मोंथा चक्रवात का असर अब भी जारी, मौसम विभाग ने फिर दी चेतावनी – कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट,जशपुर से आई तस्वीरें देखिए

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मोंथा चक्रवात का असर अब भी जारी, मौसम विभाग ने फिर दी चेतावनी – कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट   रायपुर/जशपुर – चक्रवात मोंथा का असर अब तक खत्म नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने बताया है कि छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में आज भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। कई जगहों पर तेज हवा चलने और बिजली गिरने का खतरा है। फोटो: लोरो घाटी में कोहरे और हल्की बारिश से विजिबिलिटी कम,लाइट जलाकर चलते वाहन मौसम विभाग के अनुसार, मोंथा चक्रवात का असर इस समय पूर्वी विदर्भ और दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर एक निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में बना हुआ है, जो अब उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। अगले 24 घंटे में यह सिस्टम उत्तर छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्यप्रदेश की ओर बढ़कर एक नया दबाव क्षेत्र बना सकता है। फोटो: बालाछापर नेशनल हाईवे की तस्वीर पिछले 24 घंटे में प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश हुई। बड़े बचेली में सबसे ज्यादा 6 सेमी, भोपालपटनम में 4 सेमी, कुसमी में 3 सेमी, जबकि कुटरू, गंगालूर, भैरमगढ़, दुर्गकोंदल और नारायणपुर में 2 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा औंधी, सामरी, कांसाबेल, उसूर, मानपुर, जगदलपुर, ओरछा, बिहारपुर, कुआकोडा, कटघोरा और बुलबुला में हल्की वर्षा हुई।   जशपुर जिले में सुबह से कोहरा और हल्की बारिश देखने को मिली, जिससे विजिबिलिटी यानी दृश्यता कम हो गई। मौसम विभाग ने जशपुर, बलरामपुर और आसपास के इलाकों के लिए अगले 3 घंटे का अलर्ट जारी किया है। यहां बिजली गिरने, गरज के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई गई है। फोटो: सुबह 10 बजे हैं,जशपुर शहर का मौसम कोहरे से ढका हुआ,स्ट्रीट लाइट जलते हुए   रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा मरवाही, सुरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जिलों में भी मध्यम वर्षा की संभावना बताई गई है।   राजधानी रायपुर में आज पूरे दिन बादल छाए रहेंगे और बीच-बीच में हल्की बारिश हो सकती है। तापमान में भी गिरावट आएगी और अधिकतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। फोटो: रणजीता स्टेडियम में राज्योत्सव की तैयारी में खराब मौसम का असर दिखता हुआ   मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक नवंबर तक उत्तर छत्तीसगढ़ यानी जशपुर, बलरामपुर और सरगुजा के इलाके में यह सिस्टम ज्यादा सक्रिय रहेगा। इसलिए किसानों और ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में बिजली गिरने के समय न जाएं और खुले में खड़े न रहें।

जनप्रतिनिधि से दुर्व्यवहार पर तहसीलदार सन्ना की कार्यशैली विवाद में, वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमाया

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जशपुर,30 अक्टूबर 2025 – सन्ना तहसील में पदस्थ महिला तहसीलदार एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। जनपद सदस्य राकेश गुप्ता के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होते ही मामला तूल पकड़ लिया है। इसमें तहसीलदार को जनप्रतिनिधि से तीखे लहजे में बात करते और गुस्से में नसीहत देते हुए देखा जा सकता है।इस वीडियो की पुष्टि ख़बर जनपक्ष नहीं करता है।तहसीलदार की ओर से इस मामले पर कोई बयान अभी सामने नहीं आया है।   जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक जमीन विवाद के दौरान जनपद सदस्य राकेश गुप्ता तहसीलदार से चर्चा करने गए थे। इसी दौरान दोनों के बीच कहासुनी हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि माहौल तनावपूर्ण बन गया। जनपद सदस्य का कहना है कि तहसीलदार ने जनप्रतिनिधि के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जो अस्वीकार्य है। पहले भी रह चुकी हैं विवादों में यह कोई पहला मौका नहीं है जब तहसीलदार सन्ना विवादों में आई हों। बगीचा में पदस्थापना के दौरान भी उन पर पटवारियों ने गंभीर आरोप लगाए थे कि उनसे निजी कामों और राशन की मांग की जाती थी। उस समय भी यह मामला चर्चा में रहा था और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे। इसके अलावा, अधिवक्ता संघ द्वारा उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाना भी विवादों की लंबी सूची में शामिल है।सूत्रों के मुताबिक, कुछ समय पहले तहसील के ही कर्मचारियों ने भी तहसीलदार पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामला जिला स्तर पर सुलझाया गया था।   राजनीतिक गलियारों में हलचल इस ताजा घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई हलचल मचा दी है। कई संगठन और जनप्रतिनिधि प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जनपद सदस्य राकेश गुप्ता ने कहा कि किसी भी अधिकारी को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए, न कि अहंकारपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।उन्होंने कहा कि यह मामला शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है, जहां निष्पक्षता की अपेक्षा की जा रही थी, लेकिन व्यवहारिक तौर पर भेदभाव झलक रहा है। सोशल मीडिया फेसबुक में यूजर्स तहसीलदार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।वहीं अन्य जनप्रतिनिधियों में भी इस मामले पर तहसीलदार के खिलाफ आक्रोश है। अब नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर जनप्रतिनिधि के साथ दुर्व्यवहार के आरोप के बाद अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन वायरल वीडियो और लगातार बढ़ते जन असंतोष को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस पर जांच या कार्रवाई की घोषणा की जा सकती है।

विशेष लेख : एकता दिवस का महत्व : भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन (निर्मल कुमार)

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विशेष लेख : एकता दिवस का महत्व : भारत की एकता और अखंडता की आधारशिला को नमन (निर्मल कुमार) हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस (Rashtriya Ekta Diwas) मनाता है, ताकि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती का सम्मान किया जा सके — एक ऐसे महान नेता जिनकी दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय ने एक एकीकृत भारत की नींव रखी। “भारत के लौह पुरुष” के रूप में प्रसिद्ध पटेल के नेतृत्व में स्वतंत्रता के बाद 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण हुआ, जिसने आज के इस अखंड, संप्रभु राष्ट्र को जन्म दिया। एकता दिवस केवल उनकी विरासत को श्रद्धांजलि नहीं है — यह भारत की विविधता में एकता की स्थायी प्रतिबद्धता की पुनर्पुष्टि है। लौह पुरुष और भारत का एकीकरण 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब देश को 560 से अधिक रियासतों का जटिल ताना-बाना विरासत में मिला — प्रत्येक रियासत की अपनी स्वायत्तता और अलग निष्ठाएँ थीं। सरदार पटेल ने इन रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने की चुनौती स्वीकार की — एक ऐसा कार्य जिसके लिए अद्वितीय कूटनीति, साहस और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता थी। उनकी स्थिर दृष्टि और अटूट निश्चय ने उन्हें “लौह पुरुष” का ख़िताब दिलाया। राजनैतिक समझदारी और व्यवहारिकता के संयोजन से पटेल ने हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर जैसी महत्वपूर्ण रियासतों का विलय कराया, जिससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हुई। “एकता के बिना मनुष्यबल कोई शक्ति नहीं है; जब तक वह उचित रूप से संगठित न हो जाए, तब तक वह एक आध्यात्मिक शक्ति नहीं बन सकता।” — सरदार वल्लभभाई पटेल पटेल के लिए राष्ट्र की सच्ची शक्ति केवल सीमाओं में नहीं, बल्कि उसके लोगों की एकता में निहित थी। राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत वर्ष 2014 में भारत सरकार ने सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका उद्देश्य नागरिकों में एकता की भावना को पुनर्जीवित करना और पटेल की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की दृष्टि को सम्मानित करना है। इस दिन देशभर में Run for Unity, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियाँ, और शपथ समारोह आयोजित किए जाते हैं — स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों से लेकर सेना और समुदायों तक। मुख्य समारोह गुजरात के एकता नगर स्थित “Statue of Unity” (182 मीटर ऊँची पटेल की भव्य प्रतिमा) पर आयोजित होता है, जो भारत की शक्ति, साहस और सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। एक दृष्टि जो समय से परे है सरदार पटेल की राजनीतिक बुद्धिमत्ता और दूरदृष्टि आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता के समय थी। उनका सामाजिक समरसता और समावेशिता में विश्वास आज के विभाजित विश्व में भी प्रेरणा देता है। “सत्य और न्याय के मार्ग पर चलो — क्योंकि वही सभी के लिए सही मार्ग है।” — सरदार पटेल ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि भारत के सामाजिक ताने-बाने में न्याय, परस्पर सम्मान और शांति बनाए रखना हमारी साझा जिम्मेदारी है। एकता दिवस उस भारत की भावना को पुनर्स्थापित करता है जो अपनी विविधता में फलता-फूलता है, न कि उसके बावजूद। यह हर नागरिक को राष्ट्र की एकता के प्रति समर्पण की याद दिलाता है और भाषा, क्षेत्र और धर्म के बीच मजबूत बंधन बनाने का आह्वान करता है। आधुनिक भारत में एकता दिवस का महत्व आज जब भारत क्षेत्रीय असमानताओं, सामाजिक विभाजनों और वैचारिक मतभेदों जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब एकता दिवस का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक प्रगति की भावना का पुनर्जागरण है। हर वर्ष Statue of Unity पर आयोजित समारोह देशभक्ति और गर्व की भावना को फिर से प्रज्वलित करता है। यह संदेश देता है कि भारत चाहे जितना विशाल और विविध क्यों न हो — उसका दिल और आत्मा एक है। “मेरी केवल एक इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक बने और देश में कोई भूखा न रहे, किसी की आँखों में आँसू न हों।” — सरदार पटेल उनका यह विचारशील राष्ट्रवाद सेवा और एकता पर आधारित नेतृत्व का सर्वोत्तम उदाहरण है। एकता की अमर विरासत   राष्ट्रीय एकता दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं है — यह उस शक्ति की याद दिलाता है जो एकता से आती है। यह भारत के संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, और उस कालातीत विचार का प्रतिबिंब है कि एकता ही राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति है।   एक विभाजित होती दुनिया में पटेल का उदाहरण हमें अनुशासन, एकजुटता और सामूहिक नियति में विश्वास का संदेश देता है। हर वर्ष 31 अक्टूबर को जब भारत एकता दिवस मनाता है, तब यह हमें याद दिलाता है कि पटेल की कल्पित एकता कोई स्थिर अवधारणा नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति है। “कार्य ही पूजा है, श्रम ही ईश्वर है, और जो व्यक्ति सही भावना से कार्य करता है, वह सदा शांत और प्रसन्न रहता है।” — सरदार वल्लभभाई पटेल ये वचन हर पीढ़ी को राष्ट्र की प्रगति और एकता में योगदान देने का आह्वान करते हैं। सरदार पटेल की विरासत इतिहास से परे है — वह भारत की आत्मा में सजीव है। हर वर्ष एकता दिवस यह सुनिश्चित करता है कि यह भावना कभी मंद न पड़े, भारत सदैव एक रहे, और पटेल का सुदृढ़ सामंजस्य सदा हमारा मार्गदर्शक बना रहे। (लेखक निर्मल कुमार सामाजिक,आर्थिक मुद्दों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।)

जशपुर में 15 अक्टूबर को होगा फिल्म अर्पण का पोस्टर विमोचन, डॉ हरविंदर मांकड़ और आदेश शर्मा रहेंगे विशेष अतिथि

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जशपुर में 15 अक्टूबर को होगा फिल्म अर्पण का पोस्टर विमोचन, डॉ हरविंदर मांकड़ और आदेश शर्मा रहेंगे विशेष अतिथि जशपुर,12 अक्टूबर 2025/ जशपुर की धरती एक बार फिर बड़ी सांस्कृतिक और प्रेरणादायक घटना की साक्षी बनने जा रही है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ ग्रेस कुजूर के संघर्षपूर्ण जीवन पर आधारित फिल्म अर्पण का भव्य पोस्टर विमोचन समारोह 15 अक्टूबर को जशपुर में आयोजित होगा। पॉपकॉर्न फ्लिक्स इंडिया के प्रोडक्शन हेड संतोष चौधरी ने बताया कि इस अवसर पर एपीजे अब्दुल कलाम पर पुस्तक लिखने वाले प्रसिद्ध लेखक और लोटपोट पत्रिका के मोटू पतलू के क्रिएटर, सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट डॉ हरविंदर मांकड़ तथा बालाजी फिल्म्स इंडिया के संस्थापक आदेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। खास बात है कि पॉपकॉर्न फ्लिक्स इंडिया की फिल्म अर्पण में नायिका की भूमिका स्वयं डॉ ग्रेस कुजूर ने निभाई है। कार्यक्रम में पूर्व सैनिक भी विशेष रूप से आमंत्रित हैं, क्योंकि डॉ ग्रेस के पिता स्वर्गीय स्तानिसलास कुजूर भारतीय सेना के वीर सैनिक रहे हैं, जिन्होंने चार लड़ाइयां, 1962, 1965, 1971 तथा गोवा मुक्ति संग्राम में अपनी वीरता का प्रदर्शन किया था। डॉ हरविंदर मांकड़ ने कहा कि “जशपुर की खूबसूरत और अनछुई वादियाँ मुझे दोबारा खींच लाई हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी की स्वच्छ पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता अनुकरणीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ माँ के नाम अभियान की सफलता देखकर यह फिल्म उसी भावना को समर्पित है।” वहीं, आदेश शर्मा ने भी डॉ ग्रेस के कार्यों से प्रभावित होकर समारोह में शामिल होने की सहमति दी है। वे पिछले 35 वर्षों से मीडिया और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और तथास्तु इंडिया, वायदूत न्यूज नेटवर्क, बालाजी फिल्म्स के संस्थापक होने के साथ ही दूरदर्शन स्ट्रिंगर फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं। यह समारोह न केवल जशपुर की कला और सौंदर्य को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाला साबित होगा, बल्कि डॉ ग्रेस कुजूर के प्रेरक जीवन की कहानी को भी जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

रायकेरा में दोहरी हत्या से दहशत — सास और दामाद की निर्मम हत्या, गांव में मचा हड़कंप

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रायकेरा गांव में दोहरी हत्या से सनसनी सास और दामाद की देर रात हत्या, गांव में मचा हड़कंप। पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर जांच में जुटी। एक महिला समेत दो संदेहियों से पूछताछ जारी। प्राथमिक जांच में पैसे के लेन-देन का मामला आया सामने।   रायकेरा (रायगढ़)। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा थाना क्षेत्र के रायकेरा गांव में देर रात हुए दोहरे हत्याकांड से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सास और दामाद की हत्या की खबर से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हुई है।   घटना देर रात की बताई जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद हत्या की वजह हो सकती है। पुलिस ने संदेह के आधार पर एक महिला सहित दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।   हत्या की वारदात की जानकारी मिलते ही घरघोड़ा थाना पुलिस ने इलाके को घेर लिया और एफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। गांव में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए हैं, वहीं घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।   पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और हत्या के कारणों की जांच में तेजी लाई जा रही है। थाना प्रभारी के अनुसार, प्राथमिक जांच में आर्थिक लेनदेन को लेकर विवाद सामने आया है, हालांकि पुलिस अन्य सभी बिंदुओं पर भी गहनता से जांच कर रही है।  

हाथी के हमले में महिला की मौत,ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

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हाथी के हमले में महिला की मौत, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप जशपुर जिले में जंगली हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष कम करने के दावों के बीच एक बुरी खबर आई है,जिसमें जंगली मशरूम बीन रही महिला एक जंगली हाथी की चपेट में आ गई।ग्रामीणों के शोरगुल से जंगली हाथी ने महिला को बुरी तरह घायल कर दिया।स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग की मदद से घायल को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। जशपुर,20 सितंबर 2025 – कुनकुरी विकासखंड के कुड़ुकेला जंगलपारा में हाथी के हमले से एक महिला की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार 44 वर्षीय ग्रामीण महिला ज्योति मिंज शुक्रवार की सुबह जंगल से खुखड़ी (जंगली मशरुम) बीनकर लौट रही थी। घर से महज 200 मीटर दूर जंगल की सीमा पर हाथी ने उस पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल हालत में उसे तत्काल कुनकुरी के होलीक्रॉस अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।   घटना से ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद वन विभाग की ओर से मुनादी नहीं कराई गई और न ही लोगों को सावधान किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है। वहीं वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि हाथियों के विचरण को लेकर विभिन्न संचार माध्यमों से लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।लोग जंगल में जाते समय लापरवाही कर रहे हैं।घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस से घायल को अस्पताल पहुंचाया गया। इस घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने हाथियों की लगातार आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखने और लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर होगा पौधा रोपण,कौशल्या साय ने हर घर में दीप जलाने की अपील की

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जशपुर,15 सितंबर 2025 – सत्रह सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय प्रातः 9 बजे बगिया के श्री फलेश्वर नाथ मंदिर परिसर में पौधा रोपण करेंगी एवं सांय 6 बजे कुनकुरी के छठ घाट में शहरवासियों के साथ दीप प्रज्वलन कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर राष्ट्र प्रगति की कामना करेंगी। इस मौके पर भव्य कार्यक्रम के साथ छठ घाट को दीपों से सजा कर रोशन किया जाएगा।कुनकुरी के नगरवासियों ने इस आयोजन की तैयारी उत्साहपूर्वक शुरू कर दी है। श्रीमती कौशल्या साय ने समस्त प्रदेश वासियों से अपील किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर को सभी लोग अपने घरों में पौधारोपण कर शाम को दीपक जला कर एकजुटता का संदेश दें और राष्ट्र प्रगति की कामना करें। उन्होनें आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी बीते 11 साल से लगातार देश के विकास के लिए पूरे समर्पण भाव से काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत विश्व गुरू बनने की ओर अग्रसर है। देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा मजबूत हुई है। देश का आर्थिक विकास एक नई उंचाई को छू रहा है। अंर्तराष्ट्रीय मंच में भारत की उपस्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है। बीते दो साल में नक्सल मुक्ति की ओर छत्तीसगढ़ ने तेजी से कदम बढ़ाया है।ऐसे में हम सब प्रदेश वासियों का दायित्व है कि हम जन्म दिवस के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एकजुटता का संदेश देकर उनका उत्साहवर्द्वन करे ताकि वे एक नई उर्जा के साथ देश और देशवासियों की सेवा कर सकें।

कुनकुरी में अग्रवाल समाज का प्रदर्शन, नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता के खिलाफ एफआईआर की मांग,,देखें तस्वीरें

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कुनकुरी, 11 सितम्बर 2025/ कुनकुरी शहर में आज अग्रवाल समाज ने नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता की फेसबुक पोस्ट से नाराज होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। समाज के लोगों ने रैली निकालते हुए पुतला दहन किया और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर विनयशील के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। अग्र समाज के संभागीय अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने कहा कि “गणेश विसर्जन के दौरान हुए सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी। इस पर 50 लाख रुपए मुआवजा मांगना जायज है, लेकिन किसी एक समाज के लिए अलग मांग करना और यह कहना कि फलाने समाज की कीमत इतनी और अन्य समाज की कीमत इतनी—यह बिल्कुल गलत है। राजनीति जातिवाद की नहीं होनी चाहिए। जातिवाद में बयान देने से समाज में विद्वेष फैलता है। इसी कारण आज पूरे संभाग के सभी जिलों के थानों में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।” अग्र समाज के जिला सचिव अमित अग्रवाल ने विनयशील गुप्ता के फेसबुक पोस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “बगीचा के जुरूडांड में हुई घटना में सरकार ने मृतकों के वारिसों को पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया। उससे असंतुष्ट होकर विनयशील ने फेसबुक पर समाज को टारगेट करते हुए टिप्पणी की कि अग्रवाल समाज के व्यक्ति की जान की कीमत 50 लाख और अन्य समाज—जिनमें उन्होंने तीन-चार समाजों का नाम लिया—उनकी कीमत पांच लाख। आखिर अग्रवाल समाज को टारगेट करने का उद्देश्य क्या था, यह मैं समझ नहीं पा रहा हूं। उनकी इस टिप्पणी से पूरे अग्रवाल समाज में आक्रोश व्याप्त है।” वहीं, अग्र समाज के जिलाध्यक्ष मुरारीलाल अग्रवाल ने कहा कि “अग्रवाल समाज के लोग सभी राजनीतिक दलों में हैं। विनयशील की टिप्पणी से समाज में नाराजगी है और हम उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए थाने पहुंचे हैं।” फिलहाल, कुनकुरी थाने में अग्रवाल समाज ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंप दिया है। पुलिस ने विनयशील गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली है। बता दें कि 2 सितम्बर को बगीचा थानांतर्गत ग्राम जुरूडांड में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन भीड़ में घुस गया था। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई और करीब 22 लोग घायल हुए थे। घटना के बाद कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार से मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपए और गंभीर घायलों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की थी। इसी मुद्दे पर नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील गुप्ता ने सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ लगातार मुखर होकर टिप्पणी कर रहे हैं।

भारत के राष्ट्रीय अध्यापक विनोबा भावे की जयंती पर विशेष लेख,पढ़ें विनायक से विनोबा तक का सफर

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आचार्य विनोबा भावे / जयंती पर विशेष आलेख जन्म : 11 सितंबर 1895 मृत्यु : 15 नवंबर 1982   आज भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और गांधीवादी नेता, संत विनोबा भावे को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। इन्हें महात्मा गांधी का आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माना जाता है, और भारत का राष्ट्रीय अध्यापक भी कहा जाता है, जिस कारण लोग संत विनोबा भावे को आचार्य कहकर भी संबोधित करते हैं।   आचार्य विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर, 1895 को महाराष्ट्र के कोलाबा ज़िले के गागोड गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम ‘विनायक नरहरि भावे’ था। उनके पिता का नाम नरहरि शंभू राव व माता का नाम रुक्मिणी देवी था। उनकी माता एक विदुषी महिला थी। आचार्य विनोबा भावे का ज़्यादातर समय धार्मिक कार्य व आध्यात्म में बीतता था। बचपन में वह अपनी मां से संत तुकाराम, संत ज्ञानेश्वर और भगवत् गीता की कहानियां सुनते थे। इसका प्रभाव, उनके जीवन पर काफी गहरा पड़ा और इस वजह से उनका रुझान, आध्यात्म की तरफ बढ़ गया।   आगे चलकर विनोबा भावे ने रामायण, कुरान, बाइबल, गीता जैसे अनेक धार्मिक ग्रंथों का, गहन अध्ययन किया। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, और अर्थशास्त्री भी थे। उनका संपूर्ण जीवन साधू, सन्यासियों व तपस्वी की तरह बीता। इसी कारण, उनको संत कहकर संबोधित किया जाने लगा।   वह इंटर की परीक्षा देने के लिए 25 मार्च, 1916 को मुंबई जाने वाली रेलगाड़ी में सवार हुए, परंतु उस समय उनका मन स्थिर नहीं था। उन्हें लग रहा था कि वह जीवन में जो करना चाहते हैं, वह डिग्री द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता। उनके जीवन का लक्ष्य, कुछ और ही था।   अभी उनकी गाड़ी सूरत पहुंची ही थी कि उनके मन में हलचल होने लगी। गृहस्थ जीवन या सन्यास, उनका मन दोनों में से किसी एक को नहीं चुन पा रहा था। तब थोड़ा विचार करने के बाद, उन्होंने संन्यासी बनने का निर्णय लिया, और हिमालय की ओर जाने वाली गाड़ी में सवार हो गए।   1916 में मात्र 21 वर्ष की आयु में, उन्होंने घर छोड़ दिया और साधु बनने के लिए, काशी नगरी पहुंच गए। वहां पहुंचकर, उन्होंने महान पंडितों के सानिध्य में, शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। उस समय, स्वतंत्रता आंदोलन भी अपनी चरम सीमा पर था।   महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से लौटकर भारत आ गए थे। तब विनोबा जी ने अहमदाबाद के कोचरब आश्रम में, गांधी जी से पहली मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उनका जीवन बदल गया और उन्होंने अपना पूरा जीवन गांधीजी को समर्पित कर दिया।   1921 से 1942 तक, वह अनेकों बार जेल गए। उन्होंने 1922 में नागपुर में सत्याग्रह किया, जिसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया। 1930 में विनोबा जी ने, गांधीजी के नेतृत्व में नमक सत्याग्रह को अंजाम दिया। 11 अक्टूबर, 1940 को प्रथम सत्याग्रही के रूप में गांधी जी ने विनोबा भावे को चुना।   समय के साथ गांधीजी और विनोबा जी के संबंध काफी मज़बूत होते गए। वह गांधी जी के आश्रम में रहने लगे, और वहां की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे। आश्रम में ही उनको विनोबा नाम मिला।   विनोबा भावे ने गरीबी को खत्म करने के लिए, काम करना शुरू किया। 1950 में उन्होंने, सर्वोदय आंदोलन आरंभ किया। इसके तहत, उन्होंने ‘भूदान आंदोलन’ की शुरुआत की। 1951 में, जब वह आंध्रप्रदेश का दौरा कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात, कुछ हरिजनों से हुई, जिन्होंने विनोबा जी से 80 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की विनती की।   विनोबा जी ने ज़मींदारों से आगे आकर अपनी ज़मीन दान करने का निवेदन किया, जिसका काफी ज़्यादा असर देखने को मिला और कई ज़मींदारों ने अपनी ज़मीनें दान में दीं। वहीं इस आंदोलन को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला। 17 सितम्बर 1992 को हज़ारीबाग़ में इनके नाम पर “विनोबा भावे विश्वविद्यालय” इनके भूदान आंदोलन से प्राप्त जमीन पर स्थापित किया गया। विनोबा भावे जी को भूदान आंदोलन में सबसे ज्यादा जमीन हज़ारीबाग़ में मिली थी।   1959 में उन्होंने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, ब्रह्म विद्या मंदिर की स्थापना की। स्वराज शास्त्र, गीता प्रवचन और तीसरी शक्ति उनकी लिखी किताबों में से प्रमुख है।   नवंबर 1982 में विनोबा भावे गंभीर रूप से बीमार हो गए और उन्होंने अपने जीवन को त्यागने का फैसला किया। उन्होंने जैन धर्म के संलेखना-संथारा के रूप में भोजन और दवा को त्याग दिया और इच्छा पूर्वक मृत्यु को अपनाने का निर्णय लिया। 15 नवंबर, 1982 को विनोबा भावे ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

डॉ. ग्रेस ने जुमाइकेला में स्कूली बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य और लक्ष्य निर्धारण के दिए टिप्स

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जशपुर,10 सितम्बर 2025 –  ख्यातिप्राप्त मनोचिकित्सक डॉ. ग्रेस कुजूर मंगलवार को कांसाबेल विकासखंड के जुमईकेला स्थित डॉन बोस्को इंग्लिश मीडियम स्कूल और जनता हायर सेकेंडरी स्कूल की विशेष कार्यशाला में पहुँचीं। इस अवसर पर विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यशाला में डॉ. ग्रेस ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाते हुए बुद्धि बढ़ाने के कई उपयोगी टिप्स दिए। उन्होंने मोबाइल फोन के जिम्मेदाराना उपयोग की बात करते हुए कहा कि “मोबाइल को पढ़ाई और ज्ञान बढ़ाने का साधन बनाना चाहिए, न कि केवल मनोरंजन का।’’ साथ ही उन्होंने स्क्रीन टाइम को कम करने और उसका सही उपयोग करने के उपाय भी बताए। डॉ. ग्रेस ने छात्रों को जीवन में लक्ष्य निर्धारण और मानसिक तैयारी पर जोर देते हुए कहा कि चाहे कोई भी सपना हो—डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस अधिकारी, शिक्षक या किसान बनने का—उसे हासिल करने के लिए पहले मानसिक रूप से तैयार होना जरूरी है। उन्होंने चेतन और अवचेतन मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि जब हम किसी लक्ष्य के बारे में लगातार सोचते हैं तो हमारा दिमाग उसी दिशा में काम करने लगता है। इस अवसर पर डॉन बोस्को इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रिंसिपल पॉल तिर्की ने कहा कि “छात्र जीवन सीखने का काल है और इसे दिमाग से सीखा जाता है।” वहीं जनता हायर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल कांति तिर्की ने छात्रों को डॉ. ग्रेस की बातों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी भी साझा की गई कि डॉ. ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को समर्थन देने के लिए अपनी जीवनगाथा पर बन रही फिल्म ‘अर्पण’ को समर्पित किया है। मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तित्व आज के युग में विरले ही देखने को मिलते हैं। आभार व्यक्त करने मंच पर पहुँची छात्रा आलिया ने कहा कि इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और लक्ष्य निर्धारण के प्रति एक नई दृष्टि दी।