कुनकुरी में जय स्तंभ पर माल्यार्पण: नपं अध्यक्ष विनयशील ने दी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं,बीते चार महीने की विकास उपलब्धियों और योजनाओं की जानकारी साझा की

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कुनकुरी, 15 अगस्त 2025/ आजादी के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कुनकुरी नगरपंचायत अध्यक्ष विनयशील ने जय स्तंभ चौक पर माल्यार्पण कर नगरवासियों को संबोधित किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने बीते चार महीने में नगर के लिए किए गए कार्यों और विभिन्न विकास योजनाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर नगर के गणमान्य नागरिकों में मुरारी लाल अग्रवाल, कैलाश नाथ गुप्ता, खालिद सिद्धकी, सुखदेव साय, दिलीप जैन, एस इलियास, दीपक मिश्रा, विनीत जिंदल, बृजलाल राणा, सुनील अग्रवाल, मयूर गर्ग, नीरज पारीक, संतोष सहाय, गजानन गुप्ता, राजकुमार सिंह, उपेंद्र यादव, नायक मिश्रा, राजकुमार गुप्ता, रामदेव कायता, विवेक बजाज, जयंत लकड़ा उपस्थित रहे। नगर पंचायत के उपाध्यक्ष दीपक केरकेट्टा, पार्षदगण मुक्ति मिंज, नील कुजूर, रुकसाना बानो, अजीत किस्पोट्टा, मुकेश नायक, राजेश ताम्रकार, रोहित सिंह, शीतल बजाज, अनीता गुप्ता, सावित्री चौहान सहित नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सूदबल यादव और अजेम टोप्पो भी शामिल हुए। कार्यक्रम में कुनकुरी के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं और प्राचार्य, साथ ही प्रशासन की ओर से SDM नंद पांडेय, तहसीलदार प्रमोद पटेल, जनपद CEO प्रमोद सिंह और CMO राजेन्द्र पात्रे उपस्थित रहे।

हॉलीक्रॉस हायर सेकंडरी स्कूल, घोलेंग में भव्य परेड और ध्वजारोहण के साथ मना 79वां स्वतंत्रता दिवस

स्कूल बैंड की धुनों संग मुख्य अतिथि का स्वागत, परेड निरीक्षण कर दी शुभकामनाएं जशपुर, 15 अगस्त 2025/ आजादी के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हॉलीक्रॉस हायर सेकंडरी स्कूल, घोलेंग में राष्ट्रभक्ति और उत्साह से भरा भव्य समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेविका श्रीमती अन्ना मिंज का विद्यालय बैंड दल ने मधुर धुनों के साथ परेड ग्राउंड से मंच तक स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने परेड का निरीक्षण कर छात्र-छात्राओं के अनुशासन और जोश की सराहना की। तत्पश्चात उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का विधिवत एवं ससम्मान ध्वजारोहण किया। अपने सारगर्भित उद्बोधन में श्रीमती मिंज ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को नमन करते हुए देश-प्रदेश के नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति गीत और कविताएं सभी को भावविभोर कर गईं। समारोह में विद्यालय परिवार, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

