स्टेट हाइवे पर गणेश विसर्जन जुलूस पर तेज रफ्तार बोलेरो चढ़ी, 3 की मौत, 22 से ज्यादा घायल

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उल्लास का माहौल मातम में बदला, घायलों में एक दर्जन की हालत गंभीर, आरोपी चालक गिरफ्तार जशपुर (छत्तीसगढ़)03 सितम्बर 2025 – छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में गणेश विसर्जन का जुलूस उस वक्त मातम में बदल गया जब एक तेज रफ्तार बोलेरो अनियंत्रित होकर भीड़ में घुस गई। यह हादसा बगीचा थाना क्षेत्र के जुरुडांड गांव में बीती रात करीब साढ़े दस बजे हुआ। घटना में 3 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 22 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें से एक दर्जन से ज्यादा की हालत गंभीर बताई जा रही है। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण गणेश प्रतिमा का ग्राम भ्रमण कर विसर्जन करने तालाब की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अंबिकापुर से कुनकुरी की ओर जा रही बोलेरो ने अचानक भीड़ को अपनी चपेट में ले लिया। वाहन की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई लोग हवा में उछलकर दूर जा गिरे और कई लोग वाहन के नीचे कुचल गए। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने चालक की जमकर पिटाई कर दी, जबकि वाहन में सवार अन्य लोग मौके से फरार हो गए। मृतकों की पहचान   इस दर्दनाक हादसे में जिनकी मौत हुई है, उनमें – अरविंद (19 वर्ष), पिता तोबियस केरकेट्टा विपिन कुमार प्रजापति (17 वर्ष), पिता देवनारायण खिरोवती यादव (32 वर्ष), पत्नी हरीश यादव शामिल हैं। घायलों का उपचार जारी घायलों को तुरंत बगीचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां बीएमओ डॉ. सुनील लकड़ा और उनकी टीम ने पूरी रात इलाज किया। गंभीर घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है। इस बीच सीएमएचओ डॉ. जी.एस. जात्रा ने पूरे स्वास्थ्य अमले को अलर्ट पर रखा है और घायलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मौके पर विधायक, कलेक्टर और एसएसपी हादसे की खबर मिलते ही जशपुर विधायक रायमुनि भगत रात में ही अस्पताल पहुंचीं और घायलों व परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया। वहीं जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी शशिमोहन सिंह भी देर रात अस्पताल पहुंचे। कलेक्टर ने बताया कि प्रशासन की ओर से मेडिकल ऑफिसर और दो नायब तहसीलदार को अंबिकापुर भेजा गया है ताकि घायलों के इलाज में किसी तरह की कमी न हो। पुलिस ने बोलेरो व चालक को पकड़ा एसएसपी शशिमोहन सिंह ने बताया कि बोलेरो और उसके चालक को पुलिस ने पकड़ लिया है। “प्रकरण की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” पूरे इलाके में शोक गणेश उत्सव के उल्लास के बीच हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जहां तालाब से लौटते ग्रामीणों को उत्सव का समापन करना था, वहीं अचानक हुए हादसे ने पूरे क्षेत्र में मातम का माहौल पैदा कर दिया।

