तलाक-ए-हसन शरीअत की नज़र से : न्याय, जवाबदेही और नैतिक सुधार

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तलाक-ए-हसन शरीअत की नज़र से : न्याय, जवाबदेही और नैतिक सुधार निर्मल कुमार भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 26 नवम्बर 2025 को मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत तलाक-ए-हसन की प्रथा की संवैधानिकता और सामाजिक प्रभावों का गहन परीक्षण करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया । यह वह क्षण था जब देश ने एक बार फिर देखा कि कैसे अदालतें परंपरा, शरीअत और आधुनिक कानून के संगम पर खड़ी होकर समकालीन समाज के लिए संतुलित रास्ता तलाशती हैं। तलाक-ए-हसन, इस्लामी न्यायविदों के अनुसार, ऐसा तलाक है जिसमें एक निश्चित प्रतीक्षा अवधि और पुनर्मिलन का अवसर निहित रहता है। इसमें पति और पत्नी को अपने वैवाहिक संबंध पर पुनर्विचार करने का समय दिया जाता है। पहली तथा दूसरी बार उच्चारण के बाद विवाह अभी भी पुनर्स्थापित किया जा सकता है, परन्तु तीसरे उच्चारण के बाद यह तलाक अंतिम और अपरिवर्तनीय हो जाता है । इसे तलाक-ए-बिद्दत की तुलना में अधिक विचारशील, मर्यादित और गरिमापूर्ण प्रक्रिया माना गया है, क्योंकि इसमें दम्पत्ति को समय और सम्भावना दी जाती है। आज के डिजिटल समाज में, जब रिश्ते तेजी से बनते और बिखरते हैं, यह मॉडल न्यायपालिका के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि व्यक्तिगत कानून केवल धार्मिक आज्ञा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना के आधार पर भी समझे जाने चाहिए। अदालत ने स्पष्ट रूप से यह दर्शाया कि धार्मिक ढाँचे के भीतर भी शालीनता, सुनवाई और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोपरि रहनी चाहिए। न्यायालय का हस्तक्षेप : प्रक्रिया की त्रुटियाँ और पीड़ित पक्ष की असुरक्षा सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-हसन के मामले में हस्तक्षेप इस दृष्टि से भी आवश्यक पाया कि कई मामलों में प्रक्रिया की विसंगतियाँ पीड़ित पक्ष, विशेषतः महिलाओं, को न्याय के लिए उच्चतम अदालत तक जाने को बाध्य कर देती हैं । अदालत का कक्ष एक ऐसे मंच में बदल जाता है जहाँ पुरुष-प्रधान निर्णय-प्रक्रिया उजागर होती है और महिलाओं की आवाज़ अक्सर पीछे छूट जाती है। मुख्य याचिका में अदालत ने उस पति से कठोर प्रश्न किए जिसने बिना हस्ताक्षर वाले नोटिस के माध्यम से अपने अधिवक्ता से तलाक दिलाने की चेष्टा की। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि वैवाहिक विघटन की प्रक्रिया में प्रतिनिधि-संप्रेषण (delegation) की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे प्रक्रिया की पवित्रता और महिला की गरिमा प्रभावित होती है । न्यायमूर्ति सूर्यकांत का प्रश्न — “क्या आप अपने वकील को निर्देश दे सकते हैं, पर अपनी पत्नी का सामना करने का साहस नहीं?” शायद इस मुकदमे की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति बनकर उभरा। अदालत ने पति को निर्देशित किया कि वह अपनी पत्नी हीना और बच्चे के साथ संवाद स्थापित करे, स्वयं निर्णय व्यक्त करे और शरीअत में अपेक्षित जिम्मेदारी निभाए । हीना ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दस्तावेज़-अस्पष्टता के कारण उसके बेटे के स्कूल प्रवेश, पासपोर्ट नवीनीकरण और अभिरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर अड़चनें उत्पन्न हुईं। अदालत ने तत्परता से राहत प्रदान की और आवश्यक अंतरिम आदेश जारी किए । शरिया और संविधान का संगम : समानता, गरिमा और स्वतंत्रता 2017 की प्रसिद्ध शायरा बानो बनाम भारत संघ मामले में तलाक-ए-बिद्दत को अवैधानिक घोषित किया गया था। इसी संदर्भ में न्यायालय ने तलाक-ए-हसन पर गहराई से विचार करते हुए कहा कि यदि तलाक को धार्मिक प्रावधानों के अनुसार क्रियान्वित करना है, तो हर चरण का शुद्ध पालन अनिवार्य है । अदालत ने यह भी कहा कि तीसरे पक्ष द्वारा तलाक भेजना न केवल असंवैधानिक है बल्कि महिला-सम्मान, एजेंसी और अधिकारिता को भी नुकसान पहुँचाता है। सभा-कक्ष में यह बहस केवल तलाक की तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही; यह महिलाओं की आवाज़, सुरक्षा, वित्तीय अस्तित्व और पुनर्विवाह-समान अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक भी बन गई। जब धार्मिक नियमों का गलत उपयोग होता है, तब स्त्री अक्सर सबसे बड़ा नुकसान झेलती है — आर्थिक, सामाजिक और मानसिक तीनों स्तरों पर। अदालत ने इसी बिंदु पर जोर देते हुए कहा कि इस्लामी सिद्धांत न्याय और करुणा पर आधारित हैं, और यदि प्रक्रिया महिला को असुरक्षित बनाती है, तो उसका सुधार नैतिक दायित्व है।   तलाक-ए-हसन का व्यापक प्रभाव: सुधार, पुनर्मिलन और सामाजिक संदेश अदालत ने एआईएमपीएलबी तथा जमीयत-उलमा-ए-केरल को भी इस बहस का हिस्सा बनने की अनुमति दी, ताकि इस्लामी विवाह-क़ानूनों पर समग्र दृष्टिकोण स्थापित हो सके । इस्लामी शिक्षाओं में ‘सुलह’ सर्वोत्तम मार्ग मानी जाती है, और तलाक-ए-हसन इसी सिद्धांत के निकट है। यह सुनवाई भारतीय समाज के लिए एक सबक के रूप में सामने आई कि न्याय का मक़सद दंड नहीं, बल्कि संरक्षण और संतुलन स्थापित करना है। धार्मिक विधान चाहे जितना पुराना हो, उसका उपयोग मानव गरिमा की रक्षा के अनुरूप होना चाहिए। क़ुरआन स्पष्ट कहता है कि महिला को मेहर, पोस्ट-डाइवोर्स मेंटेनेंस, और सम्पत्ति-स्वामित्व का अधिकार प्राप्त है। तलाक की प्रक्रिया में उसे किसी भी प्रकार से अपमानित या निष्कासित करना इस्लामी सिद्धांत के विरुद्ध है । हीना जैसी महिलाएँ इस न्यायिक प्रक्रिया की प्रतीक बन गई हैं, जिन्होंने अपनी आवाज़ दबने नहीं दी — और अदालत ने दिखाया कि कानून उनके साथ खड़ा है यह फैसला केवल एक मुकदमा नहीं, बल्कि भारतीय न्यायिक इतिहास में शरिया, संवैधानिक समानता और महिला-गरिमा के बीच संतुलन का उदाहरण है। तलाक-ए-हसन पर यह निर्णय बताता है कि धर्म और कानून टकराव नहीं, बल्कि संवाद और सुधार के माध्यम बन सकते हैं। यह केस हमें याद दिलाता है कि न्याय का वास्तविक उद्देश्य सबसे कमजोर को सबसे अधिक सुरक्षा देना है। (लेखक निर्मल कुमार सामाजिक एवं धार्मिक मामलों के जानकार हैं।यह उनके निजी विचार हैं।)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर होगा पौधा रोपण,कौशल्या साय ने हर घर में दीप जलाने की अपील की

