरसाइकिल से लाया नवजात का शव,जशपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

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शव वाहन न मिलने पर पत्रकार पिता ने मोटरसाइकिल से लाया नवजात का शव,जशपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल   जशपुर/फरसाबहार –  दिल को चीर देने वाली यह घटना फरसाबहार के पत्रकार मुकेश नायक के साथ घटी। रविवार–सोमवार की रात 2 बजे उनकी गर्भवती पत्नी को अचानक तेज दर्द उठा। मुकेश उन्हें तुरंत लेकर सुंदरगढ़ अस्पताल पहुंचे। सुबह 5 बजे प्रसव हुआ, लेकिन गंदा पानी पीने की वजह से नवजात ने आधे घंटे में ही दम तोड़ दिया।   ओडिशा सरकार का शववाहन छत्तीसगढ़ सीमा पर रुक गया   ओडिशा सरकार ने बच्चे के शव को अस्पताल से सीमा तक पहुंचाने के लिए वाहन दिया, लेकिन जैसे ही गाड़ी लुलकीडीह पुलिया पहुंची, चालक ने आगे बढ़ने से मना कर दिया। उसका साफ कहना था— “साहब, गाड़ी में जीपीएस लगा है… दूसरे राज्य में ले गया तो नौकरी चली जाएगी।”   छत्तीसगढ़ में मदद नहीं मिली—दो घंटे इंतजार के बाद टूटा दिल   इसके बाद पत्रकार पिता ने छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य अधिकारियों से शववाहन की मदद मांगी। सीएमएचओ ने बताया कि फरसाबहार में वाहन उपलब्ध नहीं है, कुछ देर में व्यवस्था की जाएगी। मुकेश नायक अपने मासूम बेटे के शव के साथ दो घंटे तक इंतजार करते रहे। लेकिन कोई गाड़ी नहीं आई।   आखिर मजबूरी में उन्होंने अपने नवजात बेटे को गोद में उठाया… मोटरसाइकिल स्टार्ट की… और छत्तीसगढ़ की सीमा से अपने गांव सिंगीबहार तक खुद शव लेकर चले आए।   गांव और पत्रकार जगत में गहरी पीड़ा और गुस्सा   जब लोगों को यह जानकारी मिली, तो पूरे इलाके में दुःख और गुस्सा फैल गया। लोगों का कहना है— “एक पिता को अपने मृत बच्चे को बाइक पर लाना पड़े… इससे बड़ी लाचारी और क्या होगी?”   मुख्यमंत्री की विधानसभा में व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना   यह घटना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विधानसभा क्षेत्र में हुई, जहां—घायल को समय पर एंबुलेंस नहीं,गर्भवती महिला को 102 की सुविधा नहीं,मृत्यु पर शव वाहन भी उपलब्ध नहीं।ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती रही हैं, लेकिन हालात नहीं बदल रहे।   अपने मासूम बच्चे को बाहों में लेकर घर लौटे पिता बस इतना ही कह पाए— “आज जो मेरे साथ हुआ… वह किसी और के साथ न हो।”

💥बड़ी खबर जशपुर से💥 पर्यटन स्थल पर शर्मनाक करतूत — मयाली नेचर कैंप में संदिग्ध जोड़ा रंगे हाथों पकड़ा गया, प्रबंधन पर उठे सवाल! देखें तस्वीरें