एसडब्ल्यूजेयू का जिला कार्यकारिणी घोषित,राहुल सिन्हा बने adhyksh

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रायपुर,02 सितंबर 2025 – पत्रकारिता एवं पत्रकार हितों के लिए समर्पित भारत के सबसे बड़े और पुराने राष्ट्रीय संगठन “इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन ” से सम्बध्द “स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन छत्तीसगढ़” के जिला कार्यकारिणी की घोषणा एक सितंबर 2025 को की गई। सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रभारी जिला रायपुर दिलीप साहू की अनुशंसा से प्रदेश अध्यक्ष पी सी रथ ने अनुभवी पत्रकार राहुल सिन्हा (आकाशवाणी) को जिला अध्यक्ष, जिला सचिव के पद पर लविंदर पाल सिंघोत्रा व कोषाध्यक्ष अमित बाघ (आईएनडी 24) को मनोनीत किया। रायपुर जिला ईकाई में दो उपाध्यक्ष खोमन साहू ( विस्तार न्यूज) एवं अंबिका मिश्रा, दो सह-सचिव विक्की पंजवानी एवं वर्षा यादव ( झूठा सच ) बनाए गए हैं। जिला रायपुर के लिए मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सुधीर वर्मा ( स्वदेश न्यूज ) तथा जिज्ञासा चंद्रा (साधना न्यूज) को दिया गया है। राजधानी रायपुर जिला कार्यकारिणी सदस्यों में अजय रघुवंशी, आकाश शुक्ला, अंकुश शर्मा, निधि प्रसाद, स्वप्निल गौरखेड़े, स्नेहिल सराफ, श्रवण तम्बोली, खुशबू ठाकरे, हिमांशु पटेल, कुलभूषण ठाकुर, मोनिका दुबे शामिल हैं। संगठन सचिव सुधीर आज़ाद तम्बोली ने बताया कि संगठन विस्तार के लिए प्रदेश भर में सदस्यता अभियान जारी है, जिसमें रायपुर समेत प्रदेश के सभी जिलों से सदस्य जुड़ते जा रहे है, रायपुर जिला पदाधिकारियों तथा कार्यकारिणी की घोषणा पश्चात अब जल्द ही सभी जिलों में कार्यकारिणी गठित किया जा रहा है।

हिमालय अभियान पर निकली जशपुर की युवा टीम,कलेक्टर रोहित व्यास ने दी शुभकामनाएं

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जशपुर, 31 अगस्त 2025/ जशपुर से एक विशेष पर्वतारोहण दल हिमालयी अभियान के लिए रवाना हुआ है। दल में शामिल जशपुर के युवा पर्वतारोही हैं – रवि सिंह, तेजल भगत, रूसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक। इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू है – आदिवासी संस्कृति और उसकी जड़ों से जुड़ाव। जशपुर की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय परंपराओं, प्रकृति-आधारित जीवनशैली और सामूहिकता की भावना से है। हिमालय की ऊँचाइयों पर इन युवाओं का पहुँचना केवल एक खेल उपलब्धि नहीं बल्कि इस बात का प्रतीक है कि कैसे आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक ताकत और प्रकृति से गहरे रिश्ते को लेकर दुनिया के सामने खड़ा हो रहा है। दल के सदस्य अपनी संस्कृति और साहस अपने साथ लिए हिमालय की ओर बढ़ रहे हैं।   यह अभियान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन से संचालित हो रहा है। दल जशपुर से रांची के लिए रवाना हुआ, जहां से वे ट्रेन द्वारा दिल्ली पहुँचेंगे। दिल्ली से आगे टीम जगतसुख पहुँचेगी, जहाँ वे 4 सितम्बर तक की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके बाद 5 सितम्बर को टीम आधार शिविर (Base Camp) की ओर प्रस्थान करेगी।   दल को विदा करने के लिए जशपुर जिला प्रशासन एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। जशपुर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जशपुर के डीएफओ श्री शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार और एसडीएम श्री विश्वास मस्के ने टीम को शुभकामनाएँ दीं और उनके सुरक्षित एवं सफल अभियान की कामना की।   इस अवसर पर कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि जशपुर की युवा प्रतिभाएँ इस अभियान के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने में योगदान प्रदान कर रही हैं। वहीं डीएफओ श्री शशि कुमार ने इसे जिले की उभरती खेल एवं साहसिक गतिविधियों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। विशेष रूप से, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जो स्वयं एक अनुभवी पर्वतारोही हैं, ने दल के युवाओं को पर्वतारोहण और ट्रेकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने सुरक्षा उपायों, ऊँचाई पर स्वास्थ्य प्रबंधन और टीम भावना की अहमियत पर बल देते हुए बच्चों को प्रेरित किया।   जशपुर के लोग भी इस अभियान को लेकर उत्साहित और गर्वित हैं। साथ ही स्थानीय जय जंगल कंपनी जो इस एक्सपीडिशन के स्पान्सर में से एक है, के संस्थापक समर्थ जैन का कहना है कि यह दल पूरे जिले के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों को पर्वतारोहण तथा साहसिक खेलों की ओर अग्रसर करेगा। जगह-जगह लोग बच्चों के हौसले और साहस की चर्चा कर रहे हैं और सभी को उम्मीद है कि वे हिमालय से सफलता और गौरव की नई कहानियाँ लेकर लौटेंगे।   इस अभियान का नेतृत्व पर्वतारोही स्वप्निल राचेलवार एवं राहुल ओगरा कर रहे हैं।   साथ ही इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण संदेश है – पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति की दिशा में जागरूकता। यह पहल न केवल युवाओं को प्रकृति से जोड़ने का कार्य करेगी, बल्कि उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। हिमालय अभियान से यह संदेश भी जाएगा कि साहसिक खेलों और पर्वतारोहण के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दी जा सकती है। इससे न केवल जशपुर बल्कि पूरे राज्य में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