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जशपुर,15 सितंबर 2025 – सत्रह सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय प्रातः 9 बजे बगिया के श्री फलेश्वर नाथ मंदिर परिसर में पौधा रोपण करेंगी एवं सांय 6 बजे कुनकुरी के छठ घाट में शहरवासियों के साथ दीप प्रज्वलन कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना कर राष्ट्र प्रगति की कामना करेंगी। इस मौके पर भव्य कार्यक्रम के साथ छठ घाट को दीपों से सजा कर रोशन किया जाएगा।कुनकुरी के नगरवासियों ने इस आयोजन की तैयारी उत्साहपूर्वक शुरू कर दी है। श्रीमती कौशल्या साय ने समस्त प्रदेश वासियों से अपील किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर को सभी लोग अपने घरों में पौधारोपण कर शाम को दीपक जला कर एकजुटता का संदेश दें और राष्ट्र प्रगति की कामना करें। उन्होनें आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी बीते 11 साल से लगातार देश के विकास के लिए पूरे समर्पण भाव से काम कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारत विश्व गुरू बनने की ओर अग्रसर है। देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा मजबूत हुई है। देश का आर्थिक विकास एक नई उंचाई को छू रहा है। अंर्तराष्ट्रीय मंच में भारत की उपस्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है। बीते दो साल में नक्सल मुक्ति की ओर छत्तीसगढ़ ने तेजी से कदम बढ़ाया है।ऐसे में हम सब प्रदेश वासियों का दायित्व है कि हम जन्म दिवस के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एकजुटता का संदेश देकर उनका उत्साहवर्द्वन करे ताकि वे एक नई उर्जा के साथ देश और देशवासियों की सेवा कर सकें।