स्वर्गीय एडविन बेकमैन : सादगी, अनुशासन और सेवा का प्रेरणास्पद जीवन

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कुनकुरी 07 अगस्त 2025 – छत्तीसगढ़ एंग्लो-इंडियन समुदाय के वरिष्ठ सदस्य, सरलता और अनुशासन के प्रतीक स्वर्गीय एडविन बेकमैन अब हमारे बीच नहीं रहे। 02 अगस्त 2025 को प्रातः 10:16 बजे उन्होंने रांची स्थित ऑर्किड मेडिकल सेंटर में अंतिम सांस ली। वे 93 वर्ष के थे। स्व. बेकमैन, छत्तीसगढ़ राज्य में भाजपा के प्रथम शासनकाल के दौरान एंग्लो-इंडियन समुदाय से मनोनीत विधायक सुश्री रोजलिन बेकमैन के पूज्य पिताजी थे। उनका जन्म 24 अगस्त 1932 को झारखंड राज्य के लोहरदगा ज़िले में माता स्व. बिन्थसबा और पिता स्व. जे.पी.एस. बेकमैन के परिवार में हुआ था। नौ भाई-बहनों में वे छठे स्थान पर थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नदिया हाई स्कूल, लोहरदगा में हुई। स्व. एडविन बेकमैन अपने जीवन में अत्यंत सादगीप्रिय, समय के पाबंद और अनुशासन में विश्वास रखने वाले व्यक्ति के रूप में पहचाने जाते थे। वे मिलनसार, सहृदय और सबके प्रिय थे। उनका विवाह 11 फरवरी 1957 को स्व. रेजिना बेकमैन से हुआ। दोनों ने मिलकर कुनकुरी खेल मैदान में एक आदर्श परिवार की नींव रखी। बीते 19 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची के ऑर्किड मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ 14 दिनों के इलाज के बाद, अपनी दोनों बेटियों – सुश्री रोजलिन बेकमैन और रोज़ बेकमैन – के सामने वे शांतचित्त विदा हो गए। उनका अंतिम संस्कार 4 अगस्त को कुनकुरी के आज़ाद मोहल्ला स्थित ईसाई कब्रिस्तान में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस अवसर पर परिवार, रिश्तेदारों और बड़ी संख्या में परिचितों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वर्गीय एडविन बेकमैन अपने पीछे तीन पुत्र, पांच पुत्रियाँ, तीन पोतियाँ और चार पोते का भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका जीवन हम सभी के लिए सादगी, सेवा और संयम की प्रेरणा है। उनका जाना परिवार और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। ख़बर जनपक्ष परिवार इस दुख की घड़ी में बेकमैन परिवार के साथ है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

*बीते दस दिनों से चोरी हुआ 14 चक्का ट्रक जशपुर के बालाछापर में मिला* *डीजल खत्म होने पर चोर ट्रक को वहीं छोड़कर भाग निकले*

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जशपुर,04 अगस्त 2025 – जशपुर जिले से बड़ी खबर है, बीते दस दिन पहले बलौदाबाजार से चोरी हुआ 14 चक्का ट्रक आखिरकार जशपुर जिले के बालाछापर में मिला। मिली जानकारी के अनुसार ट्रक को चोर काफी दूर तक ले आए थे, लेकिन डीजल खत्म हो जाने पर उसे सड़क किनारे छोड़कर वहां से भाग निकले। ड्राईवर संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन के द्वारा लगातार प्रयास और निगरानी के चलते ट्रक का लोकेशन पता चला, जिसकी सूचना तत्काल जशपुर पुलिस को दी गई। वहीं पुलिस की मौजूदगी में ट्रक में डीजल डलवाकर वाहन को सुरक्षित जशपुर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। वहीं छत्तीसगढ़ ड्राईवर महासंगठन ने इस कार्य में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया है तथा भविष्य में भी वाहन चोरी की घटनाओं के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

बड़ी खबर: बच्चे चप्पल पहनकर स्कूल आए तो प्रिंसिपल ने कहा – भागो यहां से,अभिभावकों में रोष,लोयोला हाईस्कूल का मामला