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💥बड़ी खबर जशपुर से💥 पर्यटन स्थल पर शर्मनाक करतूत — मयाली नेचर कैंप में संदिग्ध जोड़ा रंगे हाथों पकड़ा गया, प्रबंधन पर उठे सवाल! जशपुर/कुनकुरी – जिले का प्रसिद्ध मयाली नेचर कैंप, जो अब तक अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता था, आज एक शर्मनाक घटना के कारण सुर्खियों में है। गुरुवार दोपहर करीब दो बजे नेचर कैंप के मड हाउस में एक संदिग्ध जोड़ा प्रेम संबंध बनाते हुए पकड़ा गया, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश और शर्म दोनों का माहौल है। जानकारी के अनुसार, मयाली नेचर कैंप का उद्घाटन 27 सितंबर 2015 को तत्कालीन भाजपा विधायक रोहित साय ने किया था। पवित्र मधेश्वर महादेव पर्वत की तलहटी में स्थित यह स्थल अब तक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। पिछले वर्ष यहां पंडित प्रदीप शर्मा द्वारा महाशिव पुराण कथा का आयोजन हुआ था, जिसके बाद से यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ राष्ट्रीय पहचान पाने लगा था। लेकिन आज की इस घटना ने पूरे जिले को शर्मसार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, वन प्रबंधन समिति खडसा के सचिव हरिहर यादव के जिम्मे नेचर कैंप में पर्यटकों को कमरा देने की जिम्मेदारी थी। बताया जा रहा है कि उसने बिना इंट्री रजिस्टर में दर्ज किए ही उस जोड़े को मड हाउस की चाबी दे दी। प्रबंधन समिति के सचिव हरिहर यादव ने अपने बचाव में कहा कि, “दिसंबर महीने की तैयारी के चलते साफ-सफाई का काम चल रहा था। उसी दौरान एक युवक और युवती अंदर घुस गए। मुझे इसकी जानकारी नहीं थी।” हालांकि समिति के कुछ सदस्यों ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया है कि युवक हरिहर यादव का जान-पहचान वाला है और इससे पहले भी कई बार वह मड हाउस में जाकर “अय्याशी” कर चुका है। समिति के अध्यक्ष चंदर सिंह ने इस पूरे मामले को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि —“यह पवित्र स्थान है, यहां ऐसी हरकत अस्वीकार्य है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” वहीं नेचर कैंप के संरक्षक कपिलदेव साय ने इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की है और कहा कि,”यह सरकार और प्रशासन की छवि खराब करने की साजिश भी हो सकती है। इंचार्ज पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।बिना इंट्री कैसे किसी को भी कमरा दे दिया?” भंडरी ग्राम पंचायत के सरपंच वाल्टर कुजूर ने भी आक्रोश जताते हुए कहा कि नेचर कैंप में अनैतिक कार्य को बढ़ावा कौन दे रहा है? इसकी जांच कर दोषी व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।साथ ही प्रशासन से अपील की है कि जिले के पवित्र स्थलों,पर्यटन स्थलों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। फिलहाल कुनकुरी पुलिस ने युवक और युवती दोनों से पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही वन प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों को भी थाने बुलाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि —  *क्या धार्मिक और पर्यटन स्थलों की गरिमा की सुरक्षा के लिए प्रशासन सचमुच गंभीर है? *और क्या नेचर कैंप जैसे संवेदनशील स्थलों की निगरानी पर्याप्त है? धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि जशपुर की पवित्र धरती पर मयाली नेचर कैंप में हुई यह घटना केवल एक अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था को ठेस पहुँचाने वाली है।

मोबाइल पर की शादी, वीडियो कॉल पर सुहागरात… फिर ब्लैकमेल कर भेजा दोस्त! नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला आरोपी अब गिरफ्तार