गज़ब है : शासकीय भूमि पर पीएम आवास के निर्माण में तेजी,पटवारी प्रतिवेदन लेकर न्याय मांगने निकला प्रार्थी,आम रास्ता पर सरकारी मकान बनाने से लोगों को हो रही परेशानी

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जशपुर/कुनकुरी,29 मई,2025 –  प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवास पाने के लिए सरकारी नियमों को ताक पर रखकर शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह मामला ग्राम पंचायत रेमते (पटवारी हल्का नंबर 23, तहसील कुनकुरी) का है, जहां अमर सिंह पिता गंगा सिंह द्वारा शासकीय भूमि पर पीएम आवास का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों और एक भूमिधारी का वर्षों पुराना रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। संदीप जैन की शिकायत पर शुरू हुई जांच,आज भी है तारीख प्रार्थी संदीप कुमार जैन ने कलेक्टर सहित तहसील कार्यालय को लिखित में शिकायत दी थी कि उनकी निजी भूमि तक पहुंचने का एकमात्र सरकारी रास्ता – खसरा नंबर 216 की शासकीय भूमि – पर जबरन कब्जा कर मकान निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि यह निर्माण कार्य बिना किसी वैध सीमांकन या अनुमति के किया जा रहा है और इस पर पहले भी न्यायालय ने स्थगन आदेश दिया था। पटवारी रिपोर्ट में खुलासा – रास्ता शासकीय भूमि पर था 1 मई 2025 को प्रस्तुत पटवारी प्रतिवेदन में यह स्पष्ट किया गया कि खसरा नंबर 216, रकबा 0.498 हेक्टेयर भूमि “मिड रोड इंसान पथ” के रूप में शासकीय अभिलेख में दर्ज है। यह भूमि गांव के बीच से होकर गुजरती है और पूर्व से ही ग्रामीणों द्वारा सार्वजनिक रास्ते के रूप में उपयोग में लाई जाती रही है। प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख है कि इस रास्ते की सीमांकन की पुष्टि ग्राम सरपंच, कोटवार और ग्रामीणों की उपस्थिति में की गई। न्यायालय का आदेश निरस्त होते ही तेज़ी से हुआ निर्माण प्रार्थी संदीप जैन ने बताया कि निर्माण रोकने के लिए तहसीलदार को आवेदन दिया था, लेकिन न सीमांकन कराया गया और न ही हल्का पटवारी द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इस बीच 25 अप्रैल को न्यायालय ने स्थगन आदेश निरस्त कर दिया, और उसी दिन से शासकीय भूमि पर रात-दिन तेज़ी से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। वर्षों पुराना रास्ता अवरुद्ध, 80 वर्षों से था उपयोग में पीड़ित का कहना है कि उनके स्व. दादा हुकुमचंद जैन द्वारा पिछले 70-80 वर्षों से उक्त भूमि के रास्ते का उपयोग किया जाता रहा है। अब यह रास्ता बंद हो जाने से न केवल उनका परिवार बल्कि अन्य ग्रामीण भी प्रभावित हो रहे हैं। मांग: निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो संदीप जैन ने प्रशासन से मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर की जा रही इस अवैध कब्जाधारी कार्रवाई को तुरंत रोका जाए, ताकि उनका और अन्य ग्रामवासियों का रास्ता बहाल हो सके। साथ ही शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसे कृत्य दोहराए न जाएं। इस पूरे मामले की पड़ताल में जो बात सामने आई उसमें अमर सिंह पिता गंगा सिंह के परिजन अपनी पुश्तैनी जमीन का काफी हिस्सा बेच चुके हैं।जिसके कारण वर्षों से शासकीय भूमि पर कब्जे की जमीन ओर घर बना रहे हैं।पड़ोसी जमीन मालिक ने भी जमीन उसकी ओर बढ़ाकर मकान बनाने पर मौखिक आपत्ति की थी,जिसे दोनों पक्षों द्वारा सुलझा लेने की बात बताई गई।निर्माण स्थल पर अमर सिंह मौजूद नहीं थे,उनकी माता ने बताया कि अधिकारी लोग बोले तो बना रहे हैं।अभी कोर्ट में केस चल रहा है। बहरहाल,इस मामले में आवास मित्र दिलीप कुमार से संपर्क करने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।आज तहसील न्यायालय में सुनवाई होनी है।  

पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या: नेशनल हाईवे जाम, आरोपियों और पुलिस पर कार्रवाई की मांग

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  बीजापुर,04 जनवरी 2025 –  बीजापुर जिले के निर्भीक पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या और शव मिलने की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। तीन दिनों से लापता मुकेश का शव शुक्रवार को ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के परिसर में स्थित सेप्टिक टैंक से बरामद किया गया। घटना के बाद पत्रकार समुदाय में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। हत्या का संदिग्ध मामला: बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव द्वारा जारी बयान के अनुसार, पत्रकार मुकेश चंद्राकर 1 जनवरी को शाम के समय घर से निकले थे। कुछ देर बाद उनका फोन बंद हो गया और वह वापस नहीं लौटे। परिजनों ने काफी तलाश के बाद उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस जांच में शुक्रवार को उनका शव चट्टानपारा बस्ती में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के परिसर में एक सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। भ्रष्टाचार के खिलाफ खबर बनी कारण? मुकेश के भाई युकेश चंद्राकर ने खुलासा किया कि कुछ दिनों पहले मुकेश ने गंगालूर से नेलसनार तक बन रही 45 किलोमीटर लंबी सड़क में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को उजागर किया था। उन्होंने बताया कि मुकेश बीजापुर के अंदरूनी नक्सल प्रभावित इलाकों में पत्रकारिता करते हुए ज्वलंत मुद्दों को सामने लाने में अग्रणी थे। पत्रकारों का विरोध प्रदर्शन: मुकेश के शव मिलने के बाद शनिवार सुबह से ही बीजापुर में पत्रकारों ने नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने हत्या के दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा के साथ-साथ बीजापुर एसपी को सस्पेंड कर तबादला करने की मांग की है। प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की भारी तैनाती की गई है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। मुकेश चंद्राकर को क्षेत्र में निर्भीक और सशक्त पत्रकार के रूप में जाना जाता था। उन्होंने न केवल भ्रष्टाचार उजागर किया, बल्कि नक्सल कब्जे से जवानों को छुड़ाने में भी अहम भूमिका निभाई। उनकी हत्या ने पूरे बस्तर संभाग को स्तब्ध कर दिया है। सरकार और प्रशासन पर उठे सवाल: इस जघन्य हत्या ने पुलिस और प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि मुकेश की हत्या में पुलिस की लापरवाही भी जिम्मेदार है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि हत्या के पीछे छिपे कारणों और दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।  

बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या: सीएम साय समेत पत्रकारिता जगत और समाज में शोक की लहर