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रिपोर्ट – संतोष चौधरी जशपुर/कुनकुरी, 2 अगस्त – एक तरफ सरकार हर बच्चे को शिक्षा दिलाने की कोशिश में करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विधानसभा से ही ऐसी तस्वीर सामने आई है जो न केवल अमानवीय है बल्कि “शिक्षा का अधिकार कानून” (RTE Act, 2009) की खुलेआम अवहेलना है। दरअसल, जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित प्रतिष्ठित लोयोला हायर सेकेंडरी स्कूल, जहां से खुद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पढ़ाई की है, वहां शनिवार को कुछ छात्रों को सिर्फ इसलिए स्कूल से बाहर निकाल दिया गया क्योंकि वे बारिश में भीगने के कारण जूते नहीं पहन सके और चप्पल पहनकर आ गए थे। बताया गया कि शुक्रवार को स्कूल से लौटते समय बारिश के चलते कई बच्चों के जूते भीग गए। शनिवार को जब वे सूखे नहीं तो मजबूरी में बच्चों ने चप्पल पहनकर स्कूल आना उचित समझा, पर प्रिंसिपल फादर सुशील टोप्पो ने इसे “अनुशासनहीनता” मानते हुए बच्चों को स्कूल परिसर से बाहर निकाल दिया। छात्र हर्ष राम (कक्षा 9वीं) का कहना है – “हमने पहले भी देखा है कि पुराने प्रिंसिपल हमारी परिस्थितियों को समझते थे, लेकिन नए प्रिंसिपल बहुत सख्त हैं। आज हम लोग को बिना पढ़ाई के घर भेज दिए।बहुत खराब लग रहा है।” वहीं अभिभावक विष्णु राम और श्रवण यादव ने इसे बच्चों के शिक्षा के अधिकार का हनन बताया और जिला प्रशासन से मामले में कठोर कार्रवाई की मांग की है। क्या कहता है कानून? “शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009” (Right to Education Act) के तहत कोई भी स्कूल 6 से 14 वर्ष की आयु के किसी भी बच्चे को इस तरह शिक्षा से वंचित नहीं कर सकता। यूनिफॉर्म संबंधी नियमों के पालन में लचीलापन आवश्यक है, विशेषकर जब मामला गरीब परिवारों या प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ा हो। प्रिंसिपल ने रखा अपना पक्ष इस घटना के बारे में जब हमने लोयोला हाईस्कूल हिंदी मीडियम के प्रिंसिपल फादर सुशील तिग्गा से बात की तो उन्होंने यह स्वीकार किया कि बिना जूता पहने स्कूल आने वाले छात्रों को बिना आवेदन के क्लास में बैठने नहीं दिया जाता।सुशील ने बताया कि हमने बच्चों को जुलाई तक रियायत दी थी।आज तीन छात्र मेरे पास आए थे,उन्होंने बारिश में जूता भींगने की बात बताई थी तो मैने उन्हें आवेदन देने को कहा था लेकिन उन्होंने आवेदन नहीं दिया और स्कूल से बाहर चले गए। प्रशासन से अपील इस मामले की जानकारी मिलने पर कई अभिभावकों ने कहा – “यह मामला न सिर्फ संवेदनशील है, बल्कि कानूनन भी गलत है। ज़रूरत है कि जिला शिक्षा अधिकारी, बाल संरक्षण आयोग और प्रशासन इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराए और बच्चों को पुनः शिक्षा से जोड़ा जाए। साथ ही स्कूल प्रशासन को निर्देशित किया जाए कि बच्चों की समस्याओं को मानवीय दृष्टिकोण से समझें।”