जशपुर से हिमालय तक: जनजातीय युवाओं की ऐतिहासिक चढ़ाई की तैयारी

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जशपुर –  26 अगस्त 2025/ छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला जो अब तक अपनी हरियाली, झरनों और शांत वनों के लिए प्रसिद्ध रहा है, देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर की स्थापना के बाद अब एक और नई पहचान बनाने जा रहा है।जिले के आदिवासी युवा हिमालय की चोटियों पर अल्पाइन तरीके की रॉक क्लाइम्बिंग चढ़ाई के लिए निकलने की तैयारी कर रहे हैं। मियार वैली ट्राइबल अल्पाइन एक्सपेडिशन 2025 केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और देश के लिए गर्व और उम्मीद की कहानी बन रहा है। इस अभियान के लिए अंतिम चरण में पाँच युवाओं का चयन किया गया है, जिनकी अपनी-अपनी कहानियाँ प्रेरणादायक हैं। रुसनाथ भगत जो एम.ए. हिस्ट्री के छात्र और एनसीसी कैडेट हैं, शहर में अपने लोकप्रिय नेपोलियन चाउमिन सेंटर चलाते हैं और कंटेंट क्रिएशन में भी सक्रिय हैं। तेजल भगत एम.एससी. बॉटनी की छात्रा, अपने गाँव बस्ता में एकता क्लब के ज़रिए शिक्षा और बाल अधिकारों के लिए काम करती हैं। सचिन कुजूर, एम.ए. हिस्ट्री के छात्र, जय हो एनजीओ से जुड़े रह चुके हैं और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ मंडार, एक पारंपरिक जनजातीय वाद्य, बजाने में माहिर हैं। प्रतीक, बी.कॉम स्नातक और एनएसएस वॉलंटियर, खेती करना पसंद करते हैं और परिवार का सहारा बनने के लिए बर्तन की दुकान में काम भी कर चुके हैं। वहीं रवि सिंह, बाइक मैकेनिक और साइकिलिंग के शौकीन, ने हाल ही में जशपुर का पहला देशदेखा क्लाइम्बिंग को. नामक एडवेंचर गाइडिंग कार्य बाकी प्रशिक्षित युवाओं के साथ शुरू किया है। टीम को जशपुर के जंगलों और आसपास की चट्टानों में कठोर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहाँ उन्हें कैंपिंग, ट्रैड क्लाइम्बिंग, रूट ओपनिंग, वाइल्डरनेस फर्स्ट एड और माउंटेन एथिक्स जैसी अहम तकनीकें सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण की कमान स्वप्निल शिरीष रचेलवार, अमेरिका से डेव गेट्स, रनर्सग्च से सागर दुबे, प्रसिद्ध भारतीय कोच प्रतीक निनवाने वर्तमान में यू मुम्बा कबड्डी टीम के प्रमुख फिटनेस कोच और काफी मीडिया से ईशान गुप्ता जैसे अनुभवी प्रशिक्षकों के हाथों में है। यह प्रशिक्षण केवल शारीरिक तैयारी नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी केंद्रित है। जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के इस अभियान को स्थानीय लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर समर्थन मिला है। विश्व की सबसे बड़ी पर्वतारोहण उपकरण निर्माता कंपनी पेटज़ल ने भारत में अपने साझेदार अलाइड सेफ्टी इक्विपमेंट के साथ मिलकर आधिकारिक उपकरण प्रायोजक की भूमिका निभाई है। अद्वेनोम एडवेंचर और जय जंगल ने पौष्टिक और ऑर्गेनिक भारतीय शैली के एडवेंचर फ़ूड उपलब्ध कराने का जिम्मा उठाया है। रनर्सग्च्, एक प्रतिष्ठित एथलीट कोचिंग ब्रांड, टीम की शारीरिक और मानसिक मजबूती पर काम कर रहा है। इसके साथ स्पेन की प्रसिद्ध बार्सिलोना क्लाइम्ब्स और मिस्टिक हिमालयन ट्रेल्स ने गाइडिंग और बेसकैंप गतिविधियों में सहयोग दिया है। इस अभियान का संचालन पहाड़ी बकरा एडवेंचर कर रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ का प्रमुख औद्योगिक समूह हिरा ग्रुप इस पहल से प्रेरित होकर आधिकारिक प्रायोजक बना है। रेकी ऑउटडोर्स ने टीम को आधिकारिक पर्वतीय परिधान मुहैया कराए हैं, जबकि रेडपांडा ऑउटडोर्स और गोल्डन बोल्डर्स ने उपकरण सपोर्ट दिया है। आदि कैलाश वेलनेस पार्टनर के रूप में टीम के स्वास्थ्य और रिकवरी में सहयोग कर रहा है। मुख्य प्रायोजकों के अलावा कुल मिलाकर 15 कंपनियों ने अपना सहयोग प्रदान कर इसे शुरुआत से ही एक सफल अभियान बना दिया है। जशपुर से निकले ये पाँच युवा अब हिमालय की मियार वैली की ऊँचाइयों को छूने के सपने के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ज्ञात रहे कि यह टीम 31 अगस्त को जशपुर से हिमाचल प्रदेश की ओर गंतव्य के लिए निकलेगी। एक महीने के इस अभियान पर जनजातीय युवक देश-विदेश के प्रसिद्ध माउंटेन क्लाइम्बर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लीडर के तौर पर प्रतिभाग करेंगे। यह पहल केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए एक प्रेरणा है। यह साबित कर रही है कि अवसर और सहयोग मिलने पर जंगलों और गाँवों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोही तैयार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान आने वाले समय में भारतीय हिमालयी पर्वतारोहण की दिशा बदल सकता है और अगली पीढ़ी के अल्पाइन क्लाइम्बर्स इन्हीं अप्रत्याशित इलाकों से निकल सकते हैं। यह केवल एक चढ़ाई नहीं, बल्कि बदलाव की चढ़ाई है।

छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ डॉ. हरविंदर मांकड़ की नई फिल्म ‘अर्पण’ का सफर, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को समर्पित,

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कुनकुरी (जशपुर, छत्तीसगढ़): 22/08/2025 कुनकुरी की धरती पर आयोजित एक अद्वितीय और यादगार संध्या ने पूरे जशपुर ज़िले के लिए एक ऐतिहासिक पल रच दिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखक, कार्टूनिस्ट और फिल्म निर्देशक डॉ. हरविंदर मांकड़ को जी.के. साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर द्वारा विशेष रूप से मुंबई से आमंत्रित किया गया।   आदिवासी नृत्य से हुआ स्वागत डॉ. मांकड़ के आगमन पर सबसे पहले केरसई गाँव की आदिवासी जनजाति ने परंपरागत कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। इस नृत्य में आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली। स्थानीय कलाकारों ने ढोल-नगाड़ों और लोकगीतों की थाप पर डॉ. मांकड़ का स्वागत कर कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया। आदिवासी समाज की कला और संस्कृति को इस अवसर पर विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया, जिसे देखकर सभी अतिथि भाव-विभोर हो उठे। इसके बाद महान कार्टूनिस्ट कुनकुरी जीके साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटी सेंटर पहुंचे जहां छत्तीसगढ़ और झारखंड से पहुंचे लोगों ने आत्मीय स्वागत किया।मुख्य अतिथि के रूप में श्री मांकड़ ने विशिष्ट अतिथियों दीपक बड़ा,रोशन किरो ,नितेश महतो के साथ दीप जलाकर अर्पण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। श्री मांकड़ ने ‘प्योर सोल चिल्ड्रेन’ कुमारी नीति के हाथों अपनी किताब Journey of Soul का विमोचन हुआ। इसके बाद डॉ. हरविंदर मांकड़ ने अपनी प्रेरणादायी मोटिवेशनल क्लास में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा – “बच्चे सभी ईश्वर की अनुपम देन हैं। इन्हें भरपूर प्यार दीजिए, ये किसी से कम नहीं हैं। बस इन्हें सही इलाज और अपनापन दीजिए, यही इनकी असली ताक़त बनेगी।” उनके शब्दों ने न केवल विशेष बच्चों के अभिभावकों के दिलों को छुआ, बल्कि हर उस व्यक्ति को नई सोच दी जो समाज सेवा और मानवता की राह पर चलना चाहता है। विशेष बच्चों के उपचार में मील का पत्थर मानी जाने वाली डॉ. ग्रेस कुजूर ने अपने विचार रखते हुए कहा –“डॉ. हरविंदर मांकड़ का कुनकुरी आना किसी करिश्मे से कम नहीं है। उनका यहां आना और हमें अपना कीमती समय देना, हमारे लिए सौभाग्य की बात है। वे जिस आत्मीयता से विशेष बच्चों से जुड़े, वह इस क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी है।” नई फिल्म “अर्पण” का निर्माण शुरू इस अवसर पर यह भी घोषणा की गई कि डॉ. हरविंदर मांकड़ कुनकुरी में ही डॉ. ग्रेस कुजूर पर एक डॉक्यूमेंट्री फिक्शन फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। इस फिल्म का नाम है – “अर्पण”। यह फिल्म छत्तीसगढ़ के पर्यावरण अभियानों को बढ़ावा देने और प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को समर्पित है। इस फिल्म को स्वयं डॉ. हरविंदर मांकड़ ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म के माध्यम से न केवल डॉ. ग्रेस कुजूर की अनूठी सेवाओं को दिखाया जाएगा, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया जाएगा कि प्रकृति और मानवता का संरक्षण साथ-साथ चलना चाहिए।   छत्तीसगढ़ की सुंदरता की सराहना की कार्यक्रम का संचालन  संतोष चौधरी ने किया। उन्होंने बताया कि डॉ. मांकड़ छत्तीसगढ़ की सुंदरता से गहराई तक प्रभावित हुए हैं। डॉ. मांकड़ के शब्दों में –“मैंने छत्तीसगढ़ से अधिक सुंदर जगह आज तक नहीं देखी। कुनकुरी की धरती सचमुच स्वर्ग के समान है। यहाँ की सादगी, अपनापन और प्राकृतिक सौंदर्य मन को छू लेने वाला है।” कुनकुरी के गणमान्य नागरिक और गायक अजय मूंदड़ा ने बताया कि यह ऐतिहासिक शाम न केवल विशेष बच्चों और उनके परिवारों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आई, बल्कि पूरे जशपुर ज़िले के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई। आदिवासी कला, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और मानवता की महक से सजी इस संध्या ने यह संदेश दिया कि सच्ची समृद्धि तभी संभव है जब हम समाज और प्रकृति दोनों को समानता और प्रेम के साथ आगे बढ़ने का अवसर दें। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने मोटू पतलू कॉमिक सीरीज लिखनेवाले लेखक और उन्हें उकेरनेवाले कार्टूनिस्ट डॉ हरविंदर को अपने संस्मरण बताए।

कुनकुरी खेल मैदान में ऐसे मनाया गया स्वतंत्रता दिवस,मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा गया, प्रभात फेरी और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने मोहा मन