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मोबाइल पर की शादी, वीडियो कॉल पर सुहागरात… फिर ब्लैकमेल कर भेजा दोस्त! नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला आरोपी अब गिरफ्तार जशपुर, 12 नवम्बर 2025 – थाना दुलदुला क्षेत्र में साल 2021 में हुई एक हैरान कर देने वाली घटना में पुलिस ने आखिरकार मुख्य आरोपी के साथी को भी गिरफ्तार कर लिया है। यह वही मामला है जिसमें बिहार निवासी युवक ने सोशल मीडिया पर एक नाबालिग लड़की से दोस्ती कर मोबाइल पर ही शादी रचाई थी और फिर सुहागरात के नाम पर वीडियो कॉल से अश्लील वीडियो बना लिया था। अब फरार चल रहा उसका साथी दिलीप चौहान (29 वर्ष) पुलिस की गिरफ्त में है। ऑनलाइन प्यार, मोबाइल पर शादी और ब्लैकमेल की कहानी जशपुर की 17 वर्षीय नाबालिग बालिका ने 2022 में थाना दुलदुला में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि एक अनजान व्यक्ति कुंदन राज, जो पटना (बिहार) का निवासी है, ने मोबाइल पर उसे कॉल कर दोस्ती की थी। शुरुआत में बालिका ने इंकार किया, मगर आरोपी ने खुद की कटी हुई कलाई की तस्वीर भेजकर सहानुभूति हासिल की और धीरे-धीरे विश्वास जीत लिया। कुछ महीनों की बातचीत के बाद आरोपी ने मोबाइल फोन पर ही “शादी” का नाटक किया और वीडियो कॉल के जरिए “सुहागरात” के नाम पर नाबालिग का अश्लील वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल करने की धमकी और शैतानी मांग जब पीड़िता ने आगे वीडियो कॉल करने से मना किया तो आरोपी कुंदन राज ने धमकी दी कि वह पुराने वीडियो को वायरल कर देगा। ब्लैकमेल के डर से पीड़िता उसकी बात मानती रही। इसके बाद आरोपी ने नाबालिग से कहा कि वह उसका “दोस्त” भेज रहा है, जो उसके साथ सुहागरात मनाएगा और वह खुद वीडियो कॉल पर यह सब देखेगा। अक्टूबर 2021 में आरोपी का साथी दिलीप चौहान, फर्जी नाम “दीपक यादव” बताकर नाबालिग के पास पहुंचा और उससे दुष्कर्म किया। यह पूरा कृत्य वीडियो कॉल के माध्यम से कुंदन राज देख रहा था। हिम्मत जुटाकर थाने पहुंची पीड़िता डर और शर्म के कारण लड़की चुप रही, लेकिन जब आरोपी ने वीडियो उसकी बड़ी बहन को भेज दिया, तब उसने हिम्मत जुटाकर बहन के साथ थाना दुलदुला पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। दोनों आरोपी गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। कुंदन राज को वर्ष 2022 में ही पटना (बिहार) से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जबकि उसका साथी दिलीप चौहान घटना के बाद से फरार था। पुलिस की साइबर टीम और मुखबिरों ने महीनों तक उसकी तलाश जारी रखी। कभी गोवा, कभी झारखंड—वह बार-बार ठिकाना बदलता रहा। अंततः कुनकुरी क्षेत्र से पुलिस को उसे गिरफ्तार करने में सफलता मिली। पहचान और रिमांड कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराई गई पहचान कार्यवाही में पीड़िता ने आरोपी दिलीप चौहान को पहचान लिया। आरोपी ने पूछताछ में अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। एसएसपी बोले — “सोशल मीडिया का खतरनाक दुरुपयोग” वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा — “यह मामला सोशल मीडिया के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। नाबालिगों को ऐसे अपराधों से बचाने के लिए परिवार और समाज को सतर्क रहना चाहिए। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।” पुलिस टीम की भूमिका इस कार्रवाई में साइबर सेल निरीक्षक संतलाल आयाम, प्रधान आरक्षक अनंत मिराज किस्पोट्टा, थाना प्रभारी कृष्ण कुमार साहू, आरक्षक आनंद खलखो, अकबर चौहान, बसनाथ साहनी और अल्बर्ट कुजूर की अहम भूमिका रही।   यह घटना बताती है कि डिजिटल दुनिया में ज़रा-सी लापरवाही भी किस तरह जिंदगी को नर्क बना सकती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संबंध बनाते समय सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

गोकुलाष्टमी पर्व के शताब्दी वर्ष पर कंडोरा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब — मूढू बाबा की परंपरा आज भी जीवंत, 100 वर्षों से अटूट आस्था का पर्व

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गोकुलाष्टमी पर्व के शताब्दी वर्ष पर कंडोरा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब — मूढू बाबा की परंपरा आज भी जीवंत, 100 वर्षों से अटूट आस्था का पर्व अष्टमी के दिन आयुष जल से मां यशोदा अपने कान्हा को कराती हैं स्नान संतोष चौधरी जशपुर,12 नवंबर 2025 – महाकुल समाज के आराध्य भक्त प्रहलाद उर्फ मूढू बाबा द्वारा 1925 में प्रारंभ की गई गोकुलाष्टमी बाल लीला की परंपरा इस वर्ष अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। यह अनूठा पर्व आज भी कंडोरा गांव में उसी रीति-रिवाज और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है, जैसा एक शताब्दी पूर्व प्रारंभ हुआ था।आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में गूंजेगा “जय यादव जय माधव”।   यह बाल लीला सप्तमी की रात से प्रारंभ होती है, जब नौ प्रकार की जड़ी-बूटियों को मिलाकर आयुष जल तैयार किया जाता है। अष्टमी की भोर चार बजे अविवाहित बालक-बालिकाओं को इस आयुष जल से स्नान कराया जाता है, फिर उन्हें तिलक-चंदन लगाकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। चावल के आटे, शकरकंद, छेना और घी से बनी मीठी रोटी तैयार की जाती है, जिसे दही के साथ प्रसाद स्वरूप बच्चों और उपस्थित जनों को वितरित किया जाता है। घर-घर में यही प्रसाद प्रेमपूर्वक परोसा जाता है।       इस बाल लीला का उद्देश्य है — “बालकों की आयु बढ़े तो वंश वृद्धि होगी”, इसी मंगलकामना के साथ महाकुल समाज में गोकुलाष्टमी पर्व मनाया जाता है।   गांव के बुजुर्ग ग्राम पटेल निराकार यादव बताते हैं कि इस परंपरा की शुरुआत स्वर्गीय मूढू बाबा ने की थी, जिन्होंने धर्म, भक्ति और गौसेवा के पथ पर जीवन समर्पित किया। उन्होंने चारों धाम की पैदल यात्रा की थी और प्रायः मथुरा-वृंदावन जाकर गोसेवा में लीन रहते थे। मूढू बाबा कंदोरा और बोडोकछार — दोनों गांवों के जमींदार थे और लगभग 120 एकड़ भूमि के स्वामी थे। उनके तीन पुत्र हुए, जिनमें सबसे छोटे चेतन बोडोकछार में बस गए, जबकि अन्य दो पुत्र कंदोरा में ही रहे। मूढू बाबा ने 1942 में देह त्याग किया।   निराकार यादव बताते हैं कि महाकुल समाज के पूर्वज कृष्णवंशज थे, जो उड़ीसा के संबलपुर क्षेत्र से पलायन कर छत्तीसगढ़ के धर्मजयगढ़, लैलूंगा और आसपास के क्षेत्रों में बस गए। कहा जाता है कि जब उनके सामने खाड़ूंग नदी पड़ी, तो उन्होंने अपने इष्टदेव का सुमिरन किया और नदी सूख गई — जिससे वे सुरक्षित पार हो सके। धीरे-धीरे महाकुल समाज की आबादी बढ़ी और रायगढ़, जशपुर, बिलासपुर सहित पूरे अंचल में फैल गई।   ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार मूढू बाबा का जन्म 1831 में बोडोकछार गांव के मंगल भगत के घर हुआ था। 1910 में उन्होंने कंदोरा में खसरा नंबर 223 के 14 एकड़ 40 डिसमिल क्षेत्र में आम के पौधे लगाए, जो आज “अमराई” के नाम से प्रसिद्ध है। यही स्थान अब महाकुल समाज के यज्ञ नगर – गोकुलधाम के रूप में प्रतिष्ठित है। मूढू बाबा ने उड़िया भाषा में भागवत पुराण, हरिवंश पुराण और महाभारत के पवित्र ग्रंथों का निर्माण करवाया, जो आज भी सुरक्षित हैं और अष्टमी के दिन गोकुलधाम में पूजा के लिए रखे जाते हैं।   मूढू बाबा का जशपुर राज परिवार से गहरा संबंध था। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान राजा देवशरण सिंह जूदेव ने उन्हें राजसी विवाह समारोह का विशेष न्यौता भेजा था, जिसका प्रमाण आज भी मौजूद है।   1963 से कंदोरा की अमराई में गोकुलाष्टमी मेला प्रारंभ हुआ, जो इस वर्ष अपने 62वें वर्ष में है। अब यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में महाकुल समाज की आस्था, एकता और परंपरा का प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष के गोकुलाष्टमी शताब्दी पर्व को भव्यता देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, पद्मश्री जगेश्वर राम यादव, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, प्रांताध्यक्ष परमेश्वर यादव, रणविजय सिंह जूदेव, राधेश्याम राठिया, गोमती साय, रायमुनि भगत और प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जैसे कई प्रमुख अतिथि शामिल हो रहे हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, वहीं मेले में दुकानदार अपनी दुकानें सजा रहे हैं और मंच की तैयारी अंतिम चरण में है।   गोकुलाष्टमी पूजा समिति के अध्यक्ष रविशंकर यादव, उपाध्यक्ष कुंवर यादव, कोषाध्यक्ष बिन्नू यादव, सचिव विनोद कुमार यादव एवं सह सचिव गुले यादव अपनी कार्यकारिणी के साथ आयोजन की सफलता हेतु सक्रिय रूप से जुटे हैं।   गोकुलधाम की यह 100 वर्षीय परंपरा आज भी न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश देती है —“जहां भक्ति है, वहां वंश की समृद्धि और समाज की एकता सदैव बनी रहती है।”