*कांवड़ यात्रा:* *एक पवित्र यात्रा जो सम्मान और सहिष्णुता की हकदार है*

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निर्मल कुमार भारत के सर्वाधिक पूजनीय तीर्थयात्रा में से एक, कांवड़ यात्रा, देश भर के करोड़ों शिव भक्तों द्वारा की जाने वाली एक वार्षिक आध्यात्मिक यात्रा है। श्रावण के पवित्र महीने में, कांवड़िये कहे जाने वाले ये तीर्थयात्री, नंगे पैर और अक्सर कठोर मौसम में, सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर गंगा से पवित्र जल इकट्ठा करते हैं और उसे उत्तर भारत के मंदिरों में भगवान शिव को अर्पित करते हैं। यह सदियों पुरानी परंपरा ईश्वर के प्रति गहरी व्यक्तिगत आस्था, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। फिर भी, हाल के वर्षों में, जिसे भारतीय आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक एकता के एक जीवंत उदाहरण के रूप में मनाया जाना चाहिए, उसे कभी-कभी गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और अनुचित रूप से निशाना बनाया गया है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि कांवड़ यात्रा कोई खतरा नहीं है, यह एक शांतिपूर्ण, धार्मिक परंपरा है जो सभी समुदायों के सम्मान और समर्थन की हकदार है। हमारे जैसे विविध राष्ट्र में, धार्मिक सहिष्णुता एक विकल्प नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है और इस पवित्र समय में, समाज के सभी वर्गों को शांति, धैर्य और आपसी समझ सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।   कांवड़िये कोई राजनीतिक एजेंट या उपद्रवी नहीं हैं, वे आम नागरिक हैं, जिनमें छात्र, मजदूर, किसान, पेशेवर और यहाँ तक कि पूरा परिवार भी शामिल है, जो अपने जीवन से आध्यात्मिक पथ पर चलने के लिए समय निकालते हैं। वे अपने आराध्य के प्रति प्रेम के कारण कष्ट और थकान सहन करते हैं। इस प्रकार की भक्ति आधुनिक समय में विरले ही देखने को मिलती है और इसकी प्रशंसा की जानी चाहिए, आलोचना नहीं। दुर्भाग्य से, कुछ उपद्रवी व्यक्तियों से जुड़ी छिटपुट घटनाओं को अक्सर मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रमुखता से दिखाया जाता है, जिससे अधिकांश लोगों की भक्ति दब जाती है। यह कहानी अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जाती है कि यह यात्रा सार्वजनिक जीवन को बाधित करती है या सांप्रदायिक तनाव पैदा करती है। सच तो यह है कि ज़्यादातर कांवड़िये अनुशासन का पालन करते हैं, झगड़ों से बचते हैं और प्रार्थना करते हुए चुपचाप चलते हैं।   यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि यात्रा के दौरान, सरकारी अधिकारी यातायात, सफ़ाई और सुरक्षा प्रबंधन के लिए गंभीर प्रयास करते हैं। स्वयंसेवक और गैर-सरकारी संगठन, जिनमें अन्य धार्मिक समुदाय भी शामिल हैं, अक्सर अपनी सेवाएँ प्रदान करते हैं।पानी, भोजन या प्राथमिक उपचार वितरित करके सहायता प्रदान करना। यह भारत की परस्पर सम्मान की गहरी जड़ें जमाए हुए संस्कृति की कहानी कहता है। हालाँकि, कुछ मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में, कांवड़ यात्रा को संदेह या असहजता की दृष्टि से देखा जाता है, जिससे अनावश्यक तनाव पैदा होता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और यात्रा की भावना के साथ घोर अन्याय है। जिस प्रकार अन्य समुदाय अपने त्योहारों और धार्मिक प्रथाओं के सम्मान की अपेक्षा करते हैं, उसी प्रकार कांवड़ियों को भी इसी तरह के सम्मान की आवश्यकता है।   भारत विविध धर्मों का देश है, लेकिन इसके मूल में एक साझा मूल्य निहित है: शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व। कोई भी धार्मिक समुदाय तब तक फल-फूल नहीं सकता जब तक वह दूसरे की आस्था की अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश न करे। सहिष्णुता चयनात्मक नहीं होनी चाहिए। अगर रमज़ान के दौरान लाउडस्पीकर या क्रिसमस के दौरान ईसाई जुलूस स्वीकार्य हो सकते हैं, तो निश्चित रूप से सार्वजनिक सड़कों पर शांतिपूर्वक और क़ानूनी ढंग से आयोजित हिंदू भक्ति के कुछ दिनों का भी स्वागत किया जाना चाहिए। यह प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं है; यह करुणा का विषय है। धार्मिक सहिष्णुता का अर्थ है दूसरों की भक्ति का सम्मान करना, भले ही वह आपकी अपनी न हो। आख़िरकार, शिव, जिनकी कांवड़िये सेवा करते हैं, उन्हें “भोलेनाथ” भी कहा जाता है, यानी वे भोले भगवान जो बिना किसी भेदभाव के सभी को गले लगाते हैं।   हाँ, सभी तीर्थयात्रियों को कानून का पालन करना चाहिए और उकसावे से बचना चाहिए, लेकिन बाकी सभी को भी ऐसा ही करना चाहिए। स्थानीय समुदायों, नागरिक समाज और मीडिया का भी यह समान कर्तव्य है कि वे ज़िम्मेदारी से काम करें और छोटी-छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से बचें। विभाजन को बढ़ावा देने के बजाय, उन्हें आपसी सम्मान और सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए। भारत की आत्मा उन त्योहारों में निहित है जहाँ हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई पड़ोसी एक-दूसरे का हाथ थामकर एक-दूसरे का साथ देते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान भी यही क्रम जारी रहे।   कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, यह भक्ति, एकता और दृढ़ता का जीवंत उदाहरण है। ऐसे समय में जब दुनिया आस्था और पहचान के आधार पर विभाजित होती जा रही है, यह तीर्थयात्रा हमें विश्वास और सहनशीलता की शक्ति का स्मरण कराती है। आइए, कुछ घटनाओं या राजनीतिक उद्देश्यों को इसकी पवित्रता को धूमिल न करने दें। अन्य समुदायों के हमारे भाइयों और बहनों से, यह एक विनम्र अपील है: इस पवित्र यात्रा के दौरान अपने कांवड़िये पड़ोसियों के साथ खड़े रहें। धैर्य रखें, सम्मान करें और दयालु बनें। उनकी भक्ति आपकी भक्ति को कम नहीं करती; उनकी आस्था आपकी आस्था को खतरे में नहीं डालती। जिस प्रकार आप अपने धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शांति और सम्मान चाहते हैं, उसी प्रकार दूसरों को भी प्रदान करें। भारत तभी मजबूत रह सकता है जब उसके लोग केवल सड़कों और यात्राओं पर ही नहीं, बल्कि दिलों ओ दिमाग से भी एक साथ चलें। (नोट:लेखक निर्मल कुमार आर्थिक,सामाजिक और धार्मिक मुद्दों के जानकार हैं और यह उनके निजी विचार हैं।)

बिलासपुर गांव में दबंगई: धार्मिक-सामाजिक अशांति फैलाने और सीसी रोड पर कब्जा कर मकान निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने पट्टा निरस्तीकरण की उठाई मांग

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जशपुर/कुनकुरी, 24 जुलाई 2025/ कुनकुरी विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत रेंगारघाट के आश्रित ग्राम बिलासपुर में झूलन राम चौहान पिता स्व. गुरबारु राम द्वारा किए जा रहे मकान निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि झूलन राम न केवल सीमेंट-कांक्रीट (सीसी) सड़क से सटाकर मकान बना रहा है, बल्कि गांव में धार्मिक और सामाजिक अशांति भी फैला रहा है। ग्रामीणों ने 8 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगीचा में आवेदन प्रस्तुत कर शासन से मांग की है कि झूलन राम को प्रदाय किया गया आवासीय पट्टा शासन के नियमों के विरुद्ध है और इसे तत्काल निरस्त किया जाए। मुख्यमंत्री को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों ने जो बिंदु प्रस्तुत किए, वे इस प्रकार हैं— झूलन राम को दिया गया पट्टा गलत तरीके से जारी हुआ है। वह जिस वार्ड का निवासी है, वह प्लॉट उस क्षेत्र में नहीं आता। मकान निर्माण सीसी रोड से बिल्कुल सटा हुआ है और दूसरी ओर सड़क किनारे बोर खनन भी किया गया है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाई हो रही है। वहीं गांव में धार्मिक-सामाजिक वातावरण को बिगाड़ने की नियत से लगातार दबाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न की जा रही है। ग्राम पंचायत व तहसील स्तर पर शिकायतों के बावजूद झूलन राम किसी भी निर्णय का पालन नहीं कर रहा है। उसके पास पहले से ही ग्राम बिलासपुर में 2.1920 हेक्टेयर और मकरिबन्धा (दुलदुला) में 1.7200 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। वह हर साल 73 क्विंटल से अधिक धान का उत्पादन कर मंडी में बिक्री करता है। वर्ष 2024-25 में उसने 72 क्विंटल मोटा धान बेचकर सरकार से ₹1,55,892.50 की राशि प्राप्त की है, जो प्रमाण सहित है। टीप स्वरूप तीन और गंभीर आरोप लगाए गए हैं— 1. झूलन राम ने ईब नदी से लगी हुई लगभग 3 एकड़ भूमि पर भी अवैध कब्जा कर रखा है। 2. गांव के स्थायी निवासी और पुलिस विभाग में आरक्षक के पद पर पदस्थ संतोष भगत पर झूठा आरोप लगाया गया है कि वह गांव वालों को भड़का रहा है, जबकि गांव वाले इसके साक्षी हैं कि यह आरोप निराधार है। 3. तहसील और पंचायत स्तर से प्राप्त आवेदन की प्रतिलिपि भी सलग्न की गई है। *आवेदन के बाद की स्थिति:* 8 जुलाई 2025 को यह आवेदन सीएम कैंप बगिया में दिया गया। इस आवेदन पर तहसीलदार स्तर पर जांच हुई है, जिससे डरकर झूलन राम अब सड़क के ऊपर बनाए छज्जे को तोड़ा है, लेकिन सड़क से मकान नहीं हटाया है। ग्रामीणों ने इस बात का प्रमाण खबर जनपक्ष को देते हुए बताया कि खरीफ वर्ष 2024-25 में झूलन ने 72 क्विंटल मोटा धान बेचकर सरकार से ₹1,55,892.50 प्राप्त किया है। ऐसे में उसे भूमिहीन कैसे माना जाए? अब ग्रामीणों ने झूलन की करतूतों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि शासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए तत्काल उक्त विवादित पट्टा को निरस्त करे ताकि ग्राम का सामाजिक सौहार्द बना रह सके। राजनीतिक संदर्भ में भी मामला संवेदनशील उल्लेखनीय है कि यह वही ग्राम बिलासपुर है, जो कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में आता है और जहां वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बंपर वोट मिला था।भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं में यह चिंता है कि यदि शासन को गुमराह कर बड़े किसान को लाभ पहुंचाने वाले इस पट्टे को निरस्त नहीं किया गया, तो इसका सीधा नुकसान पार्टी को आगामी चुनाव में हो सकता है।

बड़ी खबर:रानी दरहा वाटरफॉल बना फिर हादसे का गवाह, तीन युवक बहे – एक की मौत, एक को बचाया गया, तीसरे की तलाश जारी

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छत्तीसगढ़ के एक प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थल रानी दरहा जलप्रपात में रविवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। पिकनिक मनाने पहुंचे तीन युवक पानी के तेज बहाव में बह गए। हादसे के बाद मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीम तुरंत पहुंची। एक युवक को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि एक अन्य की मौत हो चुकी है। तीसरे युवक की तलाश अब भी जारी है।   मृतक की पहचान नरेंद्र पाल सिंह छाबड़ा, पिता अवतार सिंह, निवासी मुंगेली के रूप में हुई है। पुलिस ने मृतक का शव बरामद कर लिया है। फिलहाल राहत व बचाव कार्य जारी है और प्रशासन मौके पर पूरी निगरानी बनाए हुए है।   गौरतलब है कि यह हादसा कवर्धा जिले के बोडला ब्लॉक स्थित रानी दरहा जलप्रपात में हुआ है, जहां पूर्व में भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। स्थानीय लोग लगातार यहां सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। इस दुखद घटना की पुष्टि एडिशनल एसपी ने भी की है।  

💥 मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति पर बम्हनी में भारी पड़ता भ्रष्टाचार, ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग 💥

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जशपुर/दुलदुला,13 जुलाई 2025 –  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ की नीति को उनके ही अधिकारी और पार्टी कार्यकर्ता दुलदुला क्षेत्र में चुनौती दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बम्हनी पंचायत में सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के अंतर्गत शंकर घर से महादेव चट्टान तक करीब 5 लाख 20 हजार रुपए की लागत से बनी सीसी रोड की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सड़क पंचायत के एक कथित “ठेकेदार” ने बनाई है, जो पहले कांग्रेस शासनकाल में विधायक यूडी मिंज का करीबी था और अब बीजेपी सरकार में पाला बदलकर नए विधायक और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के इर्द-गिर्द सक्रिय हो गया है। हैरानी की बात यह है कि सरकार बदलती है, लेकिन इंजीनियर नहीं बदलते — जो तब भी काम देख रहा था और आज भी वही जिम्मेदार अधिकारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बने महज दो महीने हुए हैं और गिट्टी सीमेंट छोड़ने लगी है, बालू बहने लगा है। न तो निर्माण से पहले जमीन की ठीक से तैयारी की गई, और न ही निर्माण के दौरान वाइब्रेटर जैसी आवश्यक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसका नतीजा – बारिश में सड़क की परतें उधड़ने लगी हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि दुलदुला विकासखंड में सीसी रोड निर्माण के नाम पर ठेकेदारों और तकनीकी अधिकारियों की मिलीभगत से साइड में मोटी परत और बीच में कमज़ोर सामग्री डालकर लाखों का घोटाला किया जा रहा है। इन रोडों की हालत देखकर “विकास की रफ्तार को राफेल से जोड़ना” ग्रामीणों की नजर में व्यंग्य बन गया है।   जब इस मामले में सरपंच से बात की गई, तो उन्होंने खुद को “टेक्निकल नहीं हूँ” कहकर पल्ला झाड़ लिया। यह जवाब अपने आप में ग्रामीण व्यवस्था की एक बड़ी विडंबना को उजागर करता है। ग्रामीणों की मांग: 1. सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच। 2. महादेव चट्टान के पास तत्काल पुलिया निर्माण, जिसे बारिश से ठीक पहले जेसीबी लगाकर खोद दिया गया है, जिससे आने-जाने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने पवित्र सावन मास में भगवान शिव के मार्ग पर भ्रष्टाचार की परतें बिछाने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री से स्वयं संज्ञान लेने की अपील की है।

परीक्षा अवधि पूर्ण होने पर सहायक शिक्षकों ने सौंपा सामूहिक निवेदन पत्र, जिला शिक्षा अधिकारी ने दिया शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन

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🟢 खबर जनपक्ष। शिक्षा संवाद | 23 जून 2025 🟢 📍 जशपुर, छत्तीसगढ़ जशपुर जिले में वर्ष 2022 की सीधी भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त सहायक शिक्षकों ने सोमवार को परीक्षा अवधि समाप्ति एवं सेवा नियमितीकरण की मांग को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी श्री पी.के. भटनागर को औपचारिक निवेदन पत्र सौंपा। शिक्षकों ने बताया कि 20 जून 2025 को उनकी तीन वर्ष की निर्धारित परीक्षा अवधि पूर्ण हो चुकी है, ऐसे में नियमानुसार उन्हें नियमित सेवा में शामिल किया जाए। ✅ शिक्षकों ने रखी यह प्रमुख मांगें: परीक्षा अवधि समाप्ति की औपचारिक कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए। नियमितीकरण आदेश जारी कर भविष्य की सेवाओं को स्थायित्व प्रदान किया जाए। सेवा लाभ और शासकीय योजनाओं में पात्रता सुनिश्चित की जाए। 👥 ये शिक्षक रहे उपस्थित: देवकी प्रधान, मुकेश कुमार, विजय पैंकरा, अंजना यादव, मधु पैंकरा, अनुपमा कुजूर, बांग्ला रात्रे समेत अन्य कई शिक्षक प्रतिनिधि इस मौके पर उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों तक नियमों के पालन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करने के बाद अब वे नियमित आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। — 🗣️ शिक्षकों का बयान: देवकी प्रधान: “तीन वर्षों की सेवा में हमने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हर संभव प्रयास किए हैं, अब नियमितीकरण की प्रक्रिया समय पर होनी चाहिए।” मधु पैंकरा: “परीक्षा अवधि समाप्ति का आदेश मिलने से शिक्षक समुदाय का मनोबल बढ़ेगा और सेवा के प्रति समर्पण और गहराएगा।” मुकेश कुमार: “हमने कर्तव्यपरायणता से कार्य किया है, प्रशासन से उम्मीद है कि जल्द आदेश जारी होंगे।” — 📌 जिला शिक्षा अधिकारी की प्रतिक्रिया: जिला शिक्षा अधिकारी श्री पी.के. भटनागर ने शिक्षकों की मांग को न्यायोचित और नियमसम्मत बताया। उन्होंने कहा— “यह रूटीन प्रक्रिया है, शिक्षकों की तीन वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण हो चुकी है। हम शीघ्र आवश्यक कार्रवाई कर आदेश जारी करेंगे।” — 📢 प्रक्रिया का महत्व: परीक्षा अवधि समाप्ति के आदेश से शिक्षकों की सेवा पुस्तिका में नियमितता दर्ज होती है। उन्हें शासकीय योजनाओं और लाभों का पात्र माना जाता है। भविष्य की स्थिरता और पदोन्नति जैसे विषयों पर यह आदेश निर्णायक भूमिका निभाता है। — 📍जशपुर के सहायक शिक्षकों का यह सामूहिक प्रयास उनके अधिकारों के प्रति सजगता और एकजुटता को दर्शाता है। अब सभी की निगाहें जिला शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि नियमितीकरण की दिशा में अगला कदम कब उठाया जाता है। 👉 शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समयबद्ध कार्रवाई और शिक्षकों के मनोबल के लिए यह निर्णय अत्यंत आवश्यक है। — इस तरह की शैक्षणिक खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ 📸 फोटो सौजन्य: शिक्षक प्रतिनिधिमंडल