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ख़बर ज़नपक्ष डेस्क : बीजापुर के युवा और समर्पित पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या की खबर ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस जघन्य घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि यह पत्रकारिता जगत और समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आया बयान   मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर शोक संदेश जारी करते हुए लिखा, “मुकेश चंद्राकर जी की हत्या का समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। इस घटना के अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द अपराधियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए।” पत्रकारिता में योगदान मुकेश चंद्राकर बीजापुर के चर्चित पत्रकारों में से एक थे और उनके यूट्यूब चैनल “बस्तर जंक्शन” ने नक्सल प्रभावित इलाकों में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया था। उनकी साहसी पत्रकारिता ने उन्हें लोगों के बीच एक पहचान दिलाई। परिवार और समाज में शोक मुकेश चंद्राकर के परिवार और स्थानीय पत्रकार समुदाय में इस घटना से भारी आक्रोश और दुख का माहौल है। उनकी हत्या ने क्षेत्र में प्रेस की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस जांच में प्रगति इस मामले में पुलिस ने अब तक एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है और कई सुरागों पर काम कर रही है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने दावा किया है कि इस केस को जल्द सुलझाया जाएगा। शोक संदेश मुख्यमंत्री श्री साय के अलावा कई अन्य नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकार संगठनों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की मांग की है।  

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन: देश ने खोया एक महान अर्थशास्त्री और राजनेता

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नई दिल्ली,27 दिसम्बर 2024 // भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह का कल 26 दिसम्बर को निधन हो गया। 91 वर्ष की आयु में डॉ. सिंह ने नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कांग्रेस प्रमुख खड़गे,सोनिया गांधी, राहुल गांधी और देश के अन्य नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। एक आर्थिक सुधारक का सफर डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान) के गाह गांव में हुआ था। वे बचपन से ही मेधावी छात्र थे और उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय गए। डॉ. सिंह को 1991 में देश के आर्थिक सुधारों का मुख्य शिल्पकार माना जाता है। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण की दिशा में ले जाते हुए एक नई राह दिखाई। प्रधानमंत्री के रूप में योगदान 2004 से 2014 तक डॉ. मनमोहन सिंह ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की। उनके कार्यकाल में आर्थिक विकास की दर तेज हुई, और देश ने कई ऐतिहासिक समझौतों, जैसे कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौता, पर हस्ताक्षर किए। उनकी सादगी, ईमानदारी और दूरदर्शिता ने उन्हें एक अनुकरणीय नेता के रूप में स्थापित किया। सामाजिक और राजनीतिक विरासत डॉ. सिंह को भारत रत्न समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वे न केवल एक कुशल अर्थशास्त्री थे, बल्कि एक प्रेरक नेता भी थे, जिन्होंने अपने जीवन को देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। देशभर में शोक उनके निधन पर प्रधानमंत्री, विपक्षी नेताओं, उद्योगपतियों और आम जनता ने शोक व्यक्त किया। डॉ. सिंह के सम्मान में देशभर में दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का प्रतीक था। उनका निधन भारतीय राजनीति और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।  

बांग्लादेशी नाव में मछलियों को लेकर विवाद, ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की

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कोलकाता,13 दिसम्बर 2024 – भारतीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ते पकड़ी गईं दो बांग्लादेशी नावों और 78 मछुआरों को तटरक्षक बल द्वारा जब्त किया गया था। हालांकि, इन नावों और मछुआरों को गृह और विदेश मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद ही छोड़ा जा सकेगा। लेकिन इसी बीच नावों में मौजूद 170 टन मछलियों को लेकर विवाद गहरा गया है। ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन का विरोध ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए सरकार को चेतावनी दी है। संघ ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि यह मछलियां भारतीय मछुआरों का अधिकार हैं और उन्हें किसी भी हाल में बांग्लादेश को नहीं सौंपा जाना चाहिए। इस विवाद को लेकर संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा है। संघ का आरोप: संघ ने आरोप लगाया कि 16 अक्टूबर को भारतीय नाव “जय जगन्नाथ” और “बसंती” को बांग्लादेश तटरक्षक बल ने पकड़ा और उनमें मौजूद 30 टन मछलियों को वहीं नीलाम कर दिया।हमारे 60 मछुआरे अभी तक रिहा नहीं किये गए हैं। इसके बावजूद भारतीय सरकार ने बांग्लादेशी नावों और मछुआरों को तुरंत माफी देकर वापस जाने दिया। सरकार पर सवाल ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीकांत कुमार परिडा ने कहा, “हमारी सरकार का रवैया बांग्लादेश के प्रति नरम क्यों है? 170 टन भारतीय मछलियां हमारे मछुआरों की आजीविका हैं। सरकार चाहे नावें छोड़ दे, लेकिन हम मछलियों को नहीं छोड़ेंगे।” संघ की चेतावनी उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो 15 लाख मछुआरे विरोध प्रदर्शन करेंगे और बांग्लादेशी नावों को रोकने के लिए मजबूर होंगे। — प्रधानमंत्री के नाम पत्र का सारांश (हिंदी अनुवाद) सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी, विषय: बांग्लादेशी नावों से जब्त की गई मछलियों की नीलामी के संबंध में हस्तक्षेप की मांग श्रीकांत परिडा, अध्यक्ष, ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने पत्र के माध्यम से लिखा है कि जब भारतीय नावें बांग्लादेश द्वारा पकड़ी जाती हैं, तो न केवल नाव और मछुआरों को दंडित किया जाता है, बल्कि उनकी मछलियों को भी जब्त कर नीलाम कर दिया जाता है। पत्र में उन्होंने आग्रह किया कि जब्त की गई 170 टन मछलियों को तुरंत नीलाम किया जाए और उससे होने वाली आय को स्थानीय मछुआरा समुदाय के कल्याण के लिए उपयोग किया जाए। उन्होंने लिखा: “यह न केवल हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि स्थानीय मछुआरों की आजीविका पर भी प्रभाव डालता है। यदि सरकार तुरंत कार्रवाई नहीं करती, तो यह स्थानीय मछुआरों और समुद्री पारिस्थितिकी पर बुरा प्रभाव डालेगा।” निवेदन: “आपके नेतृत्व में हमें विश्वास है कि यह मुद्दा जल्द ही भारतीय मछुआरों के अधिकारों और हितों की रक्षा करते हुए सुलझाया जाएगा।” Yours faithfully, श्रीकांत परिडा अध्यक्ष, ओडिशा मरीन फिश प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन  

*राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आत्मीय स्वागत, कुछ ही देर में प्रधानमंत्री मोदी मां महामाया एयरपोर्ट से विमानसेवा का करेंगे लोकार्पण*

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रायपुर, 20 अक्तूबर 2024/महामाया एयरपोर्ट दरिमा अंबिकापुर के लोकार्पण समारोह में शामिल होने अंबिकापुर पहुंचे राज्यपाल रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का एयरपोर्ट पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा पुष्प भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। राज्यपाल श्री डेका का यह प्रथम जिला आगमन है। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री अरूण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री एवं प्रभारी मंत्री सरगुजा ओ.पी. चौधरी भी अंबिकापुर पहुंचे। इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण एवं कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री  श्यामबिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाडे़, संसदीय क्षेत्र सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, अम्बिकापुर विधायक  राजेश अग्रवाल, सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो, संयुक्त सचिव संजीव झा, सरगुजा संभागायुक्त जीआर चुरेंद्र, आईजी अंकित गर्ग, कलेक्टर विलास भोसकर, पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ को डबल इंजन का मिल रहा डबल फायदा,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मांग पर मोदी सरकार ने सड़क उन्नयन के लिए खोला खजाना,सीएम ने मोदी-गडकरी का जताया आभार

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*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मांग पर भारत सरकार ने 8 सड़क खंडों के विकास के लिए स्वीकृत किए 892 करोड़ रुपए* *राज्य के 6 जिलों में 324 किमी सड़क का होगा विकास, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जारी किया आदेश* *मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी को दिया धन्यवाद* रायपुर. 14 अक्टूबर 2024. केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ में आठ सड़क खंडों के विकास के लिए 892 करोड़ 36 लाख रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से राज्य के छह जिलों में करीब 324 किलोमीटर सड़कों के विकास और उन्नयन के कार्य किए जाएंगे। भारत सरकार ने आज राशि स्वीकृति का आदेश राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग के सचिव को भेजा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में सड़कों के विकास के लिए इतनी बड़ी राशि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी को धन्यवाद दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीआरआईएफ (Central Road & Infrastructure Fund) से मंजूर की गई इस राशि के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में सड़कों के निर्माण में केंद्र सरकार का लगातार सहयोग मिल रहा है। इस राशि से बेमेतरा, मुंगेली, राजनांदगांव, जशपुर, बिलासपुर और खैरागढ़ जिले में आठ सड़क खंडों का चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और उन्नयन होगा। राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रदेश के छह जिलों में कुल 323.9 किलोमीटर सड़क खंडों के विकास के लिए इस साल 9 सितम्बर को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विगत 30 सितम्बर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के साथ नई दिल्ली में हुई बैठक में इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी थी। भारत सरकार द्वारा आज इसके लिए 892 करोड़ 36 लाख रुपए की स्वीकृति का आदेश जारी कर दिया गया है। भारत सरकार द्वारा मंजूर की गई 892 करोड़ 36 लाख रुपए की राशि से बेमेतरा और मुंगेली जिले में नांदघाट-मुंगेली सड़क खंड में 39 किलोमीटर लंबाई और बेमेतरा-नवागढ़-मुंगेली सड़क खंड में 43 किलोमीटर लंबाई का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण किया जाएगा। राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव-चौकी-मोहला मानपुर सड़क खंड में 96.2 किलोमीटर, जशपुर जिले के बागबहार-कोतबा सड़क खंड में 13.5 किलोमीटर, लुड़ेग-तपकरा-लावाकेरा सड़क खंड में 41 किलोमीटर और जशपुर-आस्ता-कुसमी सड़क खंड में 28 किलोमीटर लंबाई में मजबूतीकरण का कार्य भी इनमें शामिल हैं। बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी-सरवानी-पसीद-अमलडिहा-बरतोरी-दगोरी सड़क खंड के 32.8 किलोमीटर तथा राजनांदगांव और खैरागढ़ जिले के राजनांदगांव-कवर्धा-पोंडी सड़क खंड के 30.4 किलोमीटर का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का कार्य भी इस राशि से किया जाएगा।

नक्सल मोर्चे पर पीएम मोदी ने की सीएम साय की तारीफ, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाक़ात,राज्य की विकास योजनाओं और नक्सल उन्मूलन पर की चर्चा

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नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2024: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में बीते नौ महीनों के दौरान किए गए प्रमुख विकास कार्यों की जानकारी दी, जिनमें कृषि, शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित पहलों का विशेष उल्लेख किया गया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुए हालिया सफल ऑपरेशनों की जानकारी भी प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में आठ लाख आवासों की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना लाखों परिवारों को आवासीय सुरक्षा और स्थिरता प्रदान कर रही है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस पहल की सराहना की और इसे राज्य के विकास में एक अहम कदम बताया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने राज्य में माओवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिलों में हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें 31 नक्सलियों का सफाया किया गया, जो राज्य में अब तक का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता के लिए सुरक्षा बलों की प्रशंसा की और इसे राज्य में शांति बहाली और विकास के मार्ग की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बताया। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को आदिवासी क्षेत्रों में युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं के अंतर्गत युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे रोजगार के बेहतर अवसरों से जुड़ सकें और राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान दे सकें। कृषि के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक और उन्नत कृषि विधियों के इस्तेमाल से किसानों की उत्पादकता और आय में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, और छत्तीसगढ़ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य में आदिवासी बच्चों के लिए मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था की गई है, जिससे उनकी शैक्षणिक प्रगति में सुधार हो रहा है। साथ ही, तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि राज्य के बच्चे आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित हो सकें और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ सरकार के इन प्रयासों की सराहना की और राज्य की प्रगति के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का विकास मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक है और इसे और भी सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार पूर्ण समर्थन देगी। मुख्यमंत्री साय की यह मुलाकात राज्य के विकास और नक्सल उन्मूलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।