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  कुनकुरी,16 अगस्त 2025 – स्वतंत्रता दिवस का पर्व इस वर्ष कुनकुरी में ऐतिहासिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। नगर के खेल मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी एवं समारोह की मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इस अवसर पर उनकी बड़ी बहन एवं जनपद पंचायत अध्यक्षा श्रीमती सुशीला साय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। ध्वजारोहण के बाद श्रीमती कौशल्या साय ने मंच से मुख्यमंत्री का जनता के नाम संदेश पढ़ा। इससे पूर्व नगर के सभी स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने प्रभात फेरी निकालकर शहर का भ्रमण किया। प्रभात फेरी का समापन जय स्तंभ चौक पर हुआ, जहां नगर पंचायत अध्यक्ष श्री विनयशील ने परंपरानुसार जय स्तंभ पर माल्यार्पण कर शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। जय स्तंभ उन वीर बलिदानियों की स्मृति का प्रतीक है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई।   प्रभात फेरी के बाद खेल मैदान में मुख्य समारोह आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमती कौशल्या साय, जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साय, नगर पंचायत अध्यक्ष श्री विनयशील सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बच्चों ने देशभक्ति से ओतप्रोत गीत, नृत्य और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन अरविंद मिश्रा ने किया। स्वतंत्रता दिवस समारोह में पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग से सराबोर रहा।

ग्राम पंचायत भंडरी में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, नशामुक्ति का लिया संकल्प

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कुनकुरी/भंडरी,16 अगस्त 2025 – ग्राम पंचायत भंडरी में 79वां स्वतंत्रता दिवस बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। पंचायत भवन प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत सरपंच श्री वाल्टर कुजूर और उपसरपंच श्रीमती कविता मिंज की अगुवाई में भारत माता की तस्वीर पर माल्यार्पण और ध्वजारोहण से हुई। इस अवसर पर वार्ड पंच, वरिष्ठजन, महिला-पुरुष सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। समारोह में सरपंच वाल्टर कुजूर ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत आज विभिन्न विचारधाराओं के बीच संघर्ष का सामना कर रहा है, लेकिन जब बात देश की एकता और अखंडता की आती है तो पूरा देश एकजुट होकर हर परिस्थिति का सामना करता है। उन्होंने हाल ही में कश्मीर में निर्दोष नागरिकों की हत्या और उसके बाद पाकिस्तान से हुए संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरा देश सरकार और भारतीय सेना के साथ खड़ा रहा। सरपंच ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों को नमन करते हुए उनकी कुर्बानियों को याद किया। उपसरपंच श्रीमती कविता मिंज ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन में महिला क्रांतिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भंडरी पंचायत के गांवों में बढ़ती शराबखोरी पर चिंता व्यक्त की और सभी ग्रामीणों को नशा छोड़ने तथा समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में शासन की योजनाओं और बिहान समूह की सराहना करते हुए महिलाओं से इनसे जुड़ने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। अंत में सभी ग्रामीणों ने मिलकर गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।

कौन थे संविधान निर्माण में मुस्लिम दूरदर्शी? मिलिए ऐसे समावेशी भारत के वास्तुकारों से

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लेखक:निर्मल कुमार भारतीय संविधान का निर्माण केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह विविध समुदायों के बीच एक नैतिक अनुबंध था, जो उपनिवेशवाद की साझा पीड़ा और एक संप्रभु, समावेशी राष्ट्र के साझा स्वप्न से जुड़ा था। ऐसे समय में जब उपमहाद्वीप विभाजन और एकता के चौराहे पर खड़ा था, कई मुस्लिम नेताओं ने सांप्रदायिक अलगाव के बजाय संवैधानिक लोकतंत्र का मार्ग चुना। संविधान सभा में बैठे इन दूरदर्शी लोगों ने धर्मनिरपेक्षता, न्याय और समान अधिकारों को प्रतिष्ठित करने वाले एक कानूनी ढाँचे को आकार देने में मदद की। निष्क्रिय भागीदार होने से कहीं आगे, वे एक आधुनिक, बहुलतावादी भारत के सक्रिय निर्माता थे। उनका योगदान हमें याद दिलाता है कि भारत की अवधारणा कभी किसी एक धर्म या विचारधारा से नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और एकता के लिए प्रतिबद्ध विचारों के एक गठबंधन से बनी थी। इन दूरदर्शी लोगों में सबसे प्रमुख थे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, जो एक विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे। संविधान सभा में उनकी उपस्थिति प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण दोनों थी। एक कट्टर मुसलमान और कट्टर राष्ट्रवादी, आज़ाद ने लंबे समय से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज किया था। अपने भाषणों में, उन्होंने दोहराया कि भारत का भाग्य धार्मिक अलगाव पर नहीं, बल्कि साझा इतिहास, पारस्परिक सम्मान और एक साझा भविष्य पर आधारित हो सकता है। आज़ाद की बौद्धिक गंभीरता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता ने संविधान के कई प्रमुख प्रावधानों को प्रभावित किया। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देने वाले अनुच्छेद 25 और शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन के अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले अनुच्छेद 30 का पुरजोर समर्थन किया। ये केवल संवैधानिक धाराओं से कहीं अधिक, विशेष रूप से उन मुसलमानों के लिए नैतिक आश्वासन थे जिन्होंने विभाजन के बाद भारत में रहने का विकल्प चुना था।आज़ाद ने भारत की शिक्षा नीति को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा मंत्री के रूप में, उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) की नींव रखी और सभी जातियों व समुदायों में वैज्ञानिक सोच और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनके लिए, किसी राष्ट्र की प्रगति केवल संवैधानिक आदर्शों पर नहीं, बल्कि प्रबुद्ध नागरिकों पर निर्भर करती है। उन्होंने एक बार कहा था, “दिल से दी गई शिक्षा समाज में क्रांति ला सकती है।” संविधान सभा में एक और महत्वपूर्ण मुस्लिम हस्ती बेगम ऐज़ाज़ रसूल थीं, जो इस ऐतिहासिक संस्था का हिस्सा बनने वाली एकमात्र मुस्लिम महिला थीं। उनकी उपस्थिति ने ही रूढ़िवादिता को चुनौती दी और एक गहरे पितृसत्तात्मक समाज में मौजूद बाधाओं को तोड़ा। बेगम रसूल लैंगिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की प्रबल समर्थक थीं। उनकी आवाज़ ने एक एकीकृत चुनाव प्रणाली बनाने के संकल्प को मज़बूत किया, जो आज भी भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रीढ़ बनी हुई है। असम के पूर्व प्रधानमंत्री सैयद मोहम्मद सादुल्लाह एक अन्य प्रमुख व्यक्ति थे जिनकी अंतर्दृष्टि ने संघीय और अल्पसंख्यक हितों के बीच संतुलन बनाने में मदद की। नागरिकता और अल्पसंख्यक सुरक्षा उपायों पर बहस में उनके हस्तक्षेप ने भारत के बहुलवादी स्वरूप की परिपक्व समझ को प्रतिबिंबित किया। उन्होंने कानूनी समानता और सामाजिक समरसता पर ज़ोर दिया, विशेषाधिकारों की नहीं, बल्कि ऐसे संरक्षण की वकालत की जिससे हर भारतीय, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, फल-फूल सके। ये मुस्लिम नेता अलग-थलग आवाज़ें नहीं थीं। वे मुस्लिम देशभक्ति के उस व्यापक परिवेश का हिस्सा थे जो इस विचार को खारिज करता था कि धर्म राष्ट्रीय निष्ठा का निर्धारण करे। आज़ादी से पहले और बाद के वर्षों में, जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे संगठनों और खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे व्यक्तियों (हालांकि संविधान सभा में नहीं) ने भारत की एकता और संवैधानिक मूल्यों का पुरज़ोर समर्थन किया। उनकी सामूहिक उपस्थिति सांप्रदायिक दुष्प्रचार का खंडन और भारत के लोकतांत्रिक भविष्य में विश्वास की पुनः पुष्टि थी। भारतीय संविधान के निर्माण पर विचार करते हुए, हमें उन मुस्लिम नेताओं को अवश्य याद करना चाहिए जो इसके निर्माण में अग्रणी भूमिका में रहे, किसी समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के दूरदर्शी के रूप में। उनकी विरासत केवल संविधान के पन्नों में ही नहीं, बल्कि उन अधिकारों और स्वतंत्रताओं में भी समाहित है जिनका हम आज आनंद लेते हैं। ये कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि आधुनिक भारत की नींव सभी धर्मों के लोगों के हाथों रखी गई थी। संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह उन पुरुषों और महिलाओं के साहस, दूरदर्शिता और देशभक्ति का प्रमाण है जिन्होंने विभाजन के बजाय एकता को चुना। और उस पवित्र सभा में, मुस्लिम आवाज़ हाशिये से नहीं, बल्कि भारत के हृदय से गूंजी।

स्वतंत्रता दिवस पर जीके साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटी सेंटर कुनकुरी में भव्य आयोजन

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मुख्य अतिथि संतोष चौधरी और विशिष्ट अतिथि अजय मूंदड़ा ने फहराया तिरंगा, डॉ. ग्रेस ने दिया समाज को सजग रहने का संदेश कुनकुरी,16अगस्त 2025 – जीके साइकोथेरेपी एंड रिहैबिलिटी सेंटर कुनकुरी में 79वां स्वतंत्रता दिवस बड़ी धूमधाम और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सेंटर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें इलाजरत बच्चे, उनके अभिभावक और नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।   अतिथियों ने की भारत माता की पूजा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संतोष चौधरी और विशिष्ट अतिथि अजय मूंदड़ा ने सेंटर की बालिका नीति के साथ भारत माता की पूजा की और ध्वजारोहण कर राष्ट्रगान गाया गया। संस्था की डायरेक्टर डॉ. ग्रेस कुजूर ने सभी आगंतुकों का स्वागत परंपरागत तरीके से आजादी का टीका और बैज लगाकर किया।   आजादी के बदलते मायने बताए मुख्य अतिथि संतोष चौधरी ने स्वतंत्रता संग्राम के किस्से सुनाते हुए वर्तमान समय में आजादी के बदलते मायनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल शासन से मुक्ति का नाम नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के निर्वहन का भी दायित्व है। विशिष्ट अतिथि अजय मूंदड़ा ने कहा कि भारत की एकता और अखंडता बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।   मानसिक स्वास्थ्य और नशाखोरी पर चिंता कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था की डायरेक्टर डॉ. ग्रेस कुजूर ने कहा कि आजादी के बाद से सरकारों ने लगातार विकास कार्य किए हैं, लेकिन बढ़ते बोझ और घटते जल-जंगल-जमीन ने इंसानों के जीवन को प्रभावित किया है। परिवारों में मुखिया बच्चों की मानसिक स्थिति और व्यवहार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे, जिसके कारण मानसिक रोग बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में फैलती नशाखोरी युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों के जीवन को भी खोखला कर रही है, जो समाज को कमजोर बना रही है। इस पर घर-परिवार और गांव-समाज में चर्चा करने की आदत डालनी होगी।   देशभक्ति गीत से गूंजा परिसर   अपने उद्बोधन के अंत में डॉ. ग्रेस ने “प्यारा हिंदुस्तान, मेरा प्यारा हिंदुस्तान” गीत प्रस्तुत किया, जिसने पूरे परिसर को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, परेड की सलामी ली और पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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जशपुरनगर, 15 अगस्त 2025/ राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आजादी का तिरंगा फहराया और उनके गृहजिले में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने तिरंगा फहराया। जिला मुख्यालय जशपुर में 79वां स्वतंत्रता दिवस समारोह देशभक्ति और हर्षोल्लास के साथ रणजीता स्टेडियम में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली और मुख्यमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संदेश वाचन किया। उन्होंने कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों के साथ परेड का निरीक्षण किया तथा शांति के प्रतीक रंगीन गुब्बारे उड़ाए। समारोह में 13 प्लाटूनों ने हिस्सा लिया, जिसका नेतृत्व मुख्य परेड कमांडर अमरजीत खूंटे ने किया। मंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के परिजनों से भेंट कर उन्हें शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने बैंड, सामूहिक व्यायाम और देशभक्ति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 152 अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सर्किट हाउस प्रांगण में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान अंतर्गत पौधारोपण भी किया गया। मंत्री ने सिंदूरी, विधायक रायमुनी भगत ने सीता अशोक, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने गुलमोहर,नगर पंचायत अध्यक्ष अरविंद भगत ने नागकेशरी का पौधा लगाया। सभी ने इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, स्कूली बच्चे और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। संचालन डी. आर. राठिया एवं जयेश सौरभ टोपनो ने